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zara yaad karo qurbani by albela khatri & art india creation

ZARA YAAD KARO QURBANI



jai hind !
albela khatri

कवि सम्मेलनों के नाम पर कुछ ख़ास कवियों की मार्केटिंग करने वाले तत्वों को इस कार्यक्रम से दूर ही रखा गया था


अन्तर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन सूरत के तत्वाधान में होली के अवसर पर आयोजित विराट हास्य कवि सम्मेलन "हास्य गुलाल" कई मायनों में अनूठा कार्यक्रम था .  लाफ्टर चैम्पियन अलबेला खत्री के अनूठे  मंच संचालन में सूरत के कवि सम्मेलनीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि मंच से सिर्फ़ मौलिक और स्वरचित काव्यप्रस्तुति की गयी  तथा सुनेसुनाए  चुटकुलों को संचालक ने सिरे से ही नकार दिया था . पूरी तरह से पारिवारिक मनोरंजन से  परिपूर्ण  इस कार्यक्रम में हास्य-व्यंग्य के साथ साथ राष्ट्रभक्ति के स्वरों को भी पूरे मनोयोग से सुना गया  .

फ़िल्मी संवादों के अलावा फ़िल्म अभिनेता रंजीत ने जब गाना भी गाया तो लोग झूम उठे,  सुन्दर, शालीन, मौलिक और मधुर  स्वर की साम्राज्ञी श्वेता सरगम के गीत और ग़ज़लों की बहार ने महफ़िल को मोहब्बत से महका दिया, वरिष्ठ कवि संदीप सपन  की ऊर्जस्वित प्रस्तुति के  साथ साथ राजेश अग्रवाल का काव्यपाठ तो जैसे एक उपलब्धि थी सूरत वासियों के लिए ,,,ये दोनों पहली  बार सूरत में प्रस्तुति देने आये थे और खूब पसंद किये गए .  नरेंद्र बंजारा और अशोक भाटी ने भी उम्दा काव्यपाठ किया .

रमेश लोहिया, किशोर बिन्दल, राजू खण्डेलवाल, राजेश भारुका,  सुभाष मित्तल,  इन्दिरा  अग्रवाल इत्यादि आयोजकगण के सधे और कुशल नेतृत्व में दर्शकों से ठसाठस भरे सभागार में अभिनेता रंजीत, वरिष्ठ समाजसेवी किशन अग्रवाल, विधायक श्रीमती संगीता पाटील व हर्ष संघवी के अलावा  श्रीमती गंगा पाटिल, राजू देसाई,  मनोज मिस्त्री इत्यादि अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति समारोह की गरिमा बढ़ा रही थी . लगभग तीन घंटे तक चले इस रंगारंग  काव्यमहोत्सव में सभी दर्शकों के लिए  ड्राईफ्रूट्स और मिनरल वाटर की भी व्यवस्था थी

कवि सम्मेलनों के नाम पर  कुछ ख़ास कवियों की मार्केटिंग करने वाले तत्वों को इस कार्यक्रम से दूर ही रखा गया था ताकि  सूरत के कवि सम्मेलनों की दिशा और दशा बदले तथा  भविष्य में उन्हीं कवि / कवयित्रियों को बुलाया जाये जो खुद लिखते हैं और खुद सुनाते हैं, चोरी का माल बेचने वाले नकली परफॉर्मरों पर अंकुश लगाने में यह कार्यक्रम कितना सफल होता है यह तो समय बतायेगा लेकिन  मंच के हित में अलबेला खत्री के इस प्रयास को  जिस प्रकार दर्शकों ने सराहा है, वह  उजाले की उम्मीद ज़रूर जगाता है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री





aajtak walo ! tumhare ghar me maa - bahan nahin hai kya ?


महिलाओं के सम्मान और गौरव की लड़ाई लड़ने का दम भरने वाला कोई महिला मण्डल आज तक की वेब साइट पर इस तरह के फोटो देख कर क्या सोचता है ?

क्या न्यूज़ चैनल वालों द्वारा ऐसे चित्र दिखा कर किसी महिला के शारीरिक ढाँचे का उपहास उड़ाना उचित है ?

कल आजतक ने पूनम पाण्डेय की नंगी पुंगी फ़ोटो लगा कर अपने पाठकों को उसका जन्मदिवस बताते हुए उसे बधाई देने को कहा था " क्यों भाई ये चैनल अब ऐसी लड़कियों की मार्केटिंग कर रहा है क्या ?

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



आयोजनों को हथियाने के लिए कोई कवि इतना नीचे भी गिर सकता है, यह पहली बार मुझे पता चला


दिल्ली के उन सभी तथाकथित बड़े कवियों के प्रति आज मेरा मन न केवल वितृष्णा से भर गया है  बल्कि बेहद घृणा से भी भर गया है जिन्होंने आज तक मुझे अँधेरे में रखा और राजेश चेतन के लिए बेहूदा और अनर्गल बातें करके मुझे उनसे दूर रखा

कल जब वड़ोदरा में मुलाकात हुई और उनका मंचीय कार्य कौशल देखा तो सारा झूठ काफूर होगया  और कविवर राजेश चेतन को मैंने न केवल एक मेधावी रचनाकार व  ज़बरदस्त मंच संचालक के रूप में पाया बल्कि  उनके व्यक्तित्व में सौम्य कवित्व से लबालब एक श्रेष्ठ इन्सान भी सामने आया  - हद हो गयी यार !  चार पैसों और तीन आयोजनों को हथियाने के लिए कोई कवि इतना नीचे भी गिर सकता है, यह पहली बार मुझे पता चला

ईश्वर इन दुष्टों को भी सदबुद्धि प्रदान करे

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 



आपको सूरत नहीं बदलनी है आपको तो हंगामा खड़ा करना है


आदरणीय  झाड़ूवाल साहेब !
सादर निन्दा प्रस्ताव
अगर आप ये समझते हैं कि अराजकता  मचा कर अपनी महत्वाकांक्षा का  राजनैतिक उल्लू सीधा कर लेंगे तो मेरी समझ में ये आपकी  भूल है क्योंकि हिन्दुस्तान की सारी जनता इतनी वो  नहीं, जितनी आपने  समझ रखा है, या यों समझिये कि पूरा देश दिल्ली नहीं है, जो आपकी  बातों में आ जायेगा   और अपना वोट अराजक तत्वों को दे कर अपने ही हाथों अपने करम फोड़ लेगा  

चन्द सरफ़िरे और टपोरी लोगों के उत्पात मचा देने से अगर सत्ता मिल जाती तो आप से पहले ही कई लोग सत्ता सुंदरी के साथ सुहागरात मना चुके होते, आपश्री का  तो नंबर ही नहीं आता @३$उ*&!06 

श्रीमान घोंचू प्रसाद !  नौकरी मिली तो आप  नौकरी नहीं कर पाये, सत्ता मिली तो उसे सम्हाल नहीं पाये, भगवान् जाने आपकी  गृहस्थी कैसे चल रही है,,,,,किसकी किरपा से चल रही है

जितना ध्यान टीवी पर आने और लोगों का ध्यान खींचने पर लगा रहे हो उतना अगर ईमानदारी से अपने काम पर लगाते और लोगों से किये हुए वायदे पूरे  करते तो आपकी लाज आम चुनाव में भी बच जाती, परन्तु आप तो ठहरे अतिउत्साहीलाल ! आपको सूरत नहीं बदलनी है आपको तो हंगामा खड़ा करना है

राम ही राखे !
जय हिन्द !
अलबेला खत्री







तो फिर देश की कमान वर्दी वालों के हाथ में ही क्यों नहीं सौंप देनी चाहिए



दुर्भाग्य से जब देश में कुदरत का इत्ता बड़ा कहर टूट पड़ा हो कि  हज़ारों लोग काल 


के गाल में फँस गए हों, पांच दिन से  भूखे-प्यासे  हों, सर्दी में कंपकंपा  रहे हों,  दवा  

इत्यादि के अभाव में  बीमारी से तड़प रहे हों  और अपनी जान बचाने के लिए  

सरकार से गुहार व चीख पुकार  कर रहे हों, तब  उनके लिए  खाने पीने तक की  

व्यवस्था  भी  जो लोग नहीं कर  सकते,  ऐसे चादरमोद लोग नेता बनते ही क्यों हैं .


 किस काम  का वह आपदा प्रबंधन विभाग,  किस काम का इतना विराट प्रशासन 


तंत्र और किस काम के वे मौसम विशेषज्ञ तथा  सार्वजनिक निर्माण विभाग के  वरिष्ठ 

इन्जीनियर  जो ऐसे संकट के  समय केवल बहानेबाज़ी कर रहे हैं  और गलत 

सूचनाएं दे दे कर  देशवासियों को गुमराह कर रहे हैं .  उस पर साले, कमीने, 

महाहरामखोर  मंत्री लोग केवल  बयानबाज़ी  क़र के या तो सांत्वना दे रहे हैं  या फिर 

लाख  दो लाख रूपये मुआवज़ा बाँट कर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान रहे  हैं और  

लोगों की चिंता छोड़ कर राजनीति करने में लगे हुए  हैं . इन  मादरखोरों को 2014 

के चुनाव की चिंता  लगी है .....आज जो हज़ारों जानों पर  मौत का कुहासा छाया है 

वह इन्हें  दिखाई नहीं देता ..............शुक्र है कि  सेना के बहादुर जवान अपना  फ़र्ज़ 

बखूबी निभा रहे हैं  और लोगों को  बचाने में लगे हुए है . ..लेकिन सवाल  है कि  जब 

भी देश में  कोई  ऐसा संकट आता है तो वर्दी वाले ही काम आते हैं,  खादी वाले तो यों 

छुप जाते हैं जैसे  लुहारण के लहंगे में जुएँ  छुपी रहती हैं ...........तो फिर देश की 

कमान  वर्दी वालों के हाथ में ही क्यों नहीं  सौंप देनी चाहिए ...... क्यों हम मतदाता 

हर बार इन्हीं चूतियों को अपना भविष्य सौंप कर  अपने ही हाथों अपने करम फोड़ 

लेते हैं  ........इस पर विचार करना होगा और अगले चुनाव में इन्हें वोट नहीं  सोट 

देना होगा .


अरे भारत सरकार के  नाकाम  मंत्रियो !


नेता होना  क्या होता है यह सीखो गुजरात आ कर  मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से, जो 


सुख और  दुःख की हर घड़ी  में  जनता के  साथ खड़ा रह कर काम करवाता है . याद 

करो 7 अगस्त 2 0 0 6 के दिन  आई  सूरत की  महाभयंकर बाढ़  जिसने पूरे इलाके 

में त्राहि त्राहि मचादी थी लेकिन  सरकारी  तंत्र की कर्मठता के कारण  बचाव कार्य 

इत्ती तीव्रता से हुआ  कि ज़ख्म जल्द ही भर गए  और  जनता का उतना नुक्सान नहीं 

हुआ  जितना हो सकता था . 


कौन  नहीं जानता कि  जब तक  सबकुछ ठीक नहीं हो गया तब तक नरेन्द्र मोदी  


सूरत में ही डेरा डाले रहे  और  समूचे प्रदेश के तमाम  विशेषज्ञ  और संसाधन  सूरत 

में बुला कर उनका  पूरा पूरा उपयोग किया .......अगर  उस वक्त  इतनी तत्परता 

नहीं दिखाई  होती सरकार ने  तो सूरत में  महामारी फैलने  से कोई रोक नहीं 

सकता था .  अगर नरेन्द्र मोदी  की सरकार  जनता के संकट  को मिटा सकती है  

तो  सोनिया  गाँधी  की बांसुरी पर करतब दिखाने वाले जमूरे  ये सब क्यों नहीं कर 

सकते  ?  जनता कल सवाल पूछेगी तो   उनका जवाब क्या सोनिया से पूछ कर दोगे 

या कभी अपनी ओर से भी कुछ कहोगे सरदार जी ?


आओ साथियो, लाख लाख लाहनत भेजें  इस मरदूद  हुकूमत को और सब मिल 


कर अपने अपने इष्ट प्रार्थना करें कि  उत्तराखंड में  फंसे  तमाम  लोगों  को परमपिता 

परमात्मा इस संकट से बाहर निकाल कर उन्हें उनके परिवार तक सुरक्षित पहुँचाने 

की कृपा करे  .

जय हिन्द ! 





लूट दबा कर लूट रे खादी, लूट दबा कर लूट by hasyakavi albela khatri on sab tv


loot daba kar loot re khadi, 
loot daba kar loot....
albela khatri on sab tv in waah waah kya baat hai




रक्तदान की राह पर हिन्दी हास्यकवि अलबेला खत्री का नव अभियान

ALBELA KHATRI FOR BLOOD DONETION 

चालीस दिन के अमेरिका को अहमदाबाद के दिनों ने धो डाला ......


बहुत दिनों बाद आप सभी ब्लोगर बन्धुओं को नमस्कार करने का अवसर 

मिला है आज तो इसे व्यर्थ नहीं जाने दूंगा .....आप सभी को हार्दिक हार्दिक 

स्नेह स्मरण करके रहूँगा .


पिछले 40 दिनों से अमेरिका की यात्रा पर था और वहां बहुत सारे कार्यक्रमों 

के अलावा लम्बी यात्राओं, दोस्तों से मेलजोल  और मौजमस्ती  में अति व्यस्त 

होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ पाया लेकिन आज एक ऐसी घटना घटी कि  

"आना ही पड़ा सजना ....ज़ालिम है दिल की लगी ....." गाते हुए आ गया हूँ  


कहना ये चाहता हूँ कि  हमारे देश का कोई मुकाबला नहीं . "यहाँ के बन्दे 

अल्ला अल्ला, यहाँ का मौसम राम राम" 


40  दिन तक अमेरिका  में ठन्डे मौसम और प्रदूषण रहित वातावरण में रहने 

के कारण मेरे तन-बदन पर एक उजली सी चमक की परत चढ़ गयी थी . रंग 

गोरा सा हो गया था और त्वचा एक दम साफ़ हो गयी थी . ऐसा परिवर्तन अपनी 

देह में देख कर  मैं खुश था ...खुश क्या था, बल्लियों उछल रहा था . लेकिन 

अपना देश तो अपना देश है न भाई ! वह पराई चमक कब तक बर्दाश्त करता  

और क्यों करता ?  लिहाज़ा किराये के एक फ्लैट की तलाश में दो दिन तक ऑटो 

रिक्शा में बैठ कर अहमदाबाद  शहर में घूमा तो बाहरी मुल्लमा झट से उतर 

गया और फट से अपन अपने उसी रंग में आ गए ....हा हा हा हा 


ऐसी गरमी और ऐसी आग बरसाती धूप से सामना हुआ  कि रोम रोम से 

एक ही आवाज़ आई ....जय हिन्द ! 


-अलबेला खत्री 



हास्यकवि अलबेला खत्री का वीडियो एल्बम हमारा गुजरात



दी ग्रेट इंडियन लाफ्टर फेम हास्यकवि अलबेला खत्री की लोकप्रिय एवं बहुचर्चित कविता हमारा गुजरात पर आधारित गरवी गुजरात का एक शानदार वीडियो एल्बम अलबेला खत्री कृत हमारा गुजरात अब रिलीज़ के लिए तैयार है

जय हिन्द !  



ईद मुबारक पर तीन कह-मुकरियां




वो जब आये, धूम मचाये 


आँगन आँगन ख़ुशियाँ लाये 


सब कहते हैं  ख़ुश आमदीद 


क्या सखि साजन ? 


नहिं सखि ईद 




तन नूरानी, मन नूरानी 


सबके घर आँगन नूरानी 


चमकदार है इसकी दीद 


क्या सखि साजन ? 


नहिं सखि ईद 



उसकी आमद लगे सुहानी 


झूमे नाना झूमे नानी 


सारा आलम लगे खुर्शीद 


क्या सखि बादल ?


नहीं सखि ईद 



-अलबेला खत्री  

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मीत बनो तो यों बनो...........

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हास्यकवि अलबेला खत्री के सामयिक दोहे

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नौहा समझो तो नौहा, दोहा समझो तो दोहा




पहले से ही त्रस्त हैं, सीधे सादे लोग


मत फैलाओ भाइयो, अफवाहों का रोग



जन जन आशंकित हुआ, नख से लेकर केश


अफवाहों की आँच में, झुलस न जाये देश



देश हमारा  ताज है,  देशधर्म सरताज


जब तक इसकी लाज है, तब तक अपनी लाज



किसके सिर में चल रही, हिंसा की खुजलाट


मुझको गर दिख जाये वो, मारूँ  उसे चमाट 



कर्नाटक हो या असम, चाहे महाराष्ट्र

एक हमारी भावना, एक हमारा राष्ट्र 



बीज न बोयें द्वेष का, रखिये मन में नेह


आपस में नेहस्त हों , केरल हो या लेह



सरकारों को कोसना, दुस्साहस कहलाय


लेकिन अपने देश में, मूरख आग लगाय



'अलबेला' विनती करे, जोड़े दोनों हाथ


मिलजुल जीना सीख लो, इक दूजे के साथ



-जय हिन्द !


-अलबेला खत्री 

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देशवासियों को बधाई.........सुशील का अभिनन्दन !


 हरियाणा के लाल ने दिया ख़ूब परिणाम

सारे जग में कर दिया, हिन्दुस्तां का नाम


हिन्दुस्तां का नाम, रजत कुश्ती में पाया


लन्दन में जा भारत का दमख़म दिखलाया


देशवासियों ! आज झूम के ढोल बजाणा


ओलम्पिक में चमका भारत का हरियाणा



जय हिन्द !


-अलबेला खत्री


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"जय माँ हिंगुलाज" का काम बड़ी तेज़ी से हो रहा है

प्यारे मित्रो नमस्कार

यह बताते हुए अतीव हर्ष  का अनुभव कर रहा हूँ कि  श्री लेखराज खत्री 


और मेरे द्वारा निर्मित की जा रही  ऑडियो / वीडियो  "जय माँ हिंगुलाज" 

का काम  बड़ी तेज़ी से हो रहा है . संगीत जगत में सुप्रसिद्ध  स्वर मन्दिर  

के श्री पारस सोनी के अथक श्रम और  सतत समर्पित  सहयोग से संगीत 

का काम पूरा हो चुका है . अगले हफ्ते  सभी भजनों को  देश के जाने माने 

गायक - गायिकाओं द्वारा स्वरबद्ध  कर लिया  जाएगा  और उसके बाद 

जैसे ही  वीडियो  सेक्शन  पूरा होगा,  ये एलबम  हिंगुलाज भक्तों के लिए 

उपलब्ध करा दिया जाएगा .


मित्रो, यह  एलबम मेरे लिए एक ख़ास महत्व रखता है . इसलिए आपकी 


दुआ, आपके स्नेह और आपके आशीर्वाद  की मैं तहेदिल से अपेक्षा करता 

हूँ .

 जय माँ हिंगुलाज


-अलबेला खत्री 



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जीवन में तुम प्यार तो घोलो बाबाजी

पहले अपने शब्द टटोलो  बाबाजी  

फिर तुम अपना श्रीमुख खोलो बाबाजी 



साहित्य के इस मंच पे गर कुछ कहना है 


साहित्यिक भाषा में बोलो बाबाजी 



जीवन में सुख दुःख का सीधा मतलब है 


थोड़ा हँस लो, थोड़ा रो लो बाबाजी 



मान गया मैं, नहीं डरे तुम झूले पर


अब तो अपने  कपड़े धोलो बाबाजी 



ढाई  बज गये, बाबी द्वार न खोलेगी 


यहीं किसी फुटपाथ पे सो लो बाबाजी 



हाथ में थी वो सारी फ़सल उड़ा डाली 


साथ की खातिर भी कुछ बो लो बाबाजी 



रोने से क्या संकट कम हो जायेंगे ?


आओ झूमो,  नाचो,  डोलो बाबाजी 



'अलबेला' सब रूखापन मिट जायेगा 


जीवन में तुम प्यार तो घोलो बाबाजी

-अलबेला खत्री 

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चार कह-मुकरियां



मुख मण्डल उसका सतरंगा 


सबका भेद करे वह नंगा 


आज हि काम का कल बेकार 


क्या वह टीवी ? नहीं अखबार 




देह है भूरी मुख है लाल 


पिछवाड़े से मुँह में डाल


बारिश में हो जाती चीड़ी


क्या वह कीड़ी ? नहिं भाई बीड़ी 




रोज़ रात को मुँह में डालूं


चूस चास के पूरा खा लूँ 


हाय वो मीठे रस की खान 


क्या रसगुल्ला ? नहिं भई पान 




गुड़ से ज़्यादा मीठी लागे


उसके पीछे मनवा भागे 


नूरी नूरी रौशन रौशन 


क्या वह सजनी ? नहीं पड़ोसन

-अलबेला खत्री 

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अलबेला खत्री द्वारा खत्रियों की कुलदेवी हिंगलाज के भव्य ऑडियो/वीडियो का निर्माण ज़ोरों पर

सभी मित्रों को नमस्कार
आज एक सूचना दे रहा हूँ  कृपया इसे उस हर व्यक्ति तक पहुंचाने में मेरी सहायता करें  जो  भगवती हिंगलाज को मानने वाला हो अथवा  हिंगलाज के बारे में कुछ जानने  वाला हो . खासकर खत्री अथवा  ब्रह्मक्षत्रिय समुदाय के तमाम लोगों तक यह जानकारी  पहुंचाना चाहता हूँ .
धन्यवाद

माँ से बढ़ कर कौन सखी है बाबाजी


इस दुनिया में कौन सुखी है बाबाजी

जिसको देखो, वही दु:खी है बाबाजी



तुम तो केवल चखना लेकर आ जाओ


बोतल हमने खोल रखी है बाबाजी



इसकी चन्द्रमुखी है, उसकी सूर्यमुखी


मेरी ही क्यों  ज्वालमुखी है बाबाजी



रिश्वत की मदिरा फिर उससे न छूटी


जिसने भी इक बार चखी है बाबाजी



बाप से बढ़ कर कौन सखा हो सकता है


माँ से बढ़ कर कौन सखी है बाबाजी



काम अपना जी जान से करने वालों ने


अपनी किस्मत आप लिखी है बाबाजी



पथ के काँटे  क्या कर लेंगे 'अलबेला'


मैंने चप्पल पहन रखी है बाबाजी  







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