क्या मुस्लिम,क्या सिक्ख, इसाई, क्या वैष्णव,क्या जैन
सब के सब हैरान यहाँ पर, सब के सब बेचैन
खादी वाले जनता का धन लूट रहे दिन-रैन
हाय ! लुटेरों के शासन में, भीगे सब के नैन
क्या होगा कल हाल देश का, सोच सोच घबराया
इसीलिए हे पवनपुत्र ! मैं तेरी शरण में आया
प्यारे अन्जनी के लाल !
हमें संकट से निकाल !
धर्म के ठेकेदार हमें टुकड़ों में बाँट रहे हैं
छंटे छंटाये लोग आज लोगों को छाँट रहे हैं
करुणा की काया को दीमक बन के चाट रहे हैं
मानवता के कल्पवृक्ष को जड़ से काट रहे हैं
खुदगर्ज़ी में इन्सां ने इन्सां का ख़ून बहाया
इसीलिए हे पवनपुत्र ! मैं तेरी शरण में आया
प्यारे अन्जनी के लाल !
हमें संकट से निकाल !
लालच में असली डॉक्टर भी नकली दवा चलाते
हलवाई नकली मावा से नकली बरफी बनाते
व्यापारी भी नकली मिर्च-मसाले हमें खिलाते
दूध-दही, फल-फ्रूट तो क्या हम सब्ज़ी नकली खाते
गद्दारों ने बैंकों तक में नकली नोट चलाया
इसीलिए हे पवनपुत्र ! मैं तेरी शरण में आया
प्यारे अन्जनी के लाल !
हमें संकट से निकाल !
छंटे छंटाये लोग आज लोगों को छाँट रहे हैं ......
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कसाब जी ! आप आत्म-हत्या कर लीजिये प्लीज़.......
चूँकि हमारी मनमोहनी भारत सरकार तो आपको मारेगी नहीं, हमारी
न्याय प्रक्रिया आपको मरने देगी नहीं और मैं आपको मार सकता नहीं ।
इसलिए हिन्दी ब्लॉग जगत की अनुमति के बिना ही रचनाकार साहित्य
संस्थान सूरत की ओर से मैं टीकमचन्द वारडे उर्फ़ अलबेला खत्री सुपुत्र
स्वर्गीय भगवानदास खत्री मूल निवासी श्रीगंगानगर राजस्थान, वर्तमान
निवासी सूरत गुजरात आप से अत्यन्त विनम्र अनुरोध करता हूँ कि
हे अजमल कसाबजी !
आप आत्म हत्या कर लीजिये ।
प्लीज़ आप मर जाइए
क्योंकि अब मुझसे सहा नहीं जाता आपका ज़िन्दा रहना ।
अब क्यों नहीं सहा जाता ये मैं कल बताऊंगा ....आज तो केवल पाठकों का
ध्यान आकर्षित करने के लिए ये पोस्ट लगाईं है
और हाँ, कहना मत किसी से, कल किसी का नहीं आया आज
तक तो मेरा क्या आएगा, ये ध्यान रखना । मैंने कोई ठेका नहीं ले
रखा पूरी पोस्ट लिखने का ...अरे भाई जब बाबाजी ने अनशन बीच
में छोड़ दिया तो क्या मैं आप जैसे @४#ग%८&^%$#(*
पर लिखा गया ये आलेख अधूरा नहीं छोड़ सकता ? हा हा हा हा हा
जय हिन्द !
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