सभी साथियों को
माँ शारदा के नवरात्र की हार्दिक बधाई
मैयाजी हम आये
तुम्हारे दरबार
मन में लगा कर ध्यान तुम्हारा
बोलें जय जयकार
मैयाजी हम ........
हम सब तेरे बालक मैया, तू सबकी महतारी
तेरी एक झलक पे माता ये जीवन बलिहारी
इन नैनों की प्यास बुझा जा
मैया पल भर को ही आ जा
तेरे लाड़ले करें पुकार ................मैयाजी हम
आज तलक तेरे द्वारे से भक्त गया न खाली
उस पर कोई आंच न आये जिसकी तू हो वाली
तेरी महिमा सब से न्यारी
तेरी आरती जिसने उतारी
उसका हो गया बेड़ा पार .............मैयाजी हम
जगदम्बे ! तेरे चरण कमल से फूटे नेह के धारे
भले-बुरे, धनवन्ते-निर्धन सब हैं तुझ को प्यारे
माता तू ममता की मूरत
बड़ा शुभ है आज मुहूरत
आ जा ...सिंह पे हो के सवार .......
मैयाजी हम आये
तुम्हारे दरबार
मन में लगा कर ध्यान तुम्हारा
बोलें जय जयकार
___जय कारा........ माता शेराँ वाली दा
___बोल साचे दरबार दी जय........
जगदम्बे ! तेरे चरण कमल से फूटे नेह के धारे - भले-बुरे, धनवन्ते-निर्धन सब हैं तुझ को प्यारे
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मन की मीरा बोली ..... कन्हैया ! एक झलक दिखला दे ...............
नयनों के रस्ते बरस रही हूँ
प्रेम का परस करा दे
_________________कन्हैया____ एक झलक दिखला दे
तन में अगन इक ख़ास लगी है
मन में मिलन की प्यास जगी है
आकर प्यास बुझा दे
धुन मुरली की बजा दे
_________________कन्हैया ____एक झलक दिखला दे
पन्थ न जानूँ , कर्म न जानूँ
मैं पूजन का मर्म न जानूँ
नेह का धर्म निभा दे
प्रीत का गीत सुना दे
_________________कन्हैया ____एक झलक दिखला दे
मैं दु:खियारी, विरहिन नारी
कृष्ण मुरारी, हे बनवारी
म्हारी पीर मिटा दे
सुख की घटा बरसा दे
_________________कन्हैया ____एक झलक दिखला दे
कौन जतन करूँ , कौन उपाय रे
कैसे पुकारूँ समझ न आय रे
तू ही राह दिखा दे
अपनी राय बता दे
_________________कन्हैया ____एक झलक दिखला दे
_________________कन्हैया ________________
_________________कन्हैया ________________
आप सभी को श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बधाई !
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मेरे मन, भोले मन कर हरि का सुमिरन
भोले मन
कर हरि का सुमिरन
मुश्क़िल है पर मिल जाएगा
तुझको राम रतन
मेरे मन......................
सुमिरन से संकट कटते,संताप मिटेंगे सारे
सुमिरन की तलवार से तेरे पाप काटेंगे सारे
साँसों में चन्दन महकेगा
तन होगा कुन्दन
मेरे मन ....................
बस्ता ढोते बचपन बीता, काम में गई जवानी
आगे बुढापा जर जर काया, बस फिर ख़त्म कहानी
बातों में ही बीत न जाए
ये पूरा जीवन
मेरे मन .....................
पहले ही बहुतेरी हो गई,और न करियो देरी
पाँच तत्त्व के पुतले में कुछ पल का प्राण पखेरी
जाने कौन घड़ी आ जाए
मृत्यु का सम्मन
मेरे मन
भोले मन,
कर हरि का सुमिरन
मुश्क़िल है पर मिल जाएगा
तुझको राम रतन ...............मेरे मन....................
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