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Albela Khatri

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हास्यकवि का आर्तनाद - डाकण मंहगाई स्यूं टाबरियां की जान बचाओ




सालासर
सै दो घण्टा की छुट्टी लेकै आओ

पूरी बान्दर सेना लेकै संसद म्ह घुस जाओ


मेंहदीपुर कै बालाजी नै भी सागै ले आओ

डाकण मंहगाई स्यूं टाबरियां की जान बचाओ

जै जै वीर हनुमान !

काटो पीर हनुमान !



कान्दा का भी वान्दा पड़ गया, मिर्चां काढै आँख

टिंडी, भिण्डी, गोभी, तोरी, सब नै लाग्या पाँख

उड़रया आलू आसमान म्ह, धरती पर ले आओ

डाकण मंहगाई स्यूं टाबरियां की जान बचाओ

जै जै वीर हनुमान !

काटो पीर हनुमान !



चणा, उड़द, चावल, गेहूं, मोठां कै लागी आग

कैंयाँ पौआं आज रोटियां, कैंयाँ रान्दां साग

दो एक घोट्टा मनमोहन अर सोनिया कै सरकाओ

डाकण मंहगाई स्यूं टाबरियां की जान बचाओ

जै जै वीर हनुमान !

काटो पीर हनुमान !


काटो पीर हनुमान !

महावीर हनुमान !

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लोकराज के मेले में स्वर कौन सुने संताप का, चिट व पुट दोनों तुम्हरी और अंट तुम्हारे बाप का




जिस्म भले ही ज़िन्दा हो, ज़मीर तो मरा हुआ है

हड़ताल इसलिए करते हो, क्योंकि पेट भरा हुआ है


तुम्हें क्या फ़िक्र किसी के जीने और मरने की

है पूरी छूट तुमको मनचाहा हुड़दंग करने की


लोकराज के
मेले में स्वर कौन सुने संताप का

चिट व पुट दोनों तुम्हरी और अंट तुम्हारे बाप का


करो करो करो

निसंकोच करो

बे-धड़क करो

खुलकर करो

किये जाओ तुम नित नया टंटा !

पब्लिक क्या उखाड़ लेगी घंटा ?

आज जोधपुर में मरे हैं कल और कहीं मरेंगे

पर हम चाह कर भी कोई विरोध नहीं करेंगे


विरोध करें भी कैसे, लोग सोग में व्यस्त हैं

दुर्ग हैं खण्डहर हमारे, हौसले भी ध्वस्त हैं

क्यों करे चिन्ता कोई,

गरचे पड़ौसी त्रस्त हैं

अपने घर में हम तो अपनी

मस्तियों में मस्त हैं




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