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Albela Khatri

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मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन



शानदार, शानदार, शानदार …………………
शानदार और जानदार रहा मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा राजभाषा विभाग के तत्वाधान में डॉ बी आर पाल द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन,,,,, होना ही था, सुनने वाले लोग अच्छे थे, आयोजन स्थल भी ज़बरदस्त सजा हुआ था, यूनिट के प्रबन्ध निदेशक समेत सभी पदाधिकारी ठहाके लगाने के लिए मूड में थे और प्रताप फ़ौजदार, ममता शर्मा, नंदकिशोर अकेला तथा सुन्दर मालेगांवी हंसाने के मूड में भी थे

और हाँ, मैं ये बताना तो भूल ही गया कि मंच संचालन जब अलबेला खत्री के हाथ में होगा तो आनन्द तो आएगा ही, यह कौन सी नई बात है हा हा हा हा हा हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
 






 

अपनेराम ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली


लो जी,  "जब प्यार किया तो डरना क्या" वाले इस्टाइल में आज अपनेराम  ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, भावी प्रधानमन्त्री के लिए सहयोग राशि भर दी, पार्टी फण्ड के लिए डोनेशन भी दे दिया और विभिन्न मदों में 1675 रूपया भी भर दिया

अब ये नहीं बताऊंगा कि किस पार्टी की सदस्यता के लिए ऑनलाइन फ़ॉर्म और पैसा भरा है -बताने की ज़रूरत भी क्या है, आपको सब मालूम ही है … हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री


इससे पहले कि हर आदमी अपने हाथ में जूता ले ले, तुम लाईन पर आ जाओ

aam aadmi nahin hoon main

मैं आज अपना सीना ठोक के कहता हूं कि मैं भारत गणतंत्र का नागरिक हूं। नागरिक इसलिए हूं क्योंकि नगर में रहता हूं और सीना इसलिए ठोक रहा हूं क्यूंकि एक तो इससे वक्ता की बात में वजन आ जाता है, दूसरे सीना भी अपना है और ठोकने वाले भी अपन ही हैं इसलिए किसी दूसरे की आचार संहिता भंग होने का डर नहीं है। हालांकि मैं सीने के बजाय पीठ भी ठोक सकता हूं, लेकिन ठोकूंगा नहीं, क्यूंकि एक तो वहां तक मेरा हाथ ठीक से नहीं पहुंचता, दूसरे ज्यादा ठुकाई होने से पीठ में दर्द हो सकता है और तीसरे मैं एक कलाकार हूं यार, कोई झाड़ूवाल टाइप नेता थोड़े न हूं जो अपने ही हाथों अपनी पीठ ठोकता रहूं।

सरकारी और गैर सरकारी सूत्र मुझे आम आदमी कह कर चिढ़ाते हैं जबकि मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मैं कोई आम-वाम नहीं हूं। आम क्या, आलू बुखारा भी नहीं हूं, हां चाहो तो आलू समझ सकते हो क्योंकि एक तो मैं जमीन से जुड़ा हुआ हूं। दूसरे मेरी खाल इतनी पतली है कि कोई भी उधेड़ सकता है, तीसरे गरीब से गरीब और अमीर से अमीर, सभी मुझे एन्जॉय कर सकते हैं और चौथे हर मौसम में, हर हाल में सेवा के लिए मैं उपलब्ध रहता हूं। न मुझे गर्मी मार सकती है न सर्दी, लेकिन मुझे आलू नहीं, आम कहा जाता है और इसलिए आम कहा जाता है ताकि मेरे रक्त को रस की तरह पिया जा सके। हालांकि ये रक्त पिपासु भी कोई बाहर वाले नहीं हैं, अपने ही हैं, बाहर वाले तो जितना पी सकते थे, पीकर पतली गली से निकल लिए, अब अपने वाले बचाखुचा सुड़कने में लगे हैं। मजे की बात ये है कि बाहर वाले तो कुछ छोड़ भी गए, अपने वाले पठ्ठे तो एक-एक बून्द निचोड़ लेने की जुगत में है।

कल रात एक भूतपूर्व सांसद से मुलाकात हो गई। हालांकि वे भूतपूर्व होना नहीं चाहते थे लेकिन होना पड़ा क्योंकि भूतकाल में उन्होंने एक अभूतपूर्व काम कर किया था। (लोगों से रुपया लेकर संसद में सवाल पूछने का) जिसके चलते वे एक स्टिंग आप्रेशन की चपेट में आ गए और भूत हो गए। मैंने पूछा, 'भूतनाथजी, ये नेता लोग जनता को आम जनता क्यों कहते हैं? वो बोले, वैसे तो बहुत से कारण हैं लेकिन मोटा-मोटी यूं समझो कि आम जो है, वो फलों का राजा है और हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता ही असली राजा होती है, शासक तो बेचारा सेवक होता है। दूसरा कारण ये है कि आम का सीजन, आम चुनाव की तरह कुछ ही दिन चलता है, बाकी समय तो बेचारा लापता ही रहता है, लेकिन तीसरा और सबसे खास कारण ये है कि आम स्वादिष्ट बहुत होता है। इसे खाने में मजा बहुत आता है, चाहे किसी प्रान्त का हो, किसी जात का हो, किसी रंग का हो अथवा किसी भी साइज का हो।

आम के आम और गुठलियों के दाम तो आपने सुना ही होगा, जनता को आम कहने का एक कारण ये भी है कि इसे खाने में कोई खतरा नहीं क्यूंकि न तो इनमें कीड़े पड़ते है, न इसकी गुठली में कांटे होते हैं और न ही इनसे अजीर्ण होता है, अरे भाई आम तो ऐसी चीज है कि लंगड़ा हो, तो भी चलता है। मैंने कहा, नेताजी आप एक बात तो बताना भूल ही गए कि आम हर उम्र में उपयोगी होता है।

कच्चा हो तो अचार डालने के काम आता है, पका हुआ रसीला हो तो काट-काट के खाया जा सकता है और बूढ़ा, कमजोर व पिलपिला हो तो चूसने के काम आता है लेकिन सावधान विश्वासघाती नेताजी..अब आदमी को आम आम उसका रक्त पीना छोड़ दो, क्योंकि वो अब तुम्हारी कुटिलता को समझ गया है। जिस दिन नरेन्द्र मोदी जैसा कोई दबंग बन्दा राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए दिल्ली में आ जाएगा उस दिन आप जैसे स्वार्थी, मक्कार और दुष्ट नेताओं का राजनीतिक कार्यक्रम, किरिया क्रम में बदल जाएगा। इसलिए सुधर जाओ, अब भी मौका है।

उसने मुझे खा जाने वाली नजरों से घूरा। मैंने कहा, घूरते क्या हो? समय बदल चुका है। जिस जनता को तुम पांव की जूती समझते थे वो अब जूते चलाना सीख गई है। इससे पहले कि हर आदमी अपने हाथ में जूता ले ले, तुम लाईन पर आ जाओ वरना ऐसी ऑफ लाइन पर डाल दिए जाओगे जहां से आगे कोई रास्ता नहीं होगा आपके पास। विश्र्वास नहीं होता तो जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को ही देख लो जो अब घर बैठ गए हैं। नेताजी मेरी बातों से उखड़ गए और चलते बने। मैं भी अपने काम में व्यस्त हो गया, लेकिन मेरे मन में एक विजेता जैसी सन्तुष्टि है। मैंने सिद्ध कर दिया कि मैं कोई आम नहीं हूं।

जय हिन्द !
अलबेला खत्री

hasya kavi sammelan ahmedabad with albela khatri

hasya kavi sammelan ahmedabad with albela khatri

मेनका गांधी ने नरेन्द्र मोदी को शेर और राहुल गांधी को चिड़िया बताया है, ये बहुत गलत बात है


मेनका गांधी ने आज नरेन्द्र मोदी को शेर और राहुल गांधी को चिड़िया बताया है.  ये बहुत गलत बात है.  मुझे उनके इस बयान पर कड़ी आपत्ति है और मैं इस पर अपना क्रोधपूर्ण विरोध दर्ज़ करता हूँ  क्योंकि  चिड़िया तो मासूम होती है और दया की पात्र होती है जबकि कांग्रेस तो घाघ है, मक्कार है और चालाक है .  किसी कांग्रेसी को चिड़िया कहना चिड़िया पर अत्याचार करना है  ये बात मेनका गांधी को नहीं भूलना चाहिए

मेरी आँखों से देखा जाये तो मोदी अगर शेर है तो राहुल लोमड़  है,  मोदी हाथी है तो राहुल लक्कड़बग्घा है,  मोदी गरुड़  है तो राहुल सपोला है और मोदी अगर कप्तान  है तो राहुल चपरासी ………हा हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 




क्या यह सच है कि केवल पुरुष ही बलात्कारी होते हैं महिलाएं नहीं ?


क्या यह सच है कि यौन शोषण सिर्फ़ महिलाओं का होता है पुरुषों का नहीं ?

क्या यह सच है कि  केवल पुरुष ही बलात्कारी होते हैं महिलाएं नहीं ?

ज़रा सोचिये, 
सच इतना ही नहीं जितना दिखाया जा रहा है
सच वोह भी है जिसे दिखाया नहीं जा सकता

जय हिन्द !
-अलबेला खत्री




दादाजी अपने पोते की हुशियारी पर हैरान थे और आठों बादाम अपनी क़ैद से परेशान थे


सामग्री
बच्चा  : एक राज अनैतिक पार्टी
दादा    : दूसरी राज अनैतिक पार्टी
बादाम : विधायक
दांत     : आत्मविश्वास
आंत    : नीयत
जेब     : दल की साख

बच्चा   : दादाजी दादाजी, क्या आप बादाम खायेंगे ? 

दादाजी : नहीं बच्चा, मैं तो बादाम खा ही नहीं सकता,  मेरे दांत नहीं हैं

बच्चा   : तब तो ठीक है, ये रखो मेरे आठ बादाम, बाद में वापिस ले लूँगा

दादाजी : लेकिन मुझे क्यों दे रहा है, जब वापिस ही लेने हैं तो अपने पास ही रख …

बच्चा   : दादाजी, आपको इसलिए दे रहा हूँ, क्योंकि मेरी जेब फटी हुई है, कहीं गिर गए तो कोई और उठा लेगा, आपके पास रहेंगे तो मुझे ही वापिस मिलेंगे

दादाजी : लेकिन अगर मेरा मन मचल गया और मैं इन्हें कूट कूट  कर खा गया तो ?

बच्चा   : आप नहीं खाओगे, मैं जानता हूँ, क्योंकि आप सिर्फ़ दांतों से ही नहीं, आँतों से भी  कमज़ोर हैं …किसी
तरह खा भी लिए तो हज़म नहीं कर पाओगे

_________दादाजी अपने पोते की हुशियारी पर हैरान थे

_________और आठों बादाम अपनी क़ैद से परेशान थे

क्या नाटकीय दृश्य का पात्र-परिचय लिखने की ज़रूरत है या आप समझ गए ?

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 




हास्यकवि अलबेला खत्री की 101 नि:शुल्क प्रस्तुतियां




30 वर्षों में 6000 मंचों पर प्रस्तुति का आनन्दोत्सव

स्कूलों, कॉलेजों, नारी संगठनों, अनाथाश्रमों, वृद्धाश्रमों, जेलों, HIV पीड़ितों व सभी प्रकार की समाजसेवी  संस्थाओं के लिए हास्यकवि अलबेला खत्री की ख़ास सौग़ात

1 5 फ़रवरी से 2 3 जुलाई 2014 तक
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अलबेला खत्री
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बन्दर के हाथों में जो आया उस्तरा, अपना ही काम ये तमाम करेगा





साहित्यिक वेबसाइट ओ बी ओ बुक्स ऑन लाइन्स पर शानदार सृजन के साथ सम्पन्न 38 वें लाइव महा उत्सव में इस बार का प्रदत्त विषय था "पापा कहते हैं, बड़ा नाम करेगा"  अन्तिम क्षणों में  मैं भी इसमें शामिल हुआ और प्रदत्त विषय पर निम्नांकित सामयिक तुकबन्दी प्रस्तुत की :

पापा कहते हैं बड़ा काम करेगा
लंगड़ी गुठली को चौसा आम करेगा

हाथों में झाड़ू लिए घूम रहा है
अब ये सफ़ाई सुबहो-शाम करेगा

बन्दर के हाथों में जो आया  उस्तरा
अपना ही काम ये तमाम करेगा

चेला  गुरु की धोती खींच रहा है
अस्मत ये खादी की नीलाम करेगा

औरों के दीयों से जो तेल चुराये
वो क्या बिजली के सस्ते दाम करेगा

'अलबेला' गर इसे अभी रोक न दिया
जीना ये सबका हराम करेगा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री







ये उनका पराक्रम नहीं बल्कि मज़बूरी है, ऐसा करना उनके लिए निहायत ज़रूरी है


वो न खुद बनाएंगे न दूसरों की चलने देंगे
न तो खुद खेलेंगे, न  दूसरों को खेलने देंगे
वे तो घुच्ची में मूत कर खेल ख़राब करेंगे
ये उनका पराक्रम नहीं
बल्कि मज़बूरी है
ऐसा करना उनके लिए
निहायत ज़रूरी है

क्योंकि वे लोग हरम के हिजड़े हैं
अर्थात रनिवास में रहने वाले किन्नर हैं
जो जानते तो हैं कि वो सब कैसे किया जाता है
लेकिन कर कुछ नहीं सकते
___अफ़सोस
___अफ़सोस
वोट लुटा तो दिल्ली के वोटर को  आया चेत
अब पछताए होत है क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत


कोई रन फॉर यूनिटी में दौड़, देश को जोड़ रहा है
कोई अपने अहंकार में, ऊँची ऊँची छोड़ रहा है
झाड़ू वालों के झाँसे में आकर, दिल्ली का मतदाता
कमज़र्फ़ों को वोट थमा कर, अपना माथा फोड़ रहा है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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sunny deol with albela khatri

albela khatri in action


झाड़ू कुण्डली

झाड़ू वाले हाथ ने किया सूपड़ा साफ़
आम आदमी ऑन है बाकी सारे ऑफ़
बाकी सारे ऑफ़, किया कइयों को गंजा
पीला पीला हुआ, धवल शीला का पंजा
उखड़ गए दिल्ली में ख़ुद मैदान उखाड़ू
ख़ूब चलाया ए ए पी ने अपना झाड़ू

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 
hasyakavi albela khatri's kundli on jhadu

बीन से लेकिन भैंस बजाना महंगा पड़ता है



दिल की बात ज़ुबाँ पर लाना महँगा पड़ता है


लाख के घर में जोत जगाना महंगा पड़ता है



सर से जब लोहू निकला तो बात समझ में आई


दीवारों से सर टकराना महंगा पड़ता है



कविताओं की चोरी हो या हो दैहिक गठबन्धन


चलने दो,  आवाज़ उठाना महंगा पड़ता है



ग़ज़लें गर लिखवाई हैं, तारीखें भी लिखवाओ


शंखधरों को शंख बजाना महंगा पड़ता है



आम आम की माला जप कर वो जो ख़ास हुआ है


उसको फिर से आम बनाना महंगा पड़ता है



भैंस के आगे बीन बजाना चल जाता 'अलबेला'


बीन से लेकिन  भैंस बजाना महंगा पड़ता है



जय हिन्द !
अलबेला खत्री 


केंद्रीय मन्त्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने मुझे सलाह दी है कि मैं अपना नाम 'अलबेला खत्री' के बजाय 'फक्कड़ अलबेला' रख लूँ




 एक  शानदार और जानदार कवि सम्मेलन गत 2 4 नवम्बर की शाम कानपुर के जुहारीदेवी गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज परिसर में संपन्न हुआ जिसमें देश के ख्यातनाम कवि / कवयित्री लगभग चार घंटे तक दर्शकों को काव्यरसपान कराने में सफल रहे

मुख्यातिथि केन्द्रीय कोयला मन्त्री श्रीप्रकाश जायसवाल को तो बहुत जल्दी थी इसलिए वे केवल मंगल दीप प्रकटा कर,  कविगण को माल्यार्पण कर और अपनी व्यस्तता का संक्षिप्त भाषण दे कर चल दिए परन्तु  जुहारीदेवी  गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज की स्वर्ण जयन्ती के अवसर पर आयोजित व सुरेश अवस्थी द्वारा संयोजित इस भव्य काव्य-समागम में   हरी ओम पंवार, अशोक चक्रधर, सुरेश अवस्थी, रमेश शर्मा, सुनील जोगी, रास बिहारी गौड़, अनु सपन, कमल मुसद्दी व अलबेला खत्री ने खूब जम कर कवितायें सुनाईं और बिना किसी अश्लील अथवा द्विअर्थी टिप्पणी के, दर्शकों का भरपूर मनोरंजन भी किया

विशेषकर अशोक चक्रधर अपनी पूरी रंगत में थे और उन्होंने  मोबाइल में देखे बिना भी अनेक कवितायेँ सुनाईं :-), हरी ओम पंवार को मैंने जितना ऊर्जस्वित कोटा दशहरा में देखा था उतना ही पराक्रम उन्होंने कानपुर में भी कायम  रखा परन्तु पूरे कार्यक्रम के हीरो रहे रमेश शर्मा जिन्होंने अपने भावभरे गीतों से  सबको भावविह्ल कर दिया - तभी तो मंच के सभी कवियों ने भी उनका मालाएं पहना पहना कर  अभिनन्दन किया

बेटियां वाली ग़ज़ल सुना कर अनु सपन और माँ पर कविता सुना कर कमल मुसद्दी ने सबको भावविभोर कर दिया।  सुरेश अवस्थी, सुनील जोगी और रासबिहारी गौड़ और अलबेला खत्री ने हास्यव्यंग्य प्रधान रचनाएं प्रस्तुत करके  वातावरण को खिलखिलाहट प्रदान की - कुल मिला कर यह एक उम्दा कार्यक्रम था जिसमे सम्मिलित हो कर मुझे आत्मिक आनंद आया

कॉलेज के संरक्षक  सी के अरोड़ा ने आभार व्यक्त किया व प्राचार्या डॉ बी आर अग्रवाल ने सभी मेहमान कवियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये।  प्रमुख औद्योगिक घराने जेके द्वारा संस्थापित इस महाविद्यालय के उत्तरोत्तर उत्थान के लिए शुभकामनायें और इस उत्तम  आयोजन में शामिल करने के लिए सुरेश अवस्थी को सादर धन्यवाद

चलते चलते ये बता दूँ कि  केंद्रीय मन्त्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने मुझे सलाह दी है कि मैं अपना नाम 'अलबेला खत्री' के बजाय 'फक्कड़ अलबेला' रख लूँ ....... मुझे तो यह बात कुछ जमी नहीं, आपको जमेगी  क्या ?

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



AAJ KI RAAT DEEPAVALI SPECIAL ........WAAH WAAH KYA BAAT HAI






आपको, आपके पूरे परिवार को एवं आपके समस्त इष्ट मित्रों को दीपोत्सव की  हार्दिक बधाई और नूतन वर्ष अभिनन्दन ! माँ महालक्ष्मी, सरस्वती और गजानन गणपति की सामूहिक अनुकम्पा से आपके जीवन में पग पग पर  ऐश्वर्य, यश, ऊर्जा एवं आरोग्य का प्रवाहपूर्ण भंडार रहे, यही मंगल कामना  मैं और मेरा पूरा परिवार करते हैं
जय हिन्द
अलबेला खत्री

hindi hasyakavi albela khatri in waah waah kya baat hai deepavli special episode

hindi hasyakavi albela khatri in waah waah kya baat hai deepavli special episode

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rotery club presents the hassakavi sammelan in puruliya by albela khatri

सब टी वी के "वाह वाह क्या बात है" में दीपावली स्पैशल एपीसोड की शूटिंग



अभी अभी मुम्बई में  सब टी वी के "वाह वाह क्या बात है"  में दीपावली

स्पैशल एपीसोड  की शूटिंग करके लौटा हूँ  परन्तु इस बार उतना आनन्दित

नहीं हूँ जितना  अक्सर हुआ करता हूँ . कारण  नहीं बताऊंगा, क्योंकि कारण 

बताऊंगा तो मुझे बताते हुए और आपको बांचते हुए तकलीफ़ होगी ..........

इसलिए अपना दिल कहता है SHOW MUST GO ON !  


सूत्रों द्वारा बताया गया है कि  यह दीपावली  अर्थात 3 नवम्बर की रात 9  बजे

दिखाया जाएगा ...किन्तु  अभी पक्का  पता नहीं कि कब दिखाया जाएगा ...

वैसे दीपावली का था तो दीपावली पर दिखाएंगे ....क्योंकि ब्याह के गीत ब्याह

में ही गाए जाते हैं और तीज के घेवर तीज को ही खाये जाते हैं हा हा हा हा :-)


HAPPY  DEEPAVLI

जय हिन्द !
-अलबेला खत्री
hasyakavi albela khatri in waah waah kya baat hai

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hasyakavi albela khatri in waah waah kya baat hai

पत्नी रंगेहाथ पकड़ ले तो उसके पाँव दबाना पाप नहीं है बाबाजी


नयन लड़ाना पाप नहीं है बाबाजी
प्यार जताना पाप नहीं है बाबाजी

अगर पड़ोसन पट जाये तो उसके घर
आना - जाना पाप नहीं है बाबाजी

बीवी बोर करे तो कुछ दिन साली से
काम चलाना पाप नहीं है बाबाजी

पत्नी रंगेहाथ पकड़ ले तो उसके
पाँव दबाना पाप नहीं है बाबाजी

रोज़ सुबह उठ, अपनी पत्नी की खातिर
चाय बनाना पाप नहीं है बाबाजी

वेतन से यदि कार खरीदी न जाये
रिश्वत खाना पाप नहीं बाबाजी

'अलबेला' हर व्यक्ति यहाँ दुखियारा है
इन्हें हँसाना पाप नहीं है बाबाजी

-अलबेला खत्री

https://www.facebook.com/AlbelaKhatrisHasyaKaviSammelan?ref=hl


hasyakavi albela khatri

गीत गूंगे ही रह गए मेरे ....मन्ना डे की आवाज़ खामोश हो गई



प्यारे दोस्तों !
स्वर सम्राट मन्ना डे  के निधन से मुझे वैयक्तिक धक्का पहुंचा है . बड़ा अरमान था मन में कि अपने कुछ साहित्यिक गीतों और कुछ  हास्यगीतों को मन्ना दा के सुरों में स्वरबद्ध कर के एक शानदार एल्बम निकालूं .........अपने प्रिय मित्र संगीतकार अर्णब चटर्जी के संगीत निर्देशन में यह एल्बम निकालने की पूरी तयारी हो चुकी थी ....बस प्रतीक्षा थी तो मन्ना दा के स्वस्थ होने की ...परन्तु वे स्वस्थ हो कर लौटने की बजाय  परलोक चले गए और मेरे वे गीत गूंगे ही रह गए ..............

सुर, स्वर और संगीत के समन्दर में यों तो अनेक बड़ी बड़ी लहरें उठीं और शांत हो गईं परन्तु मन्ना  डे  एक ऐसी ऊँची और विराट लहर थे  जिसकी रवानी की गूंज हमारे मन में ही नहीं  आत्मा में भी स्पन्दन पैदा करती थी .

उनकी आत्मिक शान्ति के लिए आत्मिक प्रार्थना और शत शत नमन


-अलबेला खत्री 

hasyakavi albela khatri's poem

hasyakavi albela khatri in nalwa steel & power

नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड रायगढ़ में नलवा ऑफिसर्स क्लब के लिए हास्य हंगामा


नलवा ऑफ़िसर्स क्लब में शरद पूनम की रात खूब जमा हास्य हंगामा 2 0 1 3


छत्तीसगढ़ में कविता सुनने वालों का अन्दाज़ बहुत प्यारा है .  कविता अच्छी हो तो रात भर बैठे रह सकते हैं  परन्तु कविता में दम न हो तो  जल्दी ही महफ़िल छोड़ कर घर चले जायेंगे .  यह सुखद संयोग था कि  नलवा स्टील एंड पावर लिमिटेड रायगढ़ में नलवा ऑफिसर्स क्लब के लिए आयोजित व अलबेला खत्री द्वारा मंच संचालित हास्य हंगामा 2 0 1 3 कवि  सम्मेलन में कवि भी अच्छे थे और कवितायेँ भी बेहतरीन थीं इसलिए शरद पूनम की रात, रात भर  लोग  काव्य आनंद में गोते लगाते रहे .

यूनिट के मुखिया श्री पी एस राणा के मुख्य आतिथ्य में संपन्न इस रंगारंग कार्यक्रम में सर्वश्री डॉ कर्नल वी पी सिंह, प्रताप फौज़दार, प्रदीप चौबे, योगेन्द्र मौदगिल, रामगोपाल शुक्ल  व अलबेला खत्री ने  काव्यपाठ किया . श्री प्रकाश यादव के संयोजन में संपन्न इस सफल कार्यक्रम में रायगढ़ के समाजसेवी श्री महावीर अग्रवाल  का भी विशेष योगदान रहा .

प्रख्यात हिंदी ब्लोगर श्री ललित शर्मा समेत सभी कवियों को पुष्पगुच्छ एवं स्मृतिचिन्ह से सम्मानित करते हुए श्री राणा ने कहा कि  यह हास्य हंगामा उन्हें इतना  पसंद आया कि अगले वर्ष भी  इसका आयोजन करेंगे .

प्रस्तुत है  कुछ फोटो :

जय हिन्द !
-अलबेला खत्री

hasya hungama at nalwa officers club in raigarh CG by albela khatri

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