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Albela Khatri

लगता इसकी मति गई मारी बाबाजी

नीयत हो यदि साफ़ हमारी बाबाजी 

नियति भी तब लगेगी प्यारी बाबाजी 



पुस्तक, सी डी और  दवायें बेच रहे 


सन्त नहीं, वे  हैं व्यापारी बाबाजी 



कोई किसी का सगा नहीं है दुनिया में 


सब मतलब की रिश्तेदारी बाबाजी 



दाज नहीं तो दूल्हा बैरंग लौट गया


इसको कहते दुनियादारी बाबाजी 



तुम पूछो या मत पूछो, मैं कहता हूँ 


क़र्ज़ है सबसे बड़ी बीमारी बाबाजी 



ऊँची एड़ी वाले सैंडिल फिसले तो 


लग जायेगी चोट करारी बाबाजी  



अलबेला खत्री तो  कुछ भी लिखता है 


लगता इसकी मति गई मारी बाबाजी 



-अलबेला खत्री 

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4 comments:

ताऊ रामपुरिया July 21, 2012 at 8:36 PM  

आज तो और बुरे फ़ंसे बाबाजी.:)

रामराम

एस.एम.मासूम July 22, 2012 at 1:16 AM  

व्यापार तो हर जगह है फिर बाबा जी क्यों रहे पीछे.

शिवनाथ कुमार July 22, 2012 at 10:31 AM  

अलबेला खत्री तो कुछ भी लिखता है
लगता इसकी मति गई मारी बाबाजी

नहीं, असहमत हूँ आपसे :)
कुछ भी नहीं आप बहुत कुछ लिखते हैं ...
सादर !

संगीता पुरी July 22, 2012 at 4:55 PM  

अलबेला खत्री तो कुछ भी लिखता है

लगता इसकी मति गई मारी बाबाजी

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