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Albela Khatri

ले दे के एक हनुमान जी ही हैं, जो छड़े मलंग हैं, देशहित में उन्हीं की शरण लेली हास्यकवि अलबेला खत्री ने




लौजी ! अपन ने तो पूरा ज़ोर लगा लिया

नतीजा कुछ निकला नहीं

तो भ्रष्टाचार मिटा, मंहगाई घटी, हिंसा पर लगाम लगी और ही

जीवन में किसी प्रकार का आध्यात्मिक उजाला हुआ इसलिए आज मैं

अपने घोड़ों को कुछ दिन के लिए खुला छोड़ कर पवन पुत्र हनुमान जी की

शरण ले रहा हूँ क्योंकि बाकी सारे देवी-देवता तो घर-परिवार वाले हैं

उनके अपने पारिवारिक जीवन के कई झंझट होंगे, अपन उन्हें और परेशान

क्यों करें ?


ले दे के एक हनुमान जी ही हैं, जो छड़े मलंग हैं, वज्रदेह हैं, सर्वशक्तिमान हैं,

अजर-अमर हैं और लोगों के संकट मिटाने को सदैव तत्पर रहते हैं

लिहाज़ा आज से पूरी निष्ठा, आस्था, श्रद्धा, भावना एवं शुचिता के साथ मैं

कम से कम एक भजन रोजाना रामभक्त हनुमान जी पर रचने का संकल्प

लेता हूँ और ये तब तक रचता रहूँगा जब तक कि मेरा मनोरथ पूरा नहीं हो

जाता अर्थात देश में सुख और शान्ति का वातावरण नहीं बन जाता



अपने को किसी पार्टी से कोई मोह नहीं है और किसी पार्टी से कोई विरोध भी

नहीं है क्योंकि अपने को किसी से कोई उम्मीद नहीं है ये बाबा लोग भी सब

पब्लिक को भौंदू बनाने की मशीनें हैं इसलिए बाबाओं के बाबा परमबाबा

गदाधर बजरंगी बाबा की ओट लेने का मन हुआ है और मेरा मानना है

मन की आवाज़ ज़रूर सुननी और माननी चाहिए


तो मित्रो ! आज से आपको मैं हनुमानजी के स्वरचित भजनों को बांचने

और गाने का न्यौता देता हूँ....आते रहिएगा इस बालक को संबल देने


जय हनुमान

जय हिन्द !



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9 comments:

शिखा कौशिक June 26, 2011 at 4:58 PM  

jai hanuman ...jai jai hanuman !

गगन शर्मा, कुछ अलग सा June 26, 2011 at 4:59 PM  

संकट से हनुमान छुड़ावैं,
मन-कर्म-वचन ध्यान जो लावैं।
हे संकट मोचन अब तो संकटों को जन्म देने वालों को हरो।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi June 26, 2011 at 5:28 PM  

जय हो आप की! पर बाबा तुलसी पहले ही कह गए ...

होत न आज्ञा बिनु पैसा रे...

जाट देवता (संदीप पवाँर) June 26, 2011 at 5:43 PM  

अपने को किसी से कोई उम्मीद नहीं है, ना बाबा, ना नेता, ना ही किसी भगवान से, फ़िर चाहे वो हनुमान जी क्यों ना हो,

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) June 26, 2011 at 7:08 PM  

बिगड़े काम बनाइए, बनकर कृपा निधान।
कोटि-कोटि वन्दन तुम्हे, पवनपुत्र हनुमान।।

ब्लॉ.ललित शर्मा June 26, 2011 at 9:55 PM  

बोल लाल लंगोट वाले की जय।
बोल बाबा बजरंग बली की जय॥

Ratan Singh Shekhawat June 27, 2011 at 6:41 AM  

और ये तब तक रचता रहूँगा जब तक कि मेरा मनोरथ पूरा नहीं हो
जाता अर्थात देश में सुख और शान्ति का वातावरण नहीं बन जाता ।
@ इसके लिए तो आपको कई जन्मों तक भजन रचने पड़ेंगे :)

निर्मला कपिला June 28, 2011 at 10:54 AM  

जय जय जय बजरंग बली।

razia June 28, 2011 at 8:58 PM  

ले दे के एक हनुमान जी ही हैं, जो छड़े मलंग हैं, वज्रदेह हैं, सर्वशक्तिमान हैं,
अजर-अमर हैं और लोगों के संकट मिटाने को सदैव तत्पर रहते हैं ।
लिहाज़ा आज से पूरी निष्ठा, आस्था, श्रद्धा, भावना एवं शुचिता के साथ मैं
कम से कम एक भजन रोजाना रामभक्त हनुमान जी पर रचने का संकल्लेता हूँ और ये तब तक रचता रहूँगा जब तक कि मेरा मनोरथ पूरा नहीं हो जाता अर्थात देश में सुख और शान्ति का वातावरण नहीं बन जाता ।
हम आपके साथ हैं।

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