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Albela Khatri

तुम ही नहीं, तुम्हारी पुश्तों को भी ले डूबेगी तुम्हारी ख़ुदगर्ज़ी



गन्ध ये बारूद की है शायद

जिसे सहना मेरे बूते से बाहर है

लेकिन मैं सह रहा हूँ



कर कुछ नहीं सकता

इसलिए सिर्फ़ कह रहा हूँ

कि हटादो ये कुहासा

क्योंकि इस सियाह आलम में

महज़ हैवानियत पलती है

बन्दगी को खतरा है


मौत के इस खेल में

ज़िन्दगी को खतरा है


दुनिया पर कब्ज़ा करने की खूंफ़िशां मन्शा वालो !

ख़बरदार !

तुम ही नहीं, तुम्हारी पुश्तों को भी ले डूबेगी

तुम्हारी ख़ुदगर्ज़ी .........

मैं तो फ़क़त इल्तज़ा कर सकता हूँ

आगे तुम्हारी मर्ज़ी ...............



मालिक करे  नये साल में होश आ जाये आपको 

बनाने वाला  हैवान  से अब इन्सां बनाए आपको 


___नव वर्ष  अभिनन्दन ! 
 

2012 मुबारक हो ! 


जय हिन्द ! 




दो सक्रिय हिन्दी ब्लोगर्स सामने आये और दीवार की तरह खड़े रह कर मंचस्थ लोगों को सर्दी से बचाया



25 दिसम्बर की रात, राजस्थान के पिलानी में सर्वाधिक  सर्दी

..और उस महा सर्दी की रात दो बजे तक चला कवि-सम्मेलन ! 


BITS के चेयर पर्सन श्री हर्षवर्धन जी बिरला  के  मुख्य आतिथ्य में  


संपन्न हुए  इस रंगारंग  कवि-सम्मेलन में  'जन गण मन' के 

समय सभी कवि/कवयित्री ठण्ड के मारे  कंप-कंपा  रहे थे  ऐसे में   

दो सक्रिय हिन्दी ब्लोगर्स सामने आये और  एक सिरे पर 

अलबेला खत्री और दूजे सिरे पर  सुनीता शानू  ने दीवार की तरह 

खड़े रह कर  मंचस्थ  लोगों को सर्दी से बचाया....भरोसा न होतो  

फोटो देख कर लें . 


महान उद्योगपति स्व. राधाकृष्ण बिरला की जन्मशती के अवसर 


पर  आयोजित इस विराट कवि-सम्मेलन में  उनके सुपुत्र श्री हर्षवर्धन 

बिरला ने  भी  ख़ूब शेरो-शायरी  सुना कर  कवियों को अचंभित और  

दर्शकों को  मनोरंजित किया . दर्शक  दीर्घा में  बिरला परिवार  के 

समस्त  लोग थे जो कि देश-विदेश  से  जन्मशती समारोह में शिरकत 

करने आये थे . 


उस रात मैंने सुनीता शानू को पहली बार सुना  और महसूस किया कि 


वह एक बेहतरीन कवयित्री है . उन्हें  मंच  पर आना चाहिए ताकि  

अच्छी रचना का अभाव मंच  से दूर हो सके . 


जय हिन्द !  


jan gan man  by birla harshvardhanji  alongwith hasyakavi albela khatri left to sunita shanoo right all  kavi/kavyitris at pilani on 25-12-2011




सभी मित्रों को तब तक नमस्कार और जय हिन्द !





नेताओं का काम रुलाना  है 

अपना तो  काम  हँसाना है 


होगई  दो दिन की आरामगी 


अब  फिर सफ़र पर जाना है

 
______________22 -23 अहमदाबाद 


_________________24  सांपला ( हरियाणा )


_________________25  पिलानी (राजस्थान)


_____________लाज रखना प्रभो !


सभी मित्रों को तब तक नमस्कार और जय हिन्द ! 



जयपुर में दैनिक भास्कर ने सराहा "हे हनुमान बचालो" के गीतों को


बधाई हो कार्टूनिस्ट मित्र सागर कुमार जी ! आपको 3000 रूपये भी भेजे जा रहे हैं और कवर पर आपका नाम भी लग चुका है







प्यारे मित्रो !

बहुत दिन पहले मैंने  एक पोस्ट चित्रकार और कार्टूनिस्ट  बन्धुओं  के नाम 


लगा कर उनसे अनुरोध किया था कि  वे मेरे  ऑडियो  एलबम   

"हे हनुमान बचालो"  

के लिए कवर पृष्ठ छापने के लिए  कार्टून बना कर भेजें . इसके लिए मैंने मेरी  ज़रूरत 

के मुताबिक  निर्देश भी दिए थे और  दो दिन की समय सीमा भी. परन्तु  मुझे यह 

कहते हुए अच्छा नहीं लग रहा है कि सबकुछ स्पष्ट लिखने के बावजूद  मेरे मित्र 

कार्टूनिस्टों ने परफेक्ट  कार्टून बना कर नहीं भेजा ..


केवल  सागर कुमार का  भेजा हुआ  कार्टून ही मेरी थीम के आस पास 
पहुंचा 
____________________________________________________________ 


लिहाज़ा  आप सब बधाई दे सकते हैं  श्री सागर कुमार को  कि  उनकी मेहनत  


व्यर्थ नहीं गई ..घोषणा  अनुसार  मान धन के रूप में उन्हें रूपये 3000  भेजे जा 

रहे हैं  और  सी डी कवर पर उनका नाम भी दिया जा रहा है


बधाई हो भाई सागर कुमार जी !

-अलबेला खत्री 


 

हास्यकवि अलबेला खत्री का पैगाम, हनुमानजी के तमाम भक्तों के नाम



भ्रष्टाचार, हिंसाचार तथा व्यभिचार  से पूरी तरह त्रस्त, ग्रस्त और अभ्यस्त  हो चुके मेरे प्यारे देशवासियों, सादर वन्दे !

बजरंग बली की प्रेरणा एवं कृपा  से निर्मित, मेरे लोकप्रिय एवं बहुचर्चित  हनुमान भजनों का  ऑडियो सी. डी.
हे हनुमान  बचालो  अब पूरी तरह तैयार है  और इसे घर-घर तक पहुँचाने का प्रयास जारी है .

मित्रो ! ये भजन कोई आम  भजन नहीं हैं  बल्कि आज के माहौल को देखते हुए लीक से हट कर  रचे गये आइटम भजन हैं . जिस प्रकार  त्रेतायुग में  जामवंतजी ने अपने शब्दों से  हनुमानजी को उनका बल याद दिलाया था  उसी तरह  इन ९ भजनों  के ज़रिये  अन्जनी के लाल को हमने उनकी  ज़िम्मेदारी याद दिलाने का प्रयास किया है .

दुर्भाग्य से  जिस प्रकार के गीत-संगीत पूर्ण  माहौल में हम  जी रहे हैं उसमे  किसी स्वस्थ और साफ़-सुथरे देश-भक्ति  ऑडियो एलबम  को लोग  बाज़ार  से खरीद कर सुनेंगे, इसकी उम्मीद  करना बेकार है . इसलिए  इस एलबम को हम आप जैसे समर्थ एवं उदार हस्तियों  के सहयोग से घर-घर पहुँचाना चाहते हैं . हम चाहते हैं  कि आप इसे खरीद कर  अपने ग्राहकों, मित्रों, सम्बन्धियों  और  धार्मिक  स्थलों  को अपनी ओर से मुफ़्त भेन्ट करें .
इसके लिए हम  आपको बहुत ही कम  मूल्य  पर ये एलबम उपलब्ध कराएँगे . साथ ही  आपका विज्ञापन भी पूर्णतः नि:शुल्क लगायेंगे .

एक ऑडियो  सी डी का बाज़ार मूल्य ४५  रूपये है परन्तु  हम आपको २५  रूपये में देंगे और  कम से कम १००० सी डी लेने पर  आपका  विज्ञापन नि:शुल्क रूप से  सी डी कवर पर  प्रकाशित करेंगे .  यहाँ  उल्लेखनीय है कि आपका विज्ञापन  कम से कम ८००० सी डी पर  छपेगा भले ही आप १००० सी डी लें, २००० लें  या ५०००  लें .

ये देश राम का है और  राम के देश को बचाने के लिए  अब हनुमानजी के सिवा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है . इस  बात को  समझते हुए एक राष्ट्र-भक्त कवि-कलाकार के नाते मैंने अपना समूचा सामर्थ्य और  परिश्रम लगा कर  देश बचाने की राह में  यह कृति तैयार कर दी है  अब इसे  आपके सम्बल की  ज़रूरत है. यदि आप चाहते हैं  कि ऐसे प्रयास को सफलता मिलनी चाहिए  और  इस देश को बचाने  के लिए दैविक कृपा बरसनी चाहिए तो आज अभी मुझसे सम्पर्क करें  और अपना  योगदान दें .

संख्या महत्वपूर्ण नहीं है, आप एक से लेकर एक लाख तक कितनी भी  सी डी  खरीद सकते हैं  लेकिन सी डी कवर पर आपका विज्ञापन  तभी लग पायेगा जब आप कम से कम  एक हज़ार  सी डी मंगवाएंगे .

आपके सहयोग की अपेक्षा में
-अलबेला खत्री - सूरत
mobile :  92287 56902 ,  Email : albelakhatri.com@gmail.com ,
www.facebook.com/albelakhatri

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क्यों पहनें हम रूपा के जांघिये ? हम अपने ख़ुद के पहन लें, तो ही बड़ी बात है





जैसे ही जलगाँव से ट्रेन चली, मानो तूफ़ान सा आ गया बोगी में.........

हालाँकि वातानुकूलित यान में बाहरी फेरी वालों का आना और चिल्लाना

मना है परन्तु दो-तीन लोग घुस आये अन्दर और सुबह सुबह लगे शोर

करने, " चौधरी की चाय पियो ...चौधरी की चाय पियो " मेरा दिमाग ख़राब

हो गया । होना ही था ।


अरे भाई क्यों पीयें हम चौधरी की चाय ? चौधरी की हम पी लेंगे तो वो क्या

पीयेगा बेचारा ? कंगाल समझा है क्या ? अपनी चाय भी खरीद कर नहीं पी

सकते क्या हम ? चौधरी ने क्या राज भाटिया की तरह हमको ब्लोगर मीट

में बुला रखा है कि उसकी चाय फ़ोकट में पीलें ?


घर आकर टी वी ओन किया तो और दिमाग ख़राब हो गया । विज्ञापन आ

रहा था - 'रूपा के जांघिये पहनें, रूपा के जांघिये पहनें ..' यार फिर वही बात,

ये हो क्या गया है लोगों को ? क्यों पहनें हम रूपा के जांघिये ? हम अपने

ख़ुद के पहन लें, तो ही बड़ी बात है और फिर हम ठहरे पुलिंगी, तो स्त्रीलिंगी

जांघिये पहना कर तुम हमारा जुलूस क्यों निकालना चाहते हो भाई ? चलो,

तुम्हारे इसरार पर हमने रूपा के जांघिये पहन भी लिए तो तुम्हारा क्या

भरोसा..कल को तुम तो कहोगे रूपा की ब्रा भी पहन लो..........न भाई न !

हम नहीं पहनते रूपा के जांघिये...........जा के कह दो अपनी रूपा से कि

अपने जांघिये ख़ुद ही पहनें - हमारे पास ख़ुद के हैं लक्स कोज़ी ।



नेट खोला तो पता चला कि मुन्नी की बदनामी और शीला की जवानी

वाले गानों का विरोध हो रहा है । कमाल है भाई......गाना गाने वाली नारी,

गाने पर नाचने वाली नारी और नचाने वाली भी नारी और विरोध करने

वाली भी नारी !


एक वो भली मानस नारी जो अभी अभी बिग बोस के "चकलाघर" से

बाहर आई है, कह रही है कि उसने जो किया वो तहज़ीब के अनुसार ही

था यानी उसने कोई सीमा नहीं लांघी..........यही तो दुःख है कि सीमा नहीं

लांघी ! अब लांघ जाओ बाई ! जाओ तुम्हारे देश की सीमा में घुस जाओ ।

यहाँ का माहौल गर्म मत करो.........थोड़ी बहुत लाज बची रहने दो बच्चों

की आँख में, पूरी नस्ल को बे-शर्म मत करो ।



धर्म जिसे कहते हैं, वो तो चार पंक्तियों में आ गया ..बाकी सब बातें हैं बातों का क्या !



जन्म से मैं हिन्दू हूँ और अपने कुल देवता से ले कर इष्टदेव तक सभी को

नमन करता हूँ । अपने आराध्य सतगुरू के बताये आन्तरिक मार्ग पर

चलने की कोशिश भी कभी कभी कर लेता हूँ । मेरे स्वर्गवासी पिताजी ने

श्री गुरूनानकदेवजी की शरण ले रखी थी और उनपर गुरू साहेब की

प्रत्यक्ष मेहर थी । माताजी जगदम्बा की साधना करती हैं, भाई लोग

शिव भक्त हैं और पत्नी मेरी चूँकि मुस्लिम मोहल्ले में पली बढ़ी है इसलिए

वह नमाज़ भी पढ़ लेती है और रोज़े भी रखती है । कुल मिला कर सब

अपनी अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं, कोई किसी पर अपनी मान्यता की

महानता का थोपन नहीं करता ।



परन्तु मैंने अक्सर महसूस किया है, महसूस की ऐसी-तैसी....साक्षात्

देखा है कि यहाँ ब्लोगिंग क्षेत्र में अनेक विद्वान बन्धु, जो कि समाज का

बहुत ही भला और कल्याण करने का सामर्थ्य रखते हैं, अकारण ही

आपस में उलझे रहते हैं सिर्फ़ इस मुद्दे को ले कर कि तेरे धर्म से मेरा

धर्म बड़ा है अथवा मेरा खुदा तेरे ईश्वर से ज़्यादा महान है या ईश्वर

रचित वेदों पर पवित्र कुरआन भारी है इत्यादि इत्यादि । इस लफड़े में

समय भी खर्च होता है और ऊर्जा भी जबकि परिणाम रहता है

"ठन ठन गोपाल"


मैंने अब तक सिर्फ़ ये महसूस किया है कि आदमी को ईश्वर ने इसलिए

बनाया है ताकि उसकी बनाई इस सुन्दर और विराट सृष्टि को वह ढंग से

चला सके । जिस प्रकार एक बाप अपने बेटे को दूकान खोल कर दे देता

है "ले बेटा, इसे चला और कमा - खा ।" अब बेटे का फ़र्ज़ है कि वह उस

दूकान को अपनी मेहनत से और ज़्यादा सजाये, संवारे, विस्तार दे

........यदि वह ऐसा न करके केवल बाज़ार के अन्य दूकानदारों से ही

झगड़ता रहे कि मेरी दूकान तेरी दूकान से बड़ी है या मेरा बाप तेरे बाप

से ज़्यादा पैसे वाला है तो बाप के पास सिवाय माथा पीटने के और

कोई विकल्प नहीं बचता ।


हम सब
एक ही बाप के बेटे हैं, एक ही समुद्र के कतरे हैं, ये जानते बूझते

भी हम क्यों ख़ुद को धोखा दे रहे हैं भाई ?


जब हमारे पुरखों ने अपने अनुभव से बार बार ये फ़रमाया है कि " अव्वल

अल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बन्दे - एक नूर ते सब जग उपज्या

कौन भले कौन मन्दे" तो फिर आखिर हमें ऐसी कौन सी लत पड़ गई है

दूसरों पर अपनी श्रेष्ठता लादने की ?


मैं किसी धर्म का विरोध नहीं करता । लेकिन बावजूद इसके हिन्दूत्व

पर मुझे गर्व है क्योंकि भले ही इसमें विभिन्न प्रकार के पाखण्ड और

कर्म-काण्ड प्रवेश कर गये हैं परन्तु इसकी केवल चार पंक्तियों में ही

धर्म का सारा सार आ जाता है और ये चार पंक्तियाँ मैं बचपन से सुनता

- बोलता आया हूँ ..आपने भी सुनी-पढ़ी होंगी :


1 धर्म की जय हो

2 अधर्म का नाश हो

3 प्राणियों में सद्भावना हो

4 विश्व का कल्याण हो


ध्यान से देखिये और समझिये कि यहाँ "धर्म" की जय हो रही है । किसी

ख़ास धर्म का ज़िक्र नहीं है, धर्म मात्र की जय हो रही है याने सब

धर्मों की जय हो रही है ।


"अधर्म" के नाश की कामना की जा रही है । अर्थात जो कृत्य " अधर्म"

में आता है उसके विनाश की कामना है, किसी दूसरे के धर्म को अधर्म बता

कर उसके नाश का सयापा नहीं किया जा रहा ।


"प्राणियों" में सद्भाव से अभिप्राय जगत के तमाम पेड़ पौधों, कीड़े-मकौडों,

जीव -जन्तुओं,पशुओं और मानव सभी में आपसी सद्भाव और सहजीवन

की प्रेरणा दी जा रही है । केवल हिन्दुओं में सद्भावना हो, ऐसा नहीं कहा


गया है ।


"विश्व" का कल्याण हो, इस से ज़्यादा और मंगलकारी कौन सा वरदान

परमात्मा हमें दे सकता है , ये नहीं कहा गया कि भारत का कल्याण हो

कि राजस्थान का कल्याण हो, सम्पूर्ण सृष्टि के मंगल की कामना की

जा रही है । न किसी पाकिस्तान का विरोध, न चीन का, न ही

अरब या तुर्क का ...


यदि इन चार सूत्रों के जानने और मानने के बाद भी कोई विद्वान

अन्य बातों पर समय व्यर्थ करे तो वह मेरी समझ में क्रोध का नहीं,

करुणा का पात्र है, कारण ये है करुणा का कि वो बेचारा जीवन को जी

नहीं रहा है, फ़ोकट ख़राब कर रहा है । क्योंकि धर्म जिसे कहते हैं,

वो तो इन चार पंक्तियों में आ गया ..बाकी सब तो बातें हैं बातों का क्या !


इन तथाकथित धर्म के ठेकेदारों से तो

वे फ़िल्मी भांड अच्छे जो नाचते गाते ये कहते हैं :

गोरे उसके,काले उसके

पूरब-पछिम वाले उसके

सब में उसी का नूर समाया

कौन है अपना कौन पराया

सबको कर परणाम तुझको अल्लाह रखे.................$$$$$$


-अलबेला खत्री



ख़ूब जमा कवि-सम्मेलन पिथोरा में, ऐसा समाचार अखबारों में भी छपा है भाई !



पैसा ही तो सब कुछ नहीं, आन्तरिक संतुष्टि भी तो कोई चीज होती है




भई कमाल की जगह है पिथोरा  ! 

कहने को छत्तीसगढ़  का एक छोटा सा क़स्बा है, परन्तु जो बात 


वहां देखने को मिली,  वो गत 28 वर्षों में  मुझे कहीं दिखाई नहीं दी.
 


कविता - साहित्य के प्रति इतना लगाव और समर्पण  कि  पिछले 23 


वर्षों से " श्रृंखला साहित्य  मंच " नाम की एक संस्था  लगातार  छोटी 


बड़ी संगोष्टियां  आयोजित करने के अलावा  साल में एक बड़ा कवि-


सम्मेलन भी करवाती है  जिनमे  आयोजक भी  कवि, दर्शक-श्रोता भी


कवि और वक्ता तो कवि होते ही हैं . उल्लेखनीय यह है कि इन आयोजनों 


के लिए किसी से न कोई चन्दा लिया जाता है, न  प्रायोजक  बनाया जाता


है और न ही टिकट  रखा जाता  है  बल्कि सारा का सारा  खर्च  मंच के 


सदस्यों द्वारा  स्वयं वहन किया जाता है . 



मैंने देखा कि इस संस्था के  कवि-सम्मेलन में  शामिल होने लोग बहुत 

दूर-दूर से  भी आये थे....क्योंकि वहाँ  के कार्यक्रम में  कविता का स्तर


भी  औसत से ऊँचा रहता है . मनोरंजन  चलता है परन्तु  अश्लीलता, 


उन्माद, चुटकुलेबाज़ी और भड़काऊ  टिप्पणियों से सर्वथा  मुक्त रखा 


जाता है .



भले ही वहाँ कवियों को  मानदेय बहुत कम मिलता है, परन्तु  पैसा ही

तो सब कुछ नहीं,  आन्तरिक  संतुष्टि भी  तो कोई चीज होती है  जो 


भरपूर मिलती है . मैं बधाई देता हूँ  श्री शिव मोहंती और उनके समस्त 


साथियों को व कामना करता हूँ कि ये चराग सदा सदा प्रज्ज्वलित रहे 


जय हिन्द !
अलबेला खत्री 


 

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tepa & wageshwari award winner the great indian laughter champion -2 fame hindi hasyakavi, lyric writer,music composer, producer, director, actor, t v  artist  & blogger from surat gujarat . more than 6200 live performance world wide in last 27 years
this time i creat an unique video album SHREE HINGULAJ CHALISA for TIKAM MUSIC BANK
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