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उत्तराखंड की महा आपदा पर एक घनाक्षरी अलबेला खत्री की
Labels: actor , adult poetry , albela khatri , काला सच , काव्य , केदारनाथ , टीकम चंद , देशभक्ति , भगवान भोलेनाथ
क्योंकि मौत यह देखने के लिए खड़ी नहीं रहेगी
कल का काम आज ही कर लेना
और शाम का काम सुबह ही कर लेना;
क्योंकि मौत यह देखने के लिए खड़ी नहीं रहेगी
कि इस आदमी ने
अपना काम पूरा कर लिया या नहीं ।
-महावन
www.albelakhatri.com
Labels: अलबेला khatri , आदमी , काम , काव्य , पूर्ण , मौत , वचन , हिन्दी hasya






