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Albela Khatri

दिल के है नजदीक पर, बाहों से है दूर .......


जीवन के दोहे 

छोटी सी यह ज़िन्दगी, छोटा सा संसार 

छोटे हो कर देखिये, मिलता कितना प्यार 



अपनों की परवाह तो करते हैं सब लोग 


ग़ैरों की ख़िदमत करो, ये है सच्चा योग 



मेरे घर के सामने,  रहती है  इक हूर


दिल के है नजदीक पर, बाहों से है दूर 



पुरखे अपने चल दिए, करके अच्छे  काम


अपनी यह कटिबद्धता, नाम न हो बदनाम 



तेरी मेरी क्या करूँ,  क्या है इसमें सार 


कोशिश है बाँटा करूँ, सबको अविरल प्यार 


- अलबेला खत्री 

hasyakavi albela khatri in ahmadabad

2 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) July 1, 2013 at 6:59 AM  

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज सोमवार (01-07-2013) को प्रभु सुन लो गुज़ारिश : चर्चा मंच 1293 में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kuldeep Thakur July 1, 2013 at 11:27 AM  


सुंदर प्रस्तुति...
मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक 05-07-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल पर भी है...
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाएं तथा इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और नयी पुरानी हलचल को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी हलचल में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान और रचनाकारोम का मनोबल बढ़ाएगी...
मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।



जय हिंद जय भारत...


मन का मंथन... मेरे विचारों कादर्पण...

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