जब से होश सम्हाला है, लोगों को एक ही बात कहते सुना है मैंने कि पाकिस्तान
आतंकवादियों की पनाहगाह है अथवा अपराधियों की शरणस्थली है । मैं आज
तक समझ नहीं पाया कि ऐसा क्यों कहते हैं लोग ? जिसे देखो, लट्ठ ले कर
पाकिस्तान के पीछे पड़ा है । शान्ति से जीने नहीं देते गरीब को...........जबकि
वहां का इतिहास बताता है कि वहां कोई भी अपराधी सुरक्षित नहीं है । जिस
जिस ने भी भारत के विरुद्ध षड़यंत्र रचा या आक्रमण किया उसे मारने की हमें
ज़रूरत ही नहीं पड़ी । आतंकवादी हो या भारत विरोधी हुक्मरान, सब के सब
पकिस्तान में ही निपटा दिए गये..........उन्हीं के पट्ठों द्वारा ।
जिस प्रकार अपने गोडसे ने महात्मा जैसे महात्मा गांधी को, भिंडर वाला ने
शक्ति स्वरूपा इन्दिरा गांधी को और प्रभाकरण ने अपने मासूम राजीव
गांधी को लम्बी नींद सुला दिया उसी प्रकार मियां भुट्टो से लेकर जनरल
जिया और बेनज़ीर से लेकर ओसामा बिन लादेन तक सभी का काम स्वयं
पाक ने ही तमाम किया है या कराया है । आज तक एक भी उदाहरण नहीं
मिलता कि कोई पाक शासक भली चंगी मौत मरा हो और पूरी ज़िन्दगी जी
कर मरा हो............कायदे-आज़म के मुल्क का कायदा पूरी तरह अल कायदा
है जिसका सबसे बड़ा फ़ायदा वहां कि सरकार को ये है कि भूतपूर्व राष्ट्रपति
या प्रधानमन्त्री के लिए न तो बंगला देना पड़ता है, न ही सुरक्षा व्यवस्था
वगैरह....हा हा हा ..जब तक कुर्सी पे हो , जियो, जब भूत पूर्व हो जाओ तो
जाओ मौत के मुँह में.........
रहा सवाल आतंकवादियों की पनाहगाह का तो पाक कहाँ पनाहगाह है भाई ?
वो तो बेचारा रोज़ अपने अपराधी भारत में भेज रहा है । पनाहगाह तो
भारत है जहाँ किसी आतंकवादी को कोई समस्या नहीं........ किसी अपराधी
को कोई डर नहीं । मैं शर्त लगा कर कह सकता हूँ कि यदि ओसामा पाक के
बजाय हिन्द में छिपा होता तो मज़े भी करता और ज़िन्दा भी रहता ।
अरुण गवली, अबु सलेम और नटवरलाल जैसे अपराधी ही नहीं गुरू
अफज़ल और कसाब जैसे खूंख्वार आतंकवादी जहाँ मौज कर रहे हैं वो
पाकिस्तान नहीं, हिन्दुस्तान है भाई ! ये बात हमें नहीं भूलनी चाहिए
...........इसलिए मेरा मन कहता है कि अब पकिस्तान को आतताइयों की
पनाहगाह मत कहो,,,,,,,प्लीज़ ..................
बेचारे लादेन की आत्मा को दुःख पहुंचेगा ।
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-अलबेला खत्री
मूर्ख हिन्दुस्तानियों ! अब तो पाकिस्तान को आतंकवादियों की पनाहगाह मत कहो प्लीज़ ....
Labels: आतंक , ओसामा , कवि सम्मेलन , पाक , लादेन , हास्य कवि अलबेला खत्री
एक सांप ने अगर अपने ही सपोले को खा लिया तो इसमें हम इन्सानों को टी वी से क्यों चिपकना चाहिए भाई ?
बहुत बड़ी ख़बर है साहेब............इत्ती बड़ी है कि सारे चैनल सुबह से ही दिखा
रहे हैं पर ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही.......कल अखबार भी रंगे होंगे इसी
ख़बर से.......ख़बर न हुई, कमबख्त पोस्ट हो गई राजीव तनेजा की.... पढ़े
जाओ, पढ़े जाओ....पढ़े जाओ...सी आई ए वाले नाच रहे हैं तो आई एस
आई वाले थर्र थर्र कांप रहे हैं । कमाल है एक ही ख़बर के दो दो असर !
पर अपन क्यों माथा खपायें यार ?
अपने लिए कोई नई बात तो है नहीं ये.........अपना ओसामा बिन लादेन
अपन पहले ही भुगत चुके हैं । और अच्छे से भुगत चुके हैं । जो जैसा करता
है उसे वैसा ही प्राप्त होता है ऐसा मैंने सुना ही नहीं देखा भी है ।
इन्दिरा जी ने जरनैल सिंह भिंडराँवाला को अपने स्वार्थ के लिए बनाया
तो अमेरिका ने ओसामा को अपने स्वार्थ के लिए........जब दोनों को ही
अपने अपने प्रोडक्ट भारी पड़े तो दोनों ने ही उन्हें ख़त्म भी कर दिया ।
इसमें मैं कोई पोस्ट लिख कर क्यों अपना और अपने पाठक का समय
खराब करूँ यार ? जबकि अपने पास लिखने के लिए कलमाड़ी जैसा
बढ़िया आदमी है ।
ओबामा कह रहे हैं कि आतंक का खत्म हो गया ............अबे रहने दे
दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी देश के मुखिया रहने दे ! आतंक को तुम
क्या तुम्हारे फ़रिश्ते भी ख़त्म नहीं कर सकते.........अबे इसकी जड़ें कहीं
बाहर नहीं मानव के भीतर हैं ..तुम अभी अभी जन्मे हो दो ढाई सौ साल
पहले, हम से मिलो, हम ज़्यादा पुराने ज्ञानी हैं । भली भान्ति जानते हैं कि
आतंक नाम का ये तत्व जब हिरण्यकश्यप के मरने से नहीं मरा, रावण
के मरने से नहीं मरा और कंस के मरने से भी नहीं मरा तो ओसामा जैसे
पिद्दी के मरने से क्या मर जाएगा ? और क्या तुम मरने दोगे कभी आतंक
को ? अरे तुम ख़ुद, हाँ हाँ तुम ख़ुद इतने बड़े ख़ूनी दरिन्दे हो कि कल को
फिर कोई नया चेहरा तैयार कर लोगे अपने स्वार्थ के लिए.............
तुम्हें नाचना है तो नाचो अमेरिका वालो ! मैं तो नहीं नाच सकता तुम्हारे साथ।
i am sorry about that
मैं तो इन्तेज़ार कर रहा हूँ गुड्डू की माँ का........कब वो आये
और कब चाय पिलाए....हा हा हा
चलते चलते एक शे'र हो जाये :
जिसे मरना था चुल्लू भर पानी में डूब कर
बाद मरने के वो समन्दर में डुबाया गया
______वाह वाह तो बोलो यार !