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Albela Khatri

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कवि सम्मेलनों के नाम पर कुछ ख़ास कवियों की मार्केटिंग करने वाले तत्वों को इस कार्यक्रम से दूर ही रखा गया था


अन्तर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन सूरत के तत्वाधान में होली के अवसर पर आयोजित विराट हास्य कवि सम्मेलन "हास्य गुलाल" कई मायनों में अनूठा कार्यक्रम था .  लाफ्टर चैम्पियन अलबेला खत्री के अनूठे  मंच संचालन में सूरत के कवि सम्मेलनीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि मंच से सिर्फ़ मौलिक और स्वरचित काव्यप्रस्तुति की गयी  तथा सुनेसुनाए  चुटकुलों को संचालक ने सिरे से ही नकार दिया था . पूरी तरह से पारिवारिक मनोरंजन से  परिपूर्ण  इस कार्यक्रम में हास्य-व्यंग्य के साथ साथ राष्ट्रभक्ति के स्वरों को भी पूरे मनोयोग से सुना गया  .

फ़िल्मी संवादों के अलावा फ़िल्म अभिनेता रंजीत ने जब गाना भी गाया तो लोग झूम उठे,  सुन्दर, शालीन, मौलिक और मधुर  स्वर की साम्राज्ञी श्वेता सरगम के गीत और ग़ज़लों की बहार ने महफ़िल को मोहब्बत से महका दिया, वरिष्ठ कवि संदीप सपन  की ऊर्जस्वित प्रस्तुति के  साथ साथ राजेश अग्रवाल का काव्यपाठ तो जैसे एक उपलब्धि थी सूरत वासियों के लिए ,,,ये दोनों पहली  बार सूरत में प्रस्तुति देने आये थे और खूब पसंद किये गए .  नरेंद्र बंजारा और अशोक भाटी ने भी उम्दा काव्यपाठ किया .

रमेश लोहिया, किशोर बिन्दल, राजू खण्डेलवाल, राजेश भारुका,  सुभाष मित्तल,  इन्दिरा  अग्रवाल इत्यादि आयोजकगण के सधे और कुशल नेतृत्व में दर्शकों से ठसाठस भरे सभागार में अभिनेता रंजीत, वरिष्ठ समाजसेवी किशन अग्रवाल, विधायक श्रीमती संगीता पाटील व हर्ष संघवी के अलावा  श्रीमती गंगा पाटिल, राजू देसाई,  मनोज मिस्त्री इत्यादि अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति समारोह की गरिमा बढ़ा रही थी . लगभग तीन घंटे तक चले इस रंगारंग  काव्यमहोत्सव में सभी दर्शकों के लिए  ड्राईफ्रूट्स और मिनरल वाटर की भी व्यवस्था थी

कवि सम्मेलनों के नाम पर  कुछ ख़ास कवियों की मार्केटिंग करने वाले तत्वों को इस कार्यक्रम से दूर ही रखा गया था ताकि  सूरत के कवि सम्मेलनों की दिशा और दशा बदले तथा  भविष्य में उन्हीं कवि / कवयित्रियों को बुलाया जाये जो खुद लिखते हैं और खुद सुनाते हैं, चोरी का माल बेचने वाले नकली परफॉर्मरों पर अंकुश लगाने में यह कार्यक्रम कितना सफल होता है यह तो समय बतायेगा लेकिन  मंच के हित में अलबेला खत्री के इस प्रयास को  जिस प्रकार दर्शकों ने सराहा है, वह  उजाले की उम्मीद ज़रूर जगाता है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री





अपना नाम 'अलबेला खत्री' से बदल कर 'अल्पसंख्यक' रख लूं ?


सोच रहा हूँ
अपना नाम 'अलबेला खत्री' से बदल कर 'अल्पसंख्यक' रख लूं

हो सकता है किरपा यहीं अटकी पड़ी हो ,,,,

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



मैंने वज्रपुरुष नरेन्द्र मोदी को देखा है और जल्दी ही प्रधानमन्त्री बनते हुए भी देखूंगा


मुझे अफ़सोस है कि मैंने लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को साक्षात् नहीं देखा, लेकिव मुझे आनन्द है कि मैंने वज्रपुरुष नरेन्द्र मोदी को देखा है और जल्दी ही प्रधानमन्त्री बनते हुए भी देखूंगा

जय हिन्द !
अलबेला खत्री

hasyakavi albela khatri support narendra modi

वे न केवल अशिष्ट और अमर्यादित होते हैं बल्कि समाज के लिए घातक भी होते हैं



कुछ लोगों के मन में दूसरों पर चढ़ कर या उन्हें कूद फाँद कर आगे बढ़ने की ज़बरदस्त हवस होती है इसलिए वे न केवल अशिष्ट और अमर्यादित होते हैं बल्कि  समाज के लिए घातक भी होते हैं.  यहाँ प्रस्तुत चित्र 5 फ़रवरी 2011 को सिंगापोर में हुए कार्यक्रम "हँसना मना है" का है  इसमें आप देख सकते हैं कि अपने क्षेत्र के तीन महत्वपूर्ण और वरिष्ठ लोगों को जोकर दिखा कर चौथा व्यक्ति अपने आप को कैसे नायक की छवि में प्रस्तुत कर रहा है

ख़ास बात ये है कि ये डिज़ायन सिंगापोर के आयोजक ने नहीं बनाया बल्कि इसी चौथे व्यक्ति ने बना कर वहाँ भेजा था
hasyakavi albela khatri in singapore at hasna mana hai

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नरेन्द्र मोदी को सबक सिखाने और हाशिये पर लाने के लिए प्रधानमन्त्री का प्रत्याशी बनाया है ?


* कुछ लोग कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी को सबक सिखाने और हाशिये पर लाने के लिए भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने जानबूझ कर केवल इसलिए उन्हें प्रधानमन्त्री का प्रत्याशी बनाया है  ताकि गुजरात की मुख्यमन्त्री वाली कुर्सी उनके हाथ से निकल जाये -

जिस दिन मोदी मुख्यमन्त्री नहीं रहेंगे, उस दिन विभिन्न दलों के विरोध की आड़ ले कर, प्रधानमन्त्री का प्रत्याशी लालकृष्ण अडवाणी को बना दिया जायेगा - यानी ऐसी हालत कर दी जाएगी कि न तो दिल्ली के रहेंगे और न ही गुजरात के ----

** कुछ लोग कहते हैं कि  कांग्रेस की परछाई पार्टी आआपा कांग्रेस को मिलने वाले उन सारे वोटों को अपनी ओर खींच लेगी जिनके दम पर  भाजपा सरकार बनाने के ख्वाब देख रही है. परिणामतः झाड़ू +पंजा मिल कर बहुमत हासिल कर लेंगे और भाजपा, दिल्ली की ही तरह सबसे बड़ी विजेता पार्टी होकर भी सरकार नहीं बना पायेगी

***कुछ लोग कहते हैं _______अरे हटाओ, मुझे क्या करना है ये जान कर कि कौन क्या कहता है ?  मुझे तो ये भरोसा है कि देश की जनता अब अपने मताधिकार का महत्व समझ गई है और  ये भी जान चुकी है कि कौन उसके मत का सही पात्र है इसलिए  कयास  और अटकलों की ऐसी की तैसी, मुझे भरोसा है कि देश की जनता इस बार कांग्रेस का सफ़ाया करेगी, उसकी परछाई का भी सफ़ाया करेगी तथा भारत की उन्नति व प्रगति के लिए नरेन्द्र भाई मोदी को ही अपना आशीर्वाद और सम्बल देगी

जय हिन्द !
अलबेला खत्री

namo namo bharat - congress mukt bharat

hasyakavi albela khatri ki mehfil

आआपा को अगर देश भर में रायता ढोलना है तो जो वो कर रही है, वही ठीक है



नमस्कार प्यारे मित्रो !
ऐसा लगता है कि
चन्द महीनों बाद होने वाले अगले आमचुनाव  में :

कांग्रेस को अगर अपने कार्यकाल के महाघोटालों की कालिख धो धा कर, देश की जनता में पुनः लोकप्रियता और साख प्राप्त करते हुए फिर से सत्ता में आना है तो उसके पास एक ही, आखरी रास्ता है - पाकिस्तान पर आक्रमण,  हेमराज जैसे शहीदों का इन्तेक़ाम  और दुश्मन देश का सफ़ाया

भाजपा को अगर सरकार बनाने की अभिलाषा है  तो बहुमत प्राप्त करने के लिए  उसे सारे टीवी चैनल और अखबार खरीदने तथा पूरी तरह एकजुट होकर प्रयास करते हुए,  देश भर के   निष्कलंक और राष्ट्रभक्त लोगों को पार्टी में शामिल करना चाहिए  या अब पूरी तरह हिन्दूवादी हो जाना चाहिए,  भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की खुल्लमखुल्ला घोषणा और प्रतिज्ञा ही अब बहुसंख्यक वोट उसके खाते में डाल सकती है

आआपा को अगर देश भर में रायता ढोलना है तो जो वो कर रही है, वही ठीक है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री



आजतक को अब अपना नाम बदल कर आपतक कर देना चाहिए

टीवी चैनल आजतक  को अब अपना नाम बदल कर 
आपतक  कर देना चाहिए, 
ऐसा मैं नहीं 
मेरा 11 साल का बेटा आलोक कहता है, 
क्या वोह ठीक कह रहा है ? 

जय हिन्द ! 



मेरा दावा है कि अगर प्रति स्टिंग मेहनताना दिया जाए तो काम हो जाएगा और बख़ूबी हो जाएगा




वाह भाई वाह मुख्यमन्त्रीजी,
आप तो बड़े बगलोल निकले,,,,

भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर वोट आपने माँगे, भ्रष्टाचारियों को जेल भिजवाने के दावे करके जनता  के वोट आपने हथियाये, गाड़ी आपको, बंगला आपको, टीवी के स्क्रीन का लाभ आपको और हमें बना रहे उल्लू - वाह रे बाबाजी के ठुल्लू !

अगर पब्लिक को ही स्टिंग ऑपरेशन में लगाना था  तो चुनाव से पहले क्यों नहीं बताया कि हम कुछ नहीं करने वाले, सिर्फ एक  नम्बर देने वाले हैं  और नम्बर भी ऐसा कि  किसी के बाप को भी याद न रहे ---वाह वाह ! आप तो उस्तादों के भी उस्ताद निकले हुज़ूर, पूरी दुनिया में लोकहित के फोन फ्री कॉल होते हैं  और नम्बर  भी इतने कम व आसान होते हैं कि सबको सहज ही याद रहते हैं, परन्तु आप क्यों देने लगे  फ्री और आसान नम्बर ? आपको तो ड्रामा करना है, भ्रष्टाचार ख़त्म कहाँ करना है, ख़त्म ही करना होता तो भ्रष्टों से हाथ नहीं मिलाते

जिस आदमी को कोर्ट में पेशकार से तारीख लेनी है और वहाँ उससे 100 रुपये मांगे जाएँ, तो आपके अनुसार पहले जनता उस नंबर पर फोन करे जो कि जाहिर है बहुत  देर तक चलेगा और लम्बा बिल बनेगा, उसके बाद ACB से फोन आएगा और अफसर समझायेगा कि क्या करना है, तब कहीं जा कर जनता का आदमी वापिस उसके पास जाएगा, सौदा पटायेगा और पैसा देकर उसे फंसाएगा अर्थात बेचारा अपना पूरा दिन इसमें खपायेगा  लेकिन नतीजा आयेगा ठन ठन गोपाल ! क्योंकि तब तक तो कोर्ट ही बन्द हो जायेगा  - अरे जाओ, कौन फ़ालतू बैठा है जो इतनी ऐसी तैसी कराएगा, इससे अच्छा तो 100 का पत्ता देकर  काम निपटाएगा

अरे हुक्मरानों ! व्यवस्था तुम करो ऐसी कि किसी की घूस मांगने की हिम्मत न हो … लगाओ हर जगह cc tv और रखो नज़र या हर कामकाजी टेबल के पास एक आदमी खड़ा करो जो ध्यान रखे कि सही काम हो रहा है या नहीं या फिर हर स्टिंगकर्ता को प्रत्येक स्टिंग के लिए कम से कम 10 हज़ार रुपये मेहनताना देने की घोषणा करो - मेरा दावा है कि अगर प्रति स्टिंग मेहनताना दिया जाए तो  काम हो जाएगा और बख़ूबी हो जाएगा

लेकिन आपको यह नहीं सूझा, सूझे भी कैसे  आपका ध्यान अब दिल्ली पर है ही कहाँ  ? आप तो समूचे देश में ताण्डव करने के सपने देख रहे हैं

मूर्ख मत बनाओ जनता को,,,वरना पब्लिक अबकी बार तुम्हारे खिलाफ जमा होगी रामलीला मैदान में और दौड़ा दौड़ा  कर जूते मारेगी ----सर पे पांव रख कर भागना पड़ेगा तुम्हारी पूरी नाट्य मण्डली को क्योंकि मैंने सुना है दिल्ली के लोग मारते कम हैं घसीटते अधिक हैं

आगे तुम्हारी मर्ज़ी, मेरा क्या ? मुझे तो मोदी के गुजरात में कोई समस्या नहीं है
जय हिन्द !
अलबेला खत्री

ramesh lohia  in vaish sammelan surat

kishor bindal,ramdas agrawal & ramesh l,ohia in surat at vaish sammelan

hasyakavi albela khatri in action

आज प्रियंका बिटिया आ आ आ आ ताल से ताल मिला........


प्रियंका वाड्रा के स्वागत में तीन फुलझड़ियाँ


सोनिया बेचैन है
14 पर नैन है
राहुल तैयार है
लेकिन बेकार है
आज प्रियंका बिटिया
आ आ आ आ
ताल से ताल मिला ......ओ………………



____________________


लो जी आ गई मैदान में मिसेस वाड्रा
आना ही पड़ेगा
मिस्टर वाड्रा को बचाना है तो
झख मार के आना पड़ेगा
मीडिया बोला भैया को पीएम बनाने आई है
अबे सच बोल ! कि सैंयाँ को  बचाने आई है



________________

चला नहीं मैडम का लड़का
दल होगया पहले से कड़का
पंजा फड़ फड़ फड़ फड़ फड़का
मैया का  दिल धड़ धड़  धड़का
करने को इक बड़ा सा खड़का
लगा दिया ग्लैमर का तड़का

कुछ भी करले सोनिया, राहुल, रॉबर्ट व प्रियंका
घड़ा पाप का फूटेगा ही, अब जल के रहेगी लंका



जय हिन्द !
अलबेला खत्री







खालसा पंथ के संस्थापक श्री गुरु गोबिन्दसिंहजी के 348 वें प्रकाशोत्सव पर बधाई


राज करेगा खालसा आकी रहे न कोय

सत्य,शौर्य व सर्वकल्याण के उद्घोषक एवं खालसा पंथ के संस्थापक
श्री गुरु गोबिन्दसिंहजी के 348 वें प्रकाशोत्सव पर
सभी देशवासियों को

बधाई एवं गुरुपर्व अभिनन्दन !

अलबेला खत्री



 वाह रे मेरे देश के मीडिया वालो !


तुम्हें दिल्ली से आगे कुछ दिखाई ही नहीं दे रहाहै - एक मन्त्री की कार पर लगा गेन्द इतना महत्वपूर्ण होगया कि श्रीहरिकोटा में भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किया गया देशहित व राष्ट्रगौरव का ऐतिहासिक कार्य भी उसके सामने फीका पड़ गया

जय हिन्द !

आदरणीय मोदीजी, यह अभी नहीं तो कभी नहीं का खेल है, जो जीता वही सिकन्दर होगा


सम्मान्य श्री नरेन्द्र मोदीजी,
मुख्यमन्त्री,
गुजरात शासन

प्रसंग   : लोकसभा चुनाव में हानिकारक परिणाम की चेतावनी
सन्दर्भ : येदुरप्पा जैसे भ्रष्ट ( अगर वे सचमुच दोषी हैं तो ) लोगों का समर्थन

आदरणीय मोदीजी,
ये दौर आपका है, आने वाला समय आपका है  और आप ही हैं जो माँ भारती  के आंसू पोंछ सकते हैं  इसलिए पूरा देश आपके साथ है और आपके नेतृत्व में भारत विश्व की महाशक्ति बनने का सपना  देख रहा है - कोई बड़ी बात नहीं कि इस बार आपको व आपकी पार्टी को 300 से भी अधिक सीटों के साथ सत्ता का सिंहासन प्राप्त हो, लेकिन सावधानी हटी तो दुर्घटना  घटने का खतरा भी याद रखना होगा

मैं यह तो नहीं जानता कि आपकी पार्टी  यानी भाजपा की  क्या लाचारी अथवा विवशता है जो  येदुरप्पा जैसे तथाकथित रूप से भ्रष्ट लोगों को पुनः पार्टी में शामिल कर रही है लेकिन मैं यह ज़रूर जानता हूँ कि ऐसे लोग न अपने देश के हित में हुए  हैं न ही अपनी पार्टी के हित में रहेंगे लिहाज़ा अगर आपको सचमुच देश का भला करने के लिए  प्रधानमन्त्री बनने का ख्याल आया है तो सर्वप्रथम ऐसे लोगों को चिमटी से पकड़ पकड़ कर पार्टी से बाहर निकालिये जिनकी छवि खराब है  और जो दागी कहलाते हैं तथा अच्छे लोगों को ढूंढ़ ढूंढ़ कर पार्टी में सम्मिलित कीजिये ताकि आपका रथ रास्ते में पंक्चर नहीं हो


जब आपके पास अपनी ख़ुद की उज्ज्वल छवि है,  शक्ति है, सामर्थ्य है और अपार लोकप्रियता के साथ साथ गुजरात में किये गए अप्रतिम विकास के प्रमाण-पत्र हैं तो इन नामुरादों की ज़रूरत ही क्या है आपको ?

यह पत्र मैं आपको इसलिए मेल कर रहा हूँ क्योंकि  आप इस समय अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं एवं उपलब्धियों की सीढ़ी के अन्तिम डण्डे पर खड़े हैं - यदि एक सीढ़ी और चढ़ गए तो  छत पर पहुँच जायेंगे, यानी मन्ज़िल पा लेंगे परन्तु भगवान् न करे, अगर आखरी डंडे से भी फ़िसले, तो सीधे ज़मीन पर नज़र आयेंगे - रास्ते में कोई रोकने वाला नहीं मिलेगा और सच पूछो तो भ्रष्ट सदस्य किसी भी संगठन के लिए फ़िसलन ही पैदा करते हैं - आप गिरें, उठें, मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि मुझे तो अन्य बड़े कवियों की तरह  सरकार से न तो प्लॉट, फ़्लैट अथवा कोई एजेन्सी चाहिए, न ही किसी प्रकोष्ठ की अध्यक्षी, पद अथवा  राजकीय पुरस्कार की अभीप्सा है, परन्तु  देश की जनता आपसे आस लगाए बैठी है, अगर आप अपने मिशन में कामयाब न हुए तो जनता के अरमान आँसुओं में बह जाएंगे -

आदरणीय, यह अभी नहीं तो कभी नहीं का खेल है, जो जीता वही सिकन्दर होगा, हारने वाले की हालत तो सद्दाम हुसैन जैसी होने वाली है, यह अभी से  दीख रहा है क्योंकि राजनैतिक स्वार्थ अब इतने अधिक हावी हो गए हैं हरेक पार्टी पर कि  विरोधी विचारधारा का प्रत्येक व्यक्ति अब दुश्मन नज़र आने लगा है - यह दुर्भाग्यपूर्ण है परन्तु सच है

आपका प्रशंसक, समर्थक  और प्रबल हितेच्छु होने के नाते आपको सावधान कर रहा हूँ - चुनाव में जीत हो या  हार, कोई फ़र्क नहीं पड़ता - अपनी कथनी और करनी को एक रखते हुए हार भी मिले तो भी उसमें नैतिक जीत महकती है परन्तु  अपने ज़मीर को दाँव पर  लगा कर जीत भी मिले तो उसमें आत्मिक हार की बदबू आती है

एक मुख्यमन्त्री के रूप में आपने बेहतरीन  काम कर के जो वैश्विक यश अर्जित किया है वह तो कई लोगों को प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति बन कर भी नहीं मिलता ,,,,,आपसे प्रार्थना है कि इतने वर्षों में अर्जित किया हुआ यश चन्द सीटों की कीमत पर मत बेचिए …… आगे आपकी मर्ज़ी, मैं कौन होता हूँ आपकी खीर में अपना चम्मच चलाने वाला

आप विजयी हों,यशस्वी हों, दीर्घायु हों और भारत के राजनैतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हों, ऐसी शुभकामना

जय हिन्द !
अलबेला खत्री


आप विजयी हों,यशस्वी हों, दीर्घायु हों और भारत के राजनैतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हों


मगर पंजे की मजबूरी को बस झाड़ू समझता है : अलबेला खत्री


सियासत एक की दुल्हन नहीं कइयों की रानी है

ये है बदनामी मुन्नी की तो शीला की जवानी है

सियासी लोगों की आँखों में जो घड़ियाली आँसू हैं

इलेक्शन में तो मोती है, पर उसके बाद पानी है


शरम से दूर हो तुम भी, शरम से दूर हैं हम भी

नशे में चूर हो तुम भी, नशे में चूर हैं हम भी

तमाशातूर हो तुम भी, तमाशातूर हैं हम भी

अतः लंगूर हो तुम भी, अतः लंगूर हैं हम भी



सुअर कोई गन्दगी पर जो जा बैठा तो हंगामा

कुकुर कोई जो हड्डी को चबा बैठा तो हंगामा

था जिसके पास बरसों ताज दिल्ली की सियासत का

उसी पंजे को मैं झाड़ू थमा बैठा तो हंगामा



कोई चालाक कहता है, कोई आड़ू समझता है

मगर पंजे की मजबूरी को बस झाड़ू समझता है

वो उसके साथ कैसी है, वो उसके संग कैसा है ?

ये तो जिह्वा समझती है या बस लाड़ू समझता है

जय हिन्द !
अलबेला खत्री
 







झाड़ डाला है झाड़ू ने ऐसा उन्हें, आबरू उनको मुश्किल बचाना हुआ


साहित्यिक वेबसाइट ओपन बुक्स ऑन लाइन के
 तरही  मुशायरा में प्रस्तुत मेरी ताज़ा ग़ज़ल


अश्क़ आँखों से निकला, रवाना हुआ
दर्दे-दिल का मुकम्मल तराना हुआ

ज़ुल्फ़ उसने जो खोली, घटा छा गई
मुस्कुराई तो मौसम सुहाना हुआ

हुस्न दुख्तर पे जब से है आने लगा
हाय दुश्मन ये सारा ज़माना हुआ

तब से दुनिया हमारी बड़ी हो गई
जब से गैरों के घर आना जाना हुआ

चल पड़ा हूँ ठिकाना नया खोजने 
ख़त्म अपना यहाँ आबोदाना हुआ

ज़ख्म हमदर्दियों से न भर पाएंगे
फैंक दो अब ये मरहम पुराना हुआ

झाड़ डाला है झाड़ू ने ऐसा उन्हें
आबरू उनको मुश्किल बचाना हुआ

रूह प्यासी थी 'अलबेला' प्यासी रही
जिस्म का सारा पीना पिलाना हुआ

-अलबेला खत्री 








दादाजी अपने पोते की हुशियारी पर हैरान थे और आठों बादाम अपनी क़ैद से परेशान थे


सामग्री
बच्चा  : एक राज अनैतिक पार्टी
दादा    : दूसरी राज अनैतिक पार्टी
बादाम : विधायक
दांत     : आत्मविश्वास
आंत    : नीयत
जेब     : दल की साख

बच्चा   : दादाजी दादाजी, क्या आप बादाम खायेंगे ? 

दादाजी : नहीं बच्चा, मैं तो बादाम खा ही नहीं सकता,  मेरे दांत नहीं हैं

बच्चा   : तब तो ठीक है, ये रखो मेरे आठ बादाम, बाद में वापिस ले लूँगा

दादाजी : लेकिन मुझे क्यों दे रहा है, जब वापिस ही लेने हैं तो अपने पास ही रख …

बच्चा   : दादाजी, आपको इसलिए दे रहा हूँ, क्योंकि मेरी जेब फटी हुई है, कहीं गिर गए तो कोई और उठा लेगा, आपके पास रहेंगे तो मुझे ही वापिस मिलेंगे

दादाजी : लेकिन अगर मेरा मन मचल गया और मैं इन्हें कूट कूट  कर खा गया तो ?

बच्चा   : आप नहीं खाओगे, मैं जानता हूँ, क्योंकि आप सिर्फ़ दांतों से ही नहीं, आँतों से भी  कमज़ोर हैं …किसी
तरह खा भी लिए तो हज़म नहीं कर पाओगे

_________दादाजी अपने पोते की हुशियारी पर हैरान थे

_________और आठों बादाम अपनी क़ैद से परेशान थे

क्या नाटकीय दृश्य का पात्र-परिचय लिखने की ज़रूरत है या आप समझ गए ?

जय हिन्द !
अलबेला खत्री 




हिन्दी कवियों और उर्दू शायरों का संगम "काव्य-कुम्भ"


कविता के मंच पर मौलिक कविता  के अभाव को देखते हुए  कुछ पुराने कवियों को सम्मान देने और कुछ नितान्त नए रचनाकारों को  प्रोत्साहन देने के लिए निर्मित काव्य-कुम्भ  का पहला भाग बन कर तैयार है और जल्द ही इसका लोकार्पण समारोह  होगा .

kavyakumbh album by hasyakavi albela khatri

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अरे हरामखोरो ! तुम्हें फूल ही सूंघना है तो गुलफ़रोश से खरीद कर सूंघ लो, कौन रोकता है ?


जहाँ देखो वहीँ बलात्कारी खड़े हुए हैं,  हर अख़बार, हर चैनल  बलात्कार  के समाचारों से भरा पड़ा है . 

आजकल बलात्कार, विशेष रूप से गैंगरेप  कुछ ज़्यादा  ही होने लगे हैं जो कि  समाज के लिए शर्म और दुःख की बात है .  कहीं नाबालिग के साथ दुष्कर्म हो रहा है तो कहीं नाबालिग के द्वारा दुष्कर्म हो रहा है ..........क्या हो गया है  भाई ?  कहाँ जा रहा है समाज ?

ये इतने सारे स्कूल , कालेज, गुरूकुल, इतने सारे  साधू संतों के प्रवचन,  ये इतने सारे धार्मिक  ग्रन्थ और इतने सारे क़ानून मिल कर भी कोई रोकथाम नहीं कर पा रहे हैं ...........हैरत है !

अरे हरामखोरो ! तुम्हें  फूल ही सूंघना है  तो गुलफ़रोश  से खरीद कर सूंघ लो, कौन रोकता है ?  जगह जगह  एक से बढ़ कर एक दुकान सजी है  फूलों की ..........पैसा फैंकों  और  अपना शौक पूरा कर लो .........ये  ज़बरदस्ती किसी के  बगीचे में  घुस कर  फूल तोड़ने  की ज़रूरत ही क्या है ?

जय हिन्द !

परमपाखण्डी बाबा अलबेलानंदजी परमकंस के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार

https://www.facebook.com/AlbelaKhatrisHasyaKaviSammelan





लो भाई, आसाराम बापू तक पहुंचा दो इस पोस्ट को ...........



आसाराम अगर लीपापोती न करते और  कानून से मुंह न छिपाते बल्कि  पीड़िता द्वारा शिकायत दर्ज़ कराने का पता चलते ही ख़ुद चल कर पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण कर देते यह कहते हुए कि 

" मेरी पोती समान एक मासूम बच्ची ने मुझ पर देहशोषण का इतना घिनौना आरोप लगाया है कि सिर्फ़  मैं नहीं बल्कि मेरे कारण पूरा संत समाज कलंकित हो गया है इसलिए  मुझे अब संत कहलाने और  संसार में जीवित रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है . लिहाज़ा  मैं स्वयं को कानून के सुपुर्द करते हुए प्रार्थना करता हूँ  कि  मुझे कठोर से कठोर दंड देते हुए कम से कम दो बार फाँसी पर लटकाया जाये, एक बार मेरे तथाकथित अपराध के लिए और दूसरी बार  मेरे करोड़ों जिज्ञासु शिष्यों  को होने वाली आत्मिक पीड़ा  के लिए .......मुझे अपने ऊपर लगे  आरोप पर सफ़ाई में कुछ नहीं कहना है . एक साधु पर इतना बड़ा आरोप लग जाना ही पर्याप्त है .......लिहाज़ा या तो एक महीने के भीतर भीतर कानून अपने  विधिविधान से मेरे प्राण ले ले  अन्यथा  मैं स्वयं ही अपने आश्रम में जीवित समाधि  ले लूँगा . इतना बड़ा बोझ ले कर न मैं अब जी  सकता हूँ और न ही साधना कर सकता हूँ

मेरी मृत्यु के समय  मेरे तमाम शिष्य पूरी तरह शांति बनाये रखें और हरी ॐ का जाप करते रहें . भगवान् उन भले लोगों का भी भला ही करे जिन्होंने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों के लिए मुझ पर  यह कालिख पोतने में सफलता प्राप्त कर ली . हमेशा की तरह मैं उनका यह अपराध क्षमा भी करता हूँ  साथ ही  उस नन्ही बिटिया को उसके सुखी जीवन की कामना करते हुए अपनी ओर से सवा करोड़ रूपये की रकम भी भेंट करने का आदेश  अपने आश्रम के  प्रबंधकों को देता हूँ  ....हरी ॐ  हरी ॐ  हरी ॐ "

अन्य  नौटंकी करने के बजाय आसाराम ऐसा करते तो  न केवल शिष्यों और साधु समाज की बल्कि आम जनता और पुलिस की भी पूर्ण सहानुभूति उन्हें मिल जाती .  क्योंकि  हमारा देश पढ़े लिखे गंवारों का देश है  जहाँ  किसी के समर्थन या विरोध में भीड़ इकठ्ठा होते हुए देर नहीं लगती .

जय राम जी की बोलना पड़ेगा .

परमपाखण्डी बाबा अलबेलानंदजी परमकंस के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार
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albela khatri on aasaram bapu

albela khatri on aasaram bapu




















बुढ़ापे में पीली हो जाती है और मौत पर काली हो जाती है


न तो पेट भर पाता है सदा के लिए, 

न ही पेट के नीचे की आग बुझा पाता है

 

देह की गंध

एक सी नहीं रहती

बदलती रहती है रंग

बदलते समय के संग

शैशव की गंध श्वेत होती है

किशोरवय में गुलाबी और यौवन में सुर्ख़ होती है

जो

अधेड़ावस्था में जोगिया होती हुई

बुढ़ापे में पीली हो जाती है

और

मौत पर काली हो जाती है

काली पड़ चुकी गंध में कोई और रंग चढ़ नहीं सकता

इसीलिए तो मानव  का वय-रथ आगे बढ़ नहीं सकता

योनिद्वार से निकल कर

हरिद्वार तक की यात्रा करने वाला मनुष्य

पेट के नीचे से  जन्म लेता है

और

जीवन भर पेट व  पेट के नीचे की क्षुधा

भरने का प्रयास करता है

मगर अफ़सोस !

न तो पेट भर पाता है सदा के  लिए

न ही पेट के नीचे की आग बुझा पाता है

घर्षण से लेकर स्खलन तक

अर्थात 

सम्भोग से ले  समाधि तक

तमाम रंग उभरते हैं उभारों की तरह

और

जलाते हैं मनुष्य को अंगारों की तरह

देह जब तक  जीवित रहती, वासना में जलती है

इक  धधकती आग हरदम तहे-दिल में पलती है

ये गाड़ी ज़ीस्त की ऐसे चलती है, ऐसे ही चलती है

-अलबेला खत्री 

 

हास्यकवि अलबेला खत्री की नवीनतम रचना आज रात सब टीवी पर वाह वाह क्या बात है में ...


प्यारे मित्रो ! 

लीजिये एक बार फिर आप से रूबरू  होने का  अवसर आया है .

 कोलाहल के राज में कविता भले ही आज हाशिये पर चली गयी है 

फिर भी कविता के नाम पर  जो कुछ अच्छा हो रहा है उसमें  एक 

काम  सब टीवी पर वाह वाह क्या बात है  कार्यक्रम भी है . इस 

चर्चित प्रोग्राम में  एक बार फिर मैं आ रहा हूँ  अपनी कुछ नवीनतम  

हास्य रचनाओं के साथ ...........देखना  न भूलें ......


तो फिर आज रात दस बजे ...........




जय हिन्द ! 
-अलबेला खत्री 



hasyakavi albela khatri heartly welcome you...........pl. send your profile urgently




यदि ईश्वर ने आपको प्रतिभा दी है 

तो हम आपको अवसर देंगे

पूरा अवसर देंगे अपनी प्रतिभा दिखाने का ....



फ़िल्म,टी वी एवं  स्टेज पर्फ़ोर्मेन्स के लिए तुरन्त ज़रूरत है :

गीतकार
       संगीतकार
            अभिनेता
                 अभिनेत्री
                        नृत्य कलाकार
                                 हास्य  कलाकार

*** ज़रूरत सिर्फ़ उन लोगों की है जो प्रतिभावान होने  के 


साथ-साथ  कला के प्रति पूर्ण समर्पित हैं, कला में ही अपना 

कैरियर बनाना चाहते हैं  और कैरियर बनाने के लिए कुछ 

भी कर गुज़रने के लिए कटिबद्ध हैं .


*** शौकिया कलाकारों के लिए कोई जगह नहीं


पंजीकरण के लिए अपना प्रोफाइल तुरन्त यहाँ ईमेल करें :
tcmusicbank@yahoo.com


 



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