Posted by
Unknown
Friday, June 14, 2013
तलाश
है एक अदद रचना की ........जी हाँ, सिर्फ़ एक रचना की, लेकिन ऐसी
वैसी
नहीं, एक ख़ास रचना की, उस रचना की जिसका मुद्रक-प्रकाशक होने
का मेरा बड़ा
मन कर रहा है . इत्ते दिन उसकी याद नहीं आई,क्योंकि एक तो
अन्य रचनाओं से
काम चल रहा था दूसरे उस में मंचीय कसाव नहीं होने के
कारण, बड़े मंचों
के लिए उपयोगी न हो कर महज गोष्ठी-वोष्ठी के काम की
ही थी लेकिन अब बड़ी
शिद्दत से ढूंढ रहा हूँ . ढूंढें ही जा रहा हूँ उस कमबख्त
को जो पहले
किसी काम की नहीं लग रही थी .लेकिन आज उसकी ज़रूरत पड़
गयी क्योंकि मेरे
अगले काव्य-संकलन में उसे शामिल करना इसलिए ज़रूरी
हो गया है क्योंकि सौ
में एक कम पड़ रही है .
हालांकि न वह ग़ज़ल की तरह अनुशासित है, न ही
नज़्म की तरह शगुफ़्त, न
कविता सी कोमलकान्त है, न ही मुक्तक की भान्ति
उन्मुक्त,,, दोहे और चौपाई
सी तीखी और मारक भले है लेकिन हाइकू जितनी सरल
नहीं है . असल में वह
एक अलग किस्म की रचना है जिसे लोग कुण्डलिया कहते
हैं . बस ...........उसी
को तलाश रहा हूँ . न जाने कहाँ कुंडली मार कर बैठ
गयी है कठोर .......
कितना दुःख होता है जब अपनी कोई रचना गुम हो
जाती है............ यह मुझसे
ज्यादा कौन समझेगा ? जिसकी एक ऐसी रचना खो गयी जिसे
मैं सलीके से
सुधार-वुधार कर अपनी क़िताब में छापना चाहता था ताकि लोग एन्जॉय कर
सकें . अरे भाई लोग एन्जॉय करें न करें, मुझे क्या मतलब,लेकिन मेरी किताब
तो पूरी हो जाती .....अब एक, सिर्फ़ एक कुण्डली के कम पड़ जाने से पांडुलिपि
का काम रुक गया है .
वैसे देखा जाए तो
मैं भी बड़ा चूतिया आदमी हूँ ............इत्ती बकवास लिखने से
अच्छा था,
एक नई रचना ही लिख लेता ............हुड !!!!!! बेवकूफ़ कहीं का
जाओ
भाई जाओ, टाइम खोटी मत करो, आप अपना काम कारो और मैं .....
रचना करता हूँ एक
नयी रचना की ताकि सौ पूरी हो जाए और संकलन समय
पर प्रकाशित हो जाए .
-अलबेला खत्री
Posted by
Unknown
Thursday, June 13, 2013
चाँद : दो कुंडलिया
कविता लिख दूँ चाँद पर, यदि तुम करो पसन्द
मेरा तो इक लक्ष्य है, उर उमड़े आनन्द
उर उमड़े आनन्द, सुरतिया खिल खिल जाये
काश ! किसी उर्वशी से अपना उर मिल जाये
जीवन के मरुथल में बह जाये रस सरिता
करूँ समर्पित मैं तुमको अपनी हर कविता
चन्दा केवल एक है, अनगिन यहाँ चकोर
सभी ताकते चाँद को हो कर भाव विभोर
हो कर भाव विभोर, इश्क़ में मर जाते हैं
पर दीदारे-यार वो मन भर कर जाते हैं
हाय मोहब्बत ही बन जाती है इक फन्दा
कितने आशिक जीम गया यह ज़ालिम चन्दा
जय हिन्द
-अलबेला खत्री
Posted by
Unknown
Monday, June 10, 2013
नमस्कार, प्रणाम, सुप्रभात प्यारे मित्रो !
मानसून ने कल दिन में
मेरे शहर में दस्तक दी और रात को मेरी आँखों में .........
सच ! बहुत
सालों बाद मेरी आँखों में इत्ता सारा पानी एक साथ देखा गया ............
ये
पानी आनंद का था, ये पानी कृतज्ञता का था और ये पानी आत्मीयता का था
......
इससे ज्यादा सौभाग्य किसी कलाकार के लिए और क्या हो सकता है कि
दर्शक
ख़ुशी से झूम उठें
जैसे ही रात दस बजे "सब टीवी पर वाह वाह
क्या बात है" कार्यक्रम शुरू हुआ,
मेरे तीनों फोन लगातार बजते रहे और
सैकड़ों की संख्या में एस एम एस व
ईमेल आने लगे बधाइयों के
..........फेसबुक पर भी मित्रों ने खूब उत्साहवर्धन
किया .......आप जैसे
मित्रों का यह प्यार - दुलार और आशीर्वाद मेरे लिए अनमोल
है मित्रो ! मैं
आभारी हूँ आप सब का और वचन देता हूँ कि आगे भी इसी तरह
आपकी सेवा में
लगातार नव सृजन करता रहूँगा
जय हिन्द !
Posted by
Unknown
Sunday, June 9, 2013
प्यारे मित्रो !
लीजिये एक बार फिर आप से रूबरू होने का अवसर आया है .
कोलाहल के राज में कविता भले ही आज हाशिये पर चली गयी है
फिर भी कविता के नाम पर जो कुछ अच्छा हो रहा है उसमें एक
काम सब टीवी पर वाह वाह क्या बात है कार्यक्रम भी है . इस
चर्चित प्रोग्राम में एक बार फिर मैं आ रहा हूँ अपनी कुछ नवीनतम
हास्य रचनाओं के साथ ...........देखना न भूलें ......
तो फिर आज रात दस बजे ...........
जय हिन्द !
-अलबेला खत्री
Posted by
Unknown
Wednesday, June 5, 2013
प्यारे मित्रो,
नमस्कार सहित हार्दिक अभिनन्दन .
इस बार यात्रा
में ज्यादा मज़ा आया . Lux Cozi के निमन्त्रण पर
अहमदाबाद, जयपुर और
चंडीगढ़ इत्यादि अनेक शहरों में फिल्म
'यमला पगला दीवाना 2' के सभी सितारों के साथ जनता से रूबरू
होने के अवसर मिले .
ही मैन धर्मेन्द्र समेत सन्नी दयोल, बॉबी दयोल, क्रिस्टीना और नेहा
शर्मा के साथ गुज़रे कुछ दिनों में बहुत से ऐसे खूबसूरत संस्मरण
बने हैं कि तन मन दोनों मस्त हैं . फुर्सत मिलने पर कुछ ख़ास किस्से
आपको ज़रूर बताऊंगा .........आपको भी अच्छा लगेगा .
जय हिन्द !
 |
| Mr. Ashok Todi ( CMD Lux Cozi )with Rajkumar Bhakkar, Vijay Jetani, Mr. Poddar & Albela Khatri |
 |
| Mr. Ashok Todi, Sunny Dayol, Albela Khatri & Lux Cozi distributer from Himmatnagar |
 |
| Mr. Sunny Dayol, Albela Khatri, Neha Sharma, Sunny's Uncle & Mr. Ashok Todi |
 |
| Albela Khatri With His best Friend Mr. Rajkumar Bhakkar from Lux Cozi |
 |
| Albela Khatri Presenting Mr. Sunny Dayol |
 |
| Neha Sharma, Sunny Dayol, Mr. Ashok Todi, Poddar saheb & Albela khatri |
 |
| Ms. Cristina, Sunny Dayol, Neha Sharma, Mr. Ashok Todi & Albela Khatri |
Posted by
Unknown
Tuesday, May 21, 2013
 |
बहुत हो चुका बंटाधार, अब देश बचाना ही होगा, नरेन्द्र भाई मोदी को अब दिल्ली जाना ही होगा
|
Posted by
Unknown
Saturday, May 11, 2013
Posted by
Unknown
Tuesday, March 26, 2013
गुटखा ये पाउच वाला, जिसने भी मुंह में डाला
गुटखा ले लेगा उसकी जान, कर दो सभी को सावधान !
 |
| albela khatri's anti gutkha drive |
Posted by
Unknown
Monday, January 21, 2013
 |
| हुड दबंग दबंग दबंग |
Posted by
Unknown
Saturday, January 19, 2013
मसीहा मानवता का The real HERO of society
 |
| Add caption |
Posted by
Unknown
Wednesday, January 9, 2013
 |
| हास्यकवि, kavi,albela khatri,kavi-sammelan,washim,jalna,surat,aurangabad,comedy,fun,sensex,adult, |
Posted by
Unknown
Thursday, September 13, 2012
पाँच दोहे आँसू भरे
राजनीति के मंच पर, चढ़ गए आज दबंग
फूट फूट कर रो रहे, ध्वज के तीनों रंग
गधा जो देखन मैं चला, गधा न मिलया मोय
तब इक नेता ने कहा, मुझसा गधा न कोय
उजली खादी पहन के, करते काले काम
इनका बंटाधार अब, करदो मेरे राम
अभिव्यक्ति को घोंट कर, करो जेल में बन्द
लोकराज के नाम पर, करते जाओ गन्द
हाय हमारे मुल्क का, फूटा हुआ नसीब
उसने ही विष दे दिया, समझा जिसे तबीब
-जय हिन्द !
 |
| poetry,hindi doha,dohe,albela khatri,s blog,anoop jalota,kirtidan gadhvi,sensex,surat,paras soni, |
Posted by
Unknown
Tuesday, December 6, 2011
जैसे ही जलगाँव से ट्रेन चली, मानो तूफ़ान सा आ गया बोगी में.........
हालाँकि वातानुकूलित यान में बाहरी फेरी वालों का आना और चिल्लाना
मना है परन्तु दो-तीन लोग घुस आये अन्दर और सुबह सुबह लगे शोर
करने, " चौधरी की चाय पियो ...चौधरी की चाय पियो " मेरा दिमाग ख़राब
हो गया । होना ही था ।
अरे भाई क्यों पीयें हम चौधरी की चाय ? चौधरी की हम पी लेंगे तो वो क्या
पीयेगा बेचारा ? कंगाल समझा है क्या ? अपनी चाय भी खरीद कर नहीं पी
सकते क्या हम ? चौधरी ने क्या राज भाटिया की तरह हमको ब्लोगर मीट
में बुला रखा है कि उसकी चाय फ़ोकट में पीलें ?
घर आकर टी वी ओन किया तो और दिमाग ख़राब हो गया । विज्ञापन आ
रहा था - 'रूपा के जांघिये पहनें, रूपा के जांघिये पहनें ..' यार फिर वही बात,
ये हो क्या गया है लोगों को ? क्यों पहनें हम रूपा के जांघिये ? हम अपने
ख़ुद के पहन लें, तो ही बड़ी बात है और फिर हम ठहरे पुलिंगी, तो स्त्रीलिंगी
जांघिये पहना कर तुम हमारा जुलूस क्यों निकालना चाहते हो भाई ? चलो,
तुम्हारे इसरार पर हमने रूपा के जांघिये पहन भी लिए तो तुम्हारा क्या
भरोसा..कल को तुम तो कहोगे रूपा की ब्रा भी पहन लो..........न भाई न !
हम नहीं पहनते रूपा के जांघिये...........जा के कह दो अपनी रूपा से कि
अपने जांघिये ख़ुद ही पहनें - हमारे पास ख़ुद के हैं लक्स कोज़ी ।
नेट खोला तो पता चला कि मुन्नी की बदनामी और शीला की जवानी
वाले गानों का विरोध हो रहा है । कमाल है भाई......गाना गाने वाली नारी,
गाने पर नाचने वाली नारी और नचाने वाली भी नारी और विरोध करने
वाली भी नारी !
एक वो भली मानस नारी जो अभी अभी बिग बोस के "चकलाघर" से
बाहर आई है, कह रही है कि उसने जो किया वो तहज़ीब के अनुसार ही
था यानी उसने कोई सीमा नहीं लांघी..........यही तो दुःख है कि सीमा नहीं
लांघी ! अब लांघ जाओ बाई ! जाओ तुम्हारे देश की सीमा में घुस जाओ ।
यहाँ का माहौल गर्म मत करो.........थोड़ी बहुत लाज बची रहने दो बच्चों
की आँख में, पूरी नस्ल को बे-शर्म मत करो ।

Posted by
Unknown
Sunday, December 4, 2011
जन्म से मैं हिन्दू हूँ और अपने कुल देवता से ले कर इष्टदेव तक सभी को
नमन करता हूँ । अपने आराध्य सतगुरू के बताये आन्तरिक मार्ग पर
चलने की कोशिश भी कभी कभी कर लेता हूँ । मेरे स्वर्गवासी पिताजी ने
श्री गुरूनानकदेवजी की शरण ले रखी थी और उनपर गुरू साहेब की
प्रत्यक्ष मेहर थी । माताजी जगदम्बा की साधना करती हैं, भाई लोग
शिव भक्त हैं और पत्नी मेरी चूँकि मुस्लिम मोहल्ले में पली बढ़ी है इसलिए
वह नमाज़ भी पढ़ लेती है और रोज़े भी रखती है । कुल मिला कर सब
अपनी अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं, कोई किसी पर अपनी मान्यता की
महानता का थोपन नहीं करता ।
परन्तु मैंने अक्सर महसूस किया है, महसूस की ऐसी-तैसी....साक्षात्
देखा है कि यहाँ ब्लोगिंग क्षेत्र में अनेक विद्वान बन्धु, जो कि समाज का
बहुत ही भला और कल्याण करने का सामर्थ्य रखते हैं, अकारण ही
आपस में उलझे रहते हैं सिर्फ़ इस मुद्दे को ले कर कि तेरे धर्म से मेरा
धर्म बड़ा है अथवा मेरा खुदा तेरे ईश्वर से ज़्यादा महान है या ईश्वर
रचित वेदों पर पवित्र कुरआन भारी है इत्यादि इत्यादि । इस लफड़े में
समय भी खर्च होता है और ऊर्जा भी जबकि परिणाम रहता है
"ठन ठन गोपाल"
मैंने अब तक सिर्फ़ ये महसूस किया है कि आदमी को ईश्वर ने इसलिए
बनाया है ताकि उसकी बनाई इस सुन्दर और विराट सृष्टि को वह ढंग से
चला सके । जिस प्रकार एक बाप अपने बेटे को दूकान खोल कर दे देता
है "ले बेटा, इसे चला और कमा - खा ।" अब बेटे का फ़र्ज़ है कि वह उस
दूकान को अपनी मेहनत से और ज़्यादा सजाये, संवारे, विस्तार दे
........यदि वह ऐसा न करके केवल बाज़ार के अन्य दूकानदारों से ही
झगड़ता रहे कि मेरी दूकान तेरी दूकान से बड़ी है या मेरा बाप तेरे बाप
से ज़्यादा पैसे वाला है तो बाप के पास सिवाय माथा पीटने के और
कोई विकल्प नहीं बचता ।
हम सब एक ही बाप के बेटे हैं, एक ही समुद्र के कतरे हैं, ये जानते बूझते
भी हम क्यों ख़ुद को धोखा दे रहे हैं भाई ?
जब हमारे पुरखों ने अपने अनुभव से बार बार ये फ़रमाया है कि " अव्वल
अल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बन्दे - एक नूर ते सब जग उपज्या
कौन भले कौन मन्दे" तो फिर आखिर हमें ऐसी कौन सी लत पड़ गई है
दूसरों पर अपनी श्रेष्ठता लादने की ?
मैं किसी धर्म का विरोध नहीं करता । लेकिन बावजूद इसके हिन्दूत्व
पर मुझे गर्व है क्योंकि भले ही इसमें विभिन्न प्रकार के पाखण्ड और
कर्म-काण्ड प्रवेश कर गये हैं परन्तु इसकी केवल चार पंक्तियों में ही
धर्म का सारा सार आ जाता है और ये चार पंक्तियाँ मैं बचपन से सुनता
- बोलता आया हूँ ..आपने भी सुनी-पढ़ी होंगी :
1 धर्म की जय हो
2 अधर्म का नाश हो
3 प्राणियों में सद्भावना हो
4 विश्व का कल्याण हो
ध्यान से देखिये और समझिये कि यहाँ "धर्म" की जय हो रही है । किसी
ख़ास धर्म का ज़िक्र नहीं है, धर्म मात्र की जय हो रही है याने सब
धर्मों की जय हो रही है ।
"अधर्म" के नाश की कामना की जा रही है । अर्थात जो कृत्य " अधर्म"
में आता है उसके विनाश की कामना है, किसी दूसरे के धर्म को अधर्म बता
कर उसके नाश का सयापा नहीं किया जा रहा ।
"प्राणियों" में सद्भाव से अभिप्राय जगत के तमाम पेड़ पौधों, कीड़े-मकौडों,
जीव -जन्तुओं,पशुओं और मानव सभी में आपसी सद्भाव और सहजीवन
की प्रेरणा दी जा रही है । केवल हिन्दुओं में सद्भावना हो, ऐसा नहीं कहा
गया है ।
"विश्व" का कल्याण हो, इस से ज़्यादा और मंगलकारी कौन सा वरदान
परमात्मा हमें दे सकता है , ये नहीं कहा गया कि भारत का कल्याण हो
कि राजस्थान का कल्याण हो, सम्पूर्ण सृष्टि के मंगल की कामना की
जा रही है । न किसी पाकिस्तान का विरोध, न चीन का, न ही
अरब या तुर्क का ...
यदि इन चार सूत्रों के जानने और मानने के बाद भी कोई विद्वान
अन्य बातों पर समय व्यर्थ करे तो वह मेरी समझ में क्रोध का नहीं,
करुणा का पात्र है, कारण ये है करुणा का कि वो बेचारा जीवन को जी
नहीं रहा है, फ़ोकट ख़राब कर रहा है । क्योंकि धर्म जिसे कहते हैं,
वो तो इन चार पंक्तियों में आ गया ..बाकी सब तो बातें हैं बातों का क्या !
इन तथाकथित धर्म के ठेकेदारों से तो
वे फ़िल्मी भांड अच्छे जो नाचते गाते ये कहते हैं :
गोरे उसके,काले उसके
पूरब-पछिम वाले उसके
सब में उसी का नूर समाया
कौन है अपना कौन पराया
सबको कर परणाम तुझको अल्लाह रखे.................$$$$$$
-अलबेला खत्री
Posted by
Unknown
Friday, November 18, 2011
कल शाम को जब मैं मुम्बई से सूरत आ रहा था तो मेरे सामने की सीट पर
मेरी ही उम्र का एक व्यक्ति, अपेक्षाकृत कम उम्र की और ज़बरदस्त खूबसूरत
महिला के साथ बैठा था और लगातार मुझे देखे जा रहा था . पहले तो मैंने
ध्यान नहीं दिया लेकिन जब वो कुछ ज़्यादा ही बारीकी से देखने लगा तो मैंने
पूछा - क्यों भाई साहेब ? क्या मैंने आपसे कभी कुछ उधार लिया था ?
वो बोला नहीं....तो मैंने कहा - फिर क्या कारण है कि आप लगातार मुझे इस
तरह घूर रहे हैं ?
वो बोला - मैं जानना चाहता हूँ कि आपके बाल असली हैं या नकली ? मैंने कहा -
असली . वो बोला - लगते नहीं...........मैंने कहा - खींच कर देखलो भाई...........
पूछा कौनसा शैम्पू लगाते हो ? मैंने कहा - कोई नहीं, मैं शैम्पू से नहीं नहाता..
साबुन ही लगाता हूँ बस......
तो फिर और कुछ लगाते होंगे...उन्होंने पूछा तो मैंने मज़ाक में कहा -
हाँ तेल लगाता हूँ . वो बोले कौनसा ? मैंने कहा - नहीं बताऊंगा वरना आप हंसोगे
...........वो बोला - कोई बात नहीं हमारे हंसने से आपको क्या फ़र्क पड़ता है ?
आप तो बता दो ..मैंने कहा - किसी को बताओगे तो नहीं . वो बोला - नहीं..........तो
मैंने कहा - जापानी तेल लगाता हूँ....इत्ता सुनते ही वो भाई तो चुप हो गया लेकिन
उसके साथ बैठी महिला खिलखिला कर हँस पड़ी और उससे बोली - मैं कहती थी न
...जापानी तेल बहुत अच्छी चीज़ है रोज़ लगाना चाहिए..........इत्ता सुनना था कि
आस पास के लोग भी ठहाके लगाने लगे .
जय हिन्द !
Posted by
Unknown
Thursday, November 10, 2011
भाई देश चलाने वाले
डेढ़ हुशियार नेताओ, प्रशासको, अधीनस्थ अधिकारी इत्यादियो !
आपको अफज़ल गुरू
या अजमल कसाब को फांसी पर लटकाने में दिलचस्पी नहीं है
तो कोई बात नहीं,
मुझे भी कोई जल्दी नहीं है उनकी मौत का समाचार बांचने की
लेकिन इतना तो बताओ कि अगर ये लोग तुम्हारे बिना कुछ किये, अगर अपनी
मौत मर गये तो क्या होगा ?
ये सच है कि जो जन्मा है वह एक दिन मरेगा ही..........कब मरेगा ये कोई भी नहीं
जानता, भगवान न करे अगर कसाब या अफजल अगर टें बोल गये और तुम्हारी
हिरासत में बोल गये तो कितना रुपया चुकाओगे मुआवज़े का ?
ये मानवाधिकार वाले, ये राष्ट्रसंघ वाले, ये पाकिस्तान वाले, ये वाले, वो वाले जब
हिसाब मांगेंगे कि कैसे मर गये, तब क्या कहोगे ? इस बात का विचार करो और
फ़ांसी देने वाला रस्सा तैयार न हो तो फिर करोड़ों रुपया तैयार रखो अपने
दामादों का मौताणा चुकाने के लिए
जय हिन्द !
Posted by
Unknown
Saturday, August 27, 2011
आदरणीय अन्ना जी !
जिस महान मकसद के लिए आपने कदम उठाया, वह लगभग हासिल
हो चुका है . भले ही अभी काम पूरा नहीं हुआ लेकिन जितना हुआ है वह
ऐतिहासिक है और अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है . वह कोई कम नहीं है .
सारी पार्टियाँ, सारे दल एक ही मुद्दे पर संसद में चर्चा करते हुए जिस
प्रकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध आपकी जंग को समर्थन दे रहे थे उसे देख
कर मेरी पीढ़ी के लोगों को गर्व हो रहा था कि भले ही हमने गांधी को
अंग्रेजों से लड़ते हुए नहीं देखा, परन्तु हम अन्ना को भ्रष्टाचार के
खिलाफ लड़ते हुए न केवल देख रहे हैं अपितु यथाशक्ति अपना साथ
भी दे रहे हैं
अब आप अनशन तोड़ दीजिये प्रभु ! अब और जिद्द मत कीजिये .
आपका हठ अब तक हमें प्रेरित कर रहा था परन्तु अब हमें चिंतित
और परेशान करने लगा है .
12 दिन से आपने कुछ खाया नहीं है सिवाय लोकसमर्थन के, जिससे
बाकी सारे काम भले ही हो जाएँ पर पेट नहीं भरता और ज़िन्दा रहने
के लिए पेट भरना ज़रूरी है
देश के लिए मरना कोई बड़ी बात नहीं है ...देश के लिए जीना बड़ी बात
है . क्योंकि मरते तो लोग रोज़ हैं यहाँ ..कौन पूछ रहा है उनके बारे
में ? वो हेमंत करकरे, वो संदीप उन्नीकृष्णन और हज़ारों हज़ार
फौजी जो सरहद पर मर मिट गये देश के लिए.. देश ने कहाँ याद
रखा किसी को, लेकिन जो लोग देश के लिए जिए ऐसे अन्ना हज़ारे
को, किरण बेदी को, बाबा रामदेव को, नरेन्द्र मोदी को, सोनिया गांधी
को, कपिल देव को, सचिन तेंदुलकर को, बिड़ला को, टाटा को और
अमिताभ बच्चन को पूरा देश जानता, पहचानता और मानता है .
आप रहेंगे तो सब होगा, सबके सपने पूरे होंगे. अगर आप ही अनशन
पर डटे रहे, तो............हम सब चिन्तित हैं अन्ना !
देश के लिए मरना नहीं, बल्कि देश की तमाम बुराइयों को मारना है,
देश के दुश्मनों को मारना है, मारते-मारते मरना और मरते मरते भी
मारना है, ख़त्म करना है उन तिलचट्टों को जो देश को चट कर रहे हैं
ये पोस्ट बहुत लम्बी होती जा रही है और इत्ती लम्बी पोस्ट कोई
पढता नहीं है इसलिए मेरी कर बद्ध प्रार्थना है ..कृपया कुछ अन्न
ग्रहण कर लीजिये .
जय हिन्द !
Posted by
Unknown
Thursday, July 21, 2011
घूस सुन्दरी ने यहाँ, यों फैलाये केश
दो नम्बर में रंग गया, इक नम्बर का देश
सबको पैसा चाहिए, सबको सुविधा भोग
इसीलिए तो घूस का, फैला इतना रोग
हे हनुमत कुछ कीजिये, अब तो इन्तेज़ाम
भ्रष्टाचारी कर रहे, भारत को बदनाम
बजरंग तेरे सामने, करता रोज़ पुकार
तू सुनले इक बार तो, हो जाये बेड़ा पार
-अलबेला खत्री
Posted by
Unknown
Tuesday, July 19, 2011
आंगणियो भी धोयो, बाबा भींतां भी धुवाई
बैठण नै थारै, सोहणी चौकी भी सजाई
चौखट पै फूल नहीं, पलकां बिछाई
अब तो आजा रै
दरस कराजा रै
तू भी भक्त रामजी को, म्हे भी भक्त राम का
तू भी म्हारै काम को है, म्हे भी तेरै काम का
आज म्हारै काम सै म्हे आवाज़ लगाई
तेरै आगै हाथ जोड़, करां हाँ दुहाई
अब तो म्हारै केस की तू कर सुणवाई
हनुमत आजा रै
कष्ट मिटाजा रै
जनता की आंख्यां म्ह है आँसू आज खून का
ज़िन्दगी म्ह नहीं बाबा, दो पल सुकून का
दहशतवादयाँ बम फोड़, दहशत फैलाई
मुम्बई का घाव देख, आँख्यां भर आई
चारुं कानी मौत की घुमै है परछाई
इन्है हटा जा रै
बजरंग आजा रै
_______________अलबेला खत्री