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Albela Khatri

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मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन



शानदार, शानदार, शानदार …………………
शानदार और जानदार रहा मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा राजभाषा विभाग के तत्वाधान में डॉ बी आर पाल द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन,,,,, होना ही था, सुनने वाले लोग अच्छे थे, आयोजन स्थल भी ज़बरदस्त सजा हुआ था, यूनिट के प्रबन्ध निदेशक समेत सभी पदाधिकारी ठहाके लगाने के लिए मूड में थे और प्रताप फ़ौजदार, ममता शर्मा, नंदकिशोर अकेला तथा सुन्दर मालेगांवी हंसाने के मूड में भी थे

और हाँ, मैं ये बताना तो भूल ही गया कि मंच संचालन जब अलबेला खत्री के हाथ में होगा तो आनन्द तो आएगा ही, यह कौन सी नई बात है हा हा हा हा हा हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
 






 

अपनेराम ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली


लो जी,  "जब प्यार किया तो डरना क्या" वाले इस्टाइल में आज अपनेराम  ने भी एक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, भावी प्रधानमन्त्री के लिए सहयोग राशि भर दी, पार्टी फण्ड के लिए डोनेशन भी दे दिया और विभिन्न मदों में 1675 रूपया भी भर दिया

अब ये नहीं बताऊंगा कि किस पार्टी की सदस्यता के लिए ऑनलाइन फ़ॉर्म और पैसा भरा है -बताने की ज़रूरत भी क्या है, आपको सब मालूम ही है … हा हा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री


शहीद हेमराज की पत्नी को पाकिस्तानियों के 26 शीश भेंट करते हुए भारतीय सैनिकों की झाँकी


काश !
गणतन्त्र दिवस समारोह में आज इन झाँकियों का प्रदर्शन भी होता :

# अमर शहीद हेमराज की पत्नी को पाकिस्तानियों के 26 शीश भेंट करते हुए भारतीय सैनिकों की झाँकी

# 26 -01 -2001 के प्रलयंकारी भूकम्प से लहूलुहान हो चुके गुजरात को अपने पुरुषार्थ से उन्नति के अभिनव शिखर तक पहुंचाते हुए नरेन्द्र मोदी के अथक परिश्रम की झाँकी

# 2 G, DLF, CWG, कोयला इत्यादि के महाघोटालों से भारत की जनता को लूटते हुए कांग्रेसियों के काले चेहरों की झाँकी

# दिल्ली में रातदिन हो रहे सामूहिक बलात्कारों और हत्याकाण्डों की झाँकी

# मुजफ्फरनगर के दंगों पर बेशर्मी का नंगा नाच करती यूपी सरकार द्वारा आयोजित सैफई के रासरंगों की झाँकी

____आपका क्या ख्याल है ?

अलबेला खत्री



स्वामी विवेकानन्दजी की जयन्ती पर आज उनके कुछ वचन साझा कर रहा हूँ

स्वामी विवेकानन्दजी की जयन्ती पर 
आज उनके कुछ वचन आप सब मित्रों से साझा कर रहा हूँ

1
दुष्टों के दोषों की चर्चा करने से अपना चित्त प्रक्षुब्ध ही होता है इसलिए उनके वर्तन की ओर लक्ष्य न दे कर, अथवा उनकी चर्चा करने न बैठ कर, उनकी उपेक्षा करना ही अपने लिए श्रेयस्कर है ।

2
धर्म को लेकर कभी विवाद न करो । धर्म सम्बन्धी सारे विवाद और झगड़े केवल यही दर्शाते हैं कि वहां आध्यात्मिकता का अभाव है । धर्म सम्बन्धी झगड़े सदैव खोखली और असार बातों पर ही होते हैं


3
एक मोची, जो कम से कम समय में बढ़िया और मजबूत जूतों की जोड़ी तैयार कर सकता है, अपने व्यवसाय में वह उस प्राध्यापक की अपेक्षा कहीं अधिक श्रेष्ठ है जो दिन भर थोथी बकवास ही करता रहता है

- स्वामी विवेकानंद

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोबिन्दसिंहजी के 348 वें प्रकाशोत्सव पर बधाई


राज करेगा खालसा आकी रहे न कोय

सत्य,शौर्य व सर्वकल्याण के उद्घोषक एवं खालसा पंथ के संस्थापक
श्री गुरु गोबिन्दसिंहजी के 348 वें प्रकाशोत्सव पर
सभी देशवासियों को

बधाई एवं गुरुपर्व अभिनन्दन !

अलबेला खत्री



 वाह रे मेरे देश के मीडिया वालो !


तुम्हें दिल्ली से आगे कुछ दिखाई ही नहीं दे रहाहै - एक मन्त्री की कार पर लगा गेन्द इतना महत्वपूर्ण होगया कि श्रीहरिकोटा में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किया गया देशहित व राष्ट्रगौरव का ऐतिहासिक कार्य भी उसके सामने फीका पड़ गया

जय हिन्द !

अपना सिंहासन डोलता देख, लोमड़ी ने वहाँ के तमाम सियारों को चुपके से डिनर पर बुलाया


 लोमड़ी के राज में जंगल के सभी जानवर त्रस्त थे क्योंकि पड़ोसी जंगल के भेड़िये  जब तब घुस आते और नन्हे जानवरों को खा जाते. ऐसे में एक शक्तिशाली  राजा की ज़रूरत थी जो उन्हें बचा सके .......... जंगल में चारों तरफ़ चर्चा थी कि इस बार शेर को ही जिताएंगे और अपना राजा बनाएंगे हालांकि लोमड़ पार्टी इसका यह कह कर पुरज़ोर विरोध कर रही थी कि शेर तो हिंसक है, गुस्से वाला है अगर वोह राजा बन गया  तो जंगल का विनाश हो जाएगा, लेकिन सभी प्राणी ठान चुके थे कि इस बार शेर को ही शासन सौंपना है

अपना  सिंहासन डोलता देख, लोमड़ी ने वहाँ के तमाम सियारों को चुपके से डिनर पर बुलाया और कहा कि  इस बार मेरी हार निश्चित है लेकिन अगर शेर सिंहासन पर आ गया तो तुम भी मारे जाओगे और मैं भी, इसलिए  तुम तुरत फुरत एक दल बनाओ  और पूरे जंगल में घूम घूम कर  मेरा विरोध करो, मुझे गालियां दो  और मुझे  जेल भेजने की घोषणाएं करो …इससे फायदा यह होगा कि  चुनाव दो तरफ़ा से तीन तरफ़ा हो जाएगा अर्थात  जो लोग मुझसे नाराज़ हो कर शेर को वोट देने वाले हैं,  उनमें से बहुत सारे वोट तुम्हें इसलिए मिल जायेंगे  क्योंकि तुम पर हिंसक होने का कोई ख़ास ठप्पा नहीं है  लिहाज़ा जंगल के सभी धर्मनिरपेक्ष  तुम्हारे साथ हो जायेंगे

आगे यह तय हुआ कि  चुनाव में लोकदिखावे के लिए तो लोमड़दल और सियारदल इक दूजे का पुरज़ोर विरोध करेंगे परन्तु  चुनाव परिणाम  में अगर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो  हम इक दूजे के काम आयेंगे --जैसे भी हो, ये शेर नहीं आना चाहिए

वही हुआ, सीटों के हिसाब से चुनाव परिणाम शेर के पक्ष में होते हुए भी वह राजा नहीं बन सका और जिसे सबने नकार दिया था उसी के  समर्थन से सियारों ने अपनी सरकार बना ली

जंगल के सभी प्राणी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं

जय हिन्द !
अलबेला खत्री


झाड़ डाला है झाड़ू ने ऐसा उन्हें, आबरू उनको मुश्किल बचाना हुआ


साहित्यिक वेबसाइट ओपन बुक्स ऑन लाइन के
 तरही  मुशायरा में प्रस्तुत मेरी ताज़ा ग़ज़ल


अश्क़ आँखों से निकला, रवाना हुआ
दर्दे-दिल का मुकम्मल तराना हुआ

ज़ुल्फ़ उसने जो खोली, घटा छा गई
मुस्कुराई तो मौसम सुहाना हुआ

हुस्न दुख्तर पे जब से है आने लगा
हाय दुश्मन ये सारा ज़माना हुआ

तब से दुनिया हमारी बड़ी हो गई
जब से गैरों के घर आना जाना हुआ

चल पड़ा हूँ ठिकाना नया खोजने 
ख़त्म अपना यहाँ आबोदाना हुआ

ज़ख्म हमदर्दियों से न भर पाएंगे
फैंक दो अब ये मरहम पुराना हुआ

झाड़ डाला है झाड़ू ने ऐसा उन्हें
आबरू उनको मुश्किल बचाना हुआ

रूह प्यासी थी 'अलबेला' प्यासी रही
जिस्म का सारा पीना पिलाना हुआ

-अलबेला खत्री 








विनाशकाले विपरीत बुद्धि या खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे


अपना अन्त निकट देख कर भीतर ही भीतर भयभीत  कांग्रेस पार्टी 

इन दिनों जिस तरह की हरकतें कर रही है उसे क्या कहना ठीक रहेगा ?  

 "विनाशकाले विपरीत बुद्धि"  या "खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे"

जय हिन्द !



अपने 'आलोक' का जन्मदिन मनाना ही पड़ेगा


VERY VERY HAPPY BIRTH DAY TO YOU  DEAR AALOK

वैसे तो तू बदमाश है,  नालायक है, उत्पाती है
पर क्या करूँ, कमबख्त मेरी सासू का नाती है
सो लोकलाज में व्यवहार तो निभाना ही पड़ेगा
अपने 'आलोक' का जन्मदिन  मनाना ही पड़ेगा
ऐ मेरी 11 वर्षों की गाढ़ी कमाई !
तुझे जन्मदिवस की ढेरों बधाई !
-अलबेला खत्री 

albela khatri with his son aalok khatri

birth day boy aalok khatri 1

birth day boy aalok albela khatri

सुना या नहीं सुना, उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता लेकिन मैं भारत की कवयित्री नंबर वन हूँ इसमें कोई शक नहीं


'हैलो ....... पूरती पाले जी ?'

'हांजी, पूरती बोल रही हूँ, आप कौन ?'

'मैं फ़लाने शहर से, धिंकाने सांस्कृतिक संगम का प्रमुख भोलाराम पन्सारी बोल रहा हूँ पूरती जी, आप आईं थी न हमारे यहाँ ,,,,,क्या आप हमें भूल गए ?'

' नहीं जी नहीं, भूल कैसे सकते हैं ? कहिये क्या बात है ?'

'बात ऐसी है कि  पिछली बार तो हम टीम बनाने में धोखा खा गए क्योंकि कुकर्माजी के दबाव में आ गए थे  परन्तु इस बार हम कुछ अच्छे कवियों को बुलाना चाहते हैं तो आपसे रिक्वेस्ट है कि हमें कुछ बढ़िया कवियों / कवयित्रियों के नाम और नंबर देदो ताकि हम उनसे बात कर सकें'

'नम्बर तो मैं किसी का दे नहीं सकती पर आपके लिए कुछ बढ़िया नाम बता सकती हूँ, बजट क्या है आपका '

'जी बजट तो वही है 1 लाख के आसपास .... '

'1  लाख में क्या होता है भोलारामजी, अगर आप 2  लाख तक खर्च करो तो मैं अपने साथ देश के सबसे बड़े हास्यकवि मदिरेन्द्र डूबे, व्यंग्य व्योम चम्पक तरल, रमेन्द्र गजबजी के साथ साथ २-३ और कवि लेकर आ सकती हूँ'

' नहीं पूरती पालेजी, आप तो पिछली बार आ चुकी हैं, इस बार हम कोई दूसरी कवयित्री बुलाएँगे और जहाँ तक बात मदिरेन्द्र डूबे की है तो वोह भी नहीं चलेंगे, कोई ढंग का नाम बताओ ?'

'ढंग का नाम?  कैसी बात कर रहे हैं सर आप ? मदिरेन्द्र जी से बड़ा हास्यकवि कौन है देश में ? आज पूरे ब्रह्माण्ड को खंगाल लो तो हिंदी कविता के नाम पर आपको केवल दो लोग शीर्ष पर मिलेंगे ,,,एक वोह और एक मैं ,,,बाकी सब तो चिल्लर पार्टी है'

' ये आप कैसे कह सकती हैं पूरतीजी ? ऐसा आप दोनों ने क्या लिख दिया जो इत्ती बड़ी बात कर रही हैं ?
 
' सवाल लिखने का नहीं है भोलाभाई, याद करने  का है,, डूबे जी को इतना मसाला याद है कि वे अकेले ही पूरी रात बोल सकते हैं और मेरे बारे में तो आप जानते ही हैं ,,अब इस बात को क्या दोहराना कि जब मंच पर खड़ी होती हूँ तो लगता है साक्षात् सरस्वती माइक पर आ गयी हो '

' पर हमारे यहाँ  तो आप बिलकुल फ्लॉप हो गयी थीं, लोगों ने आपको सुना ही नहीं ,, आपको हमने 20 हज़ार रूपये दिए थे लेकिन आपसे  ज़यादा काम तो 2 हज़ार वाली लोकल कवयित्री ने किया था आपको याद ही होगा ?'

' सुना या नहीं सुना, उससे मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता  लेकिन मैं भारत की कवयित्री नंबर वन हूँ इसमें कोई शक नहीं,  चाहें तो आप  खुद मदिरेन्द्रजी से कन्फर्म कर लीजिये  और बात रही  प्रोग्राम की तो देखिये, जमने और न जमने के कई कारण होते हैं, अगर मैं नहीं जमी तो ज़ाहिर है कि आपका साउण्ड सिस्टम खराब होगा या फिर आपके शहर के श्रोता  नालायक होंगे जिनको कविता सुनने की तमीज न होगी '

'पालेजी,  साउण्ड तो हमने वो मंगाया था जिसकी जगजीत सिंह जैसे ग़ज़ल गायक ने भी तारीफ़ की और श्रोता हमारे शहर के मूर्ख नहीं हैं , पिछले 40 साल से कवि सम्मेलन सुनते आये हैं और आपको ये जानकार ख़ुशी होगी कि हमें चंदा भी वही श्रोता देते हैं'

'तो हो सकता है, मुझे गलत क्रम पर खड़ा कर दिया हो, हर मंच संचालक में इतना सेन्स  कहाँ होता है कि जान सके कि किस कवयित्री को कब प्रस्तुत करना है '

' बहनजी, आप बहाना क्यों करती हैं ? क्रम भी आपने ही चुना था, आप ही ने  कहा था कि मुझे ट्रेन पकड़नी है इसलिए जल्दी पढ़वा कर मुक्त कर दो '

'चलो जाने दो, अब मुद्दे की बात ये है कि आप अगर मुझे बुलाएंगे तो ही मैं टीम बनाउंगी और अगर मैं टीम बनाउंगी तो पहला नाम डूबेजी का ही होगा ……'


'आपको मैंने आमंत्रित करने के लिए  फोन नहीं किया है पालेजी, न ही मुझे आपसे कोई सलाह चाहिए, मुझे तो  कुछ अच्छे कवियों के फोन नंबर चाहिए, अगर दे सको तो देदो ,,,हैलो हैलो ---हैलो …… लगता है फोन कट गया'

या फिर काट दिया गया   ;-) '

जय हिन्द !
albela khatri in action at kavi sammelan



दादाजी अपने पोते की हुशियारी पर हैरान थे और आठों बादाम अपनी क़ैद से परेशान थे


सामग्री
बच्चा  : एक राज अनैतिक पार्टी
दादा    : दूसरी राज अनैतिक पार्टी
बादाम : विधायक
दांत     : आत्मविश्वास
आंत    : नीयत
जेब     : दल की साख

बच्चा   : दादाजी दादाजी, क्या आप बादाम खायेंगे ? 

दादाजी : नहीं बच्चा, मैं तो बादाम खा ही नहीं सकता,  मेरे दांत नहीं हैं

बच्चा   : तब तो ठीक है, ये रखो मेरे आठ बादाम, बाद में वापिस ले लूँगा

दादाजी : लेकिन मुझे क्यों दे रहा है, जब वापिस ही लेने हैं तो अपने पास ही रख …

बच्चा   : दादाजी, आपको इसलिए दे रहा हूँ, क्योंकि मेरी जेब फटी हुई है, कहीं गिर गए तो कोई और उठा लेगा, आपके पास रहेंगे तो मुझे ही वापिस मिलेंगे

दादाजी : लेकिन अगर मेरा मन मचल गया और मैं इन्हें कूट कूट  कर खा गया तो ?

बच्चा   : आप नहीं खाओगे, मैं जानता हूँ, क्योंकि आप सिर्फ़ दांतों से ही नहीं, आँतों से भी  कमज़ोर हैं …किसी
तरह खा भी लिए तो हज़म नहीं कर पाओगे

_________दादाजी अपने पोते की हुशियारी पर हैरान थे

_________और आठों बादाम अपनी क़ैद से परेशान थे

क्या नाटकीय दृश्य का पात्र-परिचय लिखने की ज़रूरत है या आप समझ गए ?

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 




हास्यकवि अलबेला खत्री की 101 नि:शुल्क प्रस्तुतियां




30 वर्षों में 6000 मंचों पर प्रस्तुति का आनन्दोत्सव

स्कूलों, कॉलेजों, नारी संगठनों, अनाथाश्रमों, वृद्धाश्रमों, जेलों, HIV पीड़ितों व सभी प्रकार की समाजसेवी  संस्थाओं के लिए हास्यकवि अलबेला खत्री की ख़ास सौग़ात

1 5 फ़रवरी से 2 3 जुलाई 2014 तक
101 नि:शुल्क  प्रस्तुतियां

तुरन्त सम्पर्क  करें

अलबेला खत्री
9228756902, 9227156902
albelakhatri@gmail.com

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कवि-सम्मेलनों के मंचों पर काव्यपाठ करते हुए आज मुझे 30 वर्ष पूरे हो रहे हैं


आज 18 दिसम्बर 2013 का दिन  मेरे लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है  क्योंकि कवि-सम्मेलनों के मंचों पर काव्यपाठ करते हुए आज मुझे 30 वर्ष पूरे हो रहे हैं  .  इन 30 वर्षों के दौरान  भारत, अमेरिका, कनाडा, वेस्ट इण्डीज़, चाईना, हांगकांग व  सिंगापोर  इत्यादि  में 6214  मंचों पर प्रस्तुति की  जिनमे  कवि सम्मेलन के अलावा, लाफ्टर शो,  ग़ज़ल नाईट, भजन संध्या  व अनेक प्रकार के एकल कार्यक्रम शामिल हैं.  जीवन में कई शानदार चढ़ाव और कई दर्दनाक उतार आये जिनके असर में कभी ख़ूब खिलखिलाया  और कभी ख़ूब रोया ……… बहुत कुछ देखा और अनुभव किया

 जो अजनबी थे, वो मित्र बने,  मित्र से प्रतिद्वन्द्वी बने, प्रतिद्वन्द्वी से दुश्मन बने और अंततः दुश्मन से कट्टर दुश्मन बने

जिन्हें आगे बढ़ाने के लिए मैंने ख़ुद को पीछे कर लिया वो तो डेढ़ हुशियार + एहसानफ़रामोश  निकले और जिनके सहयोग से मैं इस भीड़ में ज़िन्दा रह पाया उनके लिए  कुछ करने  का भगवान् ने मुझे कोई अवसर और सामर्थ्य  नहीं दिया ---  कुल मिला कर "तेरा भाणा मीठा लागे"  की तर्ज़ पर सन्तुष्ट हूँ  और  आभार व्यक्त करता हूँ  उन सभी शुभचिन्तकों व हितैषियों का जिन्होंने मुझे गिरने नहीं दिया  और लोहा मानता हूँ  उन सभी की एकता का जिन्होंने मुझे खड़ा होने नहीं दिया

सबकी जय हो
अलबेला खत्री





बन्दर के हाथों में जो आया उस्तरा, अपना ही काम ये तमाम करेगा





साहित्यिक वेबसाइट ओ बी ओ बुक्स ऑन लाइन्स पर शानदार सृजन के साथ सम्पन्न 38 वें लाइव महा उत्सव में इस बार का प्रदत्त विषय था "पापा कहते हैं, बड़ा नाम करेगा"  अन्तिम क्षणों में  मैं भी इसमें शामिल हुआ और प्रदत्त विषय पर निम्नांकित सामयिक तुकबन्दी प्रस्तुत की :

पापा कहते हैं बड़ा काम करेगा
लंगड़ी गुठली को चौसा आम करेगा

हाथों में झाड़ू लिए घूम रहा है
अब ये सफ़ाई सुबहो-शाम करेगा

बन्दर के हाथों में जो आया  उस्तरा
अपना ही काम ये तमाम करेगा

चेला  गुरु की धोती खींच रहा है
अस्मत ये खादी की नीलाम करेगा

औरों के दीयों से जो तेल चुराये
वो क्या बिजली के सस्ते दाम करेगा

'अलबेला' गर इसे अभी रोक न दिया
जीना ये सबका हराम करेगा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री







ये उनका पराक्रम नहीं बल्कि मज़बूरी है, ऐसा करना उनके लिए निहायत ज़रूरी है


वो न खुद बनाएंगे न दूसरों की चलने देंगे
न तो खुद खेलेंगे, न  दूसरों को खेलने देंगे
वे तो घुच्ची में मूत कर खेल ख़राब करेंगे
ये उनका पराक्रम नहीं
बल्कि मज़बूरी है
ऐसा करना उनके लिए
निहायत ज़रूरी है

क्योंकि वे लोग हरम के हिजड़े हैं
अर्थात रनिवास में रहने वाले किन्नर हैं
जो जानते तो हैं कि वो सब कैसे किया जाता है
लेकिन कर कुछ नहीं सकते
___अफ़सोस
___अफ़सोस
वोट लुटा तो दिल्ली के वोटर को  आया चेत
अब पछताए होत है क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत


कोई रन फॉर यूनिटी में दौड़, देश को जोड़ रहा है
कोई अपने अहंकार में, ऊँची ऊँची छोड़ रहा है
झाड़ू वालों के झाँसे में आकर, दिल्ली का मतदाता
कमज़र्फ़ों को वोट थमा कर, अपना माथा फोड़ रहा है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
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sunny deol with albela khatri

albela khatri in action

हमारा लक्ष्य गाँव का रुस्तम कहलाना नहीं बल्कि माल कमाना है लिहाज़ा अब यह मुकाबला पूरे देश में करेंगे


डिस्क्लेमर : इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं तथा इनका किसी भी जीवित अथवा मुर्दा व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है.  

एक गरीब लोकतांत्रिक गाँव में भज्जू और कंगू नाम के दो अमीर पहलवान रहते थे. देश भर में जब भी उनका कहीं मुकाबला होता, हज़ारों लोग टिकट खरीद  उसे देखते और अखाड़े में अपने अपने पसन्दीदा पहलवान का हौसला बढ़ाते. 50 साल तक ये खेल चलता रहा, दोनों पहलवान बूढ़े हो गए लेकिन मुकाबला बंद नहीं किया क्योंकि  अब वे पहलवानी दिखाने के लिए नहीं बल्कि धन कमाने के लिए लड़ते थे . वैसे अंदर की बात यह है कि वे लड़ते तो केवल दिखावे मात्र के लिए थे - अन्दर ही अन्दर दोनों की मिलिभगत थी … एक बार यह जीतेगा  तो दूसरी बार वह

इस बात का पता जब गाँव के एक पुलिस वाले खजलू को लगा कि दोनों मिले हुए हैं  और मुकाबले के बहाने लोगों को चूतिया बना रहे हैं तो उसने इसका लाभ लेने की युक्ति लगाईं . उसने अगले ही दिन पुलिस की नौकरी छोड़ दी और गांव के सभी जेबकतरों को बुला कर बताया कि उन्हें क्या करना है . इसके बाद उसने गाँव के सब निठल्ले और मवाली किस्म के लोगों का ऑडिशन ले कर उनमे से 2  लोगों को चुन लिया व उन्हें अपनी जेब से कुछ रुपये दे कर पहलवानी के गुर सीखने के लिए कहा - साथ ही गांव में पूरी पंचायत के सामने ढिंढोरा पीट दिया कि दोनों पहलवान आपस में मिले हुए हैं और गाँव को बेवकूफ बना रहे है - तब एक पहलवान कंगू ने रोष में आ कर कहा कि खजलू, तुझे ज़यादा खुजली है तो तू मुकाबला कर ले - पता लग जाएगा कि पहलवानी किसे कहते हैं . यह सुन कर खजलू ने चुनौती तो स्वीकार ली और दावा भी किया कि वह और सिस्सू  - विस्सू नाम वाले उसके दो साथी मिल कर इन दोनों को धूल चटा  देंगे लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसके लिए मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है, खजलू की बात सुन कर  गाँव वालों ने उसे खूब चंदा  देने की पेशकश की और देखते ही देखते  खूब धन भी जमा हो गया . प्रसन्न मुद्रा में खजलू घर गया और मुकाबले की नियत तारीख का इंतज़ार करने लगा .

मुकाबले  की पूर्व संध्या पर सभी जेबकतरों को बुला कर खजलू ने हिदायत दे दी  कि जैसे ही मुकाबला शुरू हो तथा लोगों  का ध्यान कुश्ती में लग जाए, सभी की जेब काट डालना ................... उधर सिस्सू - विस्सू  को जापानी तेल की दो दो बोतलें थमा कर निर्देश दिया कि कल मुकाबले से पहले पूरे शरीर को चौपड़ लेना

मुकाबला हुआ और खूब हुआ और जापानी तेल की रपटन के चलते खजलू, सिस्सु और विस्सू  के आगे भज्जू और कंगू जैसे पहलवान का एक भी दाव न चला,  लिहाज़ा न कोई जीता, न कोई हारा - मुकाबला बराबरी पर ख़त्म हुआ

शाम को जेबकतरों से उगाही करते हुए खजलू  ने सिस्सू - विस्सू  से कहा कि यह मुकाबला तो केवल बोहनी भर थी.......... हमारा लक्ष्य  गाँव का रुस्तम कहलाना नहीं बल्कि माल कमाना  है लिहाज़ा अब यह मुकाबला पूरे देश में करेंगे  और सभी जगह के दर्शकों की जेब काटेंगे

सभी ने हर्षध्वनि की और पटाखे छोड़ते हुए  अपने अपने घर कू  चले गए

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
dedicated to gurumaa anandmurti by albela khatri at ambheti
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hasya kavi sammelan by albela khatri for rotary club puruliya

hasya kavi sammelan by albela khatri for rotary club puruliya




बीन से लेकिन भैंस बजाना महंगा पड़ता है



दिल की बात ज़ुबाँ पर लाना महँगा पड़ता है


लाख के घर में जोत जगाना महंगा पड़ता है



सर से जब लोहू निकला तो बात समझ में आई


दीवारों से सर टकराना महंगा पड़ता है



कविताओं की चोरी हो या हो दैहिक गठबन्धन


चलने दो,  आवाज़ उठाना महंगा पड़ता है



ग़ज़लें गर लिखवाई हैं, तारीखें भी लिखवाओ


शंखधरों को शंख बजाना महंगा पड़ता है



आम आम की माला जप कर वो जो ख़ास हुआ है


उसको फिर से आम बनाना महंगा पड़ता है



भैंस के आगे बीन बजाना चल जाता 'अलबेला'


बीन से लेकिन  भैंस बजाना महंगा पड़ता है



जय हिन्द !
अलबेला खत्री 


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