Albelakhatri.com

Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

Albela Khatri

ताज़ा टिप्पणियां

ख़ुद अपने ही हाथों से न घर में आग लगाओ



फिर
गर्दन आए अपनी गैर मुल्क़ के हाथों में

हो जाये टुकड़े भारत के बातों ही बातों में


जुदा हुआ गर भाई - भाई खानदान फ़िर रहा कहाँ

जुदा हुए कश्मीर-असम तो हिन्दुस्तां फिर रहा कहाँ


मिल-जुल बीते सफ़र हमारा, ऐसी कोई राह बनाओ

हाथ से हाथ मिला के यारो वतन को चमन बनाओ


ख़ुद अपने ही हाथों से घर में आग लगाओ

'अलबेला' इस गुलशन में अब अमन के फूल खिलाओ


किसी दीवाने का दिल टूटा होगा आज वरना,, नवम्बर में तो ऐसी बरसात नहीं होती



मुंबई
के लोग अपनी जिजीविषा के लिए जाने जाते हैं

कोई भी सूरते-हाल हो, मज़ा लेना नहीं छोड़तेइसका एक

उदाहरण हैं मेरे पुराने मित्र और मुंबई लक्ष्मी लॉटरी वाले

पी एच जैन परिवार के सदस्य श्री अनिल पी जैन जिन्होंने

अभी अभी SMS करके मुंबई में जारी भारी बरसात पर त्वरित

टिप्पणी की है ,,,,,,,,,,

आप भी मज़ा लीजिये___



अपनों से प्यार की गुज़ारिश नहीं होती


गैरों से वफ़ा की आज़माइश नहीं होती


किसी दीवाने का दिल टूटा होगा आज वरना


नवम्बर में तो ऐसी बरसात नहीं होती



प्रेषक : अनिल पी जैन, मुंबई


राज ठाकरे के नाम - अलबेला खत्री का खुला पैगाम

प्रति,

श्रीमान राज भाऊ ठाकरे,

प्रमुख, महाराष्ट्र नव निर्माण सेना,

मुंबई



प्रसंग
: राष्ट्र भाषा हिन्दी का अपमान

सन्दर्भ
: 09 नवम्बर 2009 की शर्मनाक घटना _____________________________


बन्धुवर
राज भाऊ ठाकरे जी,

जय
महाराष्ट्र !


आशा
है आप सपरिवार सकुशल और सानन्द होंगे,

आगे
भी आपका मंगल हो ऐसी कामना परमपिता

परमात्मा
से करता हूँ


नहीं
नहीं,

मुझे
अबू आज़मी के लिए कुछ नहीं कहना है

अपने गाल पर पड़े चन्द थप्पड़ों का राजनैतिक लाभ

लेने के लिए जो मौका परस्त और बदतमीज़ आदमी

श्रद्धेय
बाला साहेब ठाकरे को बूढा कह कर उनका

निर्लज्जता पूर्वक उपहास कर सकता है, मैं उसे जानता

भी नहीं और जानना चाहता भी नहीं



मैं
तो आपको जानता हूँ


और
अपनी माँ अर्थात मातृभाषा - राष्ट्रभाषा हिन्दी को

जानता
हूँ और उसी सन्दर्भ में आपसे कुछ कहना चाहता

हूँ




राज भाऊ !

ये क्या हो गया आपको ?

क्या
वैर है आपको मेरी माँ से ?

क्यों
इसका अपमान किए जा रहे हो ?

जबकि
मेरी माँ आपकी भी मौसी लगती है

ये बात आप भलीभान्ति जानते हैं


और फ़िर आपका तो पूरा परिवार हिन्दी से जुडा रहा है


याद करो..........

याद
करो राज भाऊ !

मुंबई में जुहू स्थित होटल होली डे इन की वह रात जब

आपके चाचाश्री बाला साहेब ठाकरे के नाती का जन्म

दिवस
मनाया जा रहा थाबच्चे लोग नीचे एन्जॉय

कर
रहे थे और हम वयस्क लोग ऊपर जहाँ श्री बाला

साहेब
के अलावा उनके पुत्रश्री उद्धव जी ठाकरे, स्वयं

आप
, तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरजी जोशी, नारायण

राणे
, शिशिरजी शिंदे और चार हिन्दी के कवि मौजूद थे

जिन
में मैं और मेरे अलावा शैल चतुर्वेदी, आशकरण अटल

और
श्याम ज्वालामुखी शामिल थेउस रात छलकते

जामों
के साथ कितने ठहाके गूंजे थे उस महफ़िल में

जिसमे
स्वयं बाला साहेब ने हम सभी हिन्दी कवियों

की
मिमिक्री करके दिखाई थी और मुख्य मन्त्री को

यह
आदेश दिया था कि इन महारथियों के लिए कुछ

करो
! सारे हिन्दी कवियों के लिए एक ही जगह

आवासीय
कालोनी बना कर उन्हें सम्मानित करो...


आपने
भी इसमे प्रसन्नता ज़ाहिर की थी,,,,,,,,


याद
करो...

मुलुंड
के कालिदास सभागृह में हर साल होने वाले

मार्मिक
के वर्धापन दिवस समारोह को जिसमे हिन्दी

हास्य
प्रस्तुत करने के लिए हम अनेक बार पहुंचे हैं

बड़े
बड़े फ़िल्मी सितारों और राजनैतिक हस्तियों की

चकाचौंध
के बावजूद आपने वहाँ हमें धूम मचाते हुए

देखा
हैयानी मराठा होने के नाते और शिव सैनिक

होने
के नाते हिन्दी से आपको और आपके परिवार को

कोई आपत्ति नहींआपके स्वर्गवासी अग्रजश्री बिन्दु

ठाकरे
ने और अब श्रीमती स्मिता ठाकरे ने अनेक हिन्दी

फिल्मों
का निर्माण किया हैऔर तो और शिव सेना

द्वारा तो हिन्दी अख़बार भी प्रकाशित होता है

"
दोपहर का सामना" तो हम ये कैसे मान लें कि

आपका
वैर हिन्दी अथवा हिन्दी भाषी लोगों से है

क्योंकि
कितने ही हिन्दी भाषी लोग आपसे जुड़े हुए हैं

और
किसी को कोई शिकायत नहीं........आपसे



अबू
आज़मी की पिटाई करने वाले आपके खास साथी

और
अपने क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक शिशिरजी शिंदे

के
हिन्दी प्रेम को कौन नहीं जानता ? शैल चतुर्वेदी जब

तक
ज़िन्दा रहे, हर साल उनका जन्म दिन शिशिरजी के

घर ही मनाया जाता था...... कितने ही मौकों पर हिन्दी

के साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजन भी उन्होंने

कराये
हैं


तो मसला ...हिन्दी और मराठी का नहीं है

और
अगर है तो इससे ज़्यादा दुखदायी बात कोई हो नहीं

सकती
क्योंकि आप अगर मुंबई में हिन्दी भाषियों

को
प्रताड़ित करोगे,तो सोचो ! उन मराठियों का हाल

क्या होगा जो बिहार और उत्तर प्रदेश में रहते हैं

मानलो
यदि आवेश में बिहारियों ने तय कर लिया कि

अब
उनके बिहार और उत्तर प्रदेश में मराठियों को

सब्जीवाला
सब्ज़ी देगा, दूधवाला दूध देगा, अनाज

वाला
अनाज देगा और दवा वाला दवा देगा तो भारी

पड़
जाएगा आपको ! लेने के देने पड़ जायेंगे, कहीं मुंह

दिखाने
लायक भी रहोगे........



क्या
घटिया सा मुद्दा लाये हो सियासत चमकाने का ?

कोई
अच्छा सा सलाहकार रखो मेरे जैसा जो आपको

एक
से बढ़ कर एक idea दे ताकि आपका नाम भी

चमके
देश महाराष्ट्र का नाम भी ऊँचा हो


आप
एक देशभक्त नौजवान हैं

आपकी
देशभक्ति पर कोई सन्देह नहीं है मुझे लेकिन

आपकी
इस प्रकार की मारामारी वाली राजनीति कुछ

ज़्यादा चल पाएगी......ऐसा मुझे नहीं लगता

लिहाज़ा
अपना तरीका बदलो और भारत के लिए काम

करो
.....केवल महाराष्ट्र के लिए नहीं


आज
चीन हमें आँख दिखा रहा है, पाकिस्तान का कसाब

आपके
शहर में रक्तपात करके भी जीवित है, महानगर

में मिलावटी सामान बिक रहा है, अस्पताल कम पड़ रहे

हैं
, मुंबई में हरियाली ख़त्म होती जा रही है और घटिया

पानी
के कारण लोग गेस्ट्रो के शिकार हो रहे हैं पहले

उन्हें
बचा कर अपने भीतर के देशभक्त युवक को सिद्ध

करो
... फ़िर सारा देश तुम्हारा वैसा ही सम्मान करेगा

जैसा
आदरणीय श्री बाला साहेब का करता है.........


जय हिन्द - जय हिन्दी

जय
महाराष्ट्र

वंदे
मातरम्


विनीत
,

आपका
पुराना चाहक

-अलबेला खत्री

ले आँख मीच अन्याय देख, वह खून नहीं है, पानी है - हिन्दी से जिसको प्यार नहीं, वो कैसा हिन्दुस्तानी है


मेरे काव्य-गुरू डॉ सारस्वत मोहन "मनीषी" की ये दो पंक्तियाँ सब कुछ

कह देती हैंकुछ भी शेष नहीं रहता


ले आँख मीच अन्याय देख,


वह खून नहीं
है, पानी है


हिन्दी से जिसको प्यार नहीं,


वो
कैसा हिन्दुस्तानी है


फ़िर भी कल की घटना पर कुछ कहने के लिए मेरा मन भीतर से

आवाज़ दे रहा है लिहाज़ा हिन्दी को अपमानित किए जाने पर मैं

एक खुला आलेख लिख रहा हूँ ...........चूँकि 25 साल तक मुंबई

में रहा हूँ....और हज़ारों बार हिन्दी के आयोजनों में स्वयं को प्रस्तुत

किया है इसलिए मेरा लिखना तो बहुत ही ज़रूरी है


आप सभी आमन्त्रित हैं थोड़ी ही देर बाद इसी जगह

एक नए आलेख पर :


हिन्दी हास्य कवि अलबेला खत्री का


खुला
पैगाम


मनसे प्रमुख भाऊ राज ठाकरे के नाम .....


अति शीघ्र प्रकाश्य


रामदेव बाबा, राखी सावंत और रजत शर्मा (अन्तिम भाग)


तीनों आपस में जुड़े हुए हैं


रामदेव बाबा इण्डिया टी वी से जुड़े हैं, इण्डिया टी वी राखी सावंत का

प्रमोशन सेन्टर है और रजत शर्मा तो हैं ही साक्षात् इण्डिया टी वीइस

प्रकार तीनों आपस में गुत्थमगुत्था की भान्ति जुड़े हुए हैंऔर तीनों

लगातार इस चैनल पर दिखते रहते हैं



तीनों अति महत्वाकांक्षी है


महत्वाकांक्षा के घोड़े इन तीनों के ही सर पर इतने ज़्यादा सवार हैं कि

सब कुछ प्राप्त कर लेने के बावजूद इनको तृप्ति नहीं हुईविस्तार में

जाने कि ज़रूरत नहीं , सब जानते हैं



तीनों देह उघाड़ने में रुचिवान हैं


तीनों ही महानुभाव बड़े पहुंचे हु देह उघाडू हैं ,वस्त्रों को ये सबसे

बड़ी बाधा मानते हैं अभिव्यक्ति में.......इसीलिए रामदेव और राखी

कम से कम वस्त्र धारणा करते हैं जबकि रजत शर्मा ख़ुद तो पूरे कपड़े

पहनते हैं लेकिन लोगों के उतारने में तत्पर रहते हैंकभी पुलिस की

वर्दी तो कभी नेताओं की धोती खोलते ही दिखते हैं ये ब्रेकिंग न्यूज़ में





तीनों पराई खीर में चम्मच चलाते रहते हैं



तीनों सुर्खियों में बने रहना जानते हैं



तीनों आत्ममुग्ध हैं



तीनों ने खूब माल कमा लिया है



तीनों कहते कुछ और करते कुछ हैं


तीनों अपने करियर के चरमोत्कर्ष पर हैं




तीनों HOT हैं और तीनों ITOM हैं


रामदेव बाबा आइटम योगी हैं, राखी सावंत आइटम गर्ल है और

रजत शर्मा आइटम पत्रकार हैंतीनों ज़बरदस्त HOT भी हैं

आज बाज़ार में इनका नाम बिकता है



तीनों ने जनता की कमज़ोरी भांप ली है


तीनों ने अपने हुनर से जनता की नस पकड़ ली है और उसकी

कमज़ोरी को भांप लिया हैरामदेव ने देख लिया कि जनता

डाक्टरों से परेशान हो चुकी हैं और किसी भारतीय पुरातन विधि

से उपचार की सुविधा चाहती है और हर आदमी स्वस्थ्य चाहता है

तथा स्वास्थ्य के लिए कुछ भी कर सकता हैराखी समझ गई कि

जनता केवल मज़े लेना चाहती है और गर्म देह से अपनी आँखें सेंकना

चाहती है जबकि रजत शर्मा को ये इल्म हो गया कि टी वी के दर्शक

सनसनी चाहते हैंइसलिए पूरा चैनल ही उन्होंने सनसनीखेज़ बना

दिया है जिसकी हर न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ होती है




तीनों तमाशेबाज़ हैं और तीनों लोकप्रिय हैं


तीनों दुनिया भर में लोकप्रिय हैं और लोकप्रिय इसलिए हैं क्योंकि

तीनों को तमाशा करके लोगों को चकाचौंध करना आता हैरामदेव

पेट हिला हिला कर जनता को बावला बना देते हैं तो राखी पेट के नीचे

वाले वर्जित क्षेत्र को हिला हिला कर "देखता है तू क्या ?" की तर्ज़ पर

पूरे दर्शकों को हिला डालती हैऊपर के भाग की तो बात ही क्या

करनी, वो तो आम रास्ता हैकोई भी अपनी साइकल खड़ी करके

एक नम्बर कर सकता हैऔर जनाब रजतजी ! इनके पास जब

कोई न्यूज़ नहीं होती तो ये प्रलय, नरक का द्वार, स्वर्ग की सीढ़ी,

इन्द्र का आसन और पता नहीं क्या क्या दिखा कर लोगों को बांधे

रखते हैं . मतलब किसी भी बात को ये अपने करामाती दिमाग से

ऐसा बना डालते हैं कि दर्शक देखे ही देखे.........



तीनों का फोकटी रोज़गार : बिन पूँजी व्यापार


तीनों का ही कामकाज ऐसा है जिसमे लागत मूल्य एक पैसा भी नहीं

शुद्ध फोकटिया रोज़गार है तो पेट हिलाने और अनुलोम विलोम

करने में कोई खर्च आता है , ही देह प्रदर्शन के लिए कोई फैक्ट्री

खोलनी पड़ती है और ही जनता से उल्टे सीधे सवाल पूछने के लिए

कोई खाद खरीदनी पड़ती हैये कहावत शायद इन्हीं के लिए बनी है

--हींग लगे फिटकरी और रंग आवे चोखा.............हा हा हा



अब इस सब में जो मूल तत्त्व है बात का वो ये है कि तीनों के पास ही

अपना कुछ नहीं हैजो कुछ है वह आदिकाल से है, पारम्परिक है और

नि:शुल्क तो है ही..........और जो काम ये कर रहे हैं वो औरों ने भी

किया है और कर रहे हैं , इनसे भी अच्छा कर रहे हैं लेकिन प्रसिद्धि

इन्हें प्राप्त हुईया यूँ कहलें कि प्रसिद्धि इन्होंने लपक ली


उदाहरण के लिए योग, प्राणायाम कोई रामदेव ने ईज़ाद नहीं किए हैंये

तो आदिकाल से विद्यमान है और तभी से कोई कोई ऋषि या तपस्वी

लोग हमें सिखाते हुए यहाँ तक ले कर आए हैंमेरे शहर श्रीगंगानगर

में मैंने 35 साल पहले दिव्य योग मन्दिर देखा था जहाँ लोग योग करने

जाते थेऋषि दयानंद से लेकर स्वामी श्रद्धानंद तक कितने ही लोगों ने

इस मशाल को रौशन बनाए रखालेकिन उनके पास तो आस्था

चैनल था ही इण्डिया टीवी इसलिए उनसे ज़्यादा रामदेव ख्यातनाम

हो गए क्योंकि इन्होंने इसे व्यावसायिक रूप दे दिया


इसी प्रकार नाच गाना कोई राखी ने आरम्भ नहीं कियाये तो चलता ही

रहा है लेकिन तब वस्त्र केवल बिस्तर पर उतारे जाते थे कोई तीसरा

देखता नहीं था इसलिए उस ज़माने की नर्तकियां इतनी HOT आइटम

नहीं बनीयही हाल पत्रकारिता का हैपीत पत्रकारिता पहले भी होती

थीलेकिन एक शहर का चर्चा दूजे शहर में नहीं पहुँचता थाआज

चूँकि 24 घंटे के चैनल हैं और दिखाने के लिए 24 मिनट का भी माल

नहीं है .इसलिए कभी you tube से तो कभी लोगों के भेजे हुए वीडियो

दिखा कर विज्ञापन बटोर रहे हैं और रोकड़ा पा रहे हैं


दुर्भाग्य देखिये ........आज कथाकार से ज़्यादा मान और सम्मान कथा

वाचक पा रहा है


अब दिमाग गर्म होने लगा हैअब विषय दुःख देने लगा हैइससे पहले

कि मेरी भाषा असंयमित हो, मैं इस आलेख को एक बार समाप्त करता हूँ

और इन तीनों किरदारों को प्रणाम करता हूँ कि प्रियजनों ! आप बहुत

महान हैं, हमही -\*^/,।@ हैं जो आप जैसे बन नहीं पाये


-अलबेला खत्री












































बाबा रामदेव , राखी सावंत और रजत शर्मा (4)

तीनों P के लिए कुछ भी कर सकते हैं


यों तो अपना पूरा देश ही "P" से परेशान है जैसे P फॉर पोलिटिक्स,

P फॉर पोल्यूशन, P फॉर पार्लियामेंट, P फॉर पॉप्युलेशन, P फॉर

पाकिस्तान, P फॉर पुलिस और P फॉर पार्टी बाज़ी इत्यादि लेकिन

ये तीनों महानुभाव तो समर्पित ही P के लिए हैं और रात दिन एक

किए हुए हैं P के लिएये लोग P के लिए कुछ भी कर सकते हैं



रामदेव बाबा का के लिए P फॉर पतन्जलि योग पीठ प्राणायाम,

राखी सावंत के लिए P फॉर पब्लिसिटी और रजत शर्मा के लिए

P फॉर पैसा और पावर



तीनों विवादास्पद हैं


जी हाँ तीनों विवादों में ही घिरे रहते हैंरामदेव बाबा चूँकि कम

समय में देश का ज़्यादा भला करना चाहते हैं इसलिए कभी योग

पर तो कभी रोग पर, कभी धर्म पर तो कभी माँ भारती के मर्म पर,

कभी सम्लैंगिन्गता पर तो कभी राजनीति पर, एक से दूसरे मंच

पर उछालते ही रहते हैं, राखी रोज़ नए विवाद करती ही है कभी चुम्मे

से तो कभी स्वयंवर से.........रहे रजत शर्मा ये विवाद को हवा देने

और उसके ज़रिये अपने चैनल को चमकाने की जुगत में ही जुटे

रहते हैं




तीनों जीरो से हीरो बने हैं


जी हाँ ! तीनों ने ही यहाँ तक पहुँचने के लिए बहुत संघर्ष किया है

तीनों जीरो से हीरो बने हैंरामदेव बाबा ने जब पहला योग

कार्यक्रम किया था सूरत शहर में तो उसमे कुल तीन लोग शामिल

हुए थेराखी सावंत कुछ साल पहले तक चंद रुपयों के लिए अर्धनग्न

नृत्य करती रही है होटलों और बार मेंऔर रजत शर्मा एक साधारण

रिपोर्टर हुआ करते थेमतलब ये कि तीनों में से किसी के पास विरासत

का कुछ नहीं है, इन्होंने जो कुछ भी हासिल किया अपने दम पे किया




तीनों मीडिया के बनाए हुए हैं


बिल्कुल ! मीडिया होता तो इन में से एक भी बन्दा आज इतने शिखर

पर होताकुछ सालों पहले इन तीनों को कोई नहीं जानता था और

आज बच्चा बच्चा इनकी शक्ल से वाकिफ़ हैये सिर्फ़ और सिर्फ़

मीडिया में लगातार बने रहने के ही परिणाम हैं



मिलते हैं ब्रेक के बाद,,,,,,,,,, आपने टिप्पणी की ?

कीजिये, तब तक मैं चाय पी लूँ........



शेष अगले और अन्तिम अंक में ...........


































बाबा राम देव, राखी सावंत और रजत शर्मा...( 3)

तो मित्रो !


आओ, बात आगे बढायें...................

रामदेव बाबा , राखी सावंत और रजत शर्मा की यह गाथा आगे

बढ़ाता हूँ और आपको बताता हूँ पूरा अफ़साना...............सबसे

पहले उन बिन्दुओं पर दृष्टिपात कर लें जिन्हें मैंने थोड़ी देर पूर्व

लिखा थाअब उनके विस्तार में चलते हैं




तीनों केवल वयस्कों के लिए है - 'R' rated


रामदेव बाबा की जटिल यौगिक क्रियाएं , राखी सावंत की मादक

अदायें और रजत शर्मा की अदालती सभाएँ , तीनों वयस्कों के ही

काम की होती हैंबच्चों और किशोरों के लिए तीनों खतरनाक हैं

बिना किसी प्रत्यक्ष मार्गदर्शन के यदि कोई किशोर जोश जोश में

ज़्यादा ज़ोर से अथवा अधिक देर तक योग कर ले तो किसी ऐसे

रोग का शिकार हो सकता है जिसका इलाज रामदेव के पास भी

होगा, इसी प्रकार राखी सावंत के अर्धनग्न लटकों - झटकों को देख

कर, पूरी नस्ल के ही दिग्भ्रमित होने और भटकने का डर लगा

रहता हैरजत शर्मा जिस प्रकार की अदालत लगाते हैं और जिस

प्रकार अदालती व्यवस्था का उपहास करते हैं उस से बालकों और

किशोरों में अदालत के प्रति सम्मान और कानून के प्रति भय का

कोई प्रभाव ही नहीं रह जाताआज कल बच्चे इसीलिए अपराध

प्रवृत्ति में लिप्त हो जाते हैं क्योंकि वे कानून से डरते नहीं हैं



तीनों घोर अवसरवादी हैं

जी हाँ ! तीनों इतने घोर अवसरवादी हैं कि कूए में भी गिर पड़े,

तो चिल्लायेंगे बाद में, पहले जी भर के नहायेंगेरामदेव को मौका

मिलना भर चाहिए.........वे ज्ञान बांटने और कपालभाति करने या

कराने के लिए तत्पर ही रहते हैं, राखी सावंत बखेड़ा खड़ा करने और

उस बखेड़े से अपना उल्लू सीधा करने का कोई मौका नहीं छोड़ती

ही वस्त्र त्यागने में आलस्य करती है जबकि रजत शर्मा तो हैं ही

अवसरवाद का प्रतीकदो कौड़ी की बात को करामात बता बता कर

करोड़ों लोगों का टाइम खोटी करके, रुपया कमाना उनका खास

हुनर है



तीनों बोल बच्चन की खाते हैं


चूँकि गत कुछ वर्षों से अपने यहाँ दो चीजें ही चलायमान हैं , एक

अमिताभ बच्चन और दूसरे बोल बच्चन ! अब चूँकि अमिताभ

बच्चन बनना सबके बूते में नहीं है इसलिए बोल बच्चन सब कर

लेते हैंअन्तर ये है कि रामदेव देश के विकास और आत्म सम्मान

के लिए बोलते हैं , देश के हित और पाखण्ड को ख़त्म करने के लिए

बोलते हैं जबकि राखी और रजत दोनों केवल और केवल अपने

लाभ के लिए बोलते हैं


बाकी बिन्दुओं पर आने से पहले आपकी प्रतिक्रियाओं को देख लूँ.....



मिलते हैं ब्रेक के बाद,,,,,,,,,,


अगले अंक में.........











albela khatri

About Me

My Photo
Albela Khatri
Surat, Gujarat, India
हिन्दी, हिन्दी साहित्य एवं विश्वस्तरीय काव्य-यात्राओं के लिए विभिन्न राजकीय तथा सार्वजनिक संस्थानों द्बारा लगभग 30 पुरुस्कारों के अलावा सुविख्यात वागेश्वरी सम्मान और टेपा पुरस्कार से सम्मानित हिन्दी हास्य कवि, फ़िल्म गीतकार, कथाकार, अभिनेता व दी ग्रेट इण्डियन लाफ़्टर चैम्पियन फेम हास्य कलाकार अलबेला खत्री । अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित , 16 ऑडियो,वीडियो अल्बम रिलीज़ तथा पिछले 28 वर्षों में सम्पूर्ण भारत व अमेरिका , कनाडा तथा वेस्ट इंडीज़ समेत अनेक देशों में लगभग 5000 प्रस्तुतियां।ब्लोगिंग के माध्यम से हिन्दी साहित्य को और समृध्द व लोकप्रिय बनाने का प्रयास ।
View my complete profile
Blog Widget by LinkWithin

Emil Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Followers

BlogCatalog

Poetry Blogs - BlogCatalog Blog Directory

Albela Khatri's Album

Loading...

VOTE DO BHAI VOTE DO

विजेट आपके ब्लॉग पर

शीर्ष टिप्पणीकार

विजेट आपके ब्लॉग पर

Recent Visitor's

chitthajagat

Labels

Blog Archive

Blog

Poetry Blogs - BlogCatalog Blog Directory