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Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

हम भारतीय हैं, हमें हक़ है घुट घुट कर मरने का......


कोई नवजात डरता है तो डरे


कोई बुज़ुर्ग मरता हो तो मरे


हम तो मज़ा करेंगे



पर्यावरण के दुश्मन हैं ना


विषैला धुआं करेंगे



पहले पूजन करेंगे हम लक्ष्मी और गणेश का


फ़िर रंग दिखाएँगे अपने धार्मिक परिवेश का



आग लगायेंगे


लक्ष्मी
छाप बम को


जला देंगे


गणेश जी के भी


परखच्चे हवा में


उड़ा देंगे



लोग चिल्लाते हैं तो भले चिल्लाते रहें


ग्लोबल वार्मिंग वाले आँसू बहाते रहें



कचरा फैले तो फैले हमारी बला से.....


हमें तो मतलब है अपनी कला से...


वो कला


जो ज़िन्दगी को नर्क कर सकती है


स्वास्थ्य का बेड़ा गर्क कर सकती है


संस्कार में गिरावट


आहार में मिलावट



उस पर भी त्यौहार का ये रंगीन उन्माद


मुंबई हो दिल्ली हो, हो चाहे अहमदाबाद



बर्बाद होने की हमें पूरी तमीज है


पटाखे भी तगड़े हैं चाइनीज़ हैं



हमारे लिए ये मौसमे-महंगाई


कोई कारण नहीं है डरने का ...........



आज़ाद हैं हम, आज़ाद हैं हम


जो मन में आये वो करने का ..........



तज़ुर्बा बहुत लम्बा है हमारा


हवाओं में बारूद भरने का ...........



हम भारतीय हैं


हमें हक़ है


घुट घुट कर मरने का




10 comments:

विनोद कुमार पांडेय October 17, 2009 at 1:15 AM  

समझेंगे धीरे धीरे ये अलग बात है तब तक कुछ और नुकसान हो चुका होगा..पर्यावरण के साथ तो खेल खेल ही रहे है सब..
सार्थक पोस्ट एक संदेश देती हुई..दीवाली मंगलमय हो!!!

एस.के.राय October 17, 2009 at 1:57 AM  

अलबेलाखत्री जी ! निडर होकर जब लेखनी उठा ही लिया हैं तो समाज में परिवर्तण करके ही दम लेंगे ,यदि सडी गली व्यवस्था और सोच में परिवर्तण लाना हैं तो बेपरवाह हो कर समाज को उसी की भाशा में झकझोरना ही पडेगा ................ आपने बहुत ही अच्छी तुमबंदी की हैं ..... मेरी भाशा और आपके कहने की तरिका में अन्तर हैं जो सचमूच मन की गहराई तक पहंूच जाती हैं ............ समाज सुधरेगा और उसके बाप को सुधारना पडेगा ................।

शिवम् मिश्रा October 17, 2009 at 2:22 AM  

बहुत सटीक रचना पर कोई मर्म समझे तब ना !
आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !

राजीव तनेजा October 17, 2009 at 5:10 AM  

बिलकुल सच कहा आपने...हम खुद ही अपनी धरती का नाश करने पे तुले हैँ लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि चाँद पर पानी की खोज जारी है लेकिन उससे पहले प्रदूषण रूपी खर-दूषन ने हमारे ही सर पे लहराती लटॉं को गायब कर चाँद यहीं पे उगा देना है...यहीं पे उगा देना है

M VERMA October 17, 2009 at 7:33 AM  

सार्थक रचना. चिंता जायज है.
दिवाली की मंगलकामना

Unknown October 17, 2009 at 9:44 AM  

"लक्ष्मी छाप बम को
जला देंगे
गणेश जी के भी
परखच्चे हवा में
उड़ा देंगे"


माना कि लक्ष्मी देवी है और देवता गणेश है!
किन्तु सत्य यही है कि रुपया उनसे विशेष है!!

दीपोत्सव का यह पावन पर्व आपके जीवन को धन-धान्य-सुख-समृद्धि से परिपूर्ण करे!!!

संजय भास्‍कर October 18, 2009 at 9:50 AM  

बहुत ही सुंदर --इस खुलेपन की जितनी भी तारीफ़ करें कम है, दोस्त।

dher sari subh kamnaye
happy diwali

from sanjay bhaskar
haryana
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

संजय भास्‍कर October 18, 2009 at 9:50 AM  

बहुत ही सुंदर --इस खुलेपन की जितनी भी तारीफ़ करें कम है, दोस्त।

dher sari subh kamnaye
happy diwali

from sanjay bhaskar
haryana
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

शरद कोकास October 21, 2009 at 12:42 AM  

भैया हमने तो पटाखा जलाने वालो का विरोध शुरू कर दिया है ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' October 23, 2009 at 2:35 PM  

बहुत धारदार है भइया।
आपकी हिम्मत को दाद देता हूँ!!

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