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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

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Albela Khatri

मेरे तो प्राण बन्द हैं साँसों में आपकी

गुलकन्द है मकरन्द है साँसों में आपकी

ज़ाफ़रान की सुगन्ध है साँसों में आपकी



दुनिया में तो भरे हैं ज़ख्मो-रंजो-दर्दो-ग़म

आह्लाद और आनन्द है साँसों में आपकी



कितनी है गीतिकाएं,ग़ज़लें और रुबाइयां

कितने ही गीतो-छन्द हैं साँसों में आपकी



कहीं और ठौर ही नहीं है जाऊंगा कहाँ ?

मेरे तो प्राण बन्द हैं साँसों में आपकी

6 comments:

Unknown October 29, 2009 at 9:17 AM  

वाह खत्री जी! बहुत सुन्दर!!

नीरज जी की ये पंक्ति याद आ गई

साँस तेरी मधुर-मधुर जैसे रजनीगन्धा ...

Satish Saxena October 29, 2009 at 9:23 AM  

बहुत खूब लिखा है आपने शुभकामनाएं !

Anil Pusadkar October 29, 2009 at 10:09 AM  

बहुत खूब अलबेला भाई।

दिगम्बर नासवा October 29, 2009 at 12:14 PM  

बहुत लाजवाब लिखा है ......... उम्दा ग़ज़ल .........

राज भाटिय़ा October 29, 2009 at 4:35 PM  

अलबेला जी बहुत सुंदर लिखा, बहुत लाजवाब जी.धन्यवाद

M VERMA October 29, 2009 at 5:53 PM  

साँसो मे जब प्राण बन्द हो जाये
जज्बात और स्वच्छन्द हो जाये

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