चार दिन पहले ब्लोगर मित्र कविवर योगेन्द्र मौदगिल का फोन आया
"भाई ! मैं 23 तारीख को अहमदाबाद आ रहा हूँ" ऐसा उन्होंने बताया
उनका देना बैंक के कवि-सम्मेलन में शाम को काव्यपाठ था
संयोग से उसी रात वहां एक और कवि-सम्मेलन विराट था
योगेन्द्रजी तो थे गुजरात के मेहमान
और मेरी थी आयोजकों से पहचान
सो मैंने तुरन्त उन्हें दूसरे प्रोग्राम में भी आमन्त्रित करवा दिया
सम्मान भी करा दिया और भरपूर मान-धन भी दिलवा दिया
कविवर मौदगिलजी की एक दिन में दो बार चांदी हो गई
टाइमपास का टाइम पास और कमाई की कमाई हो गई
इससे पहले मैं जब दिल्ली में था तो उन्होंने मेरा लाभ कराया था
पानीपत के कवि-सम्मेलन में बुलवा कर लिफाफा दिलवाया था
मैंने उन्हें भिलाई और उन्होंने मुझे भिवानी बुलवाया था
यानी एक ब्लोगर ने दूजे ब्लोगर को फ़ायदा पहुँचाया था
सिलसिला ये बहुत दिनों से चला आ रहा है
इसमें हम दोनों को बराबर मज़ा आ रहा है
मेरा बस इतना कहना है
कि हमें मिलकर रहना है
वाह वाही और टिप्पणियों के साथ साथ
हम यों मिलाएं आपस में हितकारी हाथ
कि इकदूजे के लिए व्यावहारिक काम भी आयें
एक के हाथों दूजे के घर नाम संग दाम भी आयें
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