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Albela Khatri

वाह रे हिन्दी के ब्लोगर ! तुम्हें कैन्सर से मरते लाखों लोग दिखाई नहीं देते, बस टिप्पणियों की संख्या दिखती है...




जिस देश में प्रतिवर्ष लाखों लोग कैन्सर से मरते हैं उस देश के

विद्वान लेखक और चिट्ठाकार केवल टिप्पणियों की गिरती

संख्या का मातम मनाने की मूर्खता में लगे हुए हैं वो भी

4 फरवरी को, यानी विश्व कैन्सर दिवस पर !



कोई रचनाओं की कमी बता रहा है, कोई नारी की गौरव गाथा

गा रहा है, किसी को चन्द रुपयों का चेक मिल गया है वो

सबको दिखा रहा है, किसी को ब्लोगवाणी से शिकायत है, यानी

पचास तरह की निरर्थक बातें करके अपना और पाठकों का

समय ख़राब किया जा रहा है लेकिन इतने हज़ारों हिन्दी

ब्लोगर्स जिन में बहुत से डाक्टर भी हैं, किसी को ये लिखने

की फ़ुरसत अथवा याद नहीं कि कम से कम आज

"कैन्सर दिवस" पर तो कुछ ऐसा लिखे, जिससे कैन्सर के

प्रति जागरूकता का वातावरण बने............



आंकड़े बताते हैं कि प्रतिवर्ष 78 हज़ार महिलायें तो केवल

गर्भाशय के कैन्सर से मरती हैं, शेष ग्रीवा कैन्सर, फेफड़ा

कैन्सर, स्तन कैन्सर, योनी कैन्सर और रक्त कैन्सर से

कितनी महिलायें मरती हैं इसका हिसाब लगाओ तो संख्या

लाखों में पहुँचती है और ये संख्या केवल नारी की है लेकिन

नारी की बातें करने वाली स्वनाम धन्य लेखनधर्मी नारियां

केवल टिप्पणियां गिन रही हैंजय हो आपकी !



काश ! कोई एक तो पोस्ट लिखी होती किसी ने................









अगर नहीं आऊंगा तो ये कहने आऊंगा कि नहीं आऊंगा



भारत-भारती के समारोह के लिए पुणे पहुँचने में जब मुझे

विलम्ब हो गया और मैं अभी लोनावला में ही अटका था तब

आयोजन समिति के मुखिया श्रीनिवास कुन्दला जी ने मुझसे

बार-बार सम्पर्क किया और मुझे ज़रूर ज़रूर पहुँचने का

आग्रह कियातब मैंने उनसे कहा-


वादा किया है तो आऊंगा

ज़रूर आऊंगा

अगर नहीं आऊंगा

तो ये कहने के लिए आऊंगा

कि नहीं आऊंगा


फैली हुई बांहें हमें देख रही हैं, चीखें और आहें हमें देख रही हैं

गोवर्धनधारी की दुलारी गौ माँ

साधु-संतों मुनियों की प्यारी गौ माँ


ममता की मृदु फुलवारी गौ माँ

पर्यावरण की रखवारी गौ माँ


मानव पे सदा उपकारी गौ माँ

कदम-कदम सुखकारी गौ माँ


हाय फिर भी है दु:खियारी गौ माँ

संकट में आज है हमारी गौ माँ




गौ माता का दूध अमृत समान है

गोबर और मूत्र भी गुणों की खान है


रक्तचाप, मधुमेह, ज्वर, अस्थमा

कैन्सर जैसे रोगों का ये करे खात्मा


गौ मूत्र से बड़ा एन्टी बायटिक नहीं है

गौ से ज़्यादा कोई स्वास्थ्यदायक नहीं है


ह्रदय रोग में भी गुणकारी गौ माँ

संकट में आज है हमारी गौ माँ




केवल गौ-रक्षा का नारा दीजिये

केवल मुँह से ही जयकारा कीजिये


दूध जिसका पीया उसे चारा दीजिये

बे-सहारा प्राणी को सहारा दीजिये


अहिंसा का बुलन्द सितारा कीजिये

गौ हत्या करने वालों को कारा दीजिये


देखो कैसे रो रही बेचारी गौ माँ

संकट में आज है हमारी गौ माँ




फैली हुई बांहें हमें देख रही हैं

चीखें और आहें हमें देख रही हैं


मासूम निगाहें हमें देख रही हैं

माँ की रोती आँखें हमें देख रही हैं


हम चारा-पानी का प्रबन्ध करेंगे

बूचड़खानों में गौवध बन्द करेंगे


हमें ही बचानी है हमारी गौ माँ

संकट में आज है हमारी गौ माँ



________बहुत दिनों से बहुत लोग मुझसे इस कविता की प्रति

देने के लिए आग्रह कर रहे थे, इसलिए आज मैंने यह प्रकाशित

की हैआशा है इसका प्रयोग वे खूब अच्छे से कर पायेंगेबस

निवेदन केवल इतना है कि यह रचना मेरी प्रिय और प्रसिद्द रचना

है इसलिए जहाँ भी उपयोग करें, गीतकार के रूप में

अलबेला खत्री का नाम अवश्य देंऐसा करने पर बूढ़े गधे को

कच्ची इमली खिलाने जितना महा पाप लगेगा ..हा हा हा हा






आदमी को चाहिए ...



क़रम
हो मालिक का गर तो राई भी परबत बने

आदमी को चाहिए .......कमज़ोर की ताक़त बने

दिल्लगी अच्छी नहीं मज़लूम और लाचार से

बन पड़े ईसा बने.....वहशी दरिन्दा मत बने






इसे कहते हैं टेन्शन ! आप इससे बच नहीं सकते......



क्या आप जानते हैं टेन्शन किस चिड़िया का नाम हैचलो

हम बताते हैं और मज़ा ले ले कर बताते है :


आप अपनी कार में जा रहे हैंएक सुन्दर लड़की ने आपसे

लिफ़्ट मांगी, आपने बिठा लिया, रास्ते में उसकी तबीयत

बिगड़ गई, आप उसे डाक्टर के पास ले गये तो डाक्टर बोला

- आप पिता बनने वाले हैं तो आपको टेन्शन !


आप बोले- मैं इसके बच्चे का बाप नहीं, लेकिन लड़की बोली

- तुम ही मेरे होने वाले बच्चे के बाप हो तो आपको और

ज़्यादा टेन्शन !


फिर पुलिस आई, आपका मेडीकल चैक अप हुआ तो रिपोर्ट

आई कि आप तो कभी बाप बन ही नहीं सकते......तब आपने

परमात्मा का शुक्र अदा किया कि चलो झंझट से बच गये

लेकिन फिर आपने सोचा कि जब मैं बाप बन ही नहीं सकता

तो फिर घर में ये तीन बच्चे किसके हैं ? ये आपकी सबसे बड़ी

टेन्शन..........


कुल मिला कर आप टेन्शन से बच नहीं सकते..इसलिए

मज़े करो और मस्त रहो ..हा हा हा हा




वक्त आगया लक्कड़बग्घों के पाजामे फाड़ने का, चलो साथियो ! ब्लोगवाणी पर पाबला को पसन्द करने ....




शमशीरें खिंच गई हैं शायद .............

मुट्ठियाँ भिंच गई हैं शायद ..........

भई वाह !

जैसे ब्लोगिंग हुई, सियासत हो गई, वो भी तीसरे दर्जे की

बी एस पाबला जी की दूकान को घाटा पहुंचाने में लोग ऐसे जुटे हैं

जैसे डिस्कवरी चैनल पर एक शेर को फाड़ने के लिए बहुत से

लक्कड़बग्घे अपना पिछवाड़ा जोड़ जोड़ के जुट जाते हैंऔर वे

सफल भी हो गये हैं


अभी अभी मैंने देखा, पाबला जी की यहाँ नीचे दिख रही पोस्ट को

ब्लोगवाणी पर 148 लोगों ने पढ़ा, 14 लोगों ने टिप्पणियां की और

6 लोगों ने पसन्द की लेकिन कमाल की बात ये है कि 13 लोगों ने

नापसन्द भी किया जिस कारण पाबलाजी को 7 पसन्द का

महानतम घाटा हो गया


अब हो गया तो हो गया, इसमें मैं क्या करूँ ? मैं कोई नागा

बाबा हूँ जो मंत्र मार के नापसन्द को पसन्द में बदल दूँ ?


मेरी तकलीफ़ तो केवल इस बात को लेकर है कि एक भला

आदमी जो लगातार भला काम करता रहा हैजो केवल

सबके जन्मदिन और वर्ष गांठें याद करा कर लोगों से बधाइयां

दिला कर एक पारिवारिक सा स्नेह का माहौल बना रहा है बल्कि

किसका किस अखबार में क्या छपा, इसकी जानकारी देकर भी

हिन्दी ब्लोगिंग में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है क्या वो

इस पसन्द नापसन्द की जुगाड़ में सिर्फ़ इसलिए पिछड़ जायेगा

कि उसने फोन कर करके लोगों को पसन्द करने का आग्रह

नहीं किया


प्यारे मित्रो ! ये समय है सही और गलत में से सही को चुन कर

उसका साथ देने काहमारा किसी भी पक्ष से ना कोई वैर है

ना ही दोस्ताना, लेकिन वक्त का तकाज़ा है कि जो लोग इस

तरह साजिश करते हैं उनका भंडा फोड़ किया जाये...

आओ साथियो ! आओ ! हम भी अपने हाथ खोलें और ज़्यादा

से ज़्यादा लोग ब्लोगवाणी पर पसन्द देकर ना केवल

पाबला जी को समर्थन दें बल्कि ये भी दिखादें कि षड्यंत्रकारी

कितने भी संगठित क्यों ना हों, सच के सामने उनके पाजामे

फटेंगे ही फटेंगे


हालांकि मैं आपसे क्या कहूँ ..मैंने ख़ुद आलस्यवश उन्हें अभी

तक पसन्द नहीं किया, लेकिन अभी जा रहा हूँ और मुझे

उम्मीद है कि आज की तारीख बदलने से पहले पहले पाबला जी

की पोस्ट पर पसन्द का एक बड़ा आंकड़ा मुस्कुरा कर बत्तीसी

दिखा रहा होगा

धन्यवाद,

-अलबेला खत्री

<span title=पसंद करें" class="iUp" title="मुझे यह प्रविष्टी पसंद है">
-7
<span title=नापसंद करें" class="iDn" title="मुझे यह प्रविष्टी नापसंद है">

क्या मसिजीवी में साहस है इसे पढ़ कर उत्तर देने का?

भले ही इधर उधर की पोस्टों में बताया गया हो कि दिल्ली के एक शिक्षण संस्थान में सेवारत विजयेन्द्र सिंह चौहान, मसिजीवी के नामधारी प्रोफाईल के सहारे ब्लॉगिंग करते हैं, किन्तु बिना उनकी किसी आत्मस्वीकृति के, मैं वह कदम नहीं उठाना चाहता जो शून्य में चला
लेखक का नाम"> बी एस पाबला
Feb 01 2010 12:44 PM


एडिट करके जोड़ा गया निवेदन/ शुक्राना


धन्यवाद प्यारे साथियों ! ये देख के मान बाग़ बाग़ हो

गया कि अभी तक तारीख बदलने में 20 मिनट बाकी

हैं और आपने मुझ नाचीज़ के निवेदन को स्वीकारते हुए

फटाफट पसन्द के गोले दाग़ दिये और पाबला जी की

पसन्द भी अब 13 हो चुकी है


आभार...........आभार..........कृतज्ञता


-अलबेला खत्री




दोस्तों ! ये फोटो कैसा लगा ? ज़रा बताना ......


प्यारे दोस्तों !

यही है वह एपिसोड जिसे सर्वाधिक सराहना और

प्रसिद्धि मिली laughter ke phatke में --ये फोटो

मुझे अच्छा लगा, आपको कैसा लगा, ज़रूर बताना,

मुझे प्रतीक्षा रहेगी..............आपका अलबेला



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