शर्म ! शर्म !! शर्म !!!
"मध्य प्रदेश में हरदा के पास किसी गांव में 5 लोगों ने एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया तथा उसके जिस्म को लाइटर से जला जला कर ठहाके भी लगाये" यह समाचार पढ़ते समय आजतक चैनल की तेज़ समाचार वाचिका के चेहरे पर कोई विषादभाव या दुःख इसलिए नहीं था क्योंकि उसके लिए तो ऐसी घटना पर बोलना रोज़मर्रा की बात होगी परन्तु मैं दुखी हूँ , आहत हूँ और शर्मिन्दा भी हूँ क्योंकि मैं भी उसी पुरुष समाज का हिस्सा हूँ जो महिलाओं के सम्मान और संरक्षण की बात तो करता है परन्तु अपनी कामपिपासा के तुष्टि के लिए दरिन्दा बन कर किसी महिला के साथ अमानवीय अत्याचार भी करता है
उस गरीब ग्रामीण महिला ने तो न कोई नाभिदर्शना साड़ी बाँधी होगी, न ही वक्षदर्शना ब्लाउज़ पहना होगा और न ही टांग दिखाऊ स्कर्ट पहनी होगी - फिर उस पर क्यों टूट पड़े वे 5 राक्षस ?
यह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्म से डूब मरने की बात है कि कठोरतम कानूनों के बावजूद उसके लोग इतने हिंसक और अत्याचारी हो जाएँ
क्या इसकी रोकथाम का कोई उपाय नहीं ?
क्या महिलाओं की रक्षा की बातें करने वाली सरकार कोई कड़े कदम उठाएगी ?
जयहिन्द !
-अलबेला खत्री
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| the poem of hasyakav |






