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ईमान क्या है ? सब्र करना और दूसरों की भलाई करना ..



जब सत्कर्मी व्यक्ति को असह्य कष्ट हो,

तो समझना चाहिए कि

ईश्वर शीघ्र ही उस पर कृपा करने वाला है

यह बात मैंने साक्षात् अनुभव की है


-टीकमचंद वारडे




ईमानदार आदमी ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति है ।


- पोप





ईमान क्या है ?

सब्र करना और दूसरों की भलाई करना ।

अगर मोमिन ( ईमान वाला ) होना चाहता है

तो अपने पड़ौसी का भला कर

और अगर मुसलिम होना चाहता है

तो जो कुछ अपने लिए अच्छा समझता है

वही सबके लिए अच्छा समझ ।


- कुरआन शरीफ़


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10 comments:

विनोद कुमार पांडेय June 6, 2010 at 8:59 AM  

अलबेला जी बिल्कुल सत्य वचन कही आपने..कभी धीरज नही खोना चाहिए दुख के बाद सुख आता है...बढ़िया प्रस्तुति के लिए आभार

Udan Tashtari June 6, 2010 at 9:02 AM  

बहुत सही प्रस्तुति! आभार!

Shekhar Kumawat June 6, 2010 at 9:06 AM  

bahut khub



फिर से प्रशंसनीय रचना - बधाई
http://guftgun.blogspot.com/

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' June 6, 2010 at 10:05 AM  

बहुत ही उपयोगी वाक्य हैं!

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून June 6, 2010 at 11:03 AM  

आज तो बहुत अच्छी अच्छी बातें संकलित की हैं आपने.... सब ख़ैरियत तो है न !
:-))

Prem Farukhabadi June 6, 2010 at 11:03 AM  

bahut hi behtar bhav diye aapne. Dhanybaad.

पी.सी.गोदियाल "परचेत" June 6, 2010 at 12:58 PM  

बात बिलकुल सही है, मगर हकीकत में करते ठीक इसके विपरीत है

शिवम् मिश्रा June 6, 2010 at 2:08 PM  

सत्य वचन....

राज भाटिय़ा June 6, 2010 at 6:18 PM  

बहुत खुब जी सत्य वचन

शरद कोकास July 5, 2010 at 12:48 AM  

बाक़ी तो पता है लेकिन यह टीकम चन्द वारडे कौन है ....
अरे समझा .. क्या अलबेला भाई अपुन को मामू समझता है क्या ?

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