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Monday, August 6, 2012
पहले अपने शब्द टटोलो बाबाजी
फिर तुम अपना श्रीमुख खोलो बाबाजी
साहित्य के इस मंच पे गर कुछ कहना है
साहित्यिक भाषा में बोलो बाबाजी
जीवन में सुख दुःख का सीधा मतलब है
थोड़ा हँस लो, थोड़ा रो लो बाबाजी
मान गया मैं, नहीं डरे तुम झूले पर
अब तो अपने कपड़े धोलो बाबाजी
ढाई बज गये, बाबी द्वार न खोलेगी
यहीं किसी फुटपाथ पे सो लो बाबाजी
हाथ में थी वो सारी फ़सल उड़ा डाली
साथ की खातिर भी कुछ बो लो बाबाजी
रोने से क्या संकट कम हो जायेंगे ?
आओ झूमो, नाचो, डोलो बाबाजी
'अलबेला' सब रूखापन मिट जायेगा
जीवन में तुम प्यार तो घोलो बाबाजी
-अलबेला खत्री
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Monday, July 23, 2012
फिर सावन का सोमवार है बाबाजी
फिर पूजा है, मन्त्रोच्चार है बाबाजी
आज हमारे जन्म दिवस के मौके पर
नाग पंचमी का त्यौहार है बाबाजी
सुबह सवेरे जल्दी उठ कर स्नान करूँ
घरवाली का ये विचार है बाबाजी
बीवी को वश में करने का मन्तर दो
विनती तुम से बार बार है बाबाजी
वोटर का दुःख उसे दिखाई न देगा
जब तक वो कुर्सी सवार है बाबाजी
उम्मीदों पर बार बार जो वार करे
वही सही उम्मीदवार है बाबाजी
जूतों की गारंटी बारहमास मिली
पर जीवन के दिवस चार हैं बाबाजी
'अलबेला' फिर सौरभ पाण्डेय डांटेंगे
है में घुस गया अनुस्वार है बाबाजी
-अलबेला खत्री
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Saturday, July 21, 2012
नीयत हो यदि साफ़ हमारी बाबाजी
नियति भी तब लगेगी प्यारी बाबाजी
पुस्तक, सी डी और दवायें बेच रहे
सन्त नहीं, वे हैं व्यापारी बाबाजी
कोई किसी का सगा नहीं है दुनिया में
सब मतलब की रिश्तेदारी बाबाजी
दाज नहीं तो दूल्हा बैरंग लौट गया
इसको कहते दुनियादारी बाबाजी
तुम पूछो या मत पूछो, मैं कहता हूँ
क़र्ज़ है सबसे बड़ी बीमारी बाबाजी
ऊँची एड़ी वाले सैंडिल फिसले तो
लग जायेगी चोट करारी बाबाजी
अलबेला खत्री तो कुछ भी लिखता है
लगता इसकी मति गई मारी बाबाजी
-अलबेला खत्री
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Friday, July 20, 2012
सुर है लेकिन ताल नहीं है बाबाजी
पॉकेट है पर माल नहीं है बाबाजी
क्योंकर कोई चूमे हमको सावन में
अपने चिकने गाल नहीं है बाबाजी
दर्पण से उनको नफ़रत हो जाती है
जिनके सर पर बाल नहीं है बाबाजी
मेहमानों की ख़ातिरदारी कैसे हो
घर में आटा दाल नहीं है बाबाजी
देश बेच कर खाने वाले लोगों का
लोहू शायद लाल नहीं बाबाजी
उनकी ममता घुट घुट कर मर जाती है
जिनके अपने लाल नहीं है बाबाजी
मंहगाई के बिच्छू डंक चुभाते हैं
मोटी अपनी खाल नहीं बाबाजी
हास्यकवि 'अलबेला' ऐसा घोड़ा है
जिसके खुर में नाल नहीं है बाबाजी
-अलबेला खत्री
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Thursday, July 12, 2012
नील गगन के पार गया है बाबाजी
छोड़ के यह संसार गया है बाबाजी
हरा सका न कोई जिसे अखाड़े में
मौत से वह भी हार गया है बाबाजी
देवों को कुछ दाव सिखाने कुश्ती के
कुश्ती का सरदार गया है बाबाजी
अपनी माता के संग भारत माता का
सारा क़र्ज़ उतार गया है बाबाजी
हाय! रुस्तमे-हिन्द को कैसा रोग लगा
हर इलाज बेकार गया है बाबाजी
रिंग का किंग, रिंग तोड़ चला इक झटके में
सुपर किंग के द्वार गया है बाबाजी
दारासिंह के देह अन्त पर 'अलबेला'
दुःख में यह गुरूवार गया है बाबाजी
-अलबेला खत्री
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Sunday, June 10, 2012
कितना झूठा, कितना साचा बाबाजी
हमने सब का चेहरा बांचा बाबाजी
अग्निपथ टू देख के दर्शक चौंक उठे
विजय से ज़्यादा हॉट है कांचा बाबाजी
जुहू तट पर अपनी अपनी आयटम संग
खोज रहे सब कोना- खांचा बाबाजी
सीधे सच्चे बन्दे जिसमें ढलते थे
टूट गया है क्या वह सांचा बाबाजी
महाराष्ट्र में रह कर मैं भी सीख गया
तुमचा, आमचा, यांचा, त्यांचा बाबाजी
झंडों में बदलाव का कोई लाभ नहीं
बदलना होगा पूरा ढांचा बाबाजी
चोर होगया नौ दो ग्यारह और पुलिस
करती रह गई तीया-पांचा बाबाजी
अवगुण औरों में तो ढूंढे "अलबेला"
लेकिन ख़ुद को कभी न जांचा बाबाजी
___JAI HIND !
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| hasya kavi Albela Khatri in Atlanta Ga USA |