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Albela Khatri

मत दिखलाना घाव किसी को, लोग नमक घिसने लगते हैं




रिश्ते जब रिसने लगते हैं 

तब परिजन पिसने लगते हैं 

मत दिखलाना घाव किसी को 

लोग नमक घिसने लगते हैं 

-अलबेला खत्री 

6 comments:

Shah Nawaz February 18, 2013 at 10:43 AM  

सही कहा भाईजान!

ऋषभ शुक्ला February 18, 2013 at 4:09 PM  

मै भी कविता लिखता हूँ और मै किसी मंच पर कविता पथ करना चाहता हूँ कृपया आप इस पते पर जाए और अगर अच्छा लगे तो कृपया मुझे एक मौक़ा अवश्य दीजिये. ये रहा मेरे पता -http://hindikavitamanch.blogspot.in/

नाम - ऋषभ शुक्ला

मो. न.- ०९८९२३३१३१५

Ramakant Singh February 18, 2013 at 4:32 PM  

आपने सही कहा सादर नमन।

Ramakant Singh February 18, 2013 at 4:33 PM  

आपने सही कहा सादर नमन।

DINESH PAREEK February 19, 2013 at 11:15 AM  

क्या खूब कहा आपने वहा वहा बहुत सुंदर !! क्या शब्द दिए है आपकी उम्दा प्रस्तुती
मेरी नई रचना
प्रेमविरह
एक स्वतंत्र स्त्री बनने मैं इतनी देर क्यूँ

Rajendra Kumar February 19, 2013 at 12:02 PM  

नयनो की सुन्दर कविता.

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