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Albela Khatri

अखिल भुवन में सबसे सुन्दर तू ही है

मस्ती का मदहोश समन्दर तू ही है

अखिल भुवन में सबसे सुन्दर तू ही है

आँखों में तो कोई भी रह सकता है

लेकिन मेरे दिल के अन्दर तू ही है

14 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' October 26, 2009 at 11:00 AM  

तेरे दिल में, मेरे दिल मे,
सबके दिल में, वो ही है।
कुञ्जर, चींटी, पत्थर, तिल मे,
कल और मिल में, वो ही है।।

Mohammed Umar Kairanvi October 26, 2009 at 11:01 AM  

वाह अलबेले जी, ना कोई हिन्‍दू ना मुसलमान, हमारे दिल में भी बस आप ही हो,

Unknown October 26, 2009 at 11:22 AM  

मस्ती का मदहोश समुन्दर तो सुन्दर ही होगा।

सुन्दर कविता!

SACCHAI October 26, 2009 at 11:44 AM  

" bahut hi sunder ..aaapko salam "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

योगेन्द्र मौदगिल October 26, 2009 at 12:18 PM  

कमाल है यार ये दिल भी किराये पर उठा दिया..... जय हो.....

ब्लॉ.ललित शर्मा October 26, 2009 at 12:42 PM  

मस्ती का समंदर डुबकियाँ लगाएं
आपको हमारी शुभकामनाएं,
बधाई

aman varma October 26, 2009 at 1:16 PM  

kyaa baat hai

maza aa gaya

ओम आर्य October 26, 2009 at 1:28 PM  

waah
waah
waah ............

राज भाटिय़ा October 26, 2009 at 4:34 PM  

चल झुठे....:)

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद October 26, 2009 at 5:34 PM  

दमादम मस्त क़लंदर तू ही है:)

Arshia Ali October 26, 2009 at 5:59 PM  

सत्य वचन।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को प्रगति पथ पर ले जाएं।

निर्मला कपिला October 26, 2009 at 6:49 PM  

वाह वाह क्या बात है दो शेर लिख कर ही सब कुछ कह दिया बहुत बहुत बधाई

Udan Tashtari October 26, 2009 at 9:00 PM  

बढ़िया है जी!!

राजीव तनेजा October 26, 2009 at 11:16 PM  

झूठा कहीं का मुझे ऐसे मिला...

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