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Sunday, June 30, 2013
जीवन के दोहे
छोटी सी यह ज़िन्दगी, छोटा सा संसार
छोटे हो कर देखिये, मिलता कितना प्यार
अपनों की परवाह तो करते हैं सब लोग
ग़ैरों की ख़िदमत करो, ये है सच्चा योग
मेरे घर के सामने, रहती है इक हूर
दिल के है नजदीक पर, बाहों से है दूर
पुरखे अपने चल दिए, करके अच्छे काम
अपनी यह कटिबद्धता, नाम न हो बदनाम
तेरी मेरी क्या करूँ, क्या है इसमें सार
कोशिश है बाँटा करूँ, सबको अविरल प्यार
- अलबेला खत्री
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| hasyakavi albela khatri in ahmadabad |
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Unknown
Friday, November 18, 2011
कल शाम को जब मैं मुम्बई से सूरत आ रहा था तो मेरे सामने की सीट पर
मेरी ही उम्र का एक व्यक्ति, अपेक्षाकृत कम उम्र की और ज़बरदस्त खूबसूरत
महिला के साथ बैठा था और लगातार मुझे देखे जा रहा था . पहले तो मैंने
ध्यान नहीं दिया लेकिन जब वो कुछ ज़्यादा ही बारीकी से देखने लगा तो मैंने
पूछा - क्यों भाई साहेब ? क्या मैंने आपसे कभी कुछ उधार लिया था ?
वो बोला नहीं....तो मैंने कहा - फिर क्या कारण है कि आप लगातार मुझे इस
तरह घूर रहे हैं ?
वो बोला - मैं जानना चाहता हूँ कि आपके बाल असली हैं या नकली ? मैंने कहा -
असली . वो बोला - लगते नहीं...........मैंने कहा - खींच कर देखलो भाई...........
पूछा कौनसा शैम्पू लगाते हो ? मैंने कहा - कोई नहीं, मैं शैम्पू से नहीं नहाता..
साबुन ही लगाता हूँ बस......
तो फिर और कुछ लगाते होंगे...उन्होंने पूछा तो मैंने मज़ाक में कहा -
हाँ तेल लगाता हूँ . वो बोले कौनसा ? मैंने कहा - नहीं बताऊंगा वरना आप हंसोगे
...........वो बोला - कोई बात नहीं हमारे हंसने से आपको क्या फ़र्क पड़ता है ?
आप तो बता दो ..मैंने कहा - किसी को बताओगे तो नहीं . वो बोला - नहीं..........तो
मैंने कहा - जापानी तेल लगाता हूँ....इत्ता सुनते ही वो भाई तो चुप हो गया लेकिन
उसके साथ बैठी महिला खिलखिला कर हँस पड़ी और उससे बोली - मैं कहती थी न
...जापानी तेल बहुत अच्छी चीज़ है रोज़ लगाना चाहिए..........इत्ता सुनना था कि
आस पास के लोग भी ठहाके लगाने लगे .
जय हिन्द !