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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

हरिणों की ज़िन्दगी तबाह मेरे देश में........

सूरज की किरणें

सियाह होती दीखती हैं,

चाँद हुआ जा रहा है स्वाह मेरे देश में


धरती भी चाक हो चुकी है

क्योंकि इसमें भी

विपदा की खाइयां अथाह मेरे देश में


चन्द भेडि़यों ने कर

डाली पूरे जंगल के

हरिणों की ज़िन्दगी तबाह मेरे देश में


यहां-वहां, जहां-तहां,

मत पूछो कहां-कहां

नौहे-नाले-सिसकी व आह मेरे देश में

5 comments:

M VERMA September 20, 2009 at 6:36 PM  

चन्द भेडियो ने --
जी हाँ ! चन्द भेडियो ने ही तो तबाह कर रखा है
बहुत सुन्दर

Unknown September 20, 2009 at 7:36 PM  

bahut hi achha likha hai sir aapne... hamare desh me... aur bhi bahut kuchh ho raha hai...

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून September 20, 2009 at 9:46 PM  

वाह सुंदर. भाई.

संगीता पुरी September 21, 2009 at 8:55 AM  

हिरणों को एकजुट होना चाहिए !!

Sudhir (सुधीर) September 22, 2009 at 7:46 AM  

वाह वर्तमान के बोध के साथ लिखी कविता साधू

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