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Albela Khatri

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मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन



शानदार, शानदार, शानदार …………………
शानदार और जानदार रहा मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा राजभाषा विभाग के तत्वाधान में डॉ बी आर पाल द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन,,,,, होना ही था, सुनने वाले लोग अच्छे थे, आयोजन स्थल भी ज़बरदस्त सजा हुआ था, यूनिट के प्रबन्ध निदेशक समेत सभी पदाधिकारी ठहाके लगाने के लिए मूड में थे और प्रताप फ़ौजदार, ममता शर्मा, नंदकिशोर अकेला तथा सुन्दर मालेगांवी हंसाने के मूड में भी थे

और हाँ, मैं ये बताना तो भूल ही गया कि मंच संचालन जब अलबेला खत्री के हाथ में होगा तो आनन्द तो आएगा ही, यह कौन सी नई बात है हा हा हा हा हा हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
 






 

अपनेराम ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली


लो जी,  "जब प्यार किया तो डरना क्या" वाले इस्टाइल में आज अपनेराम  ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, भावी प्रधानमन्त्री के लिए सहयोग राशि भर दी, पार्टी फण्ड के लिए डोनेशन भी दे दिया और विभिन्न मदों में 1675 रूपया भी भर दिया

अब ये नहीं बताऊंगा कि किस पार्टी की सदस्यता के लिए ऑनलाइन फ़ॉर्म और पैसा भरा है -बताने की ज़रूरत भी क्या है, आपको सब मालूम ही है … हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री


इससे पहले कि हर आदमी अपने हाथ में जूता ले ले, तुम लाईन पर आ जाओ

aam aadmi nahin hoon main

मैं आज अपना सीना ठोक के कहता हूं कि मैं भारत गणतंत्र का नागरिक हूं। नागरिक इसलिए हूं क्योंकि नगर में रहता हूं और सीना इसलिए ठोक रहा हूं क्यूंकि एक तो इससे वक्ता की बात में वजन आ जाता है, दूसरे सीना भी अपना है और ठोकने वाले भी अपन ही हैं इसलिए किसी दूसरे की आचार संहिता भंग होने का डर नहीं है। हालांकि मैं सीने के बजाय पीठ भी ठोक सकता हूं, लेकिन ठोकूंगा नहीं, क्यूंकि एक तो वहां तक मेरा हाथ ठीक से नहीं पहुंचता, दूसरे ज्यादा ठुकाई होने से पीठ में दर्द हो सकता है और तीसरे मैं एक कलाकार हूं यार, कोई झाड़ूवाल टाइप नेता थोड़े न हूं जो अपने ही हाथों अपनी पीठ ठोकता रहूं।

सरकारी और गैर सरकारी सूत्र मुझे आम आदमी कह कर चिढ़ाते हैं जबकि मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मैं कोई आम-वाम नहीं हूं। आम क्या, आलू बुखारा भी नहीं हूं, हां चाहो तो आलू समझ सकते हो क्योंकि एक तो मैं जमीन से जुड़ा हुआ हूं। दूसरे मेरी खाल इतनी पतली है कि कोई भी उधेड़ सकता है, तीसरे गरीब से गरीब और अमीर से अमीर, सभी मुझे एन्जॉय कर सकते हैं और चौथे हर मौसम में, हर हाल में सेवा के लिए मैं उपलब्ध रहता हूं। न मुझे गर्मी मार सकती है न सर्दी, लेकिन मुझे आलू नहीं, आम कहा जाता है और इसलिए आम कहा जाता है ताकि मेरे रक्त को रस की तरह पिया जा सके। हालांकि ये रक्त पिपासु भी कोई बाहर वाले नहीं हैं, अपने ही हैं, बाहर वाले तो जितना पी सकते थे, पीकर पतली गली से निकल लिए, अब अपने वाले बचाखुचा सुड़कने में लगे हैं। मजे की बात ये है कि बाहर वाले तो कुछ छोड़ भी गए, अपने वाले पठ्ठे तो एक-एक बून्द निचोड़ लेने की जुगत में है।

कल रात एक भूतपूर्व सांसद से मुलाकात हो गई। हालांकि वे भूतपूर्व होना नहीं चाहते थे लेकिन होना पड़ा क्योंकि भूतकाल में उन्होंने एक अभूतपूर्व काम कर किया था। (लोगों से रुपया लेकर संसद में सवाल पूछने का) जिसके चलते वे एक स्टिंग आप्रेशन की चपेट में आ गए और भूत हो गए। मैंने पूछा, 'भूतनाथजी, ये नेता लोग जनता को आम जनता क्यों कहते हैं? वो बोले, वैसे तो बहुत से कारण हैं लेकिन मोटा-मोटी यूं समझो कि आम जो है, वो फलों का राजा है और हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही असली राजा होती है, शासक तो बेचारा सेवक होता है। दूसरा कारण ये है कि आम का सीजन, आम चुनाव की तरह कुछ ही दिन चलता है, बाकी समय तो बेचारा लापता ही रहता है, लेकिन तीसरा और सबसे खास कारण ये है कि आम स्वादिष्ट बहुत होता है। इसे खाने में मजा बहुत आता है, चाहे किसी प्रान्त का हो, किसी जात का हो, किसी रंग का हो अथवा किसी भी साइज का हो।

आम के आम और गुठलियों के दाम तो आपने सुना ही होगा, जनता को आम कहने का एक कारण ये भी है कि इसे खाने में कोई खतरा नहीं क्यूंकि न तो इनमें कीड़े पड़ते है, न इसकी गुठली में कांटे होते हैं और न ही इनसे अजीर्ण होता है, अरे भाई आम तो ऐसी चीज है कि लंगड़ा हो, तो भी चलता है। मैंने कहा, नेताजी आप एक बात तो बताना भूल ही गए कि आम हर उम्र में उपयोगी होता है।

कच्चा हो तो अचार डालने के काम आता है, पका हुआ रसीला हो तो काट-काट के खाया जा सकता है और बूढ़ा, कमजोर व पिलपिला हो तो चूसने के काम आता है लेकिन सावधान विश्वासघाती नेताजी..अब आदमी को आम आम उसका रक्त पीना छोड़ दो, क्योंकि वो अब तुम्हारी कुटिलता को समझ गया है। जिस दिन नरेन्द्र मोदी जैसा कोई दबंग बन्दा राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए दिल्ली में आ जाएगा उस दिन आप जैसे स्वार्थी, मक्कार और दुष्ट नेताओं का राजनीतिक कार्यक्रम, किरिया क्रम में बदल जाएगा। इसलिए सुधर जाओ, अब भी मौका है।

उसने मुझे खा जाने वाली नजरों से घूरा। मैंने कहा, घूरते क्या हो? समय बदल चुका है। जिस जनता को तुम पांव की जूती समझते थे वो अब जूते चलाना सीख गई है। इससे पहले कि हर आदमी अपने हाथ में जूता ले ले, तुम लाईन पर आ जाओ वरना ऐसी ऑफ लाइन पर डाल दिए जाओगे जहां से आगे कोई रास्ता नहीं होगा आपके पास। विश्र्वास नहीं होता तो जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को ही देख लो जो अब घर बैठ गए हैं। नेताजी मेरी बातों से उखड़ गए और चलते बने। मैं भी अपने काम में व्यस्त हो गया, लेकिन मेरे मन में एक विजेता जैसी सन्तुष्टि है। मैंने सिद्ध कर दिया कि मैं कोई आम नहीं हूं।

जय हिन्द !
अलबेला खत्री

hasya kavi sammelan ahmedabad with albela khatri

hasya kavi sammelan ahmedabad with albela khatri

शहीद हेमराज की पत्नी को पाकिस्तानियों के 26 शीश भेंट करते हुए भारतीय सैनिकों की झाँकी


काश !
गणतन्त्र दिवस समारोह में आज इन झाँकियों का प्रदर्शन भी होता :

# अमर शहीद हेमराज की पत्नी को पाकिस्तानियों के 26 शीश भेंट करते हुए भारतीय सैनिकों की झाँकी

# 26 -01 -2001 के प्रलयंकारी भूकम्प से लहूलुहान हो चुके गुजरात को अपने पुरुषार्थ से उन्नति के अभिनव शिखर तक पहुंचाते हुए नरेन्द्र मोदी के अथक परिश्रम की झाँकी

# 2 G, DLF, CWG, कोयला इत्यादि के महाघोटालों से भारत की जनता को लूटते हुए कांग्रेसियों के काले चेहरों की झाँकी

# दिल्ली में रातदिन हो रहे सामूहिक बलात्कारों और हत्याकाण्डों की झाँकी

# मुजफ्फरनगर के दंगों पर बेशर्मी का नंगा नाच करती यूपी सरकार द्वारा आयोजित सैफई के रासरंगों की झाँकी

____आपका क्या ख्याल है ?

अलबेला खत्री



कम से कम भारतीय जनमानस को ज़लील तो न करते विदेशी भाषा बोल कर - आपको ज़रा भी शर्म नहीं आयी हिंदी का जवाब अंग्रेजी में देते हुए ?





प्रति,
श्री श्री डॉ मनमोहन सिंहजी,
माननीय प्रधानमन्त्री,
भारत सरकार  

प्रसंग   : हार्दिक शर्म व आत्मिक दुःख की अभिव्यक्ति
सन्दर्भ :  आज का आपका संवाददाता  सम्मेलन

महोदय,
एक भारतीय होने के नाते मेरे लिए अत्यन्त शर्म एवं गहरी पीड़ा का विषय है कि आप जैसा झूठा और बनावटी व्यक्ति मेरे देश का प्रधानमंत्री है.  बचपन से ही सरदारों के मोहल्ले में रहने के कारण मैं भली भान्ति जानता हूँ कि सरदार कितने सच्चे, दिलेर और देशभक्त होते हैं  लेकिन आपने तो सरदारों के वैश्विक यश को ही  दाव पर लगा दिया सरदारजी ! आपने दिल्ली में कांग्रेसियों द्वारा कराये गए सिखों के क़त्लेआम पर आज गर्व से कहा कि पीड़ित परिवारों के लिए बहुत कुछ किया गया है और उनसे माफ़ी भी मांग ली गयी है. 

हुज़ूर, और किस किस से माफ़ी मांग ली है आपने ?  भोपाल गैस काण्ड  के लाखों पीड़ितों  से मांग ली  या  उसके लिए ज़िम्मेदार  यूनियन कार्बाइड  से मांग ली ?  मुम्बई पर पाकिस्तानी हमले में मारे गए लोगों से मांग ली  या मुजफ्फरनगर  में घर से बेघर हुए दंगापीड़ितों  से मांग ली ?  सरहद पर जिनका सर काट कर लोग पाकिस्तान ले गए उनके परिवारों से मांग ली  या रोज़ाना लाखों की  संख्या में काटे जा रहे गौवंश  से माफ़ी मांग ली ? और जनाब,  क्या माफ़ी मांग लेने से पीड़ित परिवारों के कलेजे की जलन शांत हो गयी होगी ? माना कि आप प्रधानमन्त्री हैं  लेकिन कुछ तो इन्सानियत आप में भी होगी, आज थोड़ा  उसका प्रदर्शन भी कर देते

आप से जो सवाल हिन्दी में पूछे गए, उनके भी जवाब आपने अंग्रेज़ी में दिए - इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि गुलाम की अपनी कोई भाषा नहीं होती - जैसा सिखाया जाता है वैसा ही बोलना पड़ता है - अरे हिन्दी नहीं आती तो उर्दू में दे देते, पंजाबी में दे देते, कम से कम भारतीय जनमानस को ज़लील तो न करते विदेशी भाषा बोल कर - आपको ज़रा भी शर्म नहीं आयी हिंदी का जवाब अंग्रेजी में देते हुए ? अफ़सोस  है,  बहुत अफ़सोस है,  एक तरफ अटल बिहारी वाजपेयी संयुक्त राष्ट्र संघ में भी हिन्दी भाषी रहे और एक तरफ आप …शेम शेम शेम

आपने प्रलाप किया कि नरेंद्र मोदी अगर प्रधानमन्त्री बन गए तो देश का विनाश हो जायेगा ---बहुत अच्छे -- क्या कहने ! जिस मुख्यमन्त्री ने अपने शासन में  विकास और उन्नति के गौरवपूर्ण कीर्तिमान स्थापित कर दिए उसके प्रधानमन्त्री बनने से देश का विनाश हो जाएगा  और आप व आप जैसे अन्य लोगों ने भ्रष्टाचार, अनाचार, महंगाई व अमानवीय कृत्यों के जो गंदे नाले बहाये हैं उससे देश का विकास होगा ?

नरेन्द्र मोदी कोई सगे सम्बन्धी नहीं है मेरे, जो उनका गौरवगान करूँ  लेकिन मैंने उनके राज में गुजरात को बदलते हुए देखा है इसलिए डंके की चोट पर कह सकता हूँ  कि  वो अगर एक बार प्रधानमन्त्री बन गए तो पूरा देश चमक उठेगा - चहक उठेगा

आप गाय से ज़यादा गे के अधिकारों की चिन्ता  करते हैं, आपको महंगाई घटाने के बजाय सेंसेक्स को बढ़ाने की फिक्र लगी रहती है - ये अच्छी बात नहीं है

आपने जनता को रुलाया है सरदारजी, अगर देश की रोती-बिलखती जनता की बददुआओं में ज़रा भी असर हुआ तो ऊपर वाला आपको रुलाएगा और ऐसा रुलाएगा कि आंसू पोंछने वाला भी कोई न होगा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री

झाड़ डाला है झाड़ू ने ऐसा उन्हें, आबरू उनको मुश्किल बचाना हुआ


साहित्यिक वेबसाइट ओपन बुक्स ऑन लाइन के
 तरही  मुशायरा में प्रस्तुत मेरी ताज़ा ग़ज़ल


अश्क़ आँखों से निकला, रवाना हुआ
दर्दे-दिल का मुकम्मल तराना हुआ

ज़ुल्फ़ उसने जो खोली, घटा छा गई
मुस्कुराई तो मौसम सुहाना हुआ

हुस्न दुख्तर पे जब से है आने लगा
हाय दुश्मन ये सारा ज़माना हुआ

तब से दुनिया हमारी बड़ी हो गई
जब से गैरों के घर आना जाना हुआ

चल पड़ा हूँ ठिकाना नया खोजने 
ख़त्म अपना यहाँ आबोदाना हुआ

ज़ख्म हमदर्दियों से न भर पाएंगे
फैंक दो अब ये मरहम पुराना हुआ

झाड़ डाला है झाड़ू ने ऐसा उन्हें
आबरू उनको मुश्किल बचाना हुआ

रूह प्यासी थी 'अलबेला' प्यासी रही
जिस्म का सारा पीना पिलाना हुआ

-अलबेला खत्री 








उस गरीब ग्रामीण महिला ने तो न कोई नाभिदर्शना साड़ी बाँधी होगी, न ही वक्षदर्शना ब्लाउज़ पहना होगा



शर्म ! शर्म !! शर्म !!!

"मध्य प्रदेश में हरदा के पास किसी गांव में 5 लोगों ने एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया तथा उसके जिस्म को लाइटर से जला जला कर ठहाके भी लगाये"  यह समाचार  पढ़ते समय आजतक चैनल की  तेज़ समाचार वाचिका के चेहरे पर कोई विषादभाव या दुःख  इसलिए नहीं था क्योंकि  उसके लिए तो ऐसी घटना  पर बोलना रोज़मर्रा की बात होगी परन्तु  मैं दुखी हूँ , आहत हूँ  और शर्मिन्दा भी हूँ  क्योंकि मैं भी उसी पुरुष समाज का हिस्सा हूँ  जो महिलाओं  के सम्मान और संरक्षण की बात तो करता है परन्तु  अपनी कामपिपासा के तुष्टि के  लिए  दरिन्दा बन कर किसी महिला के साथ अमानवीय अत्याचार भी करता है

उस गरीब ग्रामीण महिला ने तो न कोई  नाभिदर्शना साड़ी बाँधी होगी,  न ही वक्षदर्शना  ब्लाउज़ पहना होगा और न ही टांग दिखाऊ स्कर्ट पहनी होगी  - फिर  उस पर क्यों टूट  पड़े वे 5 राक्षस ?

यह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्म से डूब मरने की  बात है कि कठोरतम कानूनों के बावजूद उसके लोग इतने हिंसक और अत्याचारी हो जाएँ 


क्या इसकी रोकथाम का कोई उपाय नहीं ? 


क्या महिलाओं की रक्षा की बातें करने वाली सरकार कोई कड़े कदम उठाएगी ? 


जयहिन्द !
-अलबेला खत्री 

the poem of hasyakav



अभिनन्दन अटल बिहारी ! अभिनन्दन अटल बिहारी !! अभिनन्दन अटल बिहारी !!!




अटल बिहारी वाजपेयीजी के जन्मदिवस पर आत्मिक बधाई देते हुए मैं अपनी वही कविता आज उन्हें पुनः समर्पित करता हूँ जो उनके पहली बार प्रधानमन्त्री बनने पर की थी

रोक सका है कौन ज्वार सिन्धु का, दामिनी का उत्कर्षण
छीन सका है कौन गन्ध चन्दन से, कुसुमों से आकर्षण 


बाँध सका है कौन पवन का वेग और मेघों का गर्जन
कहाँ थमा है वसुन्धरा पर पल पल सृष्टि का परिवर्तन 


सूत्रपात नवयुग के नवशासन का फिर से आज हुआ है
राष्ट्र के सिंहासन पर अब एक राष्ट्रभक्त का राज हुआ है 


रोम रोम पुलकित है, मन हर्षित है, तन आह्लादित है
अब होगा उत्थान वतन का जन गण मन आश्वासित है 


हे निर्विवाद निष्छल निर्मल अविकारी
हे माँ वाणी के वरदपुत्र हुंकारी
हे प्रखर परन्तु मृदुभाषी मनोहारी 


अभिनन्दन अटल बिहारी !
अभिनन्दन अटल बिहारी !!
अभिनन्दन अटल बिहारी !!!


-अलबेला खत्री 


hasyakavi albela khatri dedicated a poem to sh.atal bihari vajpeyi

 albela khatri dedicated his poem to sh. atal bihari vajpeyi on his 90th birth day

hasyakavi albela khatri dedicated a poem to his son aalok khatri


सुना या नहीं सुना, उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता लेकिन मैं भारत की कवयित्री नंबर वन हूँ इसमें कोई शक नहीं


'हैलो ....... पूरती पाले जी ?'

'हांजी, पूरती बोल रही हूँ, आप कौन ?'

'मैं फ़लाने शहर से, धिंकाने सांस्कृतिक संगम का प्रमुख भोलाराम पन्सारी बोल रहा हूँ पूरती जी, आप आईं थी न हमारे यहाँ ,,,,,क्या आप हमें भूल गए ?'

' नहीं जी नहीं, भूल कैसे सकते हैं ? कहिये क्या बात है ?'

'बात ऐसी है कि  पिछली बार तो हम टीम बनाने में धोखा खा गए क्योंकि कुकर्माजी के दबाव में आ गए थे  परन्तु इस बार हम कुछ अच्छे कवियों को बुलाना चाहते हैं तो आपसे रिक्वेस्ट है कि हमें कुछ बढ़िया कवियों / कवयित्रियों के नाम और नंबर देदो ताकि हम उनसे बात कर सकें'

'नम्बर तो मैं किसी का दे नहीं सकती पर आपके लिए कुछ बढ़िया नाम बता सकती हूँ, बजट क्या है आपका '

'जी बजट तो वही है 1 लाख के आसपास .... '

'1  लाख में क्या होता है भोलारामजी, अगर आप 2  लाख तक खर्च करो तो मैं अपने साथ देश के सबसे बड़े हास्यकवि मदिरेन्द्र डूबे, व्यंग्य व्योम चम्पक तरल, रमेन्द्र गजबजी के साथ साथ २-३ और कवि लेकर आ सकती हूँ'

' नहीं पूरती पालेजी, आप तो पिछली बार आ चुकी हैं, इस बार हम कोई दूसरी कवयित्री बुलाएँगे और जहाँ तक बात मदिरेन्द्र डूबे की है तो वोह भी नहीं चलेंगे, कोई ढंग का नाम बताओ ?'

'ढंग का नाम?  कैसी बात कर रहे हैं सर आप ? मदिरेन्द्र जी से बड़ा हास्यकवि कौन है देश में ? आज पूरे ब्रह्माण्ड को खंगाल लो तो हिंदी कविता के नाम पर आपको केवल दो लोग शीर्ष पर मिलेंगे ,,,एक वोह और एक मैं ,,,बाकी सब तो चिल्लर पार्टी है'

' ये आप कैसे कह सकती हैं पूरतीजी ? ऐसा आप दोनों ने क्या लिख दिया जो इत्ती बड़ी बात कर रही हैं ?
 
' सवाल लिखने का नहीं है भोलाभाई, याद करने  का है,, डूबे जी को इतना मसाला याद है कि वे अकेले ही पूरी रात बोल सकते हैं और मेरे बारे में तो आप जानते ही हैं ,,अब इस बात को क्या दोहराना कि जब मंच पर खड़ी होती हूँ तो लगता है साक्षात् सरस्वती माइक पर आ गयी हो '

' पर हमारे यहाँ  तो आप बिलकुल फ्लॉप हो गयी थीं, लोगों ने आपको सुना ही नहीं ,, आपको हमने 20 हज़ार रूपये दिए थे लेकिन आपसे  ज़यादा काम तो 2 हज़ार वाली लोकल कवयित्री ने किया था आपको याद ही होगा ?'

' सुना या नहीं सुना, उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता  लेकिन मैं भारत की कवयित्री नंबर वन हूँ इसमें कोई शक नहीं,  चाहें तो आप  खुद मदिरेन्द्रजी से कन्फर्म कर लीजिये  और बात रही  प्रोग्राम की तो देखिये, जमने और न जमने के कई कारण होते हैं, अगर मैं नहीं जमी तो ज़ाहिर है कि आपका साउण्ड सिस्टम खराब होगा या फिर आपके शहर के श्रोता  नालायक होंगे जिनको कविता सुनने की तमीज न होगी '

'पालेजी,  साउण्ड तो हमने वो मंगाया था जिसकी जगजीत सिंह जैसे ग़ज़ल गायक ने भी तारीफ़ की और श्रोता हमारे शहर के मूर्ख नहीं हैं , पिछले 40 साल से कवि सम्मेलन सुनते आये हैं और आपको ये जानकार ख़ुशी होगी कि हमें चंदा भी वही श्रोता देते हैं'

'तो हो सकता है, मुझे गलत क्रम पर खड़ा कर दिया हो, हर मंच संचालक में इतना सेन्स  कहाँ होता है कि जान सके कि किस कवयित्री को कब प्रस्तुत करना है '

' बहनजी, आप बहाना क्यों करती हैं ? क्रम भी आपने ही चुना था, आप ही ने  कहा था कि मुझे ट्रेन पकड़नी है इसलिए जल्दी पढ़वा कर मुक्त कर दो '

'चलो जाने दो, अब मुद्दे की बात ये है कि आप अगर मुझे बुलाएंगे तो ही मैं टीम बनाउंगी और अगर मैं टीम बनाउंगी तो पहला नाम डूबेजी का ही होगा ……'


'आपको मैंने आमंत्रित करने के लिए  फोन नहीं किया है पालेजी, न ही मुझे आपसे कोई सलाह चाहिए, मुझे तो  कुछ अच्छे कवियों के फोन नंबर चाहिए, अगर दे सको तो देदो ,,,हैलो हैलो ---हैलो …… लगता है फोन कट गया'

या फिर काट दिया गया   ;-) '

जय हिन्द !
albela khatri in action at kavi sammelan



पुरुलिया में मौलिक व बेहतरीन कवितायें प्रस्तुत हुईं, घटिया चुटकुलों व जुमलों का रायता नहीं फैलाया गया



कौन कहता है कि आजकल मंच पर अच्छी कवितायें सुनाई नहीं जातीं  या सुनी नहीं जातीं ,,,,पुरुलिया (WB) में तो रोटरी क्लब ऑफ़ पुरुलिया द्वारा आयोजित हास्यकवि सम्मेलन ने इस बार सफलता के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, पाठकों को यही बात बताने के लिए मैं  मरा जा रहा हूँ  क्योंकि  मैं बहुत प्रसन्न हूँ, आनंद में हूँ  और आप सभी मित्रों को भी अपनी ख़ुशी में शामिल करना चाहता हूँ . भले ही  इस समय रात के 2  बजे हैं तथा अभी अभी  बहुत लम्बी यात्रा से लौटा हूँ - भले ही यात्रा से टूटी हुई देह तो कह रही है कि सोजा बेटा ! कल सुबह देखेंगे, लेकिन दिल है कि मानता नहीं .इसलिए अभी के अभी लिख रहा हूँ

व्यंग्य सम्राट माणिक वर्मा,  ओजस्वी कवि कर्नल (डॉ) वी पी सिंह,  हास्यमूर्ति सुरेन्द्र यादवेन्द्र, व्यंग्य गीतकार सुदीप भोला, कवयित्री काव्या मिश्रा और मंच संचालक अलबेला खत्री ने अपनी साढ़े 5 घण्टे  की ज़बरदस्त प्रस्तुति से पुरुलिया वासियों को आनंद के रस से कितना सराबोर कर दिया इसका अन्दाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  6 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम अधिकतम साढ़े 10  बजे तक चलना था  परन्तु साढ़े 11 बजे भी लोग उठ कर घर जाने को तैयार नहीं थे ………………और सबसे उत्तम बात तो ये है कि  पूरे कवि सम्मेलन में सिर्फ़ और सिर्फ़  मौलिक व बेहतरीन कवितायें प्रस्तुत हुईं, घटिया चुटकुलों व जुमलों का रायता नहीं फैलाया गया

यह  एक सुखद घटना  है और इसके लिए मैं आयोजन  समिति व अपनी टीम के तमाम कवियों का हृदय से आभारी हूँ

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
hasya kavi sammelan by rotary club of puruliya WB with albela khatri



यौनशोषण : सुरक्षा के लिए हमारे द्वारा मुफ्त में बांटे जा रहे इस परचे का भी उपयोग करो


पुरुषों द्वारा नारी का यौनशोषण भारत में अपनी सारी  हदें पार कर चुका है.  लगभग हर तबके के लोगों पर इस तरह के शर्मनाक आरोप लग रहे हैं परन्तु कुछ लोगों का मानना है कि ताली एक हाथ से नहीं बजती …लोगों को शक है कि अधिकतर मामलों में होता तो सबकुछ रज़ामन्दी से है परन्तु बाद में पकडे जाने पर अथवा किसी लालच में  आरोप लगाए जाते हैं

मेरा मत है कि  अगर ऐसी कोई बात है तो पुरुष को सावधानी बरतनी चाहिए.  नैतिकता को ताक पर रख कर अगर बाहरी सम्बन्ध बनाने ही हैं  तो जिस प्रकार  अपनी शारीरिक सुरक्षा के लिए कण्डोम  का प्रयोग करते हो उसी प्रकार अपनी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए  हमारे द्वारा मुफ्त में बांटे जा रहे इस परचे का भी उपयोग करो

धन्यवाद
विनीत: पुरुष बचाओ पार्टी   :-)))))))

sex contract form

purush bachaao party zindabad


क्या यह सच है कि केवल पुरुष ही बलात्कारी होते हैं महिलाएं नहीं ?


क्या यह सच है कि यौन शोषण सिर्फ़ महिलाओं का होता है पुरुषों का नहीं ?

क्या यह सच है कि  केवल पुरुष ही बलात्कारी होते हैं महिलाएं नहीं ?

ज़रा सोचिये, 
सच इतना ही नहीं जितना दिखाया जा रहा है
सच वोह भी है जिसे दिखाया नहीं जा सकता

जय हिन्द !
-अलबेला खत्री




हास्यकवि अलबेला खत्री की 101 नि:शुल्क प्रस्तुतियां




30 वर्षों में 6000 मंचों पर प्रस्तुति का आनन्दोत्सव

स्कूलों, कॉलेजों, नारी संगठनों, अनाथाश्रमों, वृद्धाश्रमों, जेलों, HIV पीड़ितों व सभी प्रकार की समाजसेवी  संस्थाओं के लिए हास्यकवि अलबेला खत्री की ख़ास सौग़ात

1 5 फ़रवरी से 2 3 जुलाई 2014 तक
101 नि:शुल्क  प्रस्तुतियां

तुरन्त सम्पर्क  करें

अलबेला खत्री
9228756902, 9227156902
albelakhatri@gmail.com

hasyakavi albela khatri present free show

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कवि-सम्मेलनों के मंचों पर काव्यपाठ करते हुए आज मुझे 30 वर्ष पूरे हो रहे हैं


आज 18 दिसम्बर 2013 का दिन  मेरे लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है  क्योंकि कवि-सम्मेलनों के मंचों पर काव्यपाठ करते हुए आज मुझे 30 वर्ष पूरे हो रहे हैं  .  इन 30 वर्षों के दौरान  भारत, अमेरिका, कनाडा, वेस्ट इण्डीज़, चाईना, हांगकांग व  सिंगापोर  इत्यादि  में 6214  मंचों पर प्रस्तुति की  जिनमे  कवि सम्मेलन के अलावा, लाफ्टर शो,  ग़ज़ल नाईट, भजन संध्या  व अनेक प्रकार के एकल कार्यक्रम शामिल हैं.  जीवन में कई शानदार चढ़ाव और कई दर्दनाक उतार आये जिनके असर में कभी ख़ूब खिलखिलाया  और कभी ख़ूब रोया ……… बहुत कुछ देखा और अनुभव किया

 जो अजनबी थे, वो मित्र बने,  मित्र से प्रतिद्वन्द्वी बने, प्रतिद्वन्द्वी से दुश्मन बने और अंततः दुश्मन से कट्टर दुश्मन बने

जिन्हें आगे बढ़ाने के लिए मैंने ख़ुद को पीछे कर लिया वो तो डेढ़ हुशियार + एहसानफ़रामोश  निकले और जिनके सहयोग से मैं इस भीड़ में ज़िन्दा रह पाया उनके लिए  कुछ करने  का भगवान् ने मुझे कोई अवसर और सामर्थ्य  नहीं दिया ---  कुल मिला कर "तेरा भाणा मीठा लागे"  की तर्ज़ पर सन्तुष्ट हूँ  और  आभार व्यक्त करता हूँ  उन सभी शुभचिन्तकों व हितैषियों का जिन्होंने मुझे गिरने नहीं दिया  और लोहा मानता हूँ  उन सभी की एकता का जिन्होंने मुझे खड़ा होने नहीं दिया

सबकी जय हो
अलबेला खत्री





बन्दर के हाथों में जो आया उस्तरा, अपना ही काम ये तमाम करेगा





साहित्यिक वेबसाइट ओ बी ओ बुक्स ऑन लाइन्स पर शानदार सृजन के साथ सम्पन्न 38 वें लाइव महा उत्सव में इस बार का प्रदत्त विषय था "पापा कहते हैं, बड़ा नाम करेगा"  अन्तिम क्षणों में  मैं भी इसमें शामिल हुआ और प्रदत्त विषय पर निम्नांकित सामयिक तुकबन्दी प्रस्तुत की :

पापा कहते हैं बड़ा काम करेगा
लंगड़ी गुठली को चौसा आम करेगा

हाथों में झाड़ू लिए घूम रहा है
अब ये सफ़ाई सुबहो-शाम करेगा

बन्दर के हाथों में जो आया  उस्तरा
अपना ही काम ये तमाम करेगा

चेला  गुरु की धोती खींच रहा है
अस्मत ये खादी की नीलाम करेगा

औरों के दीयों से जो तेल चुराये
वो क्या बिजली के सस्ते दाम करेगा

'अलबेला' गर इसे अभी रोक न दिया
जीना ये सबका हराम करेगा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री







ये उनका पराक्रम नहीं बल्कि मज़बूरी है, ऐसा करना उनके लिए निहायत ज़रूरी है


वो न खुद बनाएंगे न दूसरों की चलने देंगे
न तो खुद खेलेंगे, न  दूसरों को खेलने देंगे
वे तो घुच्ची में मूत कर खेल ख़राब करेंगे
ये उनका पराक्रम नहीं
बल्कि मज़बूरी है
ऐसा करना उनके लिए
निहायत ज़रूरी है

क्योंकि वे लोग हरम के हिजड़े हैं
अर्थात रनिवास में रहने वाले किन्नर हैं
जो जानते तो हैं कि वो सब कैसे किया जाता है
लेकिन कर कुछ नहीं सकते
___अफ़सोस
___अफ़सोस
वोट लुटा तो दिल्ली के वोटर को  आया चेत
अब पछताए होत है क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत


कोई रन फॉर यूनिटी में दौड़, देश को जोड़ रहा है
कोई अपने अहंकार में, ऊँची ऊँची छोड़ रहा है
झाड़ू वालों के झाँसे में आकर, दिल्ली का मतदाता
कमज़र्फ़ों को वोट थमा कर, अपना माथा फोड़ रहा है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
narendra modi,narendra modi,narendra modi,narendra modi,narendra modi

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sunny deol with albela khatri

albela khatri in action

हमारा लक्ष्य गाँव का रुस्तम कहलाना नहीं बल्कि माल कमाना है लिहाज़ा अब यह मुकाबला पूरे देश में करेंगे


डिस्क्लेमर : इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं तथा इनका किसी भी जीवित अथवा मुर्दा व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है.  

एक गरीब लोकतांत्रिक गाँव में भज्जू और कंगू नाम के दो अमीर पहलवान रहते थे. देश भर में जब भी उनका कहीं मुकाबला होता, हज़ारों लोग टिकट खरीद  उसे देखते और अखाड़े में अपने अपने पसन्दीदा पहलवान का हौसला बढ़ाते. 50 साल तक ये खेल चलता रहा, दोनों पहलवान बूढ़े हो गए लेकिन मुकाबला बंद नहीं किया क्योंकि  अब वे पहलवानी दिखाने के लिए नहीं बल्कि धन कमाने के लिए लड़ते थे . वैसे अंदर की बात यह है कि वे लड़ते तो केवल दिखावे मात्र के लिए थे - अन्दर ही अन्दर दोनों की मिलिभगत थी … एक बार यह जीतेगा  तो दूसरी बार वह

इस बात का पता जब गाँव के एक पुलिस वाले खजलू को लगा कि दोनों मिले हुए हैं  और मुकाबले के बहाने लोगों को चूतिया बना रहे हैं तो उसने इसका लाभ लेने की युक्ति लगाईं . उसने अगले ही दिन पुलिस की नौकरी छोड़ दी और गांव के सभी जेबकतरों को बुला कर बताया कि उन्हें क्या करना है . इसके बाद उसने गाँव के सब निठल्ले और मवाली किस्म के लोगों का ऑडिशन ले कर उनमे से 2  लोगों को चुन लिया व उन्हें अपनी जेब से कुछ रुपये दे कर पहलवानी के गुर सीखने के लिए कहा - साथ ही गांव में पूरी पंचायत के सामने ढिंढोरा पीट दिया कि दोनों पहलवान आपस में मिले हुए हैं और गाँव को बेवकूफ बना रहे है - तब एक पहलवान कंगू ने रोष में आ कर कहा कि खजलू, तुझे ज़यादा खुजली है तो तू मुकाबला कर ले - पता लग जाएगा कि पहलवानी किसे कहते हैं . यह सुन कर खजलू ने चुनौती तो स्वीकार ली और दावा भी किया कि वह और सिस्सू  - विस्सू नाम वाले उसके दो साथी मिल कर इन दोनों को धूल चटा  देंगे लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसके लिए मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है, खजलू की बात सुन कर  गाँव वालों ने उसे खूब चंदा  देने की पेशकश की और देखते ही देखते  खूब धन भी जमा हो गया . प्रसन्न मुद्रा में खजलू घर गया और मुकाबले की नियत तारीख का इंतज़ार करने लगा .

मुकाबले  की पूर्व संध्या पर सभी जेबकतरों को बुला कर खजलू ने हिदायत दे दी  कि जैसे ही मुकाबला शुरू हो तथा लोगों  का ध्यान कुश्ती में लग जाए, सभी की जेब काट डालना ................... उधर सिस्सू - विस्सू  को जापानी तेल की दो दो बोतलें थमा कर निर्देश दिया कि कल मुकाबले से पहले पूरे शरीर को चौपड़ लेना

मुकाबला हुआ और खूब हुआ और जापानी तेल की रपटन के चलते खजलू, सिस्सु और विस्सू  के आगे भज्जू और कंगू जैसे पहलवान का एक भी दाव न चला,  लिहाज़ा न कोई जीता, न कोई हारा - मुकाबला बराबरी पर ख़त्म हुआ

शाम को जेबकतरों से उगाही करते हुए खजलू  ने सिस्सू - विस्सू  से कहा कि यह मुकाबला तो केवल बोहनी भर थी.......... हमारा लक्ष्य  गाँव का रुस्तम कहलाना नहीं बल्कि माल कमाना  है लिहाज़ा अब यह मुकाबला पूरे देश में करेंगे  और सभी जगह के दर्शकों की जेब काटेंगे

सभी ने हर्षध्वनि की और पटाखे छोड़ते हुए  अपने अपने घर कू  चले गए

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
dedicated to gurumaa anandmurti by albela khatri at ambheti
dedicated to gurumaa anandmurti by albela khatri at ambheti
hasya kavi sammelan by albela khatri for rotary club puruliya

hasya kavi sammelan by albela khatri for rotary club puruliya




बीन से लेकिन भैंस बजाना महंगा पड़ता है



दिल की बात ज़ुबाँ पर लाना महँगा पड़ता है


लाख के घर में जोत जगाना महंगा पड़ता है



सर से जब लोहू निकला तो बात समझ में आई


दीवारों से सर टकराना महंगा पड़ता है



कविताओं की चोरी हो या हो दैहिक गठबन्धन


चलने दो,  आवाज़ उठाना महंगा पड़ता है



ग़ज़लें गर लिखवाई हैं, तारीखें भी लिखवाओ


शंखधरों को शंख बजाना महंगा पड़ता है



आम आम की माला जप कर वो जो ख़ास हुआ है


उसको फिर से आम बनाना महंगा पड़ता है



भैंस के आगे बीन बजाना चल जाता 'अलबेला'


बीन से लेकिन  भैंस बजाना महंगा पड़ता है



जय हिन्द !
अलबेला खत्री 


केंद्रीय मन्त्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने मुझे सलाह दी है कि मैं अपना नाम 'अलबेला खत्री' के बजाय 'फक्कड़ अलबेला' रख लूँ




 एक  शानदार और जानदार कवि सम्मेलन गत 2 4 नवम्बर की शाम कानपुर के जुहारीदेवी गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ जिसमें देश के ख्यातनाम कवि / कवयित्री लगभग चार घंटे तक दर्शकों को काव्यरसपान कराने में सफल रहे

मुख्यातिथि केन्द्रीय कोयला मन्त्री श्रीप्रकाश जायसवाल को तो बहुत जल्दी थी इसलिए वे केवल मंगल दीप प्रकटा कर,  कविगण को माल्यार्पण कर और अपनी व्यस्तता का संक्षिप्त भाषण दे कर चल दिए परन्तु  जुहारीदेवी  गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की स्वर्ण जयन्ती के अवसर पर आयोजित व सुरेश अवस्थी द्वारा संयोजित इस भव्य काव्य-समागम में   हरी ओम पंवार, अशोक चक्रधर, सुरेश अवस्थी, रमेश शर्मा, सुनील जोगी, रास बिहारी गौड़, अनु सपन, कमल मुसद्दी व अलबेला खत्री ने खूब जम कर कवितायें सुनाईं और बिना किसी अश्लील अथवा द्विअर्थी टिप्पणी के, दर्शकों का भरपूर मनोरंजन भी किया

विशेषकर अशोक चक्रधर अपनी पूरी रंगत में थे और उन्होंने  मोबाइल में देखे बिना भी अनेक कवितायेँ सुनाईं :-), हरी ओम पंवार को मैंने जितना ऊर्जस्वित कोटा दशहरा में देखा था उतना ही पराक्रम उन्होंने कानपुर में भी कायम  रखा परन्तु पूरे कार्यक्रम के हीरो रहे रमेश शर्मा जिन्होंने अपने भावभरे गीतों से  सबको भावविह्ल कर दिया - तभी तो मंच के सभी कवियों ने भी उनका मालाएं पहना पहना कर  अभिनन्दन किया

बेटियां वाली ग़ज़ल सुना कर अनु सपन और माँ पर कविता सुना कर कमल मुसद्दी ने सबको भावविभोर कर दिया।  सुरेश अवस्थी, सुनील जोगी और रासबिहारी गौड़ और अलबेला खत्री ने हास्यव्यंग्य प्रधान रचनाएं प्रस्तुत करके  वातावरण को खिलखिलाहट प्रदान की - कुल मिला कर यह एक उम्दा कार्यक्रम था जिसमे सम्मिलित हो कर मुझे आत्मिक आनंद आया

कॉलेज के संरक्षक  सी के अरोड़ा ने आभार व्यक्त किया व प्राचार्या डॉ बी आर अग्रवाल ने सभी मेहमान कवियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये।  प्रमुख औद्योगिक घराने जेके द्वारा संस्थापित इस महाविद्यालय के उत्तरोत्तर उत्थान के लिए शुभकामनायें और इस उत्तम  आयोजन में शामिल करने के लिए सुरेश अवस्थी को सादर धन्यवाद

चलते चलते ये बता दूँ कि  केंद्रीय मन्त्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने मुझे सलाह दी है कि मैं अपना नाम 'अलबेला खत्री' के बजाय 'फक्कड़ अलबेला' रख लूँ ....... मुझे तो यह बात कुछ जमी नहीं, आपको जमेगी  क्या ?

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



अपनी झाड़ू को अब कहाँ लगाओगे ? वहीं लगा लो ,,,,,,


लो जी झाड़ू लगाने वालों के ही घर में झाड़ू लग गई
सफाई करने का पाखण्ड करने वालों का ही सफाया होता दिख रहा है 


इसका मतलब यह है कि
अभी भी इस देश पर भगवान की  कृपा बनी हुई है

अरे भाई किस किस किस्से के रौ टेप मांगोगे ?
अभी तो बहुत से परदे हटने बाकी हैं 


अपनी झाड़ू को अब कहाँ लगाओगे ?
वहीं लगा लो ,,,,,,

all the best

जय हिन्द !

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