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zara yaad karo qurbani by albela khatri & art india creation

ZARA YAAD KARO QURBANI



jai hind !
albela khatri

the song dedicated to my best friend d v patel nashville tn



प्रिय मित्र  डी वी पटेल नैशविल टैनिसी को समर्पित गीत


तर्ज़ : कहो न प्यार है

नयनों से नेह झलके,  वाणी में रसधार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

भारत की है ये रौनक, अमेरिका की बहार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

सूरत, नवसारी,वलसाड के गांव-गांव से आये
संग अपने,  गुजराती माटी की ख़ुशबू लाये
आ कर ख़ूनपसीने  से यहाँ वैभव के फूल खिलाये
मेहनत के ये पुजारी, संस्कृति से इन्हें प्यार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

हॉटेल और मॉटेल के बिजनैस को दिल से अपनाया
अतिथि देवो भवः की कहावत का निजधर्म निभाया
काम किया है जान लगा कर, तब ये रंग है आया
अब इनके हाथों में ये पूरा कारोबार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

एलपीएस ऑफ़ यूएसए सीनियर सिटिजन्स का प्यारा
विमेन्स डेवलेपमेन्ट और यूथ पावर का देखो नज़ारा
स्कॉलरशिप और मेट्रो-मोनियल  की बहती है धारा
मीटिंग्स में है मधुरता, कन्वेन्शन चमकदार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

शंकर, सीएम, नट्टू, रमण संग धनसुख की बलिहारी
अमृत, भग्गू, मुकेश, भरत, हसमुख ने शान सँवारी
किरीट, समीर ने रंग जमाया, आगे  सुनील की पारी
नैशविल के डाह्याभाई सेवा में लगातार है
ये लेउवा पाटीदार है
ये लेउवा पाटीदार है

-अलबेला खत्री
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उत्तराखंड की महा आपदा पर एक घनाक्षरी अलबेला खत्री की



हास्यकवि अलबेला खत्री लाया है आपके लिए अद्भुत और अनूठा हास्य कवि सम्मेलन




यह एक ओछी और घटिया मानसिकता है जिससे उर्दू वालों को बचना चाहिए



अभी हाल ही एक नवोदित हिन्दी कवयित्री को सिर्फ़ इसलिए 

सरे-महफ़िल शर्मसार होना पड़ा क्योंकि उसे चन्द उर्दू लफ़्ज़ों का 

 मुकम्मल ज्ञान नहीं था . अपने आप को खां साहब समझने वाले 

कुछ उर्दू शायरों ने उसकी खूब लाहनत-मलामत की .........यह देख 

मुझे दुःख हुआ . बहुत दुःख हुआ .


उर्दू में लिखने वाले लोग हिंदी में लिखने वालों को नीचा दिखाने का 


कोई मौका नहीं चूकते . मौका न मिले तो उसे पैदा कर लेते हैं . यह 

एक ओछी और घटिया मानसिकता है जिससे उर्दू वालों को बचना 

चाहिए . क्योंकि कुछ शब्द उर्दू में ऐसे हैं जिनके बारे में सही उच्चारण 

का हर हिन्दी  भाषी को पता नहीं है . इसका मतलब यह नहीं कि आप 

हिन्दी भाषी का मज़ाक उड़ाने के अधिकारी हो गए .

हार्दिक दुःख सहित


-अलबेला खत्री

आपसे पहले भी बड़े बड़े तुर्रमखां इस ज़हर को वितरित कर के गए हैं



सच कहते हो राहुल बाबा

सत्ता इक ज़हर है



लेकिन आपकी मम्मी की आँखों में आंसू क्यों आ गए आपको यह 


ज़हर थमाते हुए, यह मेरी समझ में नहीं आया . क्योंकि  आपको तो 

यह ज़हर सिर्फ बांटना है, पीना और पी कर मरना तो जनता को है .


आपसे पहले भी  बड़े बड़े तुर्रमखां  इस ज़हर को वितरित कर के गए हैं . 


कुछ आपकी पार्टी वाले थे, कुछ उनकी पार्टी वाले थे, जो भी आया, 

जनता के लिए ज़हर ही लाया .........अब आपकी मम्मी ने आपको दिया 

है  तो आप भी यही कीजिये ...लीजिये लीजिये जनता की बची खुची 

जान आप भी लीजिये

जय हिन्द ! 


नई प्रतिभाओं के लिए सुनहरा अवसर ..........




नवोदित कवियों / कवयित्रियों को उनकी काव्य-प्रतिभा की चमक दिखाने  

का एक बड़ा अवसर देने के लिए एक शानदार  ऑडियो एल्बम  काव्य-कुम्भ 

का निर्माण तीव्र गति से चल रहा है . यों तो सूरत और इसके आसपास रहने 

वाले रचनाकारों  के लिए प्राधान्यता रहेगी परन्तु अन्य क्षेत्रों के  कलमकारों 

का  भी स्वागत है .


जिन प्रतिभाओं के पास अपनी काव्य कुशलता दिखाने  के लिए कोई मंच 


नहीं हैं या जो लोग कवि-सम्मेलनीय मंच पर आने के बजाय केवल 

साहित्य-सृजन में ही विश्वास रखते हैं . उन्हें इस अनुपम अवसर का लाभ 

अवश्य उठाना चाहिए . जल्द ही यह ऑडियो एल्बम  अपनी पूरी भव्यता के 

साथ  तैयार हो कर  देश-दुनिया के काव्यरसिकों  के लिए उपलब्ध कराया 

जाएगा .


यदि आप कुछ ऐसा लिखते हैं जो समाज  तक पहुंचना चाहिए  तो आज, 


अभी मुझ से संपर्क करें .


-अलबेला खत्री


मोबाइल : 92287 56902,  9227156902
Email  : albelakhatrisurat@gmail.com


 

इस सप्ताह हास्य कवि अलबेला खत्री की काव्य प्रस्तुतियां महाराष्ट्र और गुजरात में

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गुटखा ले लेगा उसकी जान, कर दो सभी को सावधान



गुटखा ये पाउच वाला,


जिसने भी मुँह में डाला


गुटखा ले लेगा उसकी जान, कर दो सभी को सावधान



कितने ही मर गये इससे,


कितने ही मिट गये इससे


बूढ़े, बालक, नौजवान,  कर दो सभी को सावधान



संतूर, तुलसी, चुटकी, जे पी, दरबार कोई


मानिकचंद, मूलचंद हों या अनुराग कोई


हो चाहे रजनीगन्धा, पानपराग कोई


सबके सब हैं ज़हरीले, कत्थई, भूरे या पीले


सबके सब हैं एक समान, कर दो सभी को सावधान ......




सड़ियल सुपारी डाली, सस्ता ज़र्दा मिलाया


लौंग, इलायची, ख़ुशबू, ठंडक, किवाम दिखलाया


बाकी बस खड़िया मिट्टी, कोरा चूना लगाया


चमड़ी छिपकलियों वाली, सांपों की हड्डियाँ डालीं


नशा है या मौत का सामान, कर दो सभी को सावधान ........




तिल्ली को खा जाता है, पत्थरी, अल्सर देता है


किडनी का दुश्मन है ये  कैन्सर  भी कर देता है


खाने वाले का जीवन बर्बाद कर देता है


सबसे गन्दी बीमारी, चालू रहती पिचकारी


दफ़्तर हो, घर हो या दूकान , कर दो सभी को सावधान ..........

-हास्यकवि अलबेला खत्री 


श्री मुछाला महावीर जी यात्रा संघ के अंतिम चरण में  संघपति श्रीमती  मोहिनी बाई  देवराजजी खांटेड़ के सान्निध्य  में यह गीत तीर्थयात्रियों के लिए  घाणेराव में प्रस्तुत किया गया 


संघपति श्रीमती मोहिनी बाई देवराजजी खांटेड़ ( जैन ) चेन्नई 

राजस्थान का मान, गौड़वाड़ की शान और घाणेराव की पहचान है चेन्नई का खांटेड़ परिवार



प्रारब्ध से, सौभाग्य से  अथवा प्रभु की कृपा से मुझे  पिछले कुछ दिन एक 

ऐसे  अनुपम, अद्वितीय और असाधारण परिवार के साथ गुज़ारने का अवसर 

प्राप्त हुआ जो न केवल  सराहनीय, सम्माननीय  और उल्लेखनीय  है बल्कि  

अनुकरणीय भी है . धर्म  के प्रति सतत  समर्पित, मानवसेवा के प्रति  सतत 

सजग  और  जैन परम्पराओं के ध्वजवाहक  के रूप में  देश,काल और समाज 

के हितार्थ  हर पल, हर क्षण  अपनी  उपस्थिति  से प्रेरित  करने वाले इस 

परिवार का परिचय  आपसे करते हुए मुझे आंतरिक  ख़ुशी है . 


मूल रूप से राजस्थान  में गौड़वाड़ की परम पुनीत धर्म नगरी घाणेराव के तथा 

हाल में चेन्नई में सुशोभित स्व . देवराजजी सागरमलजी जैन ( खांटेड़ ) का यह 

वृहद्, समृद्ध और सुप्रसिद्ध परिवार ममता व करुणा  की साक्षात् मूरत श्रीमती  

मोहिनीबाई  देवराजजी जैन के नेतृत्व  में जिस प्रकार भारतीय परम्पराओं के  

साथ साथ धर्म और मानवीय  सरोकारों का पोषण कर रहा है  वह अद्भुत और 

अविश्वसनीय  सा लगता है  परन्तु  यह आश्चर्यजनक सत्य  मैंने अपनी आँखों से 

देखा है . इसलिए मैं  भीतर तक अभिभूत हूँ . 


आइये, पूरा परिचय  करने से पहले एक झलक देख लीजिये इस परिवार की जिसमे  

बीचोबीच विराजित हैं  माताजी  और  दायें-बाएं  बैठे हैं  धर्म परायण  आठ बेटे  

और सुसंस्कृत आज्ञाकारी आठ पुत्रवधुएँ .......



अगले अंक में मैं आपको विस्तार से बताऊंगा इस परिवार के बारे में कुछ ऐसी  

बातें जिन्हें जान  कर आप भी श्रद्धा  से नत मस्तक हो जायेंगे  


-अलबेला खत्री 

स्व . देवराजजी सागरमलजी खांटेड़ ( जैन ) एवं श्रीमती मोहिनी बाई देवराजजी  जैन का धर्मावलम्बी संयुक्त परिवार 





ओपन बुक्स ऑन लाइन डॉट कॉम पर सौरभ पाण्डेय जी ने जो टिप्पणी की है उसने मेरा हौसला बुलंद कर दिया है



लगातार  नव सृजन  और नवोदित  प्रतिभाओं  को  मार्गदर्शन  देने के  अभियान में  सतत सक्रिय  साहित्यिक साईट ओपन बुक्स ऑन लाइन डॉट कॉम पर  चल रहे  25 वें लाइव महा उत्सव में इस बार का विषय है दीपावली . इसमें शिरकत करते हुए कल  रात मैंने दो कवित्त  दीपावली विषय पर  प्रस्तुत किये थे जिन पर  महोत्सव  संचालक  आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी ने जो टिप्पणी  की  है  उसने मेरा  हौसला इतना बुलंद  कर दिया है  जितना कि  बुलंद दरवाज़ा .

आइये एक झलक  आप भी देखिये ... मैंने क्या लिखा  और पाण्डेय जी ने  क्या प्रतिसाद  दिया : 




                                       कवित्त - दीपावली
काली कलमुंही रात, काली ही रहेगी यारा, फौजियों के लिए सियाचीन की दीपावली
दीपावली पर्व बनी या तो धनपतियों का या फिर मनेगी सत्तासीन की दीपावली 
गाँवों  में भले ही लोग खाते हों मिठाई पर, शहर में दारू-नमकीन की दीपावली
दीये चाइनीज़ यहाँ, लड़ियाँ भी चाइनीज़, भारत में मन रही चीन की दीपावली 

दीपावली आई है तो स्वागत करो रे भाई, ऐसे वैसे जैसे तैसे, खुशियाँ मनाइये
पैसे नहीं तो क्या हुआ, लोक दिखावे के लिए,  क़र्ज़ ले के आँगन में लड़ियाँ लगाइए
पड़ोसी को अस्थमा है, भले होवे तुम्हें क्या है, छोड़िये लिहाज़ फुलझड़ियाँ जलाइये
लक्ष्मीजी की पूजा भला, इससे अच्छी क्या होगी, लक्ष्मी छाप पटाखों के चीथड़े उड़ाइये
- अलबेला खत्री



आदरणीय अलबेलाजी, आपका स्वागत करते हुए आपकी संवेदनशीलता और आपकी उच्च सोच को सादर प्रणाम करता हूँ.  पर्व और त्यौहार समाज के क्रमशः श्रद्धा तथा उत्सव-धर्मिता का परावर्तन हैं. कवि मात्र कथ्य नहीं कहता बल्कि तथ्यों की भली-भाँति निरीक्षण कर उसकी समीचीन रिपोर्ट इस समाज को देता है. आपके अंदर के प्रबुद्ध संवेदनशील कवि को मैं हृदय से आदर देता हूँ जिसने दीपावली के नाम पर मात्र सतही चकाचौंध पर बखूबी फटकार लगायी है.

काली कलमुंही रात, काली ही रहेगी यारा, फौजियों के लिए सियाचीन की दीपावली
फ़ौजियों की बात कर आपने राष्ट्र-परिवार के सबसे भावुक किन्तु स्बसे उत्तरदायी व कर्मनिष्ठ बेटे को साग्रह याद किया है.

दीपावली पर्व बनी या तो धनपतियों का या फिर मनेगी सत्तासीन की दीपावली

सही बात .. बहुत अच्छे !

गाँवों  में भले ही लोग खाते हों मिठाई पर, शहर में दारू-नमकीन की दीपावली

आज की शहरी ज़िन्दग़ी का कोरा सच ..

दीये चाइनीज़ यहाँ, लड़ियाँ भी चाइनीज़, भारत में मन रही चीन की दीपावली

दिल खून के आँसू रो रहा है, अलबेला भाईजी.  जो कुछ अंदर था, अंदर भी धधक रहा था, आपने उसे सतह पर ही नहीं, आँखों के सामने ला कर रख दिया है. एक ऐसा घिनहा सच जिसे देख-बूझ कर भी लोग निगल रहे हैं या निगलने को अभिशप्त हैं.



दीपावली आई है तो स्वागत करो रे भाई, ऐसे वैसे जैसे तैसे, खुशियाँ मनाइये

जिस घर की असह्य आर्थिक दशा हो या एक जून को दूसरे जून से मिलाने की जुगत में जो परिवार लसर रहा हो, उसकी चिंतन करते आप एक सर्वदर्शी की तरह प्रस्तुत हो रहे हैं, आदरणीय, सादर प्रणाम .. .

पैसे नहीं तो क्या हुआ, लोक दिखावे के लिए,  क़र्ज़ ले के आँगन में लड़ियाँ लगाइए

इस पारखी दृष्टि ने क्या नहीं देख लिया है, भाई !.. . आह, क्या दशा है !

पड़ोसी को अस्थमा है, भले होवे तुम्हें क्या है, छोड़िये लिहाज़ फुलझड़ियाँ जलाइये

असंवेदनशीता को और क्या कहा जाय ! डीजे और पटाखों का शोर आत्ममुग्ध लोगों को कितना विभोर कर रहा है इसकी बानगी प्रस्तुत की है आपने. अस्थमा के मरीज़ को धुआँ .. वाह, जलते को क्या सेंधा नमक लगाती पंक्तियाँ हैं !!

लक्ष्मीजी की पूजा भला, इससे अच्छी क्या होगी, लक्ष्मी छाप पटाखों के चीथड़े उड़ाइये

शब्द नहीं हैं. अपनी जड़ों से कटे या काट दिये पौध की कैसी समझ होती है, यह बखूबी उभर कर बाहर आ रहा है. बहुत ही सधा और उन्नत प्रयास हुआ है, भाईजी.

आपकी दोनों घनाक्षरियों पर शत्-शत् बधाइयाँ.




आदरणीय सौरभ भाईजी, सादर  वंदन !
आपकी कृपापूर्ण  दृष्टि ने आज सुबह सुबह मुझ पर जो नेह-वृष्टि की है उससे समूची सृष्टि सरस हो गयी लगती है .  सचमुच आपके उर भीतर  एक ऐसा  शब्द-कोष है जो सभी रचनाकारों  को  लगातार  ऐसी  शब्दावली से नवाजता है जिसे आजीवन याद रखा जाए तो दिशा सूचक  का लाभ मिल सकता है .

मेरी मामूली  तुकबंदियों पर  आपकी गैरमामूली  विवेचना  इस बात की द्योतक है कि  आप  पूर्णतः  प्रेम और रस में पगे  हुए हैं।  मैं आपको सादर प्रणाम करता हूँ भाईजी  और प्रयास करूँगा  की भविष्य में  और बेहतर रचनाएं  इस मंच पर रख सकूँ

-अलबेला खत्री 


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पैसों को आग लगाने से अच्छा है उन्हें किसी नेक काम में लगाओ ...... दीपावली लक्ष्मी जी के पूजन का त्यौहार है, उनके अपमान का नहीं


आपके वृद्ध पिताजी  को नींद नहीं  आ रही है, सर दर्द के मारे वे  तड़प रहे 

हैं, उन्हें  इतनी तकलीफ है कि  किसी की  कोई आवाज़ नहीं सुहाती . ऐसे 

में  आपका पड़ोसी जोर जोर  से धमाके करे  बम फोड़ने के  तो आपको कैसा  

लगेगा  ?  आपकी  पत्नी  ने  कुछ ही दिन पहले  शिशु को जन्म दिया है . 

बच्चा  कमज़ोर है  और  अत्यंत छोटा भी ...लेकिन  आपके न चाहते हुए 

भी  बड़े बड़े धमाके हो रहे हों  और ज़हरीला धुआं  आपके घर में आ रहा हो 

 तो आपको कैसा लगेगा  ?  किसी के घर कोई  मौत हो गयी हो,  वहां मातम 

का माहौल  हो  और उनके घर के आगे  ही अनार और चकरियां  अथवा 

फुलझड़ियों की  रौशनी  हो, तो उस घर के लोगों को कैसा  लगेगा ?


पैसों को  आग लगाने से अच्छा है  उन्हें किसी नेक काम  में लगाओ ......


दीपावली लक्ष्मी जी के पूजन का त्यौहार है, उनके अपमान का नहीं ....इसलिए

  लक्ष्मी छाप  अथवा गणेश छाप  बम  फोड़ कर  देवी देवताओं  के चीथड़े  

उड़ने के बजाय इस दिन  अधिकाधिक काम करो  और लक्ष्मीजी  को घर ले 

कर आओ ..यही सही पूजा है .....जलाना ही है तो किसी गरीब के घर का चूल्हा  

जलाओ, किसी मजदूर  के बच्चों को नए वस्त्र  दिलाओ  किसी  बीमार  को फल 

खिलाओ ..अपने लिए तो सब जीते हैं  प्यारे ...कुछ तो ध्यान  औरों  का भी रखें 

..आखिर  हम इंसान हैं


जय हिन्द ! 

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जीवन के दोहे





छोटी सी यह ज़िन्दगी, छोटा सा संसार 


छोटे हो कर देखिये, मिलता कितना प्यार 



अपनों की परवाह तो करते हैं सब लोग 


ग़ैरों की ख़िदमत करो, ये है सच्चा योग 



मेरे घर के सामने,  रहती है  इक हूर


दिल के है नजदीक पर, बाहों से है दूर 



पुरखे अपने चल दिए, करके अच्छे  काम 


अपनी यह कटिबद्धता, नाम न हो बदनाम 



तेरी मेरी क्या करूँ,  क्या है इसमें सार 


कोशिश है बाँटा करूँ, सबको अविरल प्यार

- अलबेला खत्री

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अलबेला खत्री कृत जय माँ हिंगुलाज के भव्य लोकार्पण समारोह के साक्षी बने ब्रह्मक्षत्रिय समाज के दिग्गज महानुभाव

उदघाटक एवं लोकार्पणकर्ता श्री विजय एस ठाकुर -  पुणे, मुख्य अतिथि श्री ओम प्रकाश छूंछा - मुंबई, समरोहाध्यक्ष श्री जयेंद्रभाई खारावाला - अहमदाबाद, श्रीमती खारावाला एवं स्वागताध्यक्ष श्री हुकमीचंद भूत -सूरत 

उदघाटक एवं लोकार्पणकर्ता श्री विजय एस ठाकुर -  पुणे, मुख्य अतिथि श्री ओम प्रकाश छूंछा - मुंबई, समरोहाध्यक्ष श्री जयेंद्रभाई खारावाला - अहमदाबाद, स्वागताध्यक्ष श्री हुकमीचंद भूत -सूरत  एवं विशेष अतिथि श्री चुन्नीलाल किरी-रानीवाड़ा

जोधपुर से पधारे श्री कानदान  बारहठ को उनके कार्यों के लिए सम्मानित करते हुए अतिथि महानुभाव 

माँ हिंगुलाज की आरती में सम्मिलित सभी अतिथिजन उदघाटक एवं लोकार्पणकर्ता श्री विजय एस ठाकुर -  पुणे, मुख्य अतिथि श्री ओम प्रकाश छूंछा - मुंबई, समरोहाध्यक्ष श्री जयेंद्रभाई खारावाला - अहमदाबाद, स्वागताध्यक्ष श्री हुकमीचंद भूत -सूरत  एवं विशेष अतिथि श्री चुन्नीलाल किरी-रानीवाड़ा, श्री लक्ष्मीचंद गेला -बिल्लीमोरा


माँ हिंगुलाज की आरती में सम्मिलित सभी अतिथिजन उदघाटक एवं लोकार्पणकर्ता श्री विजय एस ठाकुर -  पुणे, मुख्य अतिथि श्री ओम प्रकाश छूंछा - मुंबई, समरोहाध्यक्ष श्री जयेंद्रभाई खारावाला - अहमदाबाद, स्वागताध्यक्ष श्री हुकमीचंद भूत -सूरत  एवं विशेष अतिथि श्री चुन्नीलाल किरी-रानीवाड़ा, श्री लक्ष्मीचंद गेला -बिल्लीमोरा

उसने ही विष दे दिया, समझा जिसे तबीब





पाँच दोहे आँसू भरे


राजनीति के मंच पर, चढ़ गए आज दबंग 


फूट फूट कर रो रहे, ध्वज के तीनों रंग 



गधा जो देखन मैं चला, गधा न मिलया मोय 


तब इक नेता ने कहा, मुझसा गधा न कोय 



उजली खादी पहन के, करते काले काम 


इनका बंटाधार अब, करदो मेरे राम 



अभिव्यक्ति को घोंट कर, करो जेल में बन्द 


लोकराज के नाम पर, करते जाओ गन्द



हाय
हमारे  मुल्क का, फूटा हुआ नसीब 

उसने ही विष दे दिया, समझा जिसे तबीब 



-जय हिन्द !  

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ऊर्जा का अथाह भण्डार : कीर्तिदान गढ़वी


प्यारे मित्रो ! पिछले कुछ दिनों में 'जय माँ हिंगुलाज' की निर्माण प्रक्रिया में  
कुछ ऐसे अनुभव हुए  जिन्होंने  मन को आनन्द से भर दिया . इन ख़ुशनुमा  
एहसासों को मैं आपके साथ  बांटना चाहता हूँ . जिन लोगों के साथ भी काम 
किया, सभी ने इतना मृदुल व्यवहार किया कि  यह विश्वास और ज़्यादा मजबूत 
हो गया कि  सरस्वती के सच्चे  साधक  चाहे कितने ही ऊँचे शिखर पर क्यों न 
जा बैठें...अपनी विनम्रता नहीं छोड़ते.........


ऊर्जा का अथाह भण्डार : कीर्तिदान गढ़वी


गुजराती लोक संगीत के सुप्रसिद्ध  कलाकार  कीर्तिदान गढ़वी  से जब हमने दो 

रचनाएं गाने के लिए कहा तो पहले तो उन्होंने  यह कह कर मना कर दिया कि 
वे समयाभाव के कारण इतनी दूर नहीं आ सकते.......लिहाज़ा हम उदास हो गये 
क्योंकि  उन दो गानों को  हमने बनाया ही कीर्ति भाई के लिए था . इसलिए 
किसी और का स्वर लेने के बजाय हमने गीत ही छोड़ने का मन बना लिया लेकिन  
मुम्बई रवाना होने  के ठीक एक दिन पहले ख़ुद उन्होंने  फोन किया कि मैं सापुतारा 
आ रहा हूँ........अगर चाहो तो  रास्ते में आपकी  रेकॉर्डिंग करते हुए  निकाल 
जाऊँगा . ये सुन कर पारस सोनी ( संगीत संयोजक) और मेरी ख़ुशी का ठिकाना 
न रहा .


कीर्तिदान गढ़वी आये....गायन किया और ऐसा ज़बरदस्त किया कि   मन आनन्द 

से झूम उठा. स्वर मन्दिर स्टूडियो सूरत  का कोना कोना नाच उठा, ऐसा एहसास 
हुआ..........उल्लेखनीय  है कि कीर्तिदान जी ने न केवल अपने ऊर्जस्वित व्यक्तित्व  
से हमें दीवाना कर दिया बल्कि माँ हिंगुलाज में श्रद्धा के कारण पारिश्रमिक  भी बहुत 
कम लिया . मुझे भरोसा है कि  कीर्तिदान  का आगमन  सिर्फ़ और सिर्फ़  माँ 
हिंगुलाज  की  अनुकम्पा  से हुआ . कदाचित माँ हिंगुला ख़ुद चाहती थीं कि  कीर्ति 
भाई आये और उनकी महिमा गाये ...........

धन्यवाद कीर्तिदान !  जय हो माँ हिंगुला !

-अलबेला खत्री


अगली पोस्ट  में.............भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा   ( जारी )

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.

'जय माँ हिंगुलाज' एलबम का 80 % काम पूर्ण हो चुका है .


प्यारे  मित्रो !

यह बताते हुए  मुझे ख़ुशी है कि 'जय माँ हिंगुलाज' एलबम का 80 % 


काम पूर्ण हो चुका है . भजन सम्राट अनूप जलोटा, साधना सरगम, 

पार्थिव गोहिल, कीर्तिदान गढ़वी, अर्णब चटर्जी, दिपाली सोनी  व 

अलबेला खत्री  द्वारा स्वरबद्ध किये गये भजनों में अब मिक्सिंग और 

कोरस का काम पूरा होते ही  वीडियो का काम शुरू हो जाएगा .


इस एलबम के गीतों की रचना व कम्पोजीशन  अलबेला खत्री ने की 


है जबकि संगीत संयोजन  पारस सोनी ने किया है . आशा है, यह 

भेन्ट  आपको पसन्द आएगी .


जय माता दी 

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आज़ादी के बाद जो है हाल मेरे देश में


 


पूछते हैं आप तो

बताऊंगा ज़रूर बन्धु


आज़ादी के बाद जो है हाल मेरे देश में


 
वोटरों के पेट पीछे


पिचके चले हैं और


लीडरों के फूले- फले गाल मेरे देश में



नीला नीला गगन भी

 
लगता सियाह आज


धरा हुई शोणित से लाल मेरे देश में



गद्दारों की भीड़ बढती

 
ही चली जा रही है


खुद्दारों का पड़ा है अकाल मेरे देश में



जय हिन्द !

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नयी उपलब्धियों और नयी सन्तुष्टि के लिए

नयी सुबह 

नया  उत्साह 


नया साहस 


नया लक्ष्य 


नयी सफलता 


नयी उपलब्धियों 


और नयी सन्तुष्टि के लिए 


नया  नमस्कार और नयी  शुभकामनायें 


__आप सब का दिन शुभ एवं सफलता भरा हो 


__अलबेला खत्री 

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ब्रह्मखत्री समाज का ज़बरदस्त समर्थन मिल रहा है जय माँ हिंगुलाज को

 jai maa hingulaj  coming soon

presented by albela khatri




http://jaimaahingulaj.blogspot.in/2012/08/blog-post.html

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