जो अपने शरीर को लज़ीज़ दावतें देता है
और अपनी आत्मा को
आध्यात्मिक आहार के बिना भूखो मारता है,
वह उस शख्स के मानिंद है
जो अपने गुलामों को दावतें देता है
और अपनी घर वाली को भूखो मारता है
जय हिंगलाज !
शुभ प्रभात !
-अलबेला खत्री
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गुलामों को दावतें देता है, घर वाली को भूखो मारता है
मज़ा शीघ्र चला जाता है, परन्तु कलंक हमेशा लगा रहता है
माना कि श्रेष्ठ कार्य में मेहनत पड़ती है,
मेहनत शीघ्र समाप्त हो जाती है,
परन्तु कीर्ति अमर रहती है;
जब कि नीच काम में,
चाहे उसके करने में मज़ा भी आता रहा हो,
मज़ा शीघ्र चला जाता है,
परन्तु कलंक हमेशा लगा रहता है ।
- जॉन स्टुअर्ट 
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ईमान क्या है ? सब्र करना और दूसरों की भलाई करना ..
जब सत्कर्मी व्यक्ति को असह्य कष्ट हो,
तो समझना चाहिए कि
ईश्वर शीघ्र ही उस पर कृपा करने वाला है
यह बात मैंने साक्षात् अनुभव की है
-टीकमचंद वारडे
ईमानदार आदमी ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति है ।
- पोप
ईमान क्या है ?
सब्र करना और दूसरों की भलाई करना ।
अगर मोमिन ( ईमान वाला ) होना चाहता है
तो अपने पड़ौसी का भला कर
और अगर मुसलिम होना चाहता है
तो जो कुछ अपने लिए अच्छा समझता है
वही सबके लिए अच्छा समझ ।
- कुरआन शरीफ़
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आज कोई भी घटना तुम्हें अप्रसन्न नहीं कर पाएगी
निश्चय करो कि आज के दिन की
कोई भी घटना
तुम्हें अप्रसन्न नहीं कर पाएगी ।
अपने काम को
इस अनुपम और पवित्र निर्णय से शुरू करो
कि उसके साथ
न मिलने पायेगी महत्वाकांक्षा,
न लाभ की आसक्ति,
न सुख की अभिलाषा ;
और
उसके फल की कोई चिन्ता तुम्हें स्पर्श नहीं करेगी,
न ही असफल होने पर कोई अधीरता या दुःख ।
- रस्किन
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केवल नमाज़ पढ़ लेने से ख़ुदा नहीं मिलता
ख़ुदा को पाने का रास्ता
सिवाय ख़ल्क की यानी दूसरों की ख़िदमत के
और कोई नहीं है ।
माला लेकर 'अल्लाह अल्लाह ' रटने से,
चटाई बिछा कर नमाज़ पढ़ने से
या गुदड़ी ओढ़ लेने से अल्लाह नहीं मिलता ।
- एक सूफ़ी सन्त
अपने रब को याद रखो
और सब चीजों से बे-लगाव हो कर
उसी की तरफ लगे रहो ।
- पवित्र क़ुरान
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राजनीतिज्ञों की बनिस्बत वह देश की ज़्यादा सेवा करता है
जो कोई
अनाज की एक बाली की जगह दो
या घास की एक पत्ती की जगह दो उगाता है,
ज़्यादा ख़ुशहाली का मुस्तहक है
और तमाम राजनीतिज्ञों की समूची जाति की बनिस्बत
वह देश की ज़्यादा सेवा करता है ।
- स्विफ्ट
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क्या आप क्रोध करते हैं ?
क्रोध करने का मतलब है
आत्मशान्ति खोना,
अपने ऊपर नियन्त्रण खोना,
विचार की स्पष्टता खोना,
परिस्थिति पर पकड़ खोना
और अक्सर
अपने निकटवर्ती लोगों का मान खोना........
- टीकमचंद वारडे
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