जाड़े का मौसम, छोटी रजाई
बांहों में भर ले बलम हरजाई
ननद निगौड़ी बाज़ न आए
दरवज्जे पर कान लगाए
सरका दे खटिया,
बिछाले चटाई .............बांहों में भर ले ...........
तू मेरा राजा, मैं तेरी रानी
अब काहे की आना-कानी
काहे का डर
मैं हूँ तेरी लुगाई .........बांहों में भर ले ..........
मेरे दिल का दरद न जाने
मैं जो कहूँ तो बात न माने
बाबुल ने ढूँढा है
कैसा जमाई ..................बांहों में भर ले ............
तेरे ही नाम की बिन्दिया-काजल
झुमका , कंगना,बिछुआ,पायल
तेरे ही नाम की
मेंहदी रचाई ..............बांहोंमें भर ले ..............
अपना हो के यूँ न सज़ा दे
प्यासी हूँ मैं मेरी प्यास बुझा दे
मर जाऊंगी वरना
राम दुहाई ....................बांहों में भर ले.................
जाड़े का मौसम, छोटी रजाई - बांहों में भर ले बलम हरजाई
एक गोरी सांवरी सी मेरे गीतों की फ़ैन हो गई..........
एक गोरी सांवरी सी मेरे गीतों की फ़ैन हो गई
एक छोरी बावरी सी मेरे गीतों की फ़ैन हो गई
पनघट जाती-जाती गाए
जल भर लाती-लाती गाए
आती गाए, जाती गाए
सखियों से बतियाती जाए
पल में सौ बल खाती जाए
गीत वो मेरे गाती जाए
कितनी बेचैन हो गई, कितनी बेचैन हो गई ...
रे मेरे गीतों की ....
उसकी छैल छबीली आँखें
चंचल आँखें , कटीली आँखें
बिजली सी चमकीली आँखें
मोटी-मोटी मछीली आँखें
नीली और नशीली आँखें
आबे-हया से गीली आँखें
तीर्थ उज्जैन हो गईं, तीर्थ उज्जैन हो गईं ...
रे मेरे गीतों की ...
जब जब मेरी याद सताये
उसकी मोहब्बत अश्क़ बहाये
तन घबराये, मन घबराये
उसका अखिल यौवन घबराये
जग-जग सारी रैन बिताये
पल दो पल भी नींद न आये
रातें कुनैन हो गईं, उसकी रातें कुनैन हो गईं
रे मेरे गीतों की ...
एक गोरी साँवरी सी मेरे गीतों की फ़ैन हो गई
एक गोरी साँवरी सी मेरे गीतों की फै़न हो गई
एक छोरी बावरी सी मेरे गीतों की फै़न हो गई
पनघट जाती-जाती गाये
जल भर लाती-लाती गाये
आती गाये, जाती गाये
सखियों से बतियाती जाये
पल में सौ बल खाती जाये
गीत वो मेरे गाती जाये
कितनी बेचैन हो गई, कितनी बेचैन हो गई ... रे मेरे गीतों की ....
उसकी छैल छबीली आँखें
चन्चल आँखें , कटीली आँखें
बिजली सी चमकीली आँखें
मोटी-मोटी मछीली आँखें
नीली और नशीली आँखें
आबे-हया से गीली आँखें
तीर्थ उज्जैन हो गईं, तीर्थ उज्जैन हो गईं ... रे मेरे गीतों की ...
जब जब मेरी याद सताये
उसकी मोहब्बत अश्क़ बहाये
तन घबराये, मन घबराये
उसका अखिल यौवन घबराये
जग-जग सारी रैन बिताये
पल दो पल भी नींद न आये
रातें क़ुनैन हो गईं, उसकी रातें क़ुनैन हो गईं .. रे मेरे गीतों की ...

