क्या सत्ता की लालसा में आदमी इतना मंददृष्टि हो जाता है कि उसे अपने सामने का
मंज़र भी दिखाई न दे
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आदरणीय नरेन्द्र भाई मोदी जी,
इस ऊंचाई पर फ़िसलन भरी राहों पर यात्रा करते समय इतनी लापरवाही ठीक नहीं है,
यहाँ तक आते आते आपको बहुत साल लगे हैं, कहीं ऐसा न हो...
12 years ago



1 comments:
जमे रहें...डटे रहें
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