मुज़्तरिब है दिल शब-ए-हिज्र बिताये न बने
हाल-ए-दिल अहले-जहां को सुनाये न बने
ख़त में उसने क्या लिखा होगा,लिफ़ाफ़ा कह रहा है
आज तो कासिद को भी मुंह दिखलाये न बने
आतिश-ए-दोज़ख़ से तो बच जायेंगे पर दोस्तो
आतिश-ए-दुनिया से ये दिल बचाये न बने
ख़त्म है जाम-ए-वफ़ा और मयकदे वीरान हैं
आज तो साक़ी से भी मय पिलाये न बने
क्या करूं तारीफ़ अब 'अलबेला' मैं उस बात की
बिन बनाये बन पड़ी, जो बात बनाये न बने
प्यारे बापू, कांग्रेस मुक्त भारत - नमो नमो भारत
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*प्यारे बापू,कांग्रेस को ख़त्म करने की आपकी अन्तिम ईच्छा पूरी करने के लिए
गुजरात से एक वज्रपुरुष ताल ठोक चुका है इसलिए आज आपकी पुण्यतिथि पर हम
भारतवासी आप...
12 years ago


5 comments:
Aatish a dojakh se to bach jayenge a doston
Atish a Duniya se ye dil bachaye na bane.
Bahut Khoob aur such bhee.
Badhiya ban padi hai gazal
हम तो जाम को देखकर इधर आ गये साथ में साकी भी मिल गया, हालांकि जाम हम बहुत पहले छोड़ चुके हैं।
अलबेला जी, क्या जोरदार रचना है...."आतिश-ए-दोज़ख..." वाला शेर तो गज़ब ढा गया....साधू!!
आज बड़े गलिबाना हो रहे हो भाई जी ,क्या बात है ?
कुछ उर्दू शब्दों को समझना कठिन लगा...
वैसे आपकी रचना बढिया लगी
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