दर्दे-मुहब्बत दर्दे-जिगर और दर्दे-जुदाई मिला हमें
फिर भी वफ़ा करते जायेंगे न शिकवा न गिला हमें
जिन ज़ुल्फ़ों के जाल में उलझे-उलझे ही दम टूट गया
हाय ! सुलगती धूप में उनका साया तक न मिला हमें
दर- दर गिरते - पड़ते गुज़री उम्र हमारी क्या कीजे
न साथी न सईगर कोई , न ही राहबर मिला हमें
बीच समन्दर पहुंचे हम तो तूफ़ानों की दहशत थी
साहिल तो है बात दूर की तिनका भी न मिला हमें
आह ! जवानी फूट-फूट क्यों न रोये इस हालत पर
मर जाएँ तो लोग कहेंगे क़फ़न तलक न मिला हमें
पढ़ते - पढ़ते 'अलबेला' काबिल तो हुए वज़ारत के
यार मगर चपरासी तक का ओहदा भी न मिला हमें
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4 comments:
जब कुछ भी नहीं मिला
तब तो यहां तक आ पहुंचे
कुछ मिल जाता गर
तो बन जाते खुदा
फिर हम कैसे पहुंचते
आपके पास बतला।
हाय किस्मत ही रकीब निकली हमारी,
न बेवफाई का,न मुहब्बत का मिला सिला हमें...
अलबेला जी ..आपको पढने में एक अलग ही आनंद है.....
बीच समन्दर पहुंचे हम तो तूफ़ानों की दहशत थी
साहिल तो है बात दूर की तिनका भी न मिला हमें
kya baat hai Albelaji .
दर्दे-मुहब्बत दर्दे-जिगर और दर्दे-जुदाई मिला हमें
फिर भी वफ़ा करते जायेंगे न शिकवा न गिला हमें
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pyaar karne walo ko mila yahi sila hai...
dard mile, judaayi mile, unhe na koi gila hai...
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