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Albela Khatri

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मज़ा आया योगेन्द्र मौदगिल के साथ भिवानी में .......





यों तो अभी हाल ही बहुत कवि-सम्मेलन किये और लम्बी-लम्बी

यात्राओं में व्यस्त रहा लेकिन योगेन्द्र मौदगिल के संयोजन में

पहली बार कविता पढने का अनुभव अत्यंत सुखद रहा


भिवानी के सुप्रसिद्ध शिक्षण संस्थान टैक्नोलोजिकल इंस्टीटयूट

ऑफ़ टेक्सटाइल एंड साइन्सेज़ के युवा महोत्सव में एक रंगारंग

हास्य कवि-सम्मेलन हुआ जिसमे योगेन्द्र मौदगिल के अलावा

अलबेला खत्री, डॉ विष्णु सक्सेना, कविता किरण, अशोक कुमार

बत्रा अशोक कुमार शर्मा इत्यादि ने प्रस्तुति दी जिसे हज़ारों

छात्र -छात्राओं ने खूब पसन्द किया


असल मज़ा तो मुझे योगेन्द्र जी से मुलाकात का आया ......बड़े

प्यारे इन्सान हैं और अच्छे कवि के साथ साथ अच्छे पर्फोर्मर

भी हैं खूब सारी बातें और गप्पबाज़ी हुई . यानी आनन्द आया























www.albelakhatri.com

अशोक चक्रधर, अलबेला खत्री और सटासट रेज़र..........



पता नहीं क्यों आज अशोक चक्रधर की याद बहुत रही है वैसे

याद इसलिए भी रही है कि तीन महीने पहले अहमदाबाद के

मेरे मित्र राजकुमार भक्कड़ ने मुझे दो दर्जन रेज़र दिये थे, वे

आज ख़त्म होने को आये हैं



आप सोचेंगे कि रेज़र के ख़त्म होने से अशोक चक्रधर की याद

का क्या लिंक है ?


लिंक है भाई, बहुत गहरा लिंक है क्योंकि हम दोनों का रिश्ता

रेज़र का ही रिश्ता है दरअसल अशोक और मैं अब तक कुल 6

बार मिले हैं और हर बार अशोक चक्रधर ने मुझसे एक ही चीज़

मांगी है - प्लास्टिक वाला सटासट रेज़र !


कल्याण में, मुम्बई में, खंडवा में, सतना में, हैदराबाद में या

लखनऊ में, जहाँ भी हमारी मुलाक़ात हुई, उन्होंने सदा एक ही

बात कही- " भाई अलबेला ! आपके पास कोई एक्स्ट्रा रेज़र हो,

तो दो ना .....मैं आज लाना भूल गया " मैं हर बार उन्हें अपना

नया रेज़र देकर ख़ुद पुराने से शेव बनाता रहा हूँ


इस बार कहीं मिल गये तो रेज़र बाद में दूंगा, पहले पिछले रेज़रों

के पैसे मांगूंगा... हा हा हा हा


आपको हो न हो, हमें तो आपकी घरवाली ( रचना ) में इन्ट्रेस्ट है, इस चांडालनी (रचना) में नहीं ..........

बात बहुत पुरानी है1992 की ............


मुंबई के पश्चिमी उप नगर विलेपार्ले के भाईदास हॉल में हास्य सम्राट कवि

सुरेन्द्र शर्मा का 'चार लाईनां ' शो चल रहा था


मैं यानी अलबेला खत्री, श्याम ज्वालामुखी, आसकरण अटल और सुभाष

काबरा काव्यपाठ करके महफ़िल जमा चुके थे और हास्य व्यंग्य का माहौल

भरपूर यौवन पर थाक्लाईमैक्स के लिए सुरेन्द्र शर्मा माइक पर आए तो

हॉल तालियों की गडगडाहट से गूँज उठा....और सुरेन्द्र जी ने अपने चुटकुलों

से हँसाया भी बहुत लेकिन जैसे ही उन्होंने "चांडालनी" कविता शुरू की, लोगों

ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया " घरवाली..........घरवाली............"


सुरेन्द्रजी ने अनसुना कर दिया और यथावत 'चांडालनी' सुनाते रहे तो चार

पाँच दर्शक मंच के पास गए और बोले- " सुरेन्द्र जी, घरवाली सुनाओ,

घरवाली ! हमने हसने के लिए पैसे खर्च किए हैं ..इस "चांडालनी" पर रोने


के लिए नहीं ........."



सुरेन्द्रजी ने मज़ाक में कहा- कमाल है यार जिस घर वाली में मुझे ही कोई

इन्ट्रेस्ट नहीं रहा, उसमें आपको क्या इन्ट्रेस्ट है ?



लोगों ने कहा- भाई आपको हो हो,

हमें
तो आपकी घरवाली ( रचना ) में इन्ट्रेस्ट है,

इस चांडालनी (रचना) में नहीं ..........

इतना
सुनना था कि पूरा हॉल ठहाकों से गूँज
उठा

और सुरेन्द्र शर्मा को घरवाली की चार लाईनां सुनानी ही पड़ी.............

लोभी तो देखे बहुत, आज देखलो लोभा.........

हिन्दी हास्य कवियों कवि सम्मेलनों को तबेलों और धर्मशालाओं से उठा कर

पाँच सितारा होटलों तक पहुंचाने वाले मंच संचालन के पहले और वास्तविक

हास्य सम्राट स्वर्गीय रामरिख "मनहर" अपने अलमस्त स्वभाव, अनूठे मंच

संचालन और ज़बरदस्त ठहाकों के लिए तो मशहूर थे ही प्रतिउत्पन्न्मति में

भी उनका कोई सानी नहीं था................


एक बार आयकर विभाग मुंबई मुख्यालय में कवि-सम्मेलन चल रहा था

एक कन्या बार बार उनके पास जाती और कहती- मुझे भी एक कविता

सुनानी हैमनहर जी चूंकि नई प्रतिभाओं को सदा बढ़ावा देते थे इसलिए

उन्होंने उसे माइक पर बुला तो लिया लेकिन नाम नहीं जानते थे तो वहीं

मंच पर अपने संचालकीय माइक से ही पूछा -'नाम क्या है आपका ?'


वो बोली-'शोभा'


अब चूंकि मनहर जी उसके बारे में कुछ भी नहीं जानते थे और माइक पर भी

बुला चुके थे तो उसके लिए बोले तो बोले क्या ? यह एक संकट हो गया

लेकिन मनहर तो मनहर थे


बिना एक क्षण गँवाए बोले-


लोभी तो देखे बहुत, आज देखलो लोभा

कविता सुनाने रही है कुमारी शोभा

अब आप चटखारे ले ले कर पढ़िये हिन्दी हास्य कवि सम्मेलनों के कुछ खट्टे, कुछ मीठे, कुछ कड़वे और कुछ बहुत ही कड़वे सच्चे किस्से

प्यारे ब्लोगर बन्धुओं और बहनों !


अब मैं एक संस्मरण माला आरम्भ कर रहा हूँ जिसमें कुछ ख़ास हिन्दी

कवियों, हिन्दी हास्य कवि सम्मेलनों और टेलिविज़न शो के कुछ ख़ास

किस्सों को आपके समक्ष बयान करूंगा



इस आलेख माला का कोई भी पात्र, स्थान समय काल्पनिक नहीं होगा ,

सभी कुछ वास्तविक होगा और पूर्णतः बेपर्दा होगा



यह सिर्फ़ आपके स्वस्थ मनोरंजन के लिए कर रहा हूँ फ़िर भी किसी

जीवित या मृत आत्मा को इससे ठेस पहुँचने वाली हो तो कृपया अपनी


आपत्ति पहले से ही दर्ज़ करादें ताकि मैं उन के विषय पर चुप ही रहूँ


क्योंकि एक बार पोस्ट प्रकाशित होने पर उसका खण्डन छपने में कोई


मज़ा नहीं है .................

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