"तू सोलह बरस की, मैं सत्रह बरस का"
ऐसे गीत और गाने तो अपने बहुत सुने होंगे
परन्तु हमारा हीरो ज़रा हट के है, क्योंकि ये सत्रह का नहीं,
सत्तर साल का है जिसकी हीरोइन सोलह की नहीं, पैंसठ की है,
लेकिन आज उसके दिल में कुछ कुछ हो रहा है ......मजबूरन हीरो को
ये कहना पड़ता है :
आस पास हूँ मैं सत्तर के, तू है पैंसठ साल की
अब हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की
सूख गई सारी सरितायें, रस का सागर सूख गया
सूख गई है गगरी तुम्हारी, मेरा गागर सूख गया
रोज़ मचलने वाला सपनों का सौदागर सूख गया
तन की राधा सूखी, मन का नटवरनागर सूख गया
ख़्वाब न देखो हरियाली के..........
ख़्वाब न देखो हरियाली के, ये है घड़ी अकाल की
अब हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की-
hindi hasyakavi sammelan in mangalore by MRPL
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शानदार, शानदार, शानदार …………………
शानदार और जानदार रहा मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा
राजभाषा विभाग के तत्वाधान में डॉ बी आर पाल द्वारा आ...
11 years ago
5 comments:
वाह,वाह!..बहूत मजेदार गीत की रचना की है आपने अलबेला जी!..प्रेम गीत गाने के लिए उम्र का तकाजा होना भी नहीं चाहिए!
वाह!...बहुत ही मजेदार
ख़्वाब न देखो हरियाली के, ये है घड़ी अकाल की
अब हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की
जै कन्हैयालाल की
शानदार
प्रणाम
sunder vyangy kavita..
albelaji! dhanyvad.
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