हे बजरंग बली ! भारत से भ्रष्टाचार मिटा दो
और अगर ये वश में नहीं तो साफ़ साफ़ बतला दो
कब तक यों खामोश रहोगे ? हनुमत कुछ तो बोलो
लाल लंगोटे वाले बाबा ! अब अपना मुँह खोलो
तेरी आस है हमें
विश्वास है हमें
तेरे दर को छोड़ के बाबा, किस दरवाज़े जाएँ ?
तुम्हें बताया दर्दे-दिल अब और किसे बतलाएं ?
हमने तो ली ओट तुम्हारी, निशदिन तुझे मनायें
तेरी आरती, तेरा चालीसा, भजन भी तेरे गायें
दुःख की बाढ़ से घिरे भवन में सुख की खिड़की खोलो
लाल लंगोटे वाले बाबा ! अब अपना मुँह खोलो
तेरी आस है हमें
विश्वास है हमें
अर्ज़ हमारी मान लो वरना हम अनशन कर देंगे
हम तो टेन्शन में हैं, तुमको भी टेन्शन कर देंगे
धमकी नहीं है, सचमुच हम ये आयोजन कर देंगे
मुल्क पे न्यौछावर हम अपना तन मन धन कर देंगे
अन्धकार में भटक रहे हम, कोई किरण टटोलो
लाल लंगोटे वाले बाबा ! अब अपना मुँह खोलो
तेरी आस है हमें
विश्वास है हमें
-अलबेला खत्री
अर्ज़ हमारी मान लो वरना हम अनशन कर देंगे - हम तो टेन्शन में हैं, तुमको भी टेन्शन कर देंगे
Labels: अलबेला खत्री , पोएट्री , बजरंग बाली , बाबा , भजन , भ्रष्टाचार , हनुमान
भारत माता तेरे करण - अर्जुन आ गये हैं अब ठाकुर तो गियो...गियो.....गियो....
बहुत इन्तज़ार किया तूने भारत माता !
बड़ा ज़ुल्म सहा,
बड़ी वेदना और पीड़ा से गुज़री
परन्तु अब तेरे करण -अर्जुन आ गये हैं माँ.........
कह दो अब राणा से
कि ठाकुर तो गियो ! गियो !! गियो !!!
-अलबेला खत्री
Labels: अन्ना , अलबेला खत्री , दिग्गीराजा , बाबा , मनमोहन , हास्यकवि
बाबाजी ! आपकी लुंगी नौ दिन में ही कैसे फट गई ?
आज निर्जला एकादशी है, जब लोग सूखा व्रत रखते हैं
दूध पीना तो दूर, पानी की एक बून्द तक नहीं चखते हैं
हाँ हो सके तो लोगों को पानी क्या, शरबत भी पिलाते हैं
और शास्त्रोक्त परम्परानुसार पुण्य का लाभ कमाते हैं
जैसे कि श्री श्री रविशंकर जी ने कमा लिया
पर बाबाजी ! आपने इससे क्या पा लिया ?
आपकी तो साख को ही बट्टा लग गया
चट्टी क्या आपको तो चट्टा लग गया
अब आप पहले की तरह "करने से होता है" कैसे कहोगे ?
और दो सौ साल तक स्वस्थ रूप से जीवित कैसे रहोगे ?
कुल आठ दिन में ही आपकी शारीरिक शक्ति क्योंकर घट गई ?
बाबा, महीने भर चलने वाली लुंगी नौ दिनों में ही कैसे फट गई ?
कमाल है ! आर्य समाज की महान परम्परा का ऐसा ह्लास ?
सफ़र का श्रीगणेश ही हुआ था और गाड़ी में तेल खलास ?
कहाँ गई वो कपालभाती ? जो आप हमसे कराते थे
स्वस्थ और शतायु रहने की कला टीवी पर बताते थे
स्वामी विरजानंद के शिष्य महर्षि दयानंद को क्या मुँह दिखाओगे ?
स्वामी श्रद्धानंद व लाला लाजपतराय पूछेंगे तो उन्हें क्या बताओगे
कुल मिला कर आपने कॉन्फिडेंस कुछ ज़्यादा ही ओवर कर लिया
बीस साल में कमाए हुए गुड़ को कुल बीस दिनों में गोबर कर दिया
ऐसे कुछ अनर्गल सम्वाद मन-मस्तिष्क में चल रहे हैं
वो कौन से दुष्ट ग्रह हैं ? जो इन दिनों आपको छल रहे हैं
उनका इलाज कराइए, ख़ुद की ग्रहदशा मजबूत बनाइये
व एक बार फिर नये सिरे से अपना आन्दोलन चलाइये
देश की त्रस्त जनता को आपसे ही उम्मीद है बाबा
बाकी नेता तो बस भ्रष्टाचार के ज़रखरीद है बाबा
लीजिये भवानी माँ का नाम, या कह के जैश्रीराम !
कर डालो अब तो इस दुर्व्यवस्था का काम तमाम
प्रार्थना मैं भी करूँगा आपके लिए
अरदास मैं भी करूँगा आपके लिए
जय हो आपकी !
________________
अरे भाई जूता चप्पल मारना है तो अपने मुँह पर मारो... नेताजी को क्यों मारते हो ?
आजकल जूते चप्पल कुछ ज़्यादा ही चलन में हैं । जनता अपना गुस्सा
निकालने के लिए मानो तैयार ही है और सदैव तत्पर है नेताओं को जूते मारने
के लिए..........लेकिन मेरा मानना है कि अपनी गलती की सज़ा स्वयं भोगनी
चाहिए । किसी दूसरे को इसका पुनीत लाभ नहीं देना चाहिए ।
अरे भाई जूते मारने हैं तो ख़ुद को मारो..........गलती तुम्हारी ही है जो तुमने
मतदान के समय इन लोगों को चुन चुन कर अपने साथ खिलवाड़ का अवसर
दिया । अब जो वोट तुमने दिया उसके ज़िम्मेदार तो तुम ही हो..... तो मारो न
जूता अपने ही मुँह पर ....दूसरे को इसका लाभ क्यों पहुंचाते हो........
वैसे भी जूते मारने से क्या होगा ? मारना है तो वोट से मारो और ऐसा मारो
कि देश का भला हो ..आगे आपकी मर्ज़ी
मैं तो एक पैरोडी पेश कर रहा हूँ साहिर लुधियानवी के उस सुपरहिट गाने की
जो उन्होंने फ़िल्म लैला मजनू के लिए लिखा था :
वोट हाज़िर है हुकूमत की जड़ हिलाने को
कोई चप्पल से ना मारे नेता मरजाणे को ........
क्यों ? ठीक है ना ठीक ?
Labels: hamara गुजरात news , अलबेला खत्री , डेल्ही , बाबा , योग , रामदेव , सूरत , हिन्दी हास्य कविता
महिलाओं का ख़ून बहा कर हो रहा भारत निर्माण
निहत्थों पर लट्ठ चला कर हो रहा भारत निर्माण
निर्दोषों पर बल आज़मा कर हो रहा भारत निर्माण
गांधी बाबा देखले तेरी लाठी किन पर बरस रही है ?
महिलाओं का ख़ून बहा कर हो रहा भारत निर्माण
शेम !
शेम !!
शेम !!!
Labels: अलबेला खत्री , आक्रोश , कवि सम्मेलन , बाबा , योगी , रामदेव , सत्याग्रह

