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Albela Khatri

लाइन लगा कर बैठे हैं सब लेने चुम्मी, किन्तु किसी को पास न आने देगी मम्मी


मम्मी की मैं लाड़ली, बाबुल की मैं जान

मैं देहरी की महक हूँ, आँगन की मुस्कान


आँगन की मुस्कान, छमाछम करती डोलूं


आनन्दित हों लोग,  मैं जब तुतलाकर बोलूं


लाइन लगा कर बैठे हैं सब लेने चुम्मी


किन्तु किसी को पास न आने देगी मम्मी 





3 comments:

Anonymous August 26, 2013 at 11:35 PM  

Bahut Hi Khubsurat Panktiyan

Rishikesh Mishra August 26, 2013 at 11:37 PM  

Bahut Hi Khubsurat Panktiyan

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक August 27, 2013 at 6:17 AM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि का लिंक आज मंगलवार (27-08-2013) को मंगलवारीय चर्चा ---1350--जहाँ परिवार में परस्पर प्यार है , वह केवल अपना हिंदुस्तान है
में "मयंक का कोना"
पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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