Albelakhatri.com

Hindi Hasya kavi Albela Khatri's blog

ताज़ा टिप्पणियां

Albela Khatri

Showing posts with label उलटबांसी अन्तर्मुखी आध्यात्मिक. Show all posts
Showing posts with label उलटबांसी अन्तर्मुखी आध्यात्मिक. Show all posts

दिल के है नजदीक पर, बाहों से है दूर .......


जीवन के दोहे 

छोटी सी यह ज़िन्दगी, छोटा सा संसार 

छोटे हो कर देखिये, मिलता कितना प्यार 



अपनों की परवाह तो करते हैं सब लोग 


ग़ैरों की ख़िदमत करो, ये है सच्चा योग 



मेरे घर के सामने,  रहती है  इक हूर


दिल के है नजदीक पर, बाहों से है दूर 



पुरखे अपने चल दिए, करके अच्छे  काम


अपनी यह कटिबद्धता, नाम न हो बदनाम 



तेरी मेरी क्या करूँ,  क्या है इसमें सार 


कोशिश है बाँटा करूँ, सबको अविरल प्यार 


- अलबेला खत्री 

hasyakavi albela khatri in ahmadabad

मैं तेरा अपराधी दाता.... मैं तेरा अपराधी

मैं तेरा अपराधी दाता

मैं तेरा अपराधी


तूने बख्शा नूर हृदय में लेकिन मैंने चुनी सियाही

तूने सैर चमन की बख्शी लेकिन मैंने कीचड़ चाही

सौ सौ क़समें खायीं लेकिन एक क़सम भी नहीं निबाही

मैं तेरा अपराधी दाता

मैं तेरा अपराधी


मालिक ! तेरी एक झलक में लाखों सूर समाये हैं

ऐसी एक झलक के दर्शन ख़ुद मैंने भी पाये हैं

लेकिन मैं वो ज्योत कि जिस पर तम के गहरे साये हैं

मैं तेरा अपराधी दाता

मैं तेरा अपराधी


तू है दयालु ,परम कृपालु , तेरे क़रम का अन्त नहीं

मैं छोटा ,मेरे पाप भी छोटे ,दोष की सूचि अनन्त नहीं

सत्य में शक्ति, शक्ति में भक्ति ,झूठ कभी बलवन्त नहीं

मैं तेरा अपराधी दाता

मैं तेरा अपराधी


एक बार फ़िर अवसर बख्शो ,बख्शो प्रेम पियाला

तम हो जायें दूर जगत के ,घट में होय उजाला

तन की सारी चाहो-हवस का कर डालो मुंह कला

मैं तेरा अपराधी दाता

मैं तेरा अपराधी

जो मज़ा संन्यास में है, वो कहाँ सहवास में.....

जो मज़ा ऐश्वर्य में है, वो कहाँ सन्त्रास में

जो मज़ा है तृप्तियों में, वो कहाँ है प्यास में


योगरथ को छोड़ कर क्यों रोगपथ पर मैं चलूँ ?

जो मज़ा संन्यास में है, वो कहाँ सहवास में.....




-अलबेला खत्री 

अलबेला खत्री की कवितायेँ

My Blog List

myfreecopyright.com registered & protected
CG Blog
www.hamarivani.com
Blog Widget by LinkWithin

Emil Subscription

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

Followers

विजेट आपके ब्लॉग पर

Blog Archive