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Laughter ke Phatke

 

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ताज़ा टिप्पणियां

दोस्तों ! समय बहुत ख़राब है...दुआ करना सब ठीक हो

चलो जी !

एक बार फिर बैग भर लिया है और टूर पर निकला हूँ

बहुत सी जगह लोगों को हँसाना है..........


10-02-2010 जयपुर

11-02-2010 महेसाणा

12-02-2010 जयपुर ( दोबारा )

13-02-2010 बारां

15- 02-2010 भुवनेश्वर

16-02-2010 मुम्बई

__________
____________17-02-2010 लौट के बुद्धू घर को


दोस्तों !

समय बहुत ख़राब है...दुआ करना सब ठीक हो ।


-अलबेला खत्री




















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आइये, आप सब को सुखी कर दूँ ............

सन्तों ने कहा है कि लालच बुरी बला है

दुनिया में जितनी भी व्याधियां और तनाव हैं,

सब धन के कारण है ..........धन को कमाना तो मुश्किल है ही

उसे
सम्हालना और भी मुश्किल है

रात
-रात भर आपको नींद नहीं आती ..कहीं चोर चुरा ले,

कहीं आयकर वाले छापा मार दें,

कहीं कोई गुंडा अपहरण कर के फिरौती मांगले वगैरह वगैरह

यानी
आप पैसों के कारण बहुत दुखी हैं ............

आओ आपका दुःख मैं बाँट लूँ .......



अपना सारा तनाव और तनाव की जड़ अपना धन मुझे दे दो

............और निश्चिंत हो जाओ ...सुख की नींद सो जाओ .....

मैं सब सम्हाल लूँगा...............

चोर हमेशा से ही मेरी उपेक्षा करते आए हैं ........

आयकर वालों को मैं दिखता नहीं और अपहरणकर्ता

मुझे इस लायक ही नहीं समझते .........इसलिए हे भले लोगो,

इस सुविधा का लाभ उठाइए


अपना
धन दे कर तन-मन का आनन्द भोगिये

..............यह सेवा बिल्कुल नि:शुल्क है


जल्दी करें .............

ऑफर केवल दिसम्बर 2050 तक ....हा हा हा हा हा हा हा हा














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अपने को जो प्रिय लगे, वैसा काम हमेशा करना चाहिए

दुनिया क्या कहेगी ?

मुझ पर हँसेगी क्या ?

ऐसे दुर्बल विचारों को न आने दे कर,

अपने को जो प्रिय लगे,

वैसा काम हमेशा करना चाहिए।

यही सारे जीवन का रहस्य है ।


- स्वामी विवेकानन्द














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एक मोमबत्ती जब तक तुम चाहोगे, जलती रहेगी............

यह कहना कि तुम एक व्यक्ति को

आजीवन प्रेम करते रहोगे,

यह कहने के समान है

कि एक मोमबत्ती जब तक तुम चाहोगे,

जलती रहेगी............


-ताल्स्ताय














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ज़िक्र करना गाली देने के समान है




किसी व्यक्ति को


उसके प्रति की गई मेहरबानी की


याद दिलाना और उसका ज़िक्र करना


गाली देने के समान है



-
डिमौस्थनीज़














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ज़माना ही ऐसा है, जिसका दिखता है, उसीका बिकता है...........




संयोग से आज सब्ज़ी बाज़ार में जाना हुआक्योंकि एक फ़िल्म

के लिए सब्ज़ी बेचने वाली का आयटम सोंग लिखने का काम

मिला है और मैं इसे एकदम रापचिक यानी गुनगुनी यानी ठेठ

मांसल भाषा में लिखने के मूड में था लिहाज़ा मैं बाज़ार का मुआयना

कर रहा था तो एक मज़ेदार वाकिया हुआ...



मैंने देखा एक केले बेचने वाला पुरूष खाली बैठा मक्खियाँ मार

रहा था जबकि उसके साथ ही बैठी केले बेचने वाली महिला के यहाँ

ग्राहकों की भीड़ लगी थी........ध्यान देने योग्य बात ये है कि महिला

का भाव भी ज़्यादा था, वह कोई सस्ते भाव में नहीं बेच रही थी पर

हैरत ! बहुत हैरत हुई मुझे इस बात की कि लोग उससे मंहगे

भाव में खरीद रहे थे जबकि वह पुरूष चिल्ला चिल्ला कर अपना

भाव कम बता रहा था तो भी उसके पास कोई नहीं फटक रहा था

मैं भी उस महिला के पास भीड़ में खड़ा होगया और बारीकी से

निरीक्षण करने लगामेरी जिज्ञासा को वह केले वाली भांप गई

और खिलखिलाते हुए बोली - अरे आओ आओ कलाकार जी,

आप आधा कप चाय पी लोगे तो मेरा मान बढ़ जाएगा ...............मैं

बोला - बाई ! आपका मान बढ़ता हो, तो मैं आधी क्या पूरी चाय भी

पी लूँगा, मंगा लो............



थोड़ी देर में चाय गई, मैंने भी पी और उसने भी.........इतनी देर में

उसके सब केले भी बिक गये ....यानी भीड़ छंट गई तब वह

मुस्कुराते हुए बोली - यही सोच रहे थे कि मेरे यहाँ इत्ती भीड़ क्यों

लगी थी ? मैंने कहा - हाँ !



वो इठलाते हुए बोली - सब इसका कमाल है ...ऐसा कह कर उसने

मुझे इशारे से दिखाया, उसके ब्लाउज़ का एक बटन खुला था और

काफी कुछ दिख रहा थामेरी आँखों में संतुष्टि के भाव गये

क्योंकि अब मैं भी सब समझ चुका था तब वह बोली- अरे साहब

ये तो कुछ नहीं, अगर दूसरा बटन खोल दूँ तो बाकी सब की दुकानें

बन्द करा दूँ........मेरा ठहाका छूट गया.........



उस महिला ने मेरी तरफ प्यारी सी मुस्कान परोसी और अपने

पड़ौसी की दूकान पर जा बैठी केले बेचने के लिए..... अरे भाई वही

पड़ौसी जो सस्ते बेच रहा था लेकिन खाली बैठा था.........मैं फिर हैरत

में पड़ गया तो वो पुरूष बोला - अरे साहब ये मेरी ही घरवाली है,

जब मेरे से बिक्री नहीं होती तो ये एक आध घंटे के लिए आती है और

सारा माल बेच बाच के निकल जाती है



महिला बोली - क्या करें साहब ! ज़माना ही ऐसा है, जिसका दिखता

है, उसीका बिकता है...........


जय हिन्द !





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पुरूषों ने दिये पुरूषों को लाल गुलाब तो ठहाके गूंज उठे ..



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Albela Khatri
Surat, Gujarat, India
हिन्दी, हिन्दी साहित्य एवं विश्वस्तरीय काव्य-यात्राओं के लिए विभिन्न राजकीय तथा सार्वजनिक संस्थानों द्बारा लगभग 30 पुरुस्कारों के अलावा सुविख्यात वागेश्वरी सम्मान और टेपा पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी हास्य कवि, फ़िल्म गीतकार, कथाकार, अभिनेता व दी ग्रेट इण्डियन लाफ़्टर चैम्पियन फेम हास्य कलाकार अलबेला खत्री । अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित , 16 ऑडियो,वीडियो अल्बम रिलीज़ तथा पिछले 28 वर्षों में सम्पूर्ण भारत व अमेरिका , कनाडा तथा वेस्ट इंडीज़ समेत अनेक देशों में लगभग 5000 प्रस्तुतियां।ब्लोगिंग के माध्यम से हिन्दी साहित्य को और समृध्द व लोकप्रिय बनाने का प्रयास ।
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