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गाँधीवादी मित्रों से हास्यकवि अलबेला खत्री का विनम्र अनुरोध, कृपया इस पोस्ट को बहुत ही गंभीरता से लें

नमस्कार मित्रो !

कल से एक अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य में जुटा हूँ । राष्ट्रपिता महात्मा

गांधी के चित्र इकट्ठे करने में लगा हूँ । कोशिश कर रहा हूँ कि ज़्यादा

से ज़्यादा गांधीजी जमा कर सकूँ ।


इस पुनीत कार्य में आप सब भी, ख़ासकर गाँधीवादी विचार धारा के

लोग मेरी ख़ूब मदद कर सकते हैं । यह काम कोई मुश्किल भी नहीं है,

बस मजबूत इरादा और इच्छाशक्ति चाहिए.................


सो यदि आप मेरे इस अभियान को सफल बनाने में सहयोगी होना

चाहते हैं तो आपके पास जितने भी गांधीजी हो, नीले, हरे या गुलाबी,

अर्थात सौ वाले, पाँच सौ वाले या हज़ार वाले, जल्द से जल्द मुझ

तक पहुंचाने की व्यवस्था करें । ये ऑफ़र केवल आज शाम सात बजे

तक खुली है । इसके बाद आपकी कोई भी प्रविष्टि स्वीकार नहीं होगी ।

और हाँ चिल्लर वाले गांधीजी में मेरा कोई इंटरेस्ट नहीं है ये ध्यान

रखें.........हा हा हा हा हा हा

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विवाह को विवाह नहीं, आडम्बर बता रहे हैं..... बापू ! ये तो आप ज़ुल्म ढा रहे हैं

परम पूज्य,

प्रातः स्मरणीय,

अनुकरणीय,

वगैरह वगैरह महात्मा गांधी जी !

प्रणाम ।


यों तो लोगों की देखा देखी और लोकलाज वश मैं भी आपका बहुत

सम्मान करता हूँ । आपको राष्ट्रपिता मानता हूँ , साबरमती का सन्त

कहने में भी आपत्ति व्यक्त नहीं करता । और तो और गांधी चौक पर

खड़े आपके पुतले पर कबूतर्स और कौएज़ जब
सामूहिक रूप से

दो नम्बर करते हैं तो मुझे शर्म भी आती है, लेकिन इसका मतलब

ये नहीं कि मैं आपका अन्धभक्त हूँ...............


आपकी ये बात मुझे गले नहीं उतर रही है :



" आज हम जिसे विवाह कहते हैं वह विवाह नहीं,

उसका आडम्बर है । जिसे हम भोग कहते हैं वह भ्रष्टाचार है "



हम तो विवाह को एक पवित्र और जनम जनम का सम्बन्ध मान कर

पता नहीं क्या क्या झेल रहे हैं

और आप हमारे साथ ऐसा खेल खेल रहे हैं

कि विवाह को विवाह नहीं, आडम्बर बता रहे हैं

बापू ! ये तो आप ज़ुल्म ढा रहे हैं


और वो कौन सा भोग है जिसे आप भ्रष्टाचार बता रहे हैं ?

मैं समझ नहीं पाया अभी तक

लेकिन एक बात तय है कि अगर मैं कभी मर गया

हालाँकि लगता नहीं कि मैं कभी मरूँगा -

क्योंकि मरते वो हैं जो जीवित होते हैं

यहाँ तो पैदाईशी " साधो ये मुर्दों का गाँव " है

लेकिन बाइदेवे यदि मर गया तो आपसे पूछूँगा ज़रूर कि बापू !

आपने ऐसा क्यों कहा ?

जवाब तैयार रखना

राम राम

-अलबेला खत्री


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पति-पत्नी अकारण सम्भोग न करें - महात्मा गांधी

पशु जीवन में  दूसरी बात हो सकती है 

लेकिन  मनुष्य  के विवाहित जीवन  का यह नियम होना चाहिए 

कि कोई भी पति-पत्नी  बिना आवश्यकता के प्रजोत्पत्ति न करें  

और बिना प्रजोत्पादन के हेतु के सम्भोग न करें .

-महात्मा गांधी 








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मेरे लिए धर्म से रहित राजनीति की कोई सत्ता नहीं है




मेरी
देश-भक्ति

अनन्त शान्ति तथा मुक्ति की ओर

मेरी यात्रा का एक पड़ाव मात्र है ।

मेरे लिए धर्म से रहित राजनीति की कोई सत्ता नहीं
है ।

राजनीति धर्म की सेविका है ।

लोग कहते हैं कि मैं धर्मपरायण मनुष्य हूँ ।

मगर राजनीति में फंस पड़ा हूँ ।

सच बात ये है कि राजनीति ही मेरा क्षेत्र है

और मैं उसी में रह कर

धर्मपरायण होने का प्रयास कर रहा हूँ ।


- महात्मा गांधी


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