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Albela Khatri

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स्वांग तुम्हारे देख-देख मेरा दिमाग चकराया



लाखों तेरे मन्दिर बाबा, लाखों तेरे धाम

लाखों तेरी प्रतिमाएं हैं,  लाखों तेरे नाम


मैं छोटा, मेरी मति भी छोटी, देख देख घबराऊं


तुमही बताओ कहाँ पे जा के, अपना शीश झुकाऊं


बता नाम असली


तेरा धाम असली




जिसके जी में जैसा आया,वैसा रूप बनाया


स्वांग तुम्हारे देख-देख मेरा दिमाग चकराया



कहीं बना बैठा रोकड़िया, कहीं पे मंगलकारी


कहीं बना है भूत भगाऊ, कहीं पे पर्वतधारी



टिकट मैं मेहंदीपुर की लूँ या सालासर की लाऊं


वाराणसी संकटमोचन या  चानणधाम मैं जाऊं


बता नाम असली


तेरा धाम असली






पीपलेश्वर, नीमेश्वर, कहीं घंटेश्वर  बना खड़ा है


कहीं विराजित मन्दिर में, कहीं सड़क के बीच पड़ा है



एकमुखी, दोमुखी, कहीं पर  पंचमुखी  बलवन्ता


उत्तरमुख कहीं दक्षिणमुख, कहीं पश्चिममुख हनुमन्ता 



कहाँ कहाँ जाकर 'अलबेला'  मैं अब भोग लगाऊं


सवामणी लेकर आया मैं , बोलो कहाँ चढाऊं


बता नाम असली


तेरा धाम असली




ले दे के एक हनुमान जी ही हैं, जो छड़े मलंग हैं, देशहित में उन्हीं की शरण लेली हास्यकवि अलबेला खत्री ने




लौजी ! अपन ने तो पूरा ज़ोर लगा लिया

नतीजा कुछ निकला नहीं

तो भ्रष्टाचार मिटा, मंहगाई घटी, हिंसा पर लगाम लगी और ही

जीवन में किसी प्रकार का आध्यात्मिक उजाला हुआ इसलिए आज मैं

अपने घोड़ों को कुछ दिन के लिए खुला छोड़ कर पवन पुत्र हनुमान जी की

शरण ले रहा हूँ क्योंकि बाकी सारे देवी-देवता तो घर-परिवार वाले हैं

उनके अपने पारिवारिक जीवन के कई झंझट होंगे, अपन उन्हें और परेशान

क्यों करें ?


ले दे के एक हनुमान जी ही हैं, जो छड़े मलंग हैं, वज्रदेह हैं, सर्वशक्तिमान हैं,

अजर-अमर हैं और लोगों के संकट मिटाने को सदैव तत्पर रहते हैं

लिहाज़ा आज से पूरी निष्ठा, आस्था, श्रद्धा, भावना एवं शुचिता के साथ मैं

कम से कम एक भजन रोजाना रामभक्त हनुमान जी पर रचने का संकल्प

लेता हूँ और ये तब तक रचता रहूँगा जब तक कि मेरा मनोरथ पूरा नहीं हो

जाता अर्थात देश में सुख और शान्ति का वातावरण नहीं बन जाता



अपने को किसी पार्टी से कोई मोह नहीं है और किसी पार्टी से कोई विरोध भी

नहीं है क्योंकि अपने को किसी से कोई उम्मीद नहीं है ये बाबा लोग भी सब

पब्लिक को भौंदू बनाने की मशीनें हैं इसलिए बाबाओं के बाबा परमबाबा

गदाधर बजरंगी बाबा की ओट लेने का मन हुआ है और मेरा मानना है

मन की आवाज़ ज़रूर सुननी और माननी चाहिए


तो मित्रो ! आज से आपको मैं हनुमानजी के स्वरचित भजनों को बांचने

और गाने का न्यौता देता हूँ....आते रहिएगा इस बालक को संबल देने


जय हनुमान

जय हिन्द !



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