अरे खाँ ! भोपाल भी हो आये । ये क्या कर रिये हो ? इत्ते सारे नेताओं के बीच में नेताओं पेई कविता पढ़ रिये हो तभी मेने कहा सबके मू कयों लटके हें । केने लगे खाँ हमपे तो कोई असर ही नहीं पड़ रिया हे हम तो मोटी चमड़ी वाले हें । लेकिन भाई मिया अपने भोपाल की जनता भोत प्यारी हे। कविता के मज़े भी लेगी ओर आपसे मोहब्बत भी खूब करेगी .
सुन्दर- बहुत आभार. श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ कामनाएं- आपका शुभ हो, मंगल हो, कल्याण हो | कृपया ये लिंक भी देख लें- http://bhartimayank.blogspot.com/2009/08/blog-post_22.html
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अरे खाँ ! भोपाल भी हो आये । ये क्या कर रिये हो ? इत्ते सारे नेताओं के बीच में नेताओं पेई कविता पढ़ रिये हो तभी मेने कहा सबके मू कयों लटके हें । केने लगे खाँ हमपे तो कोई असर ही नहीं पड़ रिया हे हम तो मोटी चमड़ी वाले हें । लेकिन भाई मिया अपने भोपाल की जनता भोत प्यारी हे। कविता के मज़े भी लेगी ओर आपसे मोहब्बत भी खूब करेगी .
बस ऐसे ही हास्य की अलख जगाएँ रखें
अरे, विडियो तो चढ़ायें.
मंच पर मंत्री अजय विश्नोई बैठे हैं क्या? हमारे बड़े खास मित्र हैं.
अब तीनों को पहचान गया. तीनों मेरे मित्र-सांसद राकेश सिंग, अजय विश्नोई और इश्वरदास रोहाणी...सब जबलपुर के.
सुन्दर-
बहुत आभार.
श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभ कामनाएं-
आपका शुभ हो, मंगल हो, कल्याण हो |
कृपया ये लिंक भी देख लें-
http://bhartimayank.blogspot.com/2009/08/blog-post_22.html
'अलबेला खत्री ने खूब हंसाया
भोपाल के लोग कविता में गहरी समझ रखते हैं'
जो लोग फूहड चुटकुलों पर तालियां पीटते है
क्या विश्लेषण है?वाह!
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