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Albela Khatri

गुलामों को दावतें देता है, घर वाली को भूखो मारता है

जो अपने शरीर को लज़ीज़ दावतें देता है

और अपनी आत्मा को

आध्यात्मिक आहार के बिना भूखो मारता है,

वह उस शख्स के मानिंद है

जो अपने गुलामों को दावतें देता है

और अपनी घर वाली को भूखो मारता है


जय हिंगलाज !
शुभ प्रभात !

-अलबेला खत्री

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4 comments:

Shah Nawaz June 8, 2010 at 9:34 AM  

क्या बात है? ज़बरदस्त!

संगीता स्वरुप ( गीत ) June 8, 2010 at 9:54 AM  

सटीक विचार ..

honesty project democracy June 8, 2010 at 10:30 AM  

बहुत ही उम्दा विचार ,सराहनीय प्रस्तुती ....

शिवम् मिश्रा June 8, 2010 at 12:07 PM  

बहुत खूब ...............कल की पोस्ट पर भी मेरा यही कमेन्ट था आज भी यही ही है |

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