काश ! गणतन्त्र दिवस समारोह में आज इन झाँकियों का प्रदर्शन भी होता :
# अमर शहीद हेमराज की पत्नी को पाकिस्तानियों के 26 शीश भेंट करते हुए भारतीय सैनिकों की झाँकी
# 26 -01 -2001 के प्रलयंकारी भूकम्प से लहूलुहान हो चुके गुजरात को अपने पुरुषार्थ से उन्नति के अभिनव शिखर तक पहुंचाते हुए नरेन्द्र मोदी के अथक परिश्रम की झाँकी
# 2 G, DLF, CWG, कोयला इत्यादि के महाघोटालों से भारत की जनता को लूटते हुए कांग्रेसियों के काले चेहरों की झाँकी
# दिल्ली में रातदिन हो रहे सामूहिक बलात्कारों और हत्याकाण्डों की झाँकी
# मुजफ्फरनगर के दंगों पर बेशर्मी का नंगा नाच करती यूपी सरकार द्वारा आयोजित सैफई के रासरंगों की झाँकी
दिल्ली के मन्त्रियों को भले ही सुरक्षा की ज़रूरत न हो, परन्तु दिल्ली के अवाम को तो अब अपने और अपने बच्चों के लिए सुरक्षा मांग ही लेनी चाहिए क्योंकि मज़ाक मज़ाक में उसने ऐसे लोगों को हुक्मरान बना दिया है जिनका कोई भरोसा नहीं कि कब, किस मासूम को खेलने के अपराध में जेल जाना पड़ जाए -
हा हा हा पता नहीं कब किस बाप को इसलिए जेल जाना पड़ जाए कि उसने ऐसी अपराधी औलाद पैदा की कि जो क्रिकेट खेलती है और अपनी गेन्द से मन्त्रीजी की गाड़ी के काँच तिड़का देती है
दिल्ली वालो! अगर कुछ दिन पहले सचमुच आपने उनके कांच तोड़ दिए होते तो आज ये दिन न देखना पड़ता
राखी के पाखण्ड पर, दिल्ली वाले दंग दो दिन में दिखला दिया, अपना असली रंग अपना असली रंग, मुखौटा उतर गया है आम होगया ख़ास, ज़ेहन तक असर गया है पाई पहली बार, कार जब नौ-दस लाखी भूल गई औक़ात, लाज खूंटी पर राखी
Posted by
Unknown
Thursday, December 26, 2013
comments (3)
शर्म ! शर्म !! शर्म !!!
"मध्य प्रदेश में हरदा के पास किसी गांव में 5 लोगों ने एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया तथा उसके जिस्म को लाइटर से जला जला कर ठहाके भी लगाये" यह समाचार पढ़ते समय आजतक चैनल की तेज़ समाचार वाचिका के चेहरे पर कोई विषादभाव या दुःख इसलिए नहीं था क्योंकि उसके लिए तो ऐसी घटना पर बोलना रोज़मर्रा की बात होगी परन्तु मैं दुखी हूँ , आहत हूँ और शर्मिन्दा भी हूँ क्योंकि मैं भी उसी पुरुष समाज का हिस्सा हूँ जो महिलाओं के सम्मान और संरक्षण की बात तो करता है परन्तु अपनी कामपिपासा के तुष्टि के लिए दरिन्दा बन कर किसी महिला के साथ अमानवीय अत्याचार भी करता है
उस गरीब ग्रामीण महिला ने तो न कोई नाभिदर्शना साड़ी बाँधी होगी, न ही वक्षदर्शना ब्लाउज़ पहना होगा और न ही टांग दिखाऊ स्कर्ट पहनी होगी - फिर उस पर क्यों टूट पड़े वे 5 राक्षस ?
यह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्म से डूब मरने की बात है कि कठोरतम कानूनों के बावजूद उसके लोग इतने हिंसक और अत्याचारी हो जाएँ क्या इसकी रोकथाम का कोई उपाय नहीं ? क्या महिलाओं की रक्षा की बातें करने वाली सरकार कोई कड़े कदम उठाएगी ? जयहिन्द ! -अलबेला खत्री
Posted by
Unknown
Wednesday, December 25, 2013
comments (1)
VERY VERY HAPPY BIRTH DAY TO YOU DEAR AALOK
वैसे तो तू बदमाश है, नालायक है, उत्पाती है पर क्या करूँ, कमबख्त मेरी सासू का नाती है सो लोकलाज में व्यवहार तो निभाना ही पड़ेगा अपने 'आलोक' का जन्मदिन मनाना ही पड़ेगा
ऐ मेरी 11 वर्षों की गाढ़ी कमाई ! तुझे जन्मदिवस की ढेरों बधाई ! -अलबेला खत्री
Posted by
Unknown
Friday, December 20, 2013
comments (2)
पुरुषों द्वारा नारी का यौनशोषण भारत में अपनी सारी हदें पार कर चुका है. लगभग हर तबके के लोगों पर इस तरह के शर्मनाक आरोप लग रहे हैं परन्तु कुछ लोगों का मानना है कि ताली एक हाथ से नहीं बजती …लोगों को शक है कि अधिकतर मामलों में होता तो सबकुछ रज़ामन्दी से है परन्तु बाद में पकडे जाने पर अथवा किसी लालच में आरोप लगाए जाते हैं
मेरा मत है कि अगर ऐसी कोई बात है तो पुरुष को सावधानी बरतनी चाहिए. नैतिकता को ताक पर रख कर अगर बाहरी सम्बन्ध बनाने ही हैं तो जिस प्रकार अपनी शारीरिक सुरक्षा के लिए कण्डोम का प्रयोग करते हो उसी प्रकार अपनी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए हमारे द्वारा मुफ्त में बांटे जा रहे इस परचे का भी उपयोग करो
Posted by
Unknown
Monday, December 16, 2013
comments (1)
अलबेला खत्री का निवेदन :
दामिनी के हत्यारों को फांसी मत दो प्लीज़
निर्भया पर ज़ुल्म करने वाले हरामज़ादों के साथ वही करो जो इन्होंने उस मासूम के साथ किया था, लोहे की राड चाहिए तो मुझसे ले जाओ, लेकिन उसी से इनका शरीर फाड़ कर सड़क पर फैंक दो ताकि ठण्ड से ठिठुर कर मरें
इससे कम कोई भी सज़ा इनके लिए पर्याप्त नहीं होगी जय हिन्द !
Posted by
Unknown
Tuesday, October 29, 2013
comments (4)
अद्भुत ! अद्भुत !! अद्भुत !!! सचमुच अद्भुत नज़ारा था कोटा दशहरा मेला का .........मानो पूरा शहर ही दुल्हन की भांति सजा रखा था नगर निगम कोटा ने ,,,,,,,,,,,,,विशेषकर मेला परिसर की रंगीनियां तो गज़ब थीं ...पूरा वर्णन करने बैठूं तो पूरी रात इसी में बीत जायेगी इसलिए यहीं पर नगर निगम कोटा को बधाई और आयोजन समिति का अभिनन्दन करते हुए आपको ले चलता हूँ वहाँ, जहाँ हमारा सफलतम अखिल भारतीय कवि सम्मेलन संपन्न हुआ ..........
कवि सम्मेलन आरम्भ होने से पहले ऊँचे,विराट और जगमगाते भव्य मंच पर सुशोभित थीं तीन ज़बरदस्त महिला मंच संचालिकाएं जिन्होंने आवागमन के दौर में भी समां बांधे रखा और कविता के लिए माहौल बनाया . सरस्वती माँ के समक्ष मंगल दीप प्रकटाने के बाद आमंत्रित कवियों का सम्मान हुआ व युगराज जैन को मंच सञ्चालन सौंप दिया गया जिन्होंने अपना दायित्व बख़ूबी निभाते हुए रसपूर्ण सञ्चालन किया . कविवर हरिओम पवार, प्रताप फ़ौज़दार, अलबेला खत्री, सुरेन्द्र यादवेन्द्र, युगराज जैन, मंजीत सिंह, अनामिका अम्बर, काव्या मिश्रा, सुश्री नेहा व नवोदित हर्षवर्धन इत्यादि सभी ने उम्दा से उम्दा काव्यपाठ किया और कार्यक्रम को ऊंचाई पर पहुँचाया .
यद्यपि मुझे ख़ूब डराया गया था कि कोटा के दशहरा मेला कवि सम्मेलन में लोग कविता सुनने नहीं बल्कि कवियों को हूट करने आते हैं इसलिए वहाँ कोई भी नहीं जमता ...परन्तु सच का दृश्य तो मैंने कुछ और ही पाया .........मुझे खूब सुना, खूब दाद दी ..यहाँ तक कि दामिनी वाले छंद पर और मोदी वाली पैरोडी पर तो लोगों ने आ कर मालाओं और गुलदस्ते से अभिनन्दन भी किया ....कुल मिला कर यह एक वास्तविक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन था जहाँ कवितायें सुनीं और सराही गयीं
धन्यवाद कोटा की रसज्ञ जनता आभार नगर निगम कोटा जय हिन्द ! -अलबेला खत्री
Posted by
Unknown
Sunday, September 8, 2013
comments (2)
प्रति, पूजनीय गजानन गणपति श्री गणेशजी महाराज, मुख्य अतिथि, सार्वजनिक गणेशोत्सव सूरत
प्रसंग : आपश्री के अनुयाइयों को सामाजिक लज्जा एवं बुद्धि वितरण कराने हेतु सन्दर्भ : आपश्री का आगमन और शोभायात्रायें
हे प्रभु, आप तो बुद्धि के देवता हैं, मंगलमूर्ति हैं और सृष्टि के विघ्नहर्ता हैं परन्तु आपके अनेक उन्मादी अनुयाइयों की वजह से न केवल आपका उपहास हो रहा है बल्कि हमारे दैनन्दिन जीवन में विघ्न भी पड़ रहा है, अमंगल भी हो रहा है और श्रद्धा का पतन भी हो रहा है .
आपकी बड़ी बड़ी विशालकाय मूर्तियाँ ले कर जब लोग सैकड़ों की संख्या में पूरी सड़क को घेर कर चलते हैं और "ढिंका चिका ढिंका चिका, फेविकोल से तथा मुन्नी बदनाम हुई" इत्यादि गानों पर डांस करते हैं तो बड़ा ही भद्दा दृश्य दिखाई देता है . शराब पी कर मस्ती और अश्लील संकेत करने वालों की हरकतें देख कर साफ़ लगता है कि उन्हें आपसे कोई लेना देना नहीं हैं वे तो आपकी आड़ में अपनी मस्ती और एन्जॉय करते हैं . जिसके कारण सच्चे श्रद्धालुओं को आत्मिक पीड़ा होती है . पूरा ट्रैफिक ठप्प हो जाता है और सड़क पर चलना मुहाल हो जाता है . इसके अलावा बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति तथा नन्हें शिशु इस घनघोर शोर से बहुत परेशान हो जाते हैं .
कृपया अपने अनुयाइयों को इत्ती सी अक्ल आप प्रदान करें कि वह अपने एन्जॉय के लिए दूसरों को दुखी न करे . क्योंकि आपकी बेढंगी मूर्तियाँ देख कर हमें दुःख होता है, मज़े मज़े में लोग आपके ऐसे ऐसे रूप बना देते हैं कि देखने भर से मन व्यथित हो उठता है . आपके सिंगार और सजाव के लिए रूप बनाये जाएँ तो अच्छी बात, लेकिन केवल कुछ अलग करने की चाहत में ऐसे ऐसे कुरूप रूप भी आपको दे दिए जाते हैं कि क्रोध आता है
आशा है, आप हमारे मन की वेदना समझेंगे और उसका निराकरण करेंगे
Posted by
Unknown
Wednesday, September 4, 2013
comments (2)
जहाँ देखो वहीँ बलात्कारी खड़े हुए हैं, हर अख़बार, हर चैनल बलात्कार के समाचारों से भरा पड़ा है .
आजकल बलात्कार, विशेष रूप से गैंगरेप कुछ ज़्यादा ही होने लगे हैं जो कि समाज के लिए शर्म और दुःख की बात है . कहीं नाबालिग के साथ दुष्कर्म हो रहा है तो कहीं नाबालिग के द्वारा दुष्कर्म हो रहा है ..........क्या हो गया है भाई ? कहाँ जा रहा है समाज ?
ये इतने सारे स्कूल , कालेज, गुरूकुल, इतने सारे साधू संतों के प्रवचन, ये इतने सारे धार्मिक ग्रन्थ और इतने सारे क़ानून मिल कर भी कोई रोकथाम नहीं कर पा रहे हैं ...........हैरत है !
अरे हरामखोरो ! तुम्हें फूल ही सूंघना है तो गुलफ़रोश से खरीद कर सूंघ लो, कौन रोकता है ? जगह जगह एक से बढ़ कर एक दुकान सजी है फूलों की ..........पैसा फैंकों और अपना शौक पूरा कर लो .........ये ज़बरदस्ती किसी के बगीचे में घुस कर फूल तोड़ने की ज़रूरत ही क्या है ?
जय हिन्द !
परमपाखण्डी बाबा अलबेलानंदजी परमकंस के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार
Posted by
Unknown
Tuesday, September 3, 2013
comments (1)
आसाराम अगर लीपापोती न करते और कानून से मुंह न छिपाते बल्कि पीड़िता द्वारा शिकायत दर्ज़ कराने का पता चलते ही ख़ुद चल कर पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण कर देते यह कहते हुए कि
" मेरी पोती समान एक मासूम बच्ची ने मुझ पर देहशोषण का इतना घिनौना आरोप लगाया है कि सिर्फ़ मैं नहीं बल्कि मेरे कारण पूरा संत समाज कलंकित हो गया है इसलिए मुझे अब संत कहलाने और संसार में जीवित रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है . लिहाज़ा मैं स्वयं को कानून के सुपुर्द करते हुए प्रार्थना करता हूँ कि मुझे कठोर से कठोर दंड देते हुए कम से कम दो बार फाँसी पर लटकाया जाये, एक बार मेरे तथाकथित अपराध के लिए और दूसरी बार मेरे करोड़ों जिज्ञासु शिष्यों को होने वाली आत्मिक पीड़ा के लिए .......मुझे अपने ऊपर लगे आरोप पर सफ़ाई में कुछ नहीं कहना है . एक साधु पर इतना बड़ा आरोप लग जाना ही पर्याप्त है .......लिहाज़ा या तो एक महीने के भीतर भीतर कानून अपने विधिविधान से मेरे प्राण ले ले अन्यथा मैं स्वयं ही अपने आश्रम में जीवित समाधि ले लूँगा . इतना बड़ा बोझ ले कर न मैं अब जी सकता हूँ और न ही साधना कर सकता हूँ
मेरी मृत्यु के समय मेरे तमाम शिष्य पूरी तरह शांति बनाये रखें और हरी ॐ का जाप करते रहें . भगवान् उन भले लोगों का भी भला ही करे जिन्होंने क्षुद्र राजनीतिक स्वार्थों के लिए मुझ पर यह कालिख पोतने में सफलता प्राप्त कर ली . हमेशा की तरह मैं उनका यह अपराध क्षमा भी करता हूँ साथ ही उस नन्ही बिटिया को उसके सुखी जीवन की कामना करते हुए अपनी ओर से सवा करोड़ रूपये की रकम भी भेंट करने का आदेश अपने आश्रम के प्रबंधकों को देता हूँ ....हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ "
अन्य नौटंकी करने के बजाय आसाराम ऐसा करते तो न केवल शिष्यों और साधु समाज की बल्कि आम जनता और पुलिस की भी पूर्ण सहानुभूति उन्हें मिल जाती . क्योंकि हमारा देश पढ़े लिखे गंवारों का देश है जहाँ किसी के समर्थन या विरोध में भीड़ इकठ्ठा होते हुए देर नहीं लगती .
Posted by
Unknown
Wednesday, August 28, 2013
comments (0)
आज़ादी के बाद वह भारतवर्ष के लिए सबसे कठिन और काला समय था जब वैश्विक बाज़ार में भारतीय रुपया लगातार गश खा कर गिर रहा था और अमेरिकी डॉलर उसकी छाती पर चढ़ कर nude dance कर रहा था. सब्जी से ले कर सोना तक हर वस्तु इत्ती महंगी हो गई थी कि आम तो आम, ख़ास लोग भी त्राहि त्राहि कर उठे थे . यहाँ तक कि भारत सरकार ( अगर कहीं थी ) ने अपना जेबखर्च चलाने के लिए एक बार फिर देश का सोना गिरवी रखने का मन बना लिया था .
सब बावली बूच की तरह एक दूसरे को देख रहे थे . किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि जब सरकार के पिछवाड़े में इतना दम ही नहीं था कि अपना नाश्ता पानी का खर्च भी उठा सके तो उसने करोड़ों लोगों को सस्ता अनाज देने का हवाई फ़ायर किया ही क्यों ? और फ़ायर भी ऐसा फुस्सू कि जिसमे बुलेट तो चला ही नहीं और तमन्ची की पतलून गीली के साथ साथ पीली भी हो गयी . आम जनता अपने को ठगी हुई महसूस कर रही थी क्योंकि उसके पास इतना सोना भी नहीं था की गिरवी रख कर प्याज़ और अनाज ले सके . सब रो रहे थे, परन्तु सरकार में शामिल कुछ हरामखोर कांग्रेसी लोग ऐसे भी थे जो उस विपत्ति में भी ठहाके लगा रहे थे, जलसा कर रहे थे और मस्ती में भांगड़ा कर रहे थे क्योंकि उनकी साज़िश कामयाब हो चुकी थी.
दरअसल जनता जिसे मन्दी समझ रही थी वह मन्दी नहीं, बल्कि एक गन्दी चाल थी जिसके ज़रिये नेताओं ने खुद को मालामाल और राष्ट्रकोष को कंगाल बना डाला क्योंकि कांग्रेस पार्टी जान चुकी थी कि नरेन्द्र मोदी की लोकलहर में उसका राज अब डूबने वाला है और दोबारा कभी आने वाला भी नहीं तो क्यों न ऐसे कुकर्म करें कि डॉलर व सोने का भाव चढ़ जाए ताकि स्विस बैंकों में रखा अपना कालाधन अपने आप बढ़ जाये . ज़ाहिर है भ्रष्ट नेताओं का जो धन स्विस बैंकों में था वह डॉलर और सोने के रूप में ही था और रूपये की हत्या होने का सीधा लाभ उन्हीं को और उनके चन्द चहेते उद्योगपतियों व पूँजी बाज़ार के खिलाड़ियों को ही मिलने वाला था . अतः सोच समझ कर धीरे धीरे देश को गर्त में धकेला गया ताकि कांग्रेस के बाद जो भी सरकार आये, उसके पास बजाने के लिए घण्टा भी न बचे . परन्तु होनी को कुछ और ही मन्ज़ूर था .
जैसे ही पब्लिक को इसकी भनक लगी, उन्होंने उन कुचमादियों को घेर लिया और मार मार कर भुरता बना डाला इससे घबराकर कुछ षड्यन्त्रकारी इटली भाग गए, कुछ अन्य देशों में जा छुपे और जनता ने भारी बहुमत से भाजपा को जिता कर वज्रपुरूष नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बना दिया जिनके सत्ता सम्हालते ही सी बी आई और आयकर विभाग ने तमाम भगौड़ों को जा दबोचा और उन्हें जूते मार मार कर सारा छुपा धन वसूल कर लिया . मोदीजी के एक ही फोन पर स्विस बैंकों ने भारतीयों का सारा कालाधन खुद अपने ही विमानों में भर कर दिल्ली पहुंचा दिया तथा भारत की इस परमविजय के सम्मान में मुद्राबाज़ार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत सिर्फ़ एक रूपया रह गई .
जय हिन्द !
आने वाले समय में हमारे बच्चे इतिहास की किताबों में ये भी पढेंगे
Posted by
Unknown
Saturday, August 24, 2013
comments (1)
हरी ॐ .........हरी ॐ
लाखों लोगों के परमपूज्य संत आसाराम बापू ने किसी कन्या के साथ दुराचार किया या नहीं किया यह जांच का विषय हो सकता है . लेकिन अचरज का तो कतई नहीं है . क्योंकि आसाराम बापू एक सिद्धहस्त धार्मिक कलाकार होने के साथ साथ एक सफल दूकानदार और स्वयंभू वैद्य भी हैं . अपने प्रवचनों में वे अनेक बार विभिन्न प्रकार के आयुर्वेदिक नुस्खे बताते रहते हैं .
हो सकता है जापानी तेल को टक्कर देने के लिए भारत की ओर से उन्होंने कोई ऐसा नया यौनशक्तिवर्धक रसायन बनाया हो जिससे कि वृद्धावस्था में भी ऊर्जा का नवसंचार होता हो और जिसे अपनी दूकान में उतारने के पहले उन्होंने उसका शक्तिपरीक्षण उस तथाकथित पीड़ित कन्या पर कर लिया हो . क्योंकि फार्मेसी वाले इस तरह के प्रयोग करते ही हैं .
अचरज इसलिए भी नहीं होना चाहिए क्योंकि बापूजी अपने प्रवचनों में आमतौर पर यौन सम्बन्ध कब बनाने चाहिए और क्या क्या , कैसे कैसे करना चाहिए इसका भी गुप्तज्ञान ओपनली ही देते हैं और उनके भक्तों को मालूम भी है कि देते हैं . इसके बावजूद श्रद्धालु महिलाओं को अगर उनके प्रवचन सुनने में कोई गुरेज़ नहीं है तो बापू का उत्साहवर्धन तो होगा ही, अब उत्साह में आ कर कोई चूक हो जाए तो अचरज नहीं होना चाहिए .
बापू अगर यौन क्रीडा करते हैं तो मुझे कोई शिकायत नहीं . शरीर उनका, आश्रम उनका, निर्णय भी उनका ही स्वीकार्य होगा . आपत्ति करने वाला मैं कौन ? मुझे तो सिर्फ़ एक ही बात पर आपत्ति है कि बलपूर्वक क्यों किया गया ? किसी मासूम को शिकार क्यों बनाया गया ? ऐसा परीक्षण करना था तो उनके लिए प्रस्तुत होने वालों की क्या कमी थी ?
निर्ममतापूर्ण, अमानवीय तरीके से किसी की देह का शोषण करना महापाप है . जब किसी मासूम की चीख गूंजती है तो प्रभु पुकार ज़रूर सुनते हैं . यह बात बापूजी को नहीं भूलनी चाहिए .
वैसे मैं मन, वचन और आत्मा से प्रार्थना करता हूँ कि यह मामला झूठा निकले, किसी षड्यंत्र का भंडाफोड़ हो और बापू निर्दोष साबित हों . क्योंकि यदि साधू-संतों के यहाँ भी अगर हमारी बहन बेटियां सुरक्षित नहीं रहेंगी तो ऐसे समाज में जीने से अच्छा है कहीं डूब कर मर जाएँ चुल्लू भर पानी में ..........
hindi hasyakavi sammelan in mangalore by MRPL
-
शानदार, शानदार, शानदार …………………
शानदार और जानदार रहा मंगलूर रिफ़ाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड द्वारा
राजभाषा विभाग के तत्वाधान में डॉ बी आर पाल द्वारा आ...
प्यारे बापू, कांग्रेस मुक्त भारत - नमो नमो भारत
-
*प्यारे बापू,कांग्रेस को ख़त्म करने की आपकी अन्तिम ईच्छा पूरी करने के लिए
गुजरात से एक वज्रपुरुष ताल ठोक चुका है इसलिए आज आपकी पुण्यतिथि पर हम
भारतवासी आप...
व्यारा के विकासपुरूष कर्मवीर डॉ तुषार ए. चौधरी
-
*व्यारा के विकासपुरूष के रूप में लोकप्रिय युवा सांसद व केन्द्रीय सड़क
परिवहन व *
*राजमार्ग राज्यमंत्री डॉ तुषार ए. चौधरी एक ऐसे कर्मवीर हैं जिन्होंने...
एक तमाशा मेरे आगे ...........
-
*ये वाला कितने का है ?बारह सौ का ये कितने का ?एक हज़ार का .........और ये
छोटा वाला कितने का है ?आठ सौ का है बहन जी, चलो आप साढ़े सा...
जय माँ हिंगलाज के निर्माण ने तेजी पकड़ी........
-
प्यारे मित्रो !
यह बताते हुए मुझे अत्यन्त ख़ुशी है कि आदि शक्ति देवी हिंगलाज
के भजनों और स्तुतियों पर आधारित एक शानदार वीडियो
"जय माँ हिंगलाज" के...