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Albela Khatri

क्या कविता का स्वर पटाखों के कोलाहल के मुकाबले अधिक असह्य होता है ?



अस्थमा, हार्ट अटैक  और  मिरगी के रोगियों के लिए जानलेवा साबित होने वाले

धूल, धुंआ, रासायनिक गंध और कानफाड़ू  शोर करके  पर्यावरण को दूषित और

बच्चों व बुज़ुर्गों को  परेशान  करने वाले  पटाख़े रात भर बजाये जा सकते हैं इन

पर कोई पाबंदी नहीं ... परन्तु  सरस, साहित्यिक, सुसांस्कृतिक एवं समाज को सही

दिशा के साथ साथ स्वस्थ मनोरंजन देने वाले कवि सम्मेलन के लिए  रात 11 बजे

ही समय सीमा समाप्त ....


जय हो तुम्हारी सरकार वालो ! 

क्या कविता का स्वर  पटाखों के कोलाहल के मुकाबले अधिक असह्य होता है ?

जय हिन्द
-अलबेला खत्री

hasyakavi albela khatri presents hasya kavi sammelan in puruliya

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3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक November 6, 2013 at 4:59 AM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (06-11-2013) मंगल मंगल लाल, लाल हनुमान लंगोटा : चर्चा मंच 1421 में "मयंक का कोना" पर भी होगी!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रवीण पाण्डेय November 6, 2013 at 6:46 AM  

कवियों और कवि सम्मेलनों की सीमा निर्धारित न हों।

काजल कुमार Kajal Kumar November 6, 2013 at 1:05 PM  

सरकारें आवाज़ से बहुत डरती हैं

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tepa & wageshwari award winner the great indian laughter champion -2 fame hindi hasyakavi, lyric writer,music composer, producer, director, actor, t v  artist  & blogger from surat gujarat . more than 6200 live performance world wide in last 27 years
this time i creat an unique video album SHREE HINGULAJ CHALISA for TIKAM MUSIC BANK
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