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Unknown
Saturday, November 3, 2012
सभी प्यारे मित्रो, पाठकों एवं शुभचिन्तकों को जताते हुए प्रसन्नता है
कि
आदिशक्ति माँ हिंगुलाज की अपार अनुकम्पा से 'जय माँ हिंगुलाज'
वीडियो
एल्बम का काम पूरा हो चुका है और अतिशीघ्र यह आप लोगों
तक पहुँच जाएगा .
इस मेगा प्रोजेक्ट में मुझे जिन महानुभावों ने तन,
मन, धन से सहयोग किया
है वे सर्वश्री विजय एस ठाकुर - पुणे,
भंवरलाल छूंछा - मुंबई, ओम प्रकाश
छूंछा - मुंबई, शंकरलाल कीरी - डीसा,
दिलीप जगड़ - पुणे, पंकज वार्डे -
सूरत, हुकमीचंद भूत - सूरत, गोरधन छूंछा
- सूरत, राजकुमार भक्कड़ -
अहमदाबाद, चुन्नीलाल कीरी - रानीवाड़ा,
अमीलाल कीरी - सूरत, बाबूलाल छूंछा -
जोधपुर, मदनगोपाल धनदे -
जयपुर इत्यादि स्नेही स्वजन मेरा धन्यवाद
स्वीकार करें . साथ ही अन्य
सभी समर्थ स्वजनों और हिंगुलाज भक्तों से मेरा
करबद्ध निवेदन है कि इस
अनुपम रचना को घर-घर पहुँचाने में मेरा सहयोग
करें.
यह मेरे जीवन का अब तक का सबसे अभिनव सृजन है . इसे
लोकप्रिय करने
के लिए अधिकाधिक संख्या में इसका वितरण अनिवार्य है . सभी
से मेरा
अनुरोध है कि चाहे डीवीडी खरीद कर बांटें, चाहे वीडियो में
विज्ञापनीय
सहयोग करें............लेकिन अपना योगदान अवश्य दें .
धन्यवाद
- अलबेला खत्री
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Unknown
Thursday, September 13, 2012
पाँच दोहे आँसू भरे
राजनीति के मंच पर, चढ़ गए आज दबंग
फूट फूट कर रो रहे, ध्वज के तीनों रंग
गधा जो देखन मैं चला, गधा न मिलया मोय
तब इक नेता ने कहा, मुझसा गधा न कोय
उजली खादी पहन के, करते काले काम
इनका बंटाधार अब, करदो मेरे राम
अभिव्यक्ति को घोंट कर, करो जेल में बन्द
लोकराज के नाम पर, करते जाओ गन्द
हाय हमारे मुल्क का, फूटा हुआ नसीब
उसने ही विष दे दिया, समझा जिसे तबीब
-जय हिन्द !
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Friday, August 31, 2012
प्यारे मित्रो ! पिछले कुछ दिनों में 'जय माँ हिंगुलाज' की निर्माण
प्रक्रिया में
कुछ ऐसे अनुभव हुए जिन्होंने मन को आनन्द से भर दिया . इन
ख़ुशनुमा
एहसासों को मैं आपके साथ बांटना चाहता हूँ . जिन लोगों के साथ
भी काम
किया, सभी ने इतना मृदुल व्यवहार किया कि यह विश्वास और ज़्यादा
मजबूत
हो गया कि सरस्वती के सच्चे साधक चाहे कितने ही ऊँचे शिखर पर
क्यों न
जा बैठें...अपनी विनम्रता नहीं छोड़ते.........
ऊर्जा का अथाह भण्डार : कीर्तिदान गढ़वी
गुजराती लोक संगीत के
सुप्रसिद्ध कलाकार कीर्तिदान गढ़वी से जब हमने दो
रचनाएं गाने के लिए
कहा तो पहले तो उन्होंने यह कह कर मना कर दिया कि
वे समयाभाव के कारण इतनी
दूर नहीं आ सकते.......लिहाज़ा हम उदास हो गये
क्योंकि उन दो गानों को
हमने बनाया ही कीर्ति भाई के लिए था . इसलिए
किसी और का स्वर लेने के बजाय
हमने गीत ही छोड़ने का मन बना लिया लेकिन
मुम्बई रवाना होने के ठीक एक दिन
पहले ख़ुद उन्होंने फोन किया कि मैं सापुतारा
आ रहा हूँ........अगर चाहो
तो रास्ते में आपकी रेकॉर्डिंग करते हुए निकाल
जाऊँगा . ये सुन कर पारस
सोनी ( संगीत संयोजक) और मेरी ख़ुशी का ठिकाना
न रहा .
कीर्तिदान गढ़वी आये....गायन किया और ऐसा ज़बरदस्त किया कि मन आनन्द
से झूम उठा. स्वर मन्दिर स्टूडियो सूरत का कोना कोना नाच उठा, ऐसा एहसास
हुआ..........उल्लेखनीय है कि कीर्तिदान जी ने न केवल अपने ऊर्जस्वित
व्यक्तित्व
से हमें दीवाना कर दिया बल्कि माँ हिंगुलाज में श्रद्धा के
कारण पारिश्रमिक भी बहुत
कम लिया . मुझे भरोसा है कि कीर्तिदान का आगमन
सिर्फ़ और सिर्फ़ माँ
हिंगुलाज की अनुकम्पा से हुआ . कदाचित माँ
हिंगुला ख़ुद चाहती थीं कि कीर्ति
भाई आये और उनकी महिमा गाये
...........
धन्यवाद कीर्तिदान ! जय हो माँ हिंगुला !
-अलबेला खत्री
अगली पोस्ट में.............भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा ( जारी )
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Thursday, August 30, 2012
तीन सामयिक कह-मुकरियां
निर्दोषों का वह हत्यारा
जन जन ने उसको धिक्कारा
किया कोर्ट ने ठीक हिसाब
क्या सखि अजमल ? नहिं रे कसाब
वो सबका इन्साफ़ करेगा
नहिं हत्याएं माफ़ करेगा
ख़ून का बदला लेगा ख़ून
क्या सखि मुन्सिफ़ ? नहिं कानून
हुआ आज हर्षित मेरा मन
करूँ ख़ूब उनका अभिनन्दन
काम कर दिया उसने अनुपम
क्या सखि मन्नू ? नहिं वोह निकम
-अलबेला खत्री
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