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Albela Khatri

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हमें कुछ फ़र्क लगता ही नहीं अपनों में-गैरों में


सज़ा  हम दे नहीं सकते, हमें तो प्यार आता है 

ये मौसम अपने ही जीवन में बारम्बार आता है 

हमें कुछ फ़र्क  लगता ही नहीं अपनों में-गैरों में 

हमें दिखता है दुश्मन भी गोया  दिलदार आता है 


-अलबेला खत्री 
 

पाकिस्तानी दर्शकों ने भी सर आँखों पर सराहा भारत के हास्यकवि अलबेला खत्री को



अमेरिका में  टेक्सास प्रान्त के डल्लास शहर में शायरी और हास्य-व्यंग्य में 

भीनी वह रात बहुत रंगीन और ख़ुशनुमा थी . भारत से सात समंदर पार 

हिन्दोस्तान और पाकिस्तान के लोग एक साथ हँस रहे थे और एक साथ  

शायरी का मज़ा ले रहे थे . 


शीराज़ मिठानी द्वारा आयोजित इस हास्य समारोह में अपनी प्रस्तुति के पहले मैं  

थोड़ा  सा चिन्तित था अपने परफोर्मेंस को ले कर ........क्योंकि आयोजकों ने 

साफ़ कह दिया था कि  ऑडियंस में केवल पाकिस्तानी लोग रहेंगे  जिन्हें  भारत 

की राजनीति, गुजरात के विकास, भ्रष्टाचार अथवा नरेन्द्र मोदी जैसे विषयों  से 

कोई लगाव नहीं है . लिहाज़ा इन विषयों से हट कर  परफ़ॉर्म  करना है . मेरे लिए 

यह थोड़ा चुनौती भरा काम था . लेकिन शुक्र है  माँ सरस्वती का जिन्होंने मेरी 

राह सरल कर दी . 


मज़े की बात ये है कि  अढाई घंटे चलने वाला प्रोग्राम साढ़े तीन  घंटे चला  और  

इस्माइली समाज के सभी पाकिस्तानी बन्धु  इतने लोटपोट हो गए हँस हँस कर 

कि  समूचा वातावरण  ठहाकों और तालियों से गूंज उठा .  मेरे लिए और भी ख़ुशी 

की बात यह थी कि  वहां के लोगों ने माइक पर आ कर स्वीकार किया  कि  प्रोग्राम 

तो वे पहले भी सैकड़ों देख चुके हैं  लेकिन  अलबेला खत्री का हास्य हंगामा  उन्हें  

अनेक वर्षों तक याद रहेगा . 


वैसे  आपको ये भी बता दूँ कि  जब मैंने गुजरात वाला गीत सुनाया तो पूरा गीत 

लोगों ने मेरे साथ साथ गाया .....है न कमाल की बात  और आनंद की बात 

जय हिन्द !

-अलबेला खत्री 







गुरू प्राणी नहीं है, प्राणाधार है



गुरू की महिमा अपरम्पार है,
गुरू प्राणी नहीं है, प्राणाधार है

jai hind

jai hind

हिन्द की खातिर मिटने वालो हम को तुम पर नाज़ है




मत दिखलाना घाव किसी को, लोग नमक घिसने लगते हैं




रिश्ते जब रिसने लगते हैं 

तब परिजन पिसने लगते हैं 

मत दिखलाना घाव किसी को 

लोग नमक घिसने लगते हैं 

-अलबेला खत्री 

यह एक ओछी और घटिया मानसिकता है जिससे उर्दू वालों को बचना चाहिए



अभी हाल ही एक नवोदित हिन्दी कवयित्री को सिर्फ़ इसलिए 

सरे-महफ़िल शर्मसार होना पड़ा क्योंकि उसे चन्द उर्दू लफ़्ज़ों का 

 मुकम्मल ज्ञान नहीं था . अपने आप को खां साहब समझने वाले 

कुछ उर्दू शायरों ने उसकी खूब लाहनत-मलामत की .........यह देख 

मुझे दुःख हुआ . बहुत दुःख हुआ .


उर्दू में लिखने वाले लोग हिंदी में लिखने वालों को नीचा दिखाने का 


कोई मौका नहीं चूकते . मौका न मिले तो उसे पैदा कर लेते हैं . यह 

एक ओछी और घटिया मानसिकता है जिससे उर्दू वालों को बचना 

चाहिए . क्योंकि कुछ शब्द उर्दू में ऐसे हैं जिनके बारे में सही उच्चारण 

का हर हिन्दी  भाषी को पता नहीं है . इसका मतलब यह नहीं कि आप 

हिन्दी भाषी का मज़ाक उड़ाने के अधिकारी हो गए .

हार्दिक दुःख सहित


-अलबेला खत्री

नरेन्द्र भाई मोदी को देश का प्रधानमंत्री बना कर भारत का जीर्णोद्धार करो


हिंगलाज माता की नई आरती देखिये और आनंद लीजिये

                                    हास्यकवि अलबेला खत्री रचित हिंगलाज माता की नई आरती 

भ्रष्टाचारी नेताओं को नंगा करता वीडियो आपके लिए लाया है हास्यकवि अलबेला खत्री



हिंगलाज माता के भजन मंत्र और आरती the bhajans of hinglaj mata

अलबेला खत्री  रचित हिंगलाज माता के भजन मंत्र और आरती का 

आनंद लीजिये और इस प्रोमो को देखिये ....

जीवन में कुछ उजाला आएगा 




albela khatri live on stage in surat at event of jai jawan


हमारी दुकान पे किसी से कोई प्रमाण पत्र माँगा नहीं जाता...



गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़  धुप्प

गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़  धुप्प



आओ  आओ  आओ, 


आजाओ आजाओ आजाओ


हमारी दुकान पर आओ


बिना पूछे घुस जाओ


नो एंट्री वाला कोई गेट नहीं है


देना  कोई सर्टीफिकेट  नहीं है


मुफ़्त का मज़ा है जी भर लूटो


कोई नहीं  कहेगा यहाँ से फूटो



ये मर्दों का मज़मा है,  आराम से देखो


दिल है कमज़ोर तो ज़रा थाम के देखो


हमारे यहाँ  रोज़ नई पोस्ट लगाई जाती है


और बिना भेदभाव सबको दिखाई जाती है


ऊँगली करने वालों का टूट गया तिलिस्म है


ब्लॉग्गिंग की दुनिया में ये उज्जड किस्म है


हम ऊँगली नहीं करते, लट्ठ या लट्ठा करते हैं


लोग हमारी दुकान पे आके हँसी-ठट्ठा करते हैं 

 
छुपाने जैसी हमारे यहाँ  कोई रचना नहीं है

लाज के मारे हमको किसी से बचना नहीं है


किसी से कोई प्रमाण पत्र माँगा नहीं जाता


रचना को किसी खूँटी पर टाँगा नहीं जाता


हमारी रचना सबकी सेवा में डे-नाईट  उपलब्ध रहती है


नारी हो नर हो या किन्नर, किसी को ना नहीं  कहती है


पेट्रोल के भाव बढे तो बढे, हमारे ब्लॉग के नहीं बढे


हम अभी तक चने के झाड़ पर  बिलकुल  नहीं चढ़े


टिप्पणियां का बॉक्स भी यहाँ सबके लिए खुला है


पाठकों  को यहाँ  रचनाकारी  का हर रंग मिला है


स्वास्थ्य से लेकर व्याधि तक


सम्भोग से लेकर समाधि तक 


यहाँ हर विषय और विकार  मिलता है


धारा क्या, मस्ती का  धार मिलता है


जहां शटर डाउन है वहाँ क्यों जाओ


आपको मज़ा लेना है तो यहाँ आओ


हमारे फ़नलैंड का कोई लोर्ड ही नहीं है


कुत्तों से सावधान वाला बोर्ड भी नहीं है


आ जाओ, आजाओ,आजाओ,


वैसे आना है तो आओ


नहीं तो भाड़ में जाओ


-जय हिन्द !




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