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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

अभी खंजर सलामत है !

न जाने क्या मुसीबत है न जाने क्या क़यामत है

नज़र आएगा नूर-ए-कल तसव्वर ला ज़मानत है


तशद्दुद इस क़दर हावी दहर पै हो गया यारो

बशर है चीज क्या यां तो ख़ुदा भी बे हिफाज़त है


अगर ज़िन्दा जलाता तो न जाने क्या हुआ होता

सितम इतना भी न करना सितमगर की शराफ़त है


तमाशा क्या है 'अलबेला' मेरे ज़ेहन से बाहर है

बशर तो मर गया लेकिन अभी खंजर सलामत है

1 comments:

ताऊ रामपुरिया June 30, 2009 at 11:41 AM  

वाह क्या बात है...

रामराम.

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