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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

हमसे तो तेरी फोटो भी फाड़ी न जायेगी ..............

चादर ये मुहब्बत की है झाड़ी न जायेगी

ये गाड़ी है अगाड़ी , पिछाड़ी न जायेगी

तूने तो इस जिगर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए

हमसे तो तेरी फोटो भी फाड़ी न जायेगी

8 comments:

निर्मला कपिला September 9, 2009 at 9:01 AM  

बहुत् खूबल्बेली सी है आपकी ये रचना बधाई

पी.सी.गोदियाल "परचेत" September 9, 2009 at 9:44 AM  

संभाल के रखिये जनाव , बहुत बढिया शेर है !

Mithilesh dubey September 9, 2009 at 10:07 AM  

बहुत खुब एक और लाजवाब प्रस्तुती। बहुत-बहुत बधाई

शिवम् मिश्रा September 9, 2009 at 10:42 AM  

फोटो तो हमने फाड़ दी , पर तस्वीर उसकी दिल से निकली न जायेगी |

Anil Pusadkar September 9, 2009 at 11:09 AM  

तोडने-फ़ोडने,फ़ाडने का काम बचपन मे खूब किया है अलबेलाजी खूब मार पडी है सो अब तो हमसे भी नही होगा किसी की भी फ़ोटो फ़ाडना,चाहे मुहब्ब की हो या ना की हो।

Rashmi Swaroop September 9, 2009 at 1:00 PM  

वाह ! क्या खूब कहा है !
:)

Vinay September 9, 2009 at 1:17 PM  

बढ़िया

राजीव तनेजा September 9, 2009 at 11:09 PM  

अलबेला जी...मेरा शक कुछ-कुछ विश्वास में बदल रहा है... :-)

सर्दी ...खाँसी ना मलेरिया हुआ...

मैँ गया यारो...मुझको लवेरिया हुआ ..

हाँ...लवेरिया हुआ

वैसे...आपका शेर बढिया है

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