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बहुत होगया अलबेला खत्री !!!....अब केवल क्षमा याचना, जो दे उसका भी भला- जो न दे उसका भी भला ...
प्यारे मित्रो, बन्धुओ, स्वजनों और समस्त परिचितों/अपरिचितो !
विनम्र प्रणाम
मुझे यह स्वीकार करते हुए अत्यन्त खेद और लज्जा के साथ साथ गहरे
दुःख का अनुभव हो रहा है परन्तु सच कहने से पीछे नहीं हटूंगा कि अपनी
तार्किक क्षमता अथवा अपरोक्ष अहंकार के चलते मैंने ब्लॉग्गिंग के इस
मंच पर बहुत से ऐसे आलेख लिखे जो मुझे नहीं करने चाहिए थे. परन्तु इन्सान
कितना भी चतुर क्यों न हो, भूल करता ही है . मुझसे भी भूलें हुईं और बहुतायत
में हुईं. भले ही उनके पीछे मेरा मक़सद केवल सच का साथ देना था लेकिन
विनम्रता के अभाव में वे सब आलेख मेरे लेखन पर काले धब्बों की भान्ति
अंकित हो गये और इसके लिए मेरा मन पश्चाताप कर रहा है .
सबसे ज़्यादा दुःख तो इस बात का है कि बाहर के इस फोकटिये चक्कर में
भीतर की यात्रा बन्द हो चुकी थी. आज से मैं एक नई शुरूआत करना चाहता हूँ .
भीतर की दुनिया बाहर की दुनिया से ज़्यादा चमकदार और सच्ची होने के
बावजूद अहम के अन्धेरे में मैंने उसे छिपा दिया था . आज सब परदे उतार कर
पुनः उजाले में आना चाहता हूँ .
अत्यन्त हार्दिक भाव से मैं यह कहना चाहता हूँ कि आप में से जिस किसी
ने भी मेरा दिल दुखाया हो, मुझे उत्तेजित करके अनर्गल लेखन के लिए प्रेरित
किया हो या वाद-विवाद में धकेला हो, मैं उन सबको हृदय से क्षमा करता हूँ
साथ ही जिन लोगों को मेरे द्वारा दुःख अथवा कष्ट पहुंचा हो, जिनके लिए मैंने
अपमानपूर्ण शब्दों का प्रयोग किया हो, उन सबसे कर बद्ध हो कर क्षमा चाहता हूँ .
भविष्य में आप में से किसी को कोई तकलीफ़ मेरे द्वारा न पहुंचे, इसका मैं पूरा
प्रयास करूँगा और इस क्रम में सबसे पहले मैं उन सब आलेखों को अथवा पोस्ट्स
को डिलीट कर रहा हूँ ताकि आज के बाद मेरे ब्लॉग पर उनका नाम-ओ-निशाँ न
रहे . अभी इतना ही......क्योंकि जिस शरीर पर मुझे अभिमान था वो अब ज़्यादा
दिन चलने वाला नहीं है और वैमनस्य अथवा रंजिश का बोझ लेकर मैं इस
जहान से जाना नहीं चाहता . अतः. क्षमाप्रार्थना के लिए ही आज यह पोस्ट लिखी है
जय हिन्द !
अलबेला खत्री
| हास्यकवि अलबेला खत्री मुंबई के एक समारोह में प्रेस को संबोधित करते हुए |
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