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Albela Khatri

हास्यकवि अलबेला खत्री का वीडियो एल्बम हमारा गुजरात



दी ग्रेट इंडियन लाफ्टर फेम हास्यकवि अलबेला खत्री की लोकप्रिय एवं बहुचर्चित कविता हमारा गुजरात पर आधारित गरवी गुजरात का एक शानदार वीडियो एल्बम अलबेला खत्री कृत हमारा गुजरात अब रिलीज़ के लिए तैयार है

जय हिन्द !  



हिन्द की खातिर मिटने वालो हम को तुम पर नाज़ है




हिन्दी हास्य कवि-सम्मेलन का विज्ञापन अंग्रेजी में क्यों ?

क्योंकि  यह सब को समझ में आता है 
और दुनिया भर में चल जाता है 



हास्यकवि अलबेला खत्री लाया है आपके लिए अद्भुत और अनूठा हास्य कवि सम्मेलन




गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी से हास्यकवि अलबेला खत्री की साहित्यिक मुलाकात


प्यारे मित्रो नमस्कार

गाँधी नगर में मेरा कल का दिन बहुत ऊर्जा  और प्रफुल्लता भरा 


रहा .  अहमदाबाद  के बंधुवर  राजकुमार भक्कड़ के सौजन्य से  

अनेकानेक  दिग्गज  हस्तियों से  मुलाकात का सिलसिला  दिन भर 

चला . विशेषकर ऊर्जा, शौर्य  और पराक्रम के प्रतीक पुरूष, गुजरात 

के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी से एक लम्बी भेंट हुई तथा उन पर 

रचित एक लम्बी कविता उन्हीं के कार्यालय में सुनाने व भेंट करने का 

अवसर मिला .


मोदीजी ने बड़े आनंद से पूरी रचना का श्रवण करने के बाद जो टिप्पणी 


की वो उनकी आत्मिक विनम्रता की सुगंध थी ...उनकी  शुभ कामनाओं  

की महक  मुझे बहुत दिनों  तक  आह्लादित रखेगी

जय हिन्द ! 








HATHI GHODA PALKI, JAI KANHAIYALAL KI ...ON SAB TV

कब आओगे ?

कब आओगे ?


कब आओगे ?


बहुत दिनों  से लोग एक ही बात पूछ रहे थे "वाह वाह क्या बात है" 


में कब आओगे ? अब मैं उनको जवाब देता तो क्या देता .....न तो 

मेरे पास इतना टाइम कि शैलेश लोढ़ा को कहूँ कि मुझे बुलाओ  

और न  ही शैलेश लोढ़ा  ने कभी कहा  कि चले आओ . संयोग से 

मुझे भी हिंगुलाज माता के एल्बम से फुर्सत मिल गयी और बुलावा 

भी आ गया तो अपनेराम चले गए .........अब आ रहे हैं सब पर 

कल रात को 10 बजे .

जो देखे उसका भी भला, न देखे उसका भी भला .....हा हा हा हा


जयहिन्द !  


तुझको मीठा होना ही था, बाप तेरा हलवाई है ....

.
 


लस्सी पीने वालों ने  अब  व्हिस्की मुँह लगाई है

तन-मन के दुःख दूर हुए, ज़ेहन पर मस्ती छाई है



बड़भागी वे नर हैं जिनको रोज़ नई सप्लाई  है


अपनी फूटी किस्मत में तो केवल एक लुगाई है



तेरे गालों के गड्ढे में गिर कर ही दम टूट गया


पूछे कौन समन्दर से तुझमे कितनी गहराई है



हाँ भई हाँ, हम तो कड़वे हैं, खारे हैं और खट्टे भी


तुझको मीठा होना ही था, बाप तेरा  हलवाई है



पाकिस्तानी मलिक हो चाहे, हिन्दुस्तानी मलिका हो


जिसने जितना जिस्म दिखाया, उतनी शोहरत पाई है



घर के सब बच्चे ख़ुश होकर लगे नाचने आँगन में


मैंने पूछा- क्या लफड़ा है, बोले- बिजली आई है



महानगर की ये विडम्बना हमने देखी 'अलबेला'


भीतर बहना बदन बेचती,  बाहर बैठा भाई है 



 जय हिन्द !
 -अलबेला खत्री 
 

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